करुण कुमार का यह चैनल क्रिकेट की दुनिया के हर महत्वपूर्ण पहलू को समेटे हुए है। यहां मैचों, खिलाड़ियों और ऐतिहासिक लम्हों से जुड़ी दिलचस्प कहानियां सुनने को मिलेंगी।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जाने-माने खेल पत्रकार करुण कुमार ने अपनी नई डिजिटल पारी की शुरुआत करते हुए अपना यूट्यूब चैनल "क्रिकेट विद करुण" (@cricketwithkarun) लॉन्च किया है। लगभग 30 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ करुण अब क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांचक कहानियों और अनसुनी जानकारियों का एक नया मंच लेकर आए हैं।
करुण कुमार का यह चैनल क्रिकेट की दुनिया के हर महत्वपूर्ण पहलू को समेटे हुए है। यहां मैचों, खिलाड़ियों और ऐतिहासिक लम्हों से जुड़ी दिलचस्प कहानियां सुनने को मिलेंगी। साथ ही, इस चैनल पर विशेष पॉडकास्ट के जरिए पूर्व क्रिकेटर्स, कोच्स, जर्नलिस्ट्स और कमेंटेटर्स के इंटरव्यू भी प्रसारित किए जाएंगे, जिनमें वे अपने अनुभव और खेल जगत की अनसुनी बातें साझा करेंगे।
करुण कुमार ने 1998 में टीवीआई (TVI) से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में टीडब्ल्यूआई (TWI) (ट्रांस वर्ल्ड इंटरनेशनल) / आईएमजी (IMG) ग्रुप का हिस्सा बने। 2002 की शुरुआत में वे जी न्यूज से जुड़े और फिर फरवरी 2003 में आजतक का हिस्सा बने।
आजतक में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 2003 वर्ल्ड कप, श्रीलंका में हुए एशिया कप, लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स, भारत-पाकिस्तान वनडे (कानपुर), भारत-इंग्लैंड वनडे (गोवा) और एथेंस ओलंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौर की सफलता जैसी बड़ी खेल घटनाओं की रिपोर्टिंग की।
2006 में उन्होंने एनडीटीवी इंडिया में प्रिंसिपल कॉरेस्पोंडेंट के रूप में जर्मनी में हो रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप की कवरेज का जिम्मा संभाला। 2008 में उन्होंने मलेशिया में आयोजित अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप की रिपोर्टिंग की, जहां विराट कोहली की कप्तानी में भारत विजेता बना।
इसके बाद वे 2009 में भारत टीवी के स्पोर्ट्स डेस्क से जुड़े और 2010-11 में जीआई ग्रुप के साथ मिलकर अनूठे खेल शो लाने की योजना बनाई। 2011 में न्यूज एक्सप्रेस में रहते हुए उन्होंने पूर्व क्रिकेटर मनोज प्रभाकर के साथ कई चर्चित क्रिकेट शो किए।
2012 में करुण कुमार न्यूज नेशन के स्पोर्ट्स एडिटर बने और 2020 तक इस भूमिका में रहे। इसके बाद उन्होंने भारत24 में स्पोर्ट्स एडिटर और एंकर के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
अब करुण कुमार ने "क्रिकेट विद करुण" के जरिए क्रिकेट प्रेमियों को एक नया प्लेटफॉर्म दिया है, जहां वह खेल की रोमांचक कहानियां, विश्लेषण और विशेषज्ञों की राय साझा करेंगे।
डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अपनी प्रमुख सहयोगी कंपनी ListenFirst Media Quintype Technologies Inc. में बड़े नेतृत्व बदलाव की घोषणा की है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अपनी प्रमुख सहयोगी कंपनी ListenFirst Media Quintype Technologies Inc. में बड़े नेतृत्व बदलाव की घोषणा की है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि मौजूदा CEO मिरांडा मैकवीनी (Miranda McWeeney) अपने पद से हट रही हैं। हालांकि, वह कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं होंगी और अब एडवाइजरी बोर्ड में शामिल होकर कंपनी को रणनीतिक सलाह और मार्गदर्शन देती रहेंगी।
कंपनी ने उनकी जगह रुचा पंडित को नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 1 जून 2026 से प्रभावी हो गई है।
रुचा पंडित फिलहाल कंपनी में टेक इनेबल सर्विसेज व पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थीं। कंपनी के अनुसार, उनके पास इंडस्ट्री का व्यापक अनुभव है और उन्होंने नेतृत्व की भूमिका में मजबूत प्रदर्शन किया है। इसी अनुभव को देखते हुए उन्हें CEO की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
Quint Digital ने मिरांडा मैकवीनी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त करती है। साथ ही कंपनी को विश्वास है कि नए नेतृत्व में उसका विकास और सफलता का सफर आगे भी जारी रहेगा।
मीडिया कंपनी HT Media Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की परिचालन आय (Revenue from Operations) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया कंपनी HT Media Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की परिचालन आय (Revenue from Operations) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन कुछ एकमुश्त खर्चों और कारोबार में आई चुनौतियों के कारण कंपनी को पूरे साल घाटा हुआ है। साथ ही कंपनी के बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Mosaic Media Ventures Pvt. Ltd. में 5 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दी है।
कंपनी की कुल परिचालन आय वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,803.31 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 1,745.84 करोड़ रुपये थी। वहीं कंपनी का EBITDA भी बढ़कर 298.42 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 275.49 करोड़ रुपये था।
हालांकि, पूरे वित्त वर्ष में कंपनी को 54.27 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने 1.95 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। मार्च 2026 तिमाही में भी कंपनी को 13.56 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।
कंपनी ने बताया कि नए लेबर कोड्स के प्रभाव, रेडियो कारोबार की परिसंपत्तियों में मूल्यह्रास (Impairment) और कुछ अन्य विशेष मदों (Exceptional Items) के कारण वित्तीय प्रदर्शन प्रभावित हुआ। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने कुल 114.23 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल लॉस दर्ज किए।
सेगमेंट के आधार पर देखें तो अखबार और प्रकाशन कारोबार कंपनी की सबसे मजबूत इकाई बना रहा। इस कारोबार से कंपनी को वित्त वर्ष 2025-26 में 1,500.43 करोड़ रुपये की आय हुई, जो पिछले साल के 1,385.95 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं रेडियो और डिजिटल कारोबार अभी भी दबाव में रहे।
बोर्ड ने कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Mosaic Media Ventures Private Limited के इक्विटी शेयरों में 5 करोड़ रुपये तक निवेश करने को भी मंजूरी दी है। यह निवेश कंपनी के डिजिटल और मीडिया कारोबार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कंपनी के वैधानिक ऑडिटर S.R. Batliboi & Co. LLP ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों पर ‘अनमॉडिफाइड ओपिनियन’ दी है, यानी ऑडिट रिपोर्ट में किसी तरह की बड़ी आपत्ति नहीं जताई गई है।
HT Media के चेयरपर्सन एवं एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भार्तिया की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इन नतीजों को मंजूरी दी गई।
एक दौर था जब किसी विज्ञापन को तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे, मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीमें काम करती थीं और फिर प्रोडक्शन की लंबी प्रक्रिया चलती थी। 2026 तक आते-आते यह पूरी दुनिया बदल चुकी है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक समय था जब किसी कंपनी का विज्ञापन तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे। बड़ी-बड़ी मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीम रणनीति बनाती थी, कॉपीराइटर और डिजाइनर कंटेंट तैयार करते थे, फिर प्रोडक्शन हाउस उसे अंतिम रूप देता था। लेकिन 2026 तक आते-आते यह पूरी तस्वीर बदल चुकी है। अब AI आधारित टूल कुछ ही मिनटों में सैकड़ों विज्ञापन तैयार कर सकते हैं, उन्हें सही ऑडियंस तक पहुंचा सकते हैं और उनके नतीजों का विश्लेषण भी कर सकते हैं- वह भी बेहद कम इंसानी दखल के साथ।
यह सिर्फ नई तकनीक का असर नहीं है, बल्कि मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री के काम करने के तरीके में आया एक बड़ा बदलाव है। ऐसा बदलाव, जो विज्ञापन, कंटेंट और ऑडियंस कनेक्शन की पूरी दुनिया को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।
एक ट्रिलियन डॉलर का मील का पत्थर
2026 में दुनिया भर का ऐडवर्टाइजिंग खर्च पहली बार 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के पार जाने वाला है। 'डेंट्सू' (Dentsu) की Global Ad Spend Forecast (दिसंबर 2025) के मुताबिक, वैश्विक ऐडवर्टाइजिंग खर्च 2026 में $1.04 ट्रिलियन तक पहुंचेगा, जो 2025 की तुलना में 5.1% की बढ़ोतरी है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की 3.1% वृद्धि दर से कहीं ज्यादा है। यह अपने आप में बताता है कि ब्रैंड्स के लिए ऐडवर्टाइजिंग अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि व्यापार बढ़ाने का सबसे अहम औजार बन चुका है।
इस पूरे मार्केट में AI की भूमिका केंद्रीय है। Dentsu का अनुमान है कि 2026 तक 71.6% ऐडवर्टाइजिंग खर्च एल्गोरिदम संचालित होगा- यानी इंसान नहीं, बल्कि AI तय करेगा कि कौन सा ऐड, किसे, कब और किस कीमत पर दिखाया जाए और 2028 तक यह आंकड़ा 76% तक पहुंचने का अनुमान है।
ऐडवर्टाइजिंग में AI का मार्केट खुद 2025 के $11.17 बिलियन से बढ़कर 2026 में $14.12 बिलियन हो चुका है, और 2030 तक यह $36.34 बिलियन तक पहुंचेगा- यह आंकड़े The Business Research Company की "AI in Advertising Global Market Report 2026" (फरवरी 2026) से लिए गए हैं।
Meta ने Google को पछाड़ा- AI ने बदला खेल
2026 का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग की सत्ता पलट है। EMARKETER की 13 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में Meta पहली बार Google को पीछे छोड़ देगा- वैश्विक डिजिटल विज्ञापन राजस्व में। यह 14 साल में पहली बार होगा।
Meta की इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे मुख्य वजह है- AI कंपनी का Advantage+ टूल और AI-generated ad creatives ने विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम दिए हैं। Meta की विकास दर 2025 के 22.1% से बढ़कर 2026 में 24.1% हो गई है, जबकि Google की विकास दर 11.9% पर स्थिर है।
EMARKETER के सीनियर एक्सपर्ट Zach Goldner के अनुसार, Meta की यह बढ़त किसी एक सोर्स से नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम से आ रही है- Facebook, Instagram, Reels और Threads सभी पर AI की ताकत काम कर रही है।
Google के लिए चुनौती यह भी है कि AI संचालित सर्च टूल और chatbots पारंपरिक सर्च आधारित ऐडवर्टाइजिंग को प्रभावित कर रहे हैं। Gartner का अनुमान है कि 2026 तक पारंपरिक सर्च वॉल्यूम में 25% की गिरावट आ सकती है।
Amazon भी कम नहीं है- 2025 के $68.64 बिलियन से बढ़कर 2026 में $82.07 बिलियन तक पहुंच रहा है।
प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग: AI का सबसे बड़ा मैदान
अगर AI और ऐडवर्टाइजिंग के मेल का सबसे साफ उदाहरण देखना हो, तो वह है प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग (programmatic Advertising)। यह वह तकनीक है जहां AI सेकंड के हजारवें हिस्से में तय करता है कि किसे कौन सा ऐड दिखाना है।
Basis Technologies की जनवरी 2026 रिपोर्ट (EMARKETER data के आधार पर) के अनुसार, अमेरिका में 2026 में प्रोग्रामेटिक डिस्प्ले ऐडवर्टाइजिंग खर्च 203 बिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगा, जो 2025 के 180.4 बिलियन डॉलर की तुलना में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
Dentsu के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रोग्रामैटिक ट्रेंडिंग 81.4% डिजिटल ऐड स्पेंड को कंट्रोल करेगी- यानी हर $5 में से $4 से ज्यादा का ऐडवर्टाइजिंग खर्च अब AI संचालित ग्रामैटिक सिस्टम से होकर गुजर रहा है।
शॉर्ट-फॉर्म वीडियो इस पूरे इकोसिस्टम का नया केंद्र बन गया है। रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ने वाला डिजिटल चैनल है, जिसमें 14.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं ऑनलाइन वीडियो 11.5 प्रतिशत और सोशल मीडिया 11.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।
AI मार्केटिंग का मार्केट: एक बड़ी इंडस्ट्री
सिर्फ ऐडवर्टाइजिंग ही नहीं, बल्कि पूरी मार्केटिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पकड़ तेजी से मजबूत हो रही है। McKinsey की 2025 में प्रकाशित “स्टेट ऑफ AI इन 2025” रिपोर्ट के मुताबिक, अब 88 प्रतिशत ऑर्गनाइजेशंस अपने कम से कम एक कामकाजी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पिछले साल के 78 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। वहीं “स्टेट ऑफ ऑर्गेनाइजेशंस 2026” रिपोर्ट, जो 10,000 से अधिक सीनियर लीडर्स के सर्वे पर आधारित है, जो यह भी बताती है कि 88 प्रतिशत लीडर्स की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लागू कर चुकी हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मार्केटिंग पर खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। अब यह कंपनियों के कुल मार्केटिंग बजट का 9 प्रतिशत हो गया है, जो 2024 में 7 प्रतिशत था। इसके साथ ही, जो मार्केटिंग टीमें AI का इस्तेमाल कर रही हैं, वे हर हफ्ते औसतन 11 घंटे का समय बचा रही हैं और उनकी उत्पादकता में 44 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।
कुछ और अहम आंकड़े जो 2026 की तस्वीर बताते हैं:
आज के समय में ज्यादातर मार्केटर्स अपनी रणनीतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। McKinsey के 2026 State of AI सर्वे के मुताबिक, करीब 75 प्रतिशत मार्केटर्स अब AI का सहारा लेकर अपने कैंपेन प्लान और एग्जिक्यूट कर रहे हैं। AI से चलने वाले कैंपेन पारंपरिक तरीकों की तुलना में ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं। ऐसे कैंपेन लगभग 22 प्रतिशत बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट देते हैं, जिससे कंपनियों को ज्यादा फायदा मिल रहा है।
पर्सनलाइजेशन में भी AI बड़ा बदलाव ला रहा है। AI के जरिए बनाए गए पर्सनलाइज्ड अनुभव से कन्वर्जन रेट में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा, AI से तैयार किए गए हेडलाइंस भी ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं, जिनसे क्लिक-थ्रू रेट में लगभग 25 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है।
ई-मेल मार्केटिंग में भी AI का असर साफ दिखाई दे रहा है। AI से चलने वाले ईमेल कैंपेन में 41 प्रतिशत तक ज्यादा रेवेन्यू आने की संभावना होती है।
एजेंसियां: बदलाव का नया दौर
जे.पी. मॉर्गन के विश्लेषण और डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, अमेरिका में 2026 में ऐडवर्टाइजिंग खर्च 415 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2025 के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि यह बढ़त एजेंसियों के लिए उतनी अच्छी खबर नहीं है, जितनी दिखती है। डिजिटल विज्ञापन अब ग्लोबल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का 68.7 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है और गूगल, मेटा और एमेजॉन जैसे प्लेटफॉर्म्स ने टार्गेटिंग, क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन और रिपोर्टिंग को काफी हद तक ऑटोमेट कर दिया है।
Forrester Research की 2023 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2030 तक एजेंसियां अपनी 7.5 प्रतिशत नौकरियों को ऑटोमेशन से बदल देंगी, जो अमेरिका में करीब 33,000 नौकरियों के बराबर है। लेकिन नवंबर 2025 में इस अनुमान को अपडेट करते हुए फॉरेस्टर ने कहा कि केवल 2026 में ही एजेंसी नौकरियों में 15 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, क्योंकि 2025 में भी औसतन 8 प्रतिशत कर्मचारियों की संख्या में कटौती देखी गई थी।
Forrester के अनुसार, जितनी ज्यादा मौलिकता होगी, उतना ही ऑटोमेशन का खतरा कम होगा। क्लेरिकल, प्रशासनिक और सेल्स से जुड़े कामों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा, जबकि क्रिएटिव और डेटा स्ट्रेटेजी से जुड़े रोल्स की मांग बढ़ेगी।
Meta का Advantage+ और Google का AI- असली बदलाव यहां है
Meta का Advantage+ कैंपेन सिस्टम ऐडवर्टाइजर्स को बस एक प्रोडक्ट URL, बजट और लक्ष्य देने की सुविधा देता है- बाकी सब AI खुद करता है। AI-generated creatives, audience modeling, bid optimization और performance learning- सब कुछ ऑटोमेटेड है।
Google अपने Performance Max campaigns में AI का इस्तेमाल करता है, जो automatically सभी Google properties- Search, YouTube, Display, Maps- पर best performing ads चलाता है।
Amazon के पास retail data की ताकत है। Acxiom- जिसे IPG ने 2018 में acquire किया था और जो अब Omnicom के पास है- 90% global credit card issuers और 75% U.S. retail banks के साथ काम करता है। यह ultra-precise targeting को possible बनाता है।
बाकी सभी काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खुद ही करता है। AI से तैयार किए गए क्रिएटिव्स, ऑडियंस मॉडलिंग, bid optimization और performance learning- ये सब पूरी तरह ऑटोमेटेड हो चुका है।
गूगल अपने परफॉर्मेंस मैक्स कैंपेन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है, जो अपने आप गूगल के सभी प्लेटफॉर्म- सर्च, यूट्यूब, डिस्प्ले और मैप्स पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ऐड चलाता है। एमेजॉन के पास रिटेल डेटा की जबरदस्त ताकत है। Acxiom, जिसे 2018 में IPG ने खरीदा था और जो अब ओमनीकॉम के पास है, दुनिया के 90 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों और अमेरिका के 75 प्रतिशत रिटेल बैंकों के साथ काम करता है। इससे बेहद सटीक टार्गेटिंग संभव हो पाती है।
क्रिएटिव क्रांति: AI संचालित ऐड्स का उदय
ऐड बनाने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। AI टूल्स अब एक ही स्क्रिप्ट को 8 अलग AI personas से, अलग-अलग सेटि्ंग्स में प्रदान कर सकते हैं और इतनी बड़ी मात्रा पारंपरिक प्रोडक्शन तरीकों से कभी हासिल नहीं की जा सकती थी।
डेटा प्राइवेसी और AI का टकराव
AI का यह सफर बिना चुनौतियों के नहीं है। थर्ड-पार्टी कुकीज का अंत हो चुका है और ऐडवर्टाइजर्स को अब फर्स्ट-पार्टी डेटा पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे डेटा क्लीन रूम का चलन बढ़ा है- ये ऐसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म होते हैं, जहां ब्रैंड्स और पब्लिशर्स बिना किसी का निजी डेटा उजागर किए अपना डेटा आपस में मिलाते हैं। इसी वजह से रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इसके पास फर्स्ट-पार्टी शॉपर डेटा होता है, जो कुकीज के बाद का सबसे मूल्यवान संसाधन बन चुका है।
भारत और एशिया-प्रशांत में AI ऐडवर्टाइजिंग का उभार
भारत के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, भारत का ऐडवर्टाइजिंग मार्केट 2026 में 8.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, जो 2025 के 7.8 प्रतिशत से ज्यादा है। इस बढ़त के पीछे ICC मेन्स टी20 क्रिकेट वर्ल्डकप, IPL 2026 और तेजी से बढ़ता डिजिटल विस्तार मुख्य कारण हैं।
भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग खर्च 19.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगा, जिसमें रिटेल मीडिया और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो की बड़ी भूमिका होगी। वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र कुल मिलाकर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 376.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, और भारत इस क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बनकर उभर रहा है।
Omnicom-IPG का महाविलय: एजेंसी का भविष्य
2026 में ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में एक और बड़ा बदलाव आया- Omnicom और IPG का विलय, जो 26 नवंबर 2025 को पूरा हुआ। इस संयुक्त कंपनी की सालाना आय 25 बिलियन डॉलर से अधिक है और इसमें करीब 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। हालांकि, विलय के बाद लगभग 4,000 नौकरियों में कटौती की घोषणा भी की गई है।
यह विलय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में बड़े पैमाने पर विस्तार और बेहतर तकनीकी क्षमताएं हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है। ओमनीकॉम ने सालाना 750 मिलियन डॉलर की बचत का लक्ष्य रखा है। इसके तहत FCB, MullenLowe और DDB जैसे प्रसिद्ध एजेंसी ब्रैंड्स को बंद किया जा रहा है, जबकि McCann, BBDO और TBWA को तीन वैश्विक क्रिएटिव नेटवर्क के रूप में रखा जाएगा।
मार्केटिंग का नया युग
2026 तक आते-आते यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि ऐडवर्टाइजिंग में AI अब कोई फ्यूचर ट्रेंड नहीं, बल्कि आज की जमीनी हकीकत है। $1.04 ट्रिलियन का वैश्विक विज्ञापन मार्केट, Meta का Google पर ऐतिहासिक बढ़त, प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग का $200 बिलियन का पड़ाव, और AI संचालित कैंपेन का बेहतर ROI- ये सब मिलकर एक नई दुनिया का निर्माण कर रहे हैं।
लेकिन इस बदलाव में सिर्फ दक्षता ही नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल भी है। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही क्रिएटिव तैयार करेगा, टार्गेटिंग करेगा और उसे बेहतर बनाएगा, तो इंसान की भूमिका क्या रह जाएगी? इसका जवाब शायद यही है- रणनीति, संवेदनशीलता और वह मानवीय स्पर्श, जो किसी एल्गोरिदम के पास नहीं होता।
जो ब्रैंड्स और एजेंसियां यह समझ जाएंगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक सहयोगी है, प्रतिस्पर्धी नहीं, वही इस नए एल्गोरिदम आधारित दौर में आगे निकलेंगी।
OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि AI नौकरियों के लिए ‘महाविनाश’ नहीं ला रहा। उन्होंने माना कि वाइट-कॉलर नौकरियों पर असर को लेकर उनकी पुरानी आशंकाएं जरूरत से ज्यादा थीं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में नौकरियों पर खतरे की चर्चा के बीच OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि AI नौकरियों के लिए किसी “महाविनाश” जैसी स्थिति नहीं ला रहा है और वाइट-कॉलर नौकरियों के खत्म होने को लेकर उनकी पुरानी चिंताएं जरूरत से ज्यादा थीं।
सैम ऑल्टमैन मंगलवार को सिडनी में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (Commonwealth Bank of Australia - CBA) की ओर से आयोजित किया गया था, जहां उन्होंने बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉमिन (Matt Comyn) के साथ बातचीत की।
ऑल्टमैन ने कहा कि साल 2022 में ChatGPT लॉन्च होने के बाद उन्हें डर था कि एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर नौकरियों पर बड़ा असर पड़ेगा। हालांकि अब तक रोजगार पर असर उनकी उम्मीद से काफी कम रहा है।
उन्होंने माना कि तकनीक के विकास को लेकर उनका अनुमान सही था, लेकिन समाज और अर्थव्यवस्था पर इसके असर का आकलन पूरी तरह सही नहीं निकला। सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उस समय खतरा वास्तविक लग रहा था, इसलिए उस पर चर्चा जरूरी थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में AI का असर और बढ़ सकता है।
आज HSBC, अमेजन (Amazon), स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) और CBA जैसी कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके बावजूद ऑल्टमैन का मानना है कि इंसानी बातचीत और समझ की जगह मशीनें आसानी से नहीं ले सकतीं।
RBI ने मोबाइल वॉलेट्स के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं। अब वॉलेट बैलेंस, P2P ट्रांसफर और कैश लोडिंग की लिमिट तय कर दी गई है, जिससे फिनटेक कंपनियों में चिंता बढ़ गई है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी मोबाइल वॉलेट्स के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। इस फैसले के बाद मोबिक्विक (Mobikwik), फोनपे (PhonePe), अमेजन पे (Amazon Pay), पाइन लैब्स (Pine Labs) और एयरटेल पेमेंट्स बैंक (Airtel Payments Bank) जैसी कंपनियों को नए नियमों के तहत काम करना होगा।
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब किसी भी मोबाइल वॉलेट में अधिकतम मासिक बैलेंस 2 लाख रुपये तक ही रखा जा सकेगा। वहीं व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) फंड ट्रांसफर की सीमा घटाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हर महीने वॉलेट में अधिकतम 10 हजार रुपये तक ही नकद जमा किए जा सकेंगे।
इन नियमों के बाद फिनटेक इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। पॉलिसी कंसेंसस सेंटर (Policy Consensus Centre - PCC) द्वारा आयोजित एक बैठक में कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि इन प्रतिबंधों से मोबाइल वॉलेट्स कमजोर हो सकते हैं और बैंकिंग सिस्टम व UPI को ज्यादा बढ़ावा मिल सकता है।
दरअसल RBI की सख्ती के पीछे डिजिटल वॉलेट्स के बढ़ते दुरुपयोग को मुख्य वजह माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) ने हाल में कई संदिग्ध लेन-देन पकड़े थे। इनमें सट्टेबाजी, गैंबलिंग और रियल-मनी गेमिंग से जुड़े ट्रांजैक्शन शामिल बताए गए हैं।
डिजिटल मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने बोर्ड स्तर पर कई अहम फैसले लिए हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने बोर्ड स्तर पर कई अहम फैसले लिए हैं। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 22 मई 2026 को हुई बैठक में कई डायरेक्टर्स की दोबारा नियुक्ति और नए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति को मंजूरी दी।
कंपनी के मुताबिक, बोर्ड ने आगामी वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting) में शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन वंदना मलिक, ऋतु कपूर और आभा कपूर की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी है।
ऋतु कपूर फिर संभालेंगी अहम जिम्मेदारी
ऋतु कपूर कंपनी की को-फाउंडर, सीईओ व मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्हें डिजिटल मीडिया में इनोवेशन और फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म 'वेबकूफ' (WebQoof) शुरू करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने “My Report” और “Talking Stalking” जैसे अभियानों के जरिए नागरिक पत्रकारिता और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी आगे बढ़ाया।
वंदना मलिक का मीडिया में लंबा अनुभव
वंदना मलिक पिछले तीन दशकों से मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी रही हैं। उन्होंने TV18 और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स में एंटरटेनमेंट कंटेंट और प्रोग्रामिंग से जुड़े कई अहम रोल निभाए हैं। वे पहले नेटवर्क18 मीडिया व इन्वेस्टमेंट्स के बोर्ड में भी रह चुकी हैं।
आभा कपूर को मिला दूसरा कार्यकाल
आभा कपूर को कंपनी ने इंडिपेेंडेंट वुमेन डायरेक्टर के तौर पर दूसरा पांच साल का कार्यकाल देने का फैसला किया है। उनका नया कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 30 दिसंबर 2031 तक रहेगा। आभा कपूर कॉरपोरेट गवर्नेंस और मीडिया-एंटरटेनमेंट सेक्टर में टैलेंट बिल्डिंग के लिए जानी जाती हैं।
नए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए Raghu Nath Rai & Co. को नया इंटर्नल ऑडिटर नियुक्त किया है। यह फर्म 1967 से काम कर रही है और ऑडिट, टैक्सेशन, रिस्क एडवाइजरी और फाइनेंशियल कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में अनुभव रखती है।
कंपनी के मुताबिक, ये सभी नियुक्तियां शेयरधारकों की मंजूरी के बाद प्रभावी होंगी।
सरकार ने DigiLocker और CISCE के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट को लेकर अलर्ट जारी किया है। MeitY ने लोगों को निजी जानकारी, आधार डिटेल और OTP साझा न करने की सख्त चेतावनी दी है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर ठग अब सरकारी सेवाओं के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने DigiLocker और CISCE के नाम पर चल रही एक फर्जी वेबसाइट को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। सरकार के मुताबिक http://digilocker.cisceboard.org नाम की एक फर्जी वेबसाइट इंटरनेट पर सक्रिय है। यह वेबसाइट देखने में बिल्कुल असली DigiLocker और CISCE पोर्टल जैसी लगती है, जिससे आम यूजर्स आसानी से धोखा खा सकते हैं।
MeitY ने नागरिकों को इस वेबसाइट से दूर रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा है कि लोग इस पोर्टल पर अपना नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या आधार से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा न करें। साथ ही किसी भी ओटीपी (OTP) को यहां दर्ज करने से बचें। सरकार ने चेतावनी दी है कि यह वेबसाइट शुल्क या किसी अन्य बहाने से ऑनलाइन भुगतान की मांग भी कर सकती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का लेन-देन न करने की सलाह दी गई है।
मंत्रालय ने लोगों को याद दिलाया है कि भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइटों के अंत में आमतौर पर “.gov.in” या “.nic.in” लिखा होता है। इसके अलावा व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल के जरिए मिलने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचने को कहा गया है। सरकार ने लोगों से इस जानकारी को परिवार और दोस्तों के साथ साझा करने की अपील की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग साइबर ठगी से सुरक्षित रह सकें।
ब्रेकिंग न्यूज से लेकर लोकल अपडेट तक, सब कुछ वहीं पहुंच रहा है जहां लोग पहले से अपना समय बिता रहे हैं। न्यूज अब ऐप के अंदर नहीं, लोगों की रोजमर्रा की डिजिटल आदतों के बीच बह रही है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अब खबरें पढ़ने के लिए लोग किसी एक न्यूज ऐप पर नहीं जाते। सुबह की पहली अपडेट वॉट्सऐप फॉरवर्ड, इंस्टाग्राम रील, यूट्यूब वीडियो या टेलीग्राम चैनलों से मिल जाती है। ब्रेकिंग न्यूज से लेकर लोकल अपडेट तक, सब कुछ वहीं पहुंच रहा है जहां लोग पहले से अपना समय बिता रहे हैं। न्यूज अब ऐप के अंदर नहीं, लोगों की रोजमर्रा की डिजिटल आदतों के बीच बह रही है।
यह सिर्फ एक आदत नहीं बदली- यह पूरे मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन का भूगोल बदल रहा है।
"डेस्टिनेशन इंटरनेट" से "डिस्ट्रीब्यूशन इंटरनेट" की इस यात्रा में भारत सबसे आगे है। और इस यात्रा के केंद्र में है एक सवाल जो मीडिया इंडस्ट्री की नींव हिला रहा है: क्या न्यूज ऐप्स अपना सबसे बड़ा युद्ध हार रहे हैं?
भारत: वॉट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार, न्यूज का नया अड्डा
आंकड़े बोलते हैं और जोर से बोलते हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट (Reuters Institute) के Digital News Report 2025 के अनुसार, भारत में 46% लोग वॉट्सऐप को न्यूज के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यूट्यूब (55%) के बाद वॉट्सऐप दूसरा सबसे बड़ा न्यूज प्लेटफॉर्म बन चुका है। इसके बाद इंस्टाग्राम (37%), फेसबुक (36%), और टेलीग्राम (22%) आते हैं।
तुलना के लिए देखें तो वैश्विक औसत में वॉट्सऐप का यह आंकड़ा महज 19% है। यानी भारत में वॉट्सऐप न्यूज खपत दुनिया के औसत से ढाई गुना ज्यादा है।
कई आंकड़ा स्रोतों के अनुसार भारत में वॉट्सऐप के करीब 535 मिलियन मंथसी एक्टिव यूजर्स हैं, जो दुनिया में किसी भी देश से सबसे ज्यादा है। दुनियाभर में वॉट्सऐप के 3 अरब मंथसी एक्टिव यूजर्स हैं, और उनमें से हर छठा भारतीय है। औसत वॉट्सऐप यूजर्स इस पर हर महीने 21 घंटे बिताता है।
इतने बड़े पारिस्थितिकी तंत्र में जब कोई न्यूज पब्लिशर अपना चैनल खोलता है, तो वह सिर्फ सामग्री नहीं डाल रहा, वह दर्शकों के उसी इनबॉक्स में घर बना रहा है जहां उसके परिवार, दोस्त और दफ्तर के लोग हैं।
वॉट्सऐप चैनल्स सितंबर 2023 में शुरू हुआ था और जून 2024 तक इसके 50 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हो गए। किसी भी नए फीचर के लिए इतनी तेज ग्रोथ काफी बड़ी मानी जाती है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Financial Times को टेलीग्राम पर 35 हजार फॉलोअर्स जुटाने में एक साल लगा, जबकि वॉट्सऐप पर उतने ही फॉलोअर्स सिर्फ दो हफ्तों में मिल गए।
न्यूज मीडिया अब वॉट्सऐप चैनल्स पर दूसरी सबसे बड़ी कैटेगरी बन चुकी है, स्पोर्टस के बाद। और इस कैटेगरी में भारतीय न्यूज चैनल वैश्विक स्तर पर सबसे आगे हैं।
न्यूज ऐप डाउनलोड तो हो रहे हैं, लेकिन अब एक बड़ा प्रश्न, क्या न्यूज ऐप्स वाकई संकट में हैं?
Appfigures के आंकड़ों के अनुसार 2025 में वैश्विक ऐप डाउनलोड लगातार पांचवें साल घटे, 106.9 अरब तक। AppTweak के विश्लेषण के अनुसार कुल ऐप डाउनलोड में साल-दर-साल 4.1% की गिरावट दर्ज हुई। Sensor Tower के अनुसार भारत उन कुछ देशों में से एक है जहां 2025 में डाउनलोड बढ़े, 24.6 अरब से 25.5 अरब। लेकिन इस वृद्धि का श्रेय मुख्यतः AI सहायक, क्विक कॉमर्स और सरकारी सेवा ऐप्स को जाता है।
मीडिया और सोशल मैसेंजर ऐप्स की कैटेगरी में? भारत में भी गिरावट।
इससे भी बड़ी समस्या रिटेंशन की है। एक बार डाउनलोड होने के बाद यूजर्स कितने दिन ऐप पर टिकता है? Statista के Android ऐप आंकड़ों (तीसरी तिमाही 2024) के अनुसार न्यूज ऐप्स का 30-दिन रिटेंशन रेट लगभग 10% है, यह सभी ऐप कैटेगरीज में सबसे अच्छा है, फिर भी इसका मतलब यह है कि 100 में से 90 लोग एक महीने बाद ऐप नियमित रूप से नहीं खोल रहे।
इसके साथ जोड़ें एक और आंकड़ा: एक भारतीय स्मार्टफोन में औसतन 80 से ज्यादा ऐप्स होते हैं, लेकिन उनमें से नियमित रूप से इस्तेमाल होते हैं बस मुट्ठीभर। एक अलग अध्ययन बताता है कि 22% यूजर्स खुद मानते हैं कि उनके फोन पर ऐप्स की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है। स्टोरेज कम नहीं होती, धैर्य पहले खत्म हो जाता है।
पुश नोटिफिकेशन का संकट: जब अलर्ट ही दुश्मन बन जाए
एक समय था जब न्यूज ऐप्स की सबसे बड़ी ताकत पुश नोटिफिकेशन मानी जाती थी। जैसे ही ब्रेकिंग न्यूज आती थी, फोन पर नोटिफिकेशन आता और लोग तुरंत ऐप खोल लेते थे। लेकिन अब यही तरीका लोगों को परेशान करने लगा है।
Batch की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, Android फोन में पुश नोटिफिकेशन स्वीकार करने वाले यूजर्स की संख्या एक साल में 85% से घटकर 67% रह गई। iPhone में यह पहले से ही करीब 56-58% के बीच थी। मीडिया और एंटरटेनमेंट कैटेगरी में यह आंकड़ा सबसे कम कैटेगरी में शामिल है।
भारत में भी हाल कुछ ऐसा ही है। यहां Android पर सिर्फ 40-60% और iPhone पर 30-45% लोग ही नोटिफिकेशन ऑन रखते हैं। अगर जरूरत से ज्यादा नोटिफिकेशन आने लगें, तो लोग तुरंत ऐप म्यूट कर देते हैं या फिर उसे फोन से हटा देते हैं।
असल में आज हर ऐप यूजर्स का ध्यान खींचना चाहता है। किसी ने सही कहा है कि भारतीय स्मार्टफोन की नोटिफिकेशन ट्रे अब “पूरी तरह भरी हुई जगह” बन चुकी है। हर तरफ सिर्फ अलर्ट ही अलर्ट हैं।
वॉट्सऐप यहां अलग नजर आता है। उसका नोटिफिकेशन लोगों को ज्यादा निजी और भरोसेमंद लगता है, क्योंकि वही जगह है जहां परिवार और दोस्तों के मैसेज भी आते हैं। इसलिए अगर कोई खबर वॉट्सऐप चैनल से आती है, तो वह यूजर्स को उतनी परेशान नहीं करती जितनी किसी न्यूज ऐप की नोटिफिकेशन करती है। यही वजह है कि लोग अब न्यूज ऐप्स से ज्यादा वॉट्सऐप पर खबरें देखना पसंद करने लगे हैं।
Social Media का घटता योगदान: Traffic का महाविनाश
रीजनल मीडिया की नई रणनीति: वॉट्सऐप ही है असली Homepage
भारत में यह बदलाव इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां बड़े शहरों और छोटे शहरों के लोगों का इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका काफी अलग है।
मेट्रो शहरों में लोग शायद सीधे NDTV या TOI जैसे न्यूज ऐप खोलते हों। लेकिन छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में लोगों तक खबर सबसे ज्यादा वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए पहुंचती है। वहां परिवार या दोस्तों के ग्रुप में जो खबर फॉरवर्ड होती है, वही लोगों के लिए “हेडलाइन” बन जाती है।
Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आधे से ज्यादा लोग कभी-कभी न्यूज से दूरी बनाते हैं। लेकिन वॉट्सऐप पर आने वाली खबरों को वे नजरअंदाज नहीं करते, क्योंकि वह उनके रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन चुकी हैं।
इसी बात को हिंदी और क्षेत्रीय मीडिया कंपनियां तेजी से समझ रही हैं। छोटे और मझोले डिजिटल पब्लिशर्स अब वॉट्सऐप चैनल्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। BloombergQuint India ने वॉट्सऐप पर फाइनेंशियल न्यूज भेजना शुरू किया और उसके 3.5 लाख से ज्यादा एक्टिव सब्सक्राइबर हो गए। कंपनी ने 90% डेली एंगेजमेंट का दावा भी किया, जो डिजिटल दुनिया में काफी बड़ा आंकड़ा माना जाता है। वहीं Newschecker जैसे फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप का इस्तेमाल फेक न्यूज रोकने के लिए कर रहे हैं।
यह पूरा ट्रेंड एक बड़ी बात दिखाता है। पहले मीडिया कंपनियां लोगों से कहती थीं कि “हमारी वेबसाइट पर आओ”, लेकिन अब उन्हें खुद वहां जाना पड़ रहा है जहां लोग पहले से मौजूद हैं।
न्यूज कंजप्शन का बदल गया पूरा नक्शा
Reuters Institute Digital News Report 2025 की रिपोर्ट बताती है कि लोगों के न्यूज देखने और पढ़ने का तरीका तेजी से बदल रहा है। सबसे बड़ा बदलाव वीडियो में दिख रहा है। 2020 में जहां 52% लोग सोशल वीडियो के जरिए न्यूज देखते थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 65% हो गया। भारत उन देशों में शामिल है जहां अब लोग न्यूज पढ़ने से ज्यादा वीडियो में देखना पसंद कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर लोग अब यूट्यूब, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज देख रहे हैं। वीडियो न्यूज का 61% हिस्सा इन प्लेटफॉर्म्स पर देखा जाता है, जबकि न्यूज कंपनियों की अपनी वेबसाइट्स पर सिर्फ 29% लोग पहुंचते हैं। इसका सीधा असर मीडिया कंपनियों की विज्ञापन कमाई और सब्सक्रिप्शन बिजनेस पर पड़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दुनिया भर में लोग अब न्यूज से दूरी बनाने लगे हैं। 2025 में करीब 40% लोगों ने माना कि वे कभी-कभी या अक्सर न्यूज देखना टालते हैं। 2017 में यह आंकड़ा 29% था। इसकी बड़ी वजह लगातार नकारात्मक खबरें और जरूरत से ज्यादा न्यूज का दबाव बताया गया है।
वहीं AI भी तेजी से न्यूज की दुनिया में जगह बना रहा है। भारत में 18% लोग हर हफ्ते न्यूज के लिए AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि ब्रिटेन में यह आंकड़ा सिर्फ 3% है। खास बात यह है कि 44% भारतीय AI से तैयार न्यूज को सहजता से स्वीकार कर रहे हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।
सबसे बड़ा खतरा: दूसरों के प्लेटफॉर्म पर बनी ऑडियंस
मीडिया कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी ऑडियंस आखिर उनकी अपनी है या किसी और प्लेटफॉर्म की।
सीधी भाषा में समझें तो:
न्यूज ऐप = अपनी ऑडियंस
वॉट्सऐप चैनल = किराए की ऑडियंस
मान लीजिए किसी मीडिया कंपनी के वॉट्सऐप चैनल पर 10 लाख सब्सक्राइबर हो जाते हैं। यह सुनने में बहुत बड़ा लगता है, लेकिन असली समस्या यह है कि उन लोगों का पूरा डेटा कंपनी के पास नहीं होता। वॉट्सऐप यह नहीं बताता कि सब्सक्राइबर कौन हैं, उनकी उम्र क्या है, वे कहां रहते हैं या उनकी पसंद क्या है। मीडिया कंपनी सीधे उन्हें ईमेल या नोटिफिकेशन भी नहीं भेज सकती।
सबसे बड़ा डर यह है कि Meta कभी भी अपने नियम बदल सकता है।
ऐसा पहले भी हो चुका है। कुछ साल पहले मीडिया कंपनियों ने फेसबुक पर बहुत भरोसा किया था। उन्होंने अपनी पूरी डिजिटल रणनीति फेसबुक के हिसाब से बना ली। लेकिन बाद में फेसबुक ने अपना एल्गोरिदम बदल दिया और न्यूज कंटेंट की पहुंच कम कर दी। इसका असर यह हुआ कि मीडिया वेबसाइट्स का ट्रैफिक तेजी से गिर गया। X (पहले Twitter) के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
अब वॉट्सऐप भी उसी रास्ते पर जाता दिख रहा है। Meta ने वॉट्सऐप चैनल्स पर पेड सब्सक्रिप्शन और प्रमोटेड चैनल्स शुरू करने की तैयारी कर ली है। यानी आने वाले समय में यहां भी पहुंच के लिए पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
Reuters Institute की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 77% मीडिया कंपनियां सोशल मीडिया से घटते ट्रैफिक की वजह से नए रास्ते खोज रही हैं। इसलिए वे वॉट्सऐप की तरफ जा रही हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वे एक प्लेटफॉर्म की निर्भरता छोड़कर दूसरे प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो रही हैं?
आगे का रास्ता क्या है?
मीडिया इंडस्ट्री के सामने अब तीन बड़े रास्ते हैं।
पहला रास्ता: App और वॉट्सऐप दोनों साथ
मीडिया कंपनियां वॉट्सऐप का इस्तेमाल लोगों तक पहुंचने के लिए करें और फिर उन्हें अपने ऐप या वेबसाइट तक लाएं। यानी वॉट्सऐप सिर्फ दरवाजा बने, पूरा घर नहीं।
दूसरा रास्ता: अपनी ऑडियंस खुद बनाना
ईमेल न्यूज़लेटर, पेड सब्सक्रिप्शन और ऐप engagement पर ज्यादा ध्यान दिया जाए, ताकि ऑडियंस पर कंपनी का सीधा नियंत्रण बना रहे।
तीसरा रास्ता: AI आधारित न्यूज
अब लोग AI चैटबॉट्स से भी न्यूज लेने लगे हैं। आने वाले समय में AI आधारित personal news feeds और chatbots एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकते हैं। लेकिन वहां भी मीडिया कंपनियों का सीधा कंट्रोल सीमित रहेगा।
न्यूज ऐप खत्म नहीं हो रहे, उनकी भूमिका बदल रही है
न्यूज ऐप पूरी तरह खत्म नहीं होंगे, लेकिन अब उनका काम बदल रहा है। पहले ऐप्स का मकसद ज्यादा से ज्यादा नए यूजर्स लाना था। अब वे उन लोगों के लिए प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं जो पहले से लॉयल रीडर्स हैं और गहराई से कंटेंट पढ़ना चाहते हैं। अब नई ऑडियंस वॉट्सऐप, YouTube, Instagram और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म्स से आ रही है।
एक तरह से देखें तो अब वॉट्सऐप Groups नए जमाने के डिजिटल अखबार स्टॉल बन चुके हैं। पहले लोग चाय की दुकान पर अखबार पढ़ते थे, अब वही काम वॉट्सऐप ग्रुप में फॉरवर्ड हुई खबरें कर रही हैं। यह बदलाव मीडिया इंडस्ट्री के लिए खतरा नहीं, बल्कि नया सच है। जो मीडिया कंपनी लोगों तक उनकी पसंद के प्लेटफॉर्म पर पहुंचेगी, वही आगे बढ़ेगी।
लेकिन सावधानी जरूरी है। किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस बनाना आसान है, लेकिन अगर वह प्लेटफॉर्म अपने नियम बदल दे, तो पूरी रणनीति बिगड़ सकती है। यानी न्यूज ऐप्स का दौर खत्म नहीं हो रहा, लेकिन अब लोगों तक पहुंचने का सबसे बड़ा रास्ता app stores नहीं, बल्कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स बनते जा रहे हैं।
गूगल (Google) ने अपने AI Pro प्लान में बड़े बदलाव किए हैं। अब डेली प्रॉम्प्ट लिमिट हटाकर कंप्यूट-बेस्ड सिस्टम लागू किया गया है, जबकि Jio के फ्री यूजर्स को YouTube Premium Lite का लाभ नहीं मिलेगा।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने अपने AI Pro प्लान में कई अहम बदलाव किए हैं। कंपनी ने जहां एक तरफ YouTube Premium Lite जैसे नए फायदे जोड़े हैं, वहीं दूसरी ओर AI उपयोग की लिमिट तय करने का तरीका भी बदल दिया है।
अब गूगल (Google) डेली प्रॉम्प्ट लिमिट की जगह “कंप्यूट-बेस्ड सिस्टम” लागू कर रहा है। यानी यूजर कितनी AI क्षमता इस्तेमाल कर सकता है, यह उसकी चैट की लंबाई, फीचर्स के उपयोग और रिक्वेस्ट की जटिलता पर निर्भर करेगा।
कंपनी ने 5 घंटे की “रोलिंग विंडो” व्यवस्था भी शुरू की है। इसके तहत लिमिट खत्म होने पर यूजर्स को अगला कोटा रिफ्रेश होने तक इंतजार करना होगा। इस बीच गूगल (Google) और रिलायंस जियो (Reliance Jio) के 18 महीने वाले फ्री AI Pro ऑफर को लेकर भी नई जानकारी सामने आई है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस ट्रायल प्लान में YouTube Premium Lite की सुविधा शामिल नहीं होगी।
जेमिनी एआई (Gemini AI) के प्रोडक्ट लीड विकास कंसल (Vikas Kansal) ने एक्स (X) पर बताया कि YouTube Premium Lite केवल पेड AI Pro सब्सक्राइबर्स को मिलेगा। यानी Jio के जरिए मुफ्त AI Pro इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को यह सुविधा ट्रायल खत्म होने के बाद पेड प्लान लेने पर ही मिलेगी।
YouTube Premium Lite एक बेसिक प्रीमियम प्लान है, जिसमें अधिकांश वीडियो विज्ञापन-मुक्त देखे जा सकते हैं। हालांकि इसमें YouTube Music Premium, बैकग्राउंड प्ले, ऑफलाइन डाउनलोड और हाई-क्वालिटी ऑडियो जैसे फीचर्स शामिल नहीं हैं।
इससे पहले वह ‘HT Digital Streams’ में हेड (वीडियो ग्रोथ) के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ में वरिष्ठ डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल निखिल राठौर की वापसी हुई है। उन्होंने इस समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कड़क’ (Kadak) के एडिटर के रूप में जॉइन किया है।
निखिल राठौर ने खुद अपने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए इस नई पारी की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि वर्षों तक स्टोरीटेलिंग, टीम बिल्डिंग और प्रभावशाली पत्रकारिता पर काम करने के बाद अब वह इस नई चुनौती को लेकर उत्साहित हैं और निर्भीक व प्रभावशाली कंटेंट तैयार करने में योगदान देना चाहते हैं।
इससे पहले वह ‘HT Digital Streams’ में हेड (वीडियो ग्रोथ) के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने ‘No Intervals’, ‘Alert News’ और ‘DesiMartini Podcast’ जैसे कई डिजिटल प्रॉपर्टीज और ब्रांड्स की लॉन्चिंग और री-लॉन्चिंग में अहम भूमिका निभाई।
निखिल राठौर को मीडिया और डिजिटल इंडस्ट्री में काम करने का करीब 18 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह नेटवर्क18 में ही ‘हेड, ऑफ प्लेटफॉर्म- News18 India, SportsNext और News18 Hindi’ की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने न्यूज18 हिंदी के सोशल मीडिया और वीडियो/यूट्यूब ऑपरेशंस का नेतृत्व किया।
उन्होंने नेटवर्क18 में ‘लीड-वीडियो स्ट्रैटेजी एंड ऑपरेशंस’ और ‘न्यूज एडिटर, वीडियो सिनर्जी’ जैसी भूमिकाओं में भी काम किया है। इसके अलावा वह सीएनएन-न्यूज18, इंडिया टुडे, न्यूजएक्स, एनडीटीवी और होमशॉप18 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से भी जुड़े रहे हैं।
डिजिटल वीडियो, सोशल मीडिया स्ट्रैटेजी, ऑर्गेनिक ग्रोथ, यूट्यूब ऑपरेशंस और AI आधारित कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। समाचार4मीडिया की ओर से निखिल राठौर को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।