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...तो कुछ इस तरह पैसे कमाती हैं ‘पेटीएम’
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में पांच सौ व एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद करने के बाद चारों ओर अफरातफरी मची है। लोग पैसे के लिए बैंकों व एटीएम के बाहर लाइन लगाए खड़े हैं लेकिन पर्याप्त मात्रा में
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में पांच सौ व एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद करने के बाद चारों ओर अफरातफरी मची है। लोग पैसे के लिए बैंकों व एटीएम के बाहर लाइन लगाए खड़े हैं लेकिन पर्याप्त मात्रा में उन्हें नकदी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में लोगों के बीच क्रेडिट कार्ड अथवा डेबिट कार्ड से बिजली-पानी-मोबाइल बिल आदि के भुगतान करने का क्रेज बढ़ा है, जिसके लिए उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है और वे विभिन्न ई-कॉमर्स वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वैसे तो देश में इस तरह की कई साइट काम कर रही हैं लेकिन लोग सिर्फ चुनिंदा पर ही भरोसा कर पा रहे हैं और उनका जबर्दस्त इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसी ही वेबसाइट है ‘पेटीएम’ (Paytm), जिसका इन दिनों काफी इस्तेमाल किया जा रहा है, हालांकि कई लोग इसका इस्तेमाल काफी समय से कर रहे हैं लेकिन नोटबंदी के बाद इसके यूजर्स की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है।
आइए जानते हैं कि पेटीएम क्या है और कैसे काम करती है :
पेटीएम एक भारतीय ई-कॉमर्स शॉपिंग वेबसाइट है, जिसकी स्थापना विजय शेखर शर्मा ने की थी। इसका ऑफिस नोएडा में है। दूसरे शब्दों में यदि हम कहें तो Paytm मनी ट्रांसफर करने वाली थर्ड पार्टी कंपनी है। इसकी वेबसाइट और ऐप दोनों इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका ऐप एंड्रॉयड, iOS और विंडोज सभी तरह के यूजर्स के लिए है। इस ऐप को स्मार्टफोन पर प्ले स्टोर से इन्स्टॉल करना होता है। इसके द्वारा मोबाइल बिल का रीचार्ज हो या बिल पेमेंट, टैक्सी के पैसे चुकाने हों या फिर मेट्रो कार्ड का रीचार्ज करना हो। पेटीएम पर आपकी हर समस्या का समाधान है।
मूवी टिकट बुक करना हो, या फ्लाइट, होटल, हर किसी के लिए पेटीएम करें और लंबी लाइन से छुटकारा पाएं। लोग कैफे कॉफी डे या किसी मेडिकल शॉप पर भी भुगतान के लिए मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे तौर पर कहें, तो मोबाइल वॉलेट का यह वो युग है जो अर्थव्यवस्था में बदलाव के साथ एक कैशलैस सोसायटी का निर्माण कर रहे हैं। मोबाइल वॉलेट एक सेमी-क्लोज्ड वॉलेट है। यानी इसमें कैश जमा कर सकते हैं लेकिन निकाल नहीं सकते। इससे कई अलग-अलग लोकेशन पर सामान और सर्विस के लिए पेमेंट का भुगतान किया जा सकता है। शुरुआत में इससे मोबाइल, डीटीएच, और बिल पेमेंट किया जा सकता था, हालांकि, बाद में कंपनी ने इसे ई-कॉमर्स कंपनी बना दिया गया। वॉलेट में जमा पैसों को यूजर अपनी इच्छा अनुसार खर्च कर सकता है।
हाल ही में नोट बंदी के बाद पेटीएम ने नया 'नियरबाय' फ़ीचर भी लॉन्च किया है। इसके जरिए आप अपने आसपास पेटीएम वॉलेट के जरिए पेमेंट लेने वाले दुकानदार को आसानी से खोज पाएंगे। इस फ़ीचर से उन ग्राहकों को मदद मिलेगी जिनके पास नकदी की कमी है। पेटीएम के 'नियरबाय' फ़ीचर में देशभर में मौज़ूद कंपनी के करीब 8 लाख से ज्यादा ऑफलाइन दुकानदार की डायरेक्टरी है। कंपनी ने ईमेल के जरिए एक बयान जारी कर बताया कि पहले चरण के तहत करीब 2 लाख दुकानदारों को इस फ़ीचर में जोड़ दिया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि लोग जब इसके द्वारा भुगतान करते हैं तो कंपनी किस तरह अपना राजस्व कमाती है जबकि यह उपभोक्ता से इसके लिए पैसे चार्ज नहीं करती और कई बार तो ढेर सारे ऑफर्स भी देती है, जिसमें ‘कैशबैक’ तक का ऑफर शामिल होता है।
गौर करने वाली बात है, पेटीएम अकेला ऐसा मोबाइल वॉलेट है जो आईआरसीटीसी पर बुकिंग सपोर्ट करता है और इसके पास पेमेंट बैंक सेटअप के लिए आरबीआई का लाइसेंस भी है। इस लाइसेंस से पेटीएम करंट व सेविंग अकाउंट डिपॉजिट करने, डेबिट कार्ड जारी करने व इंटरनेट बैंकिंग सर्विस ऑफर करता है।
दरअसल, पेटीएम पर विभिन्न कंपनियां अपने प्रॉडक्ट का प्रचार भी करती हैं। जब भी कोई कस्टमर इस साइट के द्वारा उन प्रॉडक्ट को खरीदता है तो ये कंपनियां पेटीएम को कमीशन देती हैं। इस कमीशन को ही यह कंपनी कैशबैक के रूप में यूजर्स को देती हैं। जब कैशबैक अथवा अन्य कोई आकर्षक ऑफर मिलता है तो ज्यादा से ज्यादा यूजर्स पेटीएम से जुड़ते हैं और इसे मिलने वाला कमीशन भी बढ़ता जाता है। वहीं जब कोई यूजर्स पेटीएम के वॉलेट में पैसे रखता है तो वह उसके सर्विस प्रोबाइडर बैंक के खाते में जमा होता है। इस राशि पर ही वह सर्विस प्रोवाइडर बैंक पेटीएम को ब्याज देता है। यह ब्याज कस्टमर को नहीं मिलता है और पेटीएम का रेवेन्यू बढ़ता है। वहीं इस वॉलेट का इस्तेमाल यूजर्स जिस कंपनी का प्रॉडक्ट अथवा सर्विस खरीदने के लिए करता है, वह भी पेटीएम को कुछ कमीशन देती है।
इसके अलावा विभिन्न सेवाओं जैसे बिजली-पानी आदि का बिल जमा करने पर भी इसे वह राशि संबंधित विभाग को कुछ दिन बाद देनी होती है और इस समय अंतराल में ब्याज के रूप में इसे पैसे मिलते हैं। इसके अलावा अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए कस्टमर के डाटा बेस का इस्तेमाल भी किया जाता है। इस डाटाबेस के द्वारा विभिन्न बिजनेस को प्रमोट कर एडवर्टाइजर्स को आकर्षित किया जाता है। ऐसे में नए यूजर्स को अपने साथ जोड़ने के लिए भी कंपनी कैशबैक का ऑफर देती है। यूजर्स भी कई बार इस कैशबैक का इस्तेमाल आगे कर लेते हैं और यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।
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