वॉल्ट डिज्नी हजारों कर्मचारियों की छंटनी पर कर रही विचार

वॉल्ट डिज्नी हजारों नौकरियों में कटौती पर विचार कर रही है। कंपनी मैनेजरों से सालाना खर्च में 20 फीसदी तक बचत के विकल्प तलाशने को कह रही है।

Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
Walt Disney


वॉल्ट डिज्नी (Walt Disney) व्यापक स्तर पर लागत कम करने की योजना के तहत हजारों नौकरियों में कटौती पर विचार कर रही है। वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने कुछ मैनेजरों से सालाना खर्च में 20 फीसदी तक बचत के विकल्प तलाशने को कहा है।

प्रस्तावित बचत का कुछ हिस्सा नौकरियों में कटौती से हासिल किया जा सकता है, जबकि बाकी रकम अन्य ऑपरेशनल खर्च कम करके बचाने की योजना है।

कंपनी की यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है, जब डिज्नी को कई कारोबारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का बढ़ता इस्तेमाल, बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन में कमजोरी, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और थीम पार्कों में अंतरराष्ट्रीय दर्शकों की संख्या में सुस्ती शामिल है।

सीईओ जोश डी'अमारो (Josh D’Amaro) के नेतृत्व में कंपनी बचत से मिलने वाली रकम का कुछ हिस्सा विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं पर खर्च करने की तैयारी कर रही है। इनमें फिल्म और टेलीविजन प्रोग्रामिंग, तकनीकी पहल, थीम पार्क और क्रूज कारोबार शामिल हैं।

खर्चों की यह समीक्षा इस साल कंपनी में हुई कर्मचारियों की कटौती के बाद हो रही है। सितंबर में डिज्नी ने सैकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से हटाया था। इसे 2026 में कंपनी की छंटनी का तीसरा दौर बताया गया था। डिज्नी ने मौजूदा वित्त वर्ष में समायोजित प्रति शेयर आय में दोहरे अंक की वृद्धि देने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

डी'अमारो और सीएफओ ह्यू जॉनस्टन (Hugh Johnston) ने अगस्त में संकेत दिया था कि कंपनी खर्च कम करने के लिए अतिरिक्त कदमों का मूल्यांकन कर रही है। इनमें कर्मचारियों की संख्या में संभावित कटौती भी शामिल थी।

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भारत को AVGC-XR का वैश्विक केंद्र बनाने की तैयारी कितनी आगे बढ़ी?

भारत के सामने एक बड़ा अवसर है कि वह केवल दूसरे देशों के लिए इन सेवाओं का काम करने वाला बाजार न रहे, बल्कि खुद भी ऐसे कंटेंट, तकनीक और प्रोडक्शन का बड़ा केंद्र बने, जिसकी मांग दुनिया भर में हो।

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Tuesday, 03 November, 2026
AnimationGame547

भारत में एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स (VFX) और एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) जैसे क्षेत्रों में तेजी से नए अवसर बन रहे हैं। फिल्मों में इस्तेमाल होने वाले शानदार विजुअल इफेक्ट्स से लेकर मोबाइल गेमिंग, एनिमेटेड फिल्मों, कॉमिक्स और वर्चुअल रियलिटी तक, मनोरंजन की दुनिया में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत के सामने एक बड़ा अवसर है कि वह केवल दूसरे देशों के लिए इन सेवाओं का काम करने वाला बाजार न रहे, बल्कि खुद भी ऐसे कंटेंट, तकनीक और प्रोडक्शन का बड़ा केंद्र बने, जिसकी मांग दुनिया भर में हो।

इसी दिशा में केंद्र सरकार ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी यानी AVGC-XR सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं। इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT), वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (WAVES), WaveX स्टार्टअप एक्सीलरेटर और 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज' जैसी पहल शामिल हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, इन प्रयासों का मकसद इस सेक्टर के लिए कुशल प्रतिभाएं तैयार करना, युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ना, नए स्टार्टअप को बढ़ावा देना और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कारोबार तक पहुंच दिलाना है। सवाल यह है कि इन पहलों के जरिए भारत ने अब तक कितनी प्रगति की है और दुनिया का बड़ा AVGC-XR केंद्र बनने की दिशा में आगे कौन से कदम उठाए जा रहे हैं?

IICT: रचनात्मक तकनीक की पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए नया संस्थान

भारत को AVGC-XR का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना में IICT की भूमिका काफी अहम है। मुंबई में स्थापित इस संस्थान को AVGC-XR सेक्टर के लिए नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ महाराष्ट्र सरकार और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों की भागीदारी है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) भी इसके प्रमुख इंडस्ट्री पार्टनर हैं।

IICT की स्थापना के लिए 11 अप्रैल 2025 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार, महाराष्ट्र फिल्म, स्टेज एंड कल्चरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (MFSCDCL) और IICT के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में IIT और IIM की तर्ज पर एक विश्वस्तरीय संस्थान तैयार करना है, जहां युवाओं को उद्योग की जरूरतों के मुताबिक ट्रेनिंग दी जा सके।

संस्थान का अस्थायी कैंपस मुंबई में नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) परिसर में शुरू किया गया। 18 जुलाई 2025 को इसका उद्घाटन हुआ। इसी मौके पर संस्थान का लोगो लॉन्च किया गया और गेमिंग, पोस्ट प्रोडक्शन, एनीमेशन, कॉमिक्स तथा एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) से जुड़े कुल 17 कोर्स शुरू किए गए।

इन पाठ्यक्रमों में अंडरग्रेजुएट डिप्लोमा, एक साल के डिप्लोमा और कम अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स शामिल हैं। AI आधारित प्रोग्राम और वर्चुअल प्रोडक्शन जैसी नई तकनीकों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। यहां 'लर्न बाय डूइंग' यानी काम करते हुए सीखने के तरीके पर जोर दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि छात्रों को सिर्फ क्लासरूम की पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय स्टूडियो और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट के जरिए अनुभव देने की कोशिश की जा रही है।

IICT में कितनी हुई प्रगति?

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान में 167 छात्रों ने दाखिला लिया था, जबकि 150 से अधिक उम्मीदवार पाइपलाइन में थे। इसके अलावा IICT ने टेक्नोलॉजी, शिक्षा और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों के साथ 43 MoU किए हैं। इनमें NVIDIA, Adobe, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं।

संस्थान ने LTI Mindtree, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) और MIT आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के साथ भी सहयोग किया है। इन साझेदारियों का मकसद छात्रों को नई तकनीक, इंडस्ट्री की जरूरतों और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।

IICT में स्टार्टअप को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के इन्क्यूबेटर में पहले बैच के 7 स्टार्टअप ने काम शुरू किया था। इन्हें मार्गदर्शन, तकनीकी सुविधाएं और इंडस्ट्री से संपर्क उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल IICT NFDC परिसर से काम कर रहा है। वहीं मुंबई के गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी में 10 एकड़ में इसका स्थायी कैंपस विकसित किया जा रहा है। इस कैंपस में आधुनिक स्टूडियो और इमर्सिव प्रोडक्शन से जुड़ी सुविधाएं तैयार करने की योजना है। 

इस तरह IICT का उद्देश्य सिर्फ डिग्री या डिप्लोमा देना नहीं, बल्कि युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करना है जिनकी जरूरत एनीमेशन, गेमिंग, VFX और XR उद्योग में पड़ती है।

WaveX: स्टार्टअप को आइडिया से कारोबार तक पहुंचाने की पहल

AVGC-XR सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ प्रशिक्षित लोगों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे स्टार्टअप की भी जरूरत है जो अपनी तकनीक, गेम, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट तैयार करके बाजार में ला सकें। कई बार युवाओं के पास अच्छे आइडिया होते हैं, लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन, फंडिंग, तकनीकी सुविधाएं और निवेशकों तक पहुंच नहीं मिल पाती। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने WAVES के तहत WaveX पहल शुरू की है।

WaveX सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एक स्टार्टअप एक्सीलरेटर पहल है। इसका उद्देश्य मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर, खासकर AVGC-XR में उद्यमिता, नए प्रयोग और अपनी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property यानी IP) तैयार करने को बढ़ावा देना है। आसान भाषा में कहें तो इसका मकसद नए क्रिएटर्स और स्टार्टअप को केवल आइडिया बनाने तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें ऐसा कारोबार खड़ा करने में मदद करना है, जिससे उनकी बनाई तकनीक और कंटेंट बाजार तक पहुंच सके।

WaveX के तहत स्टार्टअप को तीन चरणों में मदद दी जाती है-

  • प्री-इन्क्यूबेशन: इस चरण में स्टार्टअप के आइडिया की जांच, मेंटरशिप, ट्रेनिंग बूटकैंप और शुरुआती सहायता पर काम किया जाता है।
  • इन्क्यूबेशन: इसमें काम करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, फंडिंग से जुड़ी सहायता और इंडस्ट्री के साथ संपर्क उपलब्ध कराया जाता है।
  • एक्सीलरेशन: इस स्तर पर स्टार्टअप को बाजार तक पहुंच बनाने, निवेशकों से संपर्क करने, अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने और कारोबार का विस्तार करने में मदद दी जाती है।

इस कार्यक्रम में T-Hub और IIT दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) जैसे संस्थान मास्टर इन्क्यूबेटर के रूप में जुड़े हैं। वहीं IICT, FTII और SRFTI जैसे संस्थान इसके सहयोगी केंद्रों में शामिल हैं।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में WaveX को 120 से अधिक स्टार्टअप आवेदन मिले और 30 से अधिक स्टार्टअप को इन्क्यूबेशन कार्यक्रम में शामिल किया गया। WAVES 2025 के दौरान 200 से अधिक स्टार्टअप के साथ संपर्क किया गया, जबकि करीब 100 स्टार्टअप ने राष्ट्रीय मंच पर अपने इनोवेशन दिखाए।

स्टार्टअप को वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो, गेमिंग लैब, XR/VR से जुड़ी सुविधाएं, एनीमेशन और VFX सुइट्स तथा प्रोटोटाइप तैयार करने की सुविधाओं तक पहुंच दी गई है। इसके अलावा उन्हें इंडस्ट्री विशेषज्ञों और निवेशकों के नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

WaveX की एक खास बात यह भी है कि इसे IICT और WAVES से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। क्रिएट इन इंडिया चैलेंज से नए आइडिया और प्रतिभाएं सामने आती हैं, IICT उन्हें जरूरी तकनीकी ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में मदद करता है, जबकि WaveX उन्हें कारोबार के रूप में आगे बढ़ाने और WAVES Bazaar के जरिए बाजार तक पहुंच बनाने का रास्ता देता है।

WAVES 2025: भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की कोशिश

IICT और WaveX के साथ सरकार ने WAVES को भी इस पूरे इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बनाया है। WAVES यानी वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट का पहला आयोजन 1 से 4 मई 2025 तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई को इसका उद्घाटन किया था।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोजन में 100 से अधिक देशों की भागीदारी रही। इसमें 650 से अधिक मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों तथा करीब एक लाख प्रतिनिधियों की भागीदारी दर्ज की गई।

WAVES 2025 में तीन प्रमुख पहल WAVES Bazaar, WaveX और Creatosphere को प्रमुखता से आगे बढ़ाया गया।

WAVES Bazaar को मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग के लिए कारोबारी मंच के रूप में तैयार किया गया। इसके जरिए 3,000 से अधिक B2B मीटिंग हुईं और 1,300 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी सौदों में मदद मिली। इस मंच का मकसद भारतीय और विदेशी कंपनियों को एक-दूसरे से जोड़ना और नए कारोबारी अवसर तैयार करना है।

WaveX के जरिए स्टार्टअप को अपने आइडिया पेश करने और निवेश से जुड़े अवसर मिले। मंत्रालय की रिपोर्ट में 120 से अधिक स्टार्टअप के बीच 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश संबंधी विचार-विमर्श का उल्लेख है। यहां यह समझना जरूरी है कि निवेश संबंधी चर्चा को वास्तविक निवेश या प्राप्त फंडिंग नहीं माना जाना चाहिए।

वहीं Creatosphere को क्रिएट इन इंडिया चैलेंज के पहले सीजन के ग्रैंड फिनाले, मास्टरक्लास और मेंटरशिप सेशन के लिए मंच बनाया गया। इसके जरिए क्रिएटर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने और इंडस्ट्री के लोगों से सीधे जुड़ने का अवसर मिला।

WAVES 2025 के दौरान 8,000 करोड़ रुपये के रणनीतिक MoU भी हुए। इसके अलावा सह-निर्माण (Co-production) से जुड़े समझौते किए गए। इन प्रयासों का मकसद भारतीय और विदेशी कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाना और भारतीय कंटेंट एवं तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। हालांकि, MoU की राशि को पूरे हो चुके कारोबार या वास्तविक निवेश के रूप में नहीं देखना चाहिए।

Create in India Challenge: देशभर की प्रतिभाओं को मिला मंच

AVGC-XR सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें सही अवसर देना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से मंत्रालय ने WAVES के तहत 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज' (CIC) शुरू किया।

इस पहल का मकसद देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद क्रिएटर्स, छात्रों, नए कलाकारों और तकनीक से जुड़े लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देना है। इसके तहत इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग चुनौतियां रखी जाती हैं, जिनमें हिस्सा लेकर प्रतिभागी अपने आइडिया और काम को सामने ला सकते हैं।

पहला सीजन WAVES 2025 से पहले शुरू किया गया था। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें भारत और 60 से अधिक देशों से एक लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन मिले। रिपोर्ट के विस्तृत विवरण में 63 देशों से एक लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन का उल्लेख है। इसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

इस पहल के तहत आठ सेक्टरों में 33 चैलेंज आयोजित किए गए और 25 से अधिक इंडस्ट्री पार्टनर इससे जुड़े। 750 से अधिक फाइनलिस्ट को WAVES 2025 में अपना काम दिखाने के लिए चुना गया। इस पहल को डिजिटल माध्यमों पर 2.13 करोड़ से अधिक इम्प्रेशन भी मिले।

इन चैलेंज में एनीमेशन, गेमिंग, म्यूजिक, कॉमिक्स, AI और AR/VR जैसे क्षेत्र शामिल थे। मंत्रालय की रिपोर्ट के शुरुआती हिस्से में 32 चैलेंज का उल्लेख है, जबकि पेज 55 पर दिए गए विस्तृत विवरण में 33 चैलेंज बताया गया है। इसलिए विस्तृत विवरण के आधार पर यहां 33 चैलेंज का आंकड़ा इस्तेमाल किया गया है।

इसका समापन Creatosphere में हुआ, जहां गेमिंग, एनीमेशन, VFX, XR, म्यूजिक और डिजिटल कंटेंट से जुड़े काम दिखाए गए। यहां मास्टरक्लास, पैनल चर्चा, प्रदर्शनियों और नेटवर्किंग सेशन का आयोजन किया गया। इस मंच के जरिए क्रिएटर्स को इंडस्ट्री के विशेषज्ञों से सीखने और अपने काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

इस पहल की खास बात यह है कि इसका उद्देश्य सिर्फ प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं है। इसके जरिए प्रतिभाओं की पहचान करने के बाद उन्हें ट्रेनिंग, कारोबार और बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर

AVGC-XR सेक्टर में रोजगार के अवसर केवल एनीमेशन बनाने या गेम डिजाइन करने तक सीमित नहीं हैं। इसमें 3D मॉडलिंग, कैरेक्टर डिजाइन, VFX, गेम डेवलपमेंट, वर्चुअल प्रोडक्शन, XR कंटेंट, पोस्ट प्रोडक्शन और AI आधारित क्रिएटिव काम जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।

उदाहरण के तौर पर किसी फिल्म में दिखाए जाने वाले काल्पनिक शहर, डिजिटल किरदार या एक्शन सीन तैयार करने के लिए अलग-अलग तरह के तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। इसी तरह गेमिंग इंडस्ट्री में गेम डिजाइनर, प्रोग्रामर, एनिमेटर और साउंड डिजाइनर की भूमिका होती है। XR तकनीक के जरिए शिक्षा, मनोरंजन और दूसरे क्षेत्रों के लिए नए अनुभव तैयार किए जा सकते हैं।

इस दिशा में मंत्रालय ने पूर्वोत्तर भारत के युवाओं के लिए भी एक खास पहल की है। 2 अगस्त 2025 को NFDC ने ट्रेनिंग पार्टनर Aptech के सहयोग से 3D एनीमेशन और VFX में आठ महीने का मुफ्त आवासीय ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया था। इसके लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं का चयन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें इंडस्ट्री में मांग वाले तकनीकी कौशल सिखाना और रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना है।

इस तरह सरकार की कोशिश केवल बड़े शहरों तक ट्रेनिंग और तकनीकी सुविधाओं को सीमित रखने की नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद युवाओं को भी इस उद्योग से जोड़ने की है।

भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबार की संभावनाएं

भारत की AVGC-XR इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा अवसर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने का है। अभी तक भारतीय कंपनियां दुनिया की कई बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों के लिए एनीमेशन, VFX और पोस्ट प्रोडक्शन से जुड़े काम करती रही हैं। लेकिन अब जरूरत ऐसी भारतीय कंपनियां और स्टार्टअप तैयार करने की भी है, जो अपने गेम, एनीमेशन कैरेक्टर, डिजिटल कहानियां और तकनीक विकसित कर सकें।

IICT के जरिए युवाओं को तकनीकी ट्रेनिंग और इंडस्ट्री से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। WaveX स्टार्टअप को अपना कारोबार शुरू करने और आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। वहीं WAVES Bazaar भारतीय कंपनियों को विदेशी खरीदारों और कारोबारी भागीदारों से जोड़ने का मंच उपलब्ध करा रहा है।

इन पहलों का एक और महत्वपूर्ण पहलू अपनी बौद्धिक संपदा (IP) तैयार करना है। उदाहरण के लिए, यदि कोई भारतीय कंपनी अपना एनिमेटेड कैरेक्टर, गेम या डिजिटल कहानी विकसित करती है और उसे अलग-अलग देशों में इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे कंपनी के लिए लंबे समय तक कमाई के अवसर बन सकते हैं। इसलिए सरकार का जोर केवल सेवाएं देने के बजाय भारतीय कंपनियों की अपनी क्रिएटिव पहचान और कारोबार विकसित करने पर भी है।

हालांकि, इसके लिए कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता, नई तकनीक, मजबूत टीम और बाजार की जरूरतों के मुताबिक कंटेंट तैयार करना होगा। केवल ट्रेनिंग और स्टार्टअप की संख्या बढ़ने से वैश्विक बाजार में जगह बनना तय नहीं है।

भारत को वैश्विक AVGC-XR हब बनाने की तैयारी कितनी आगे बढ़ी?

मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 को देखें तो भारत में AVGC-XR सेक्टर के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। IICT की शुरुआत, 17 कोर्स का लॉन्च, 43 MoU, 167 छात्रों का दाखिला, इन्क्यूबेटर में 7 स्टार्टअप की शुरुआत, WaveX के तहत 30 से अधिक स्टार्टअप को शामिल करना और Create in India Challenge में एक लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन इस दिशा में हुई प्रगति को दिखाते हैं।

इसके अलावा WAVES 2025 में 1,300 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी सौदे और 8,000 करोड़ रुपये के रणनीतिक MoU इस बात को दिखाते हैं कि सरकार भारतीय मीडिया एवं एंटरटेनमेंट उद्योग को अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जोड़ने के लिए भी प्रयास कर रही है।

हालांकि, इन आंकड़ों को इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि भारत पहले ही दुनिया का बड़ा AVGC-XR केंद्र बन चुका है। अभी यह देखना बाकी है कि IICT से प्रशिक्षित युवाओं को कितने रोजगार मिलते हैं, इन्क्यूबेट किए गए स्टार्टअप में से कितने सफल कारोबार बन पाते हैं और भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से कितना नियमित कारोबार हासिल कर पाती हैं।

इसी तरह WAVES में हुए कारोबारी समझौते और निवेश संबंधी चर्चाएं अपने आप में वास्तविक निवेश या पूरे हो चुके कारोबार के बराबर नहीं हैं। इन पहलों का वास्तविक असर आने वाले वर्षों में इनके नतीजों से ही पता चलेगा।

फिलहाल सरकार की कोशिश एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की है, जिसमें किसी युवा के पास एनीमेशन या गेमिंग का आइडिया हो तो उसे ट्रेनिंग, तकनीकी सुविधाएं, मेंटरशिप, निवेश और बाजार तक पहुंचने के अवसर मिल सकें।

यदि IICT, WaveX, WAVES और Create in India Challenge के बीच यह तालमेल लगातार मजबूत होता है तो भारतीय कंपनियों के लिए सिर्फ विदेशी प्रोजेक्ट पर काम करने के बजाय अपने गेम, एनीमेशन कैरेक्टर, डिजिटल कहानियां और तकनीक विकसित करने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। यही भारत को AVGC-XR के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की इस पूरी पहल का बड़ा उद्देश्य है। 

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Digicontent को दूसरी तिमाही में 4.27 करोड़ रुपये का मुनाफा, पिछले साल से 55% की गिरावट

मीडिया और डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी Digicontent Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
DigiContent8754

मीडिया और डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी Digicontent Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में 4.27 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालांकि, पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले कंपनी के मुनाफे में करीब 55 फीसदी की गिरावट आई है। सितंबर 2025 तिमाही में कंपनी का मुनाफा 9.52 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने 2 नवंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी।

रेवेन्यू में मामूली बढ़ोतरी

कंसोलिडेटेड नतीजों के मुताबिक, Digicontent का ऑपरेशंस से रेवेन्यू दूसरी तिमाही में 132.81 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 131.79 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपनी के रेवेन्यू में करीब 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी की कुल आय 133.26 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के 133.93 करोड़ रुपये से थोड़ी कम है।

वहीं, कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 126.70 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल सितंबर तिमाही में यह 120.32 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA भी घटकर 10.83 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 18.47 करोड़ रुपये था।

छह महीने में 2.34 करोड़ रुपये का मुनाफा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 256.11 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 242.24 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2.34 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की पहली छमाही में यह 7.19 करोड़ रुपये था।

स्टैंडअलोन नतीजों में घाटा

कंपनी के स्टैंडअलोन नतीजों की बात करें तो सितंबर 2026 तिमाही में उसे 2.33 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। पिछले साल की समान तिमाही में यह घाटा 1.77 करोड़ रुपये था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 29 लाख रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 30 लाख रुपये था।

Digicontent के साथ उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी HT Digital Streams Limited के नतीजे भी कंसोलिडेटेड वित्तीय आंकड़ों में शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि उसका कारोबार एंटरटेनमेंट और डिजिटल इनोवेशन बिजनेस से जुड़ा है।

इसके अलावा, कंपनी ने अपने इन-स्टोर म्यूजिक बिजनेस FabPlay से जुड़े डोमेन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को 1 करोड़ रुपये में ट्रांसफर करने का समझौता किया है। इस सौदे को बोर्ड की मंजूरी 1 अक्टूबर, 2026 को मिली थी, इसलिए इसे सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों में शामिल नहीं किया गया है।

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ZEE5 ने Saptharushi के साथ मिलकर लॉन्च किया विज्ञापनदाताओं के लिए नया प्लेटफॉर्म ZAP

डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में अपनी पेशकश को मजबूत करने के लिए ZEE5 ने नया कदम उठाया है। कंपनी ने ऑडियंस इंटेलिजेंस और डेटा को सुरक्षित तरीके से साझा करने वाली कंपनी Saptharushi के साथ साझेदारी की है।

Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
Z5

डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में अपनी पेशकश को मजबूत करने के लिए ZEE5 ने नया कदम उठाया है। कंपनी ने ऑडियंस इंटेलिजेंस और डेटा को सुरक्षित तरीके से साझा करने वाली कंपनी Saptharushi के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत ZEE5 ने अपना नया ऑडियंस प्लेटफॉर्म 'ZEE5 Audience Platform' (ZAP) लॉन्च किया है।

इस प्लेटफॉर्म का मकसद विज्ञापनदाताओं को पारंपरिक उम्र, लिंग और दूसरी सामान्य जानकारियों के आधार पर विज्ञापन दिखाने के तरीके से आगे ले जाना है। इसके जरिए ब्रांड ज्यादा सटीक दर्शक समूहों की पहचान कर सकेंगे और अपने विज्ञापन उन लोगों तक पहुंचा सकेंगे, जिनकी उनके प्रोडक्ट या सर्विस में रुचि होने की संभावना है।

ZEE5 की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, ZAP प्लेटफॉर्म पर ZEE5 के दर्शकों और उनके देखने के व्यवहार से जुड़ी जानकारी को साझेदार कंपनियों के सहमति-आधारित व्यवहार और लेनदेन से जुड़े संकेतों के साथ जोड़ा जाएगा। इसमें क्विक कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट और दूसरे क्षेत्रों के साझेदारों से मिलने वाले संकेत शामिल होंगे।

कैसे काम करेगा ZAP प्लेटफॉर्म?

ZAP के जरिए ब्रांड केवल उम्र या पहले से तय किए गए दर्शक समूहों के आधार पर विज्ञापन देने तक सीमित नहीं रहेंगे। वे अपने प्रोडक्ट, कैटेगरी और विज्ञापन अभियान के उद्देश्य के हिसाब से खास ऑडियंस ग्रुप तैयार कर सकेंगे।

उदाहरण के तौर पर, ZEE5 पर दर्शक किस तरह का कंटेंट देखते हैं और किस तरह जुड़ते हैं, इसे साझेदार कंपनियों से मिलने वाले सहमति-आधारित व्यवहार और खरीदारी से जुड़े संकेतों के साथ समझा जा सकेगा। इससे ब्रांड को दर्शकों की पसंद, किसी कैटेगरी में उनकी रुचि और खरीदारी के व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

इसका उद्देश्य विज्ञापनदाताओं को अपने मीडिया निवेश का बेहतर इस्तेमाल करने और ज्यादा प्रासंगिक दर्शकों तक पहुंचने का मौका देना है।

यूजर्स का डेटा नहीं होगा ट्रांसफर

इस प्लेटफॉर्म की एक अहम बात डेटा की प्राइवेसी है। कंपनी के मुताबिक, साझेदारों के बीच यूजर्स का मूल डेटा एक-दूसरे के पास ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। डेटा संबंधित साझेदार के अपने सिस्टम में ही रहेगा और जानकारी हासिल करने के लिए सहमति-आधारित क्वेरी का इस्तेमाल होगा।

कंपनी ने इस प्रक्रिया को समझाते हुए कहा है, 'डेटा अपनी जगह रहता है, क्वेरी आगे बढ़ती है।' यानी जानकारी हासिल करने के लिए सवाल या अनुरोध भेजा जाता है, न कि यूजर्स का पूरा डेटा दूसरी कंपनी को दिया जाता है।

यह व्यवस्था भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) फ्रेमवर्क के सिद्धांतों के अनुरूप बताई गई है। इसमें यूजर की सहमति, डेटा की प्राइवेसी और उसके जिम्मेदारी से इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।

विज्ञापन के साथ रिवॉर्ड और लॉयल्टी का भी मौका

ZEE5 और Saptharushi की साझेदारी के तहत सिर्फ ऑडियंस टारगेटिंग ही नहीं, बल्कि को-ब्रांडेड रिवॉर्ड और लॉयल्टी प्रोग्राम पर भी काम किया जाएगा।

इसके जरिए प्रीमियम कंटेंट और स्पोर्ट्स जैसे खास मौकों पर ब्रांड दर्शकों को रिवॉर्ड आधारित अनुभव दे सकेंगे। इसका मकसद केवल विज्ञापन दिखाने के बजाय दर्शकों के साथ ज्यादा समय तक जुड़ाव बनाना है।

ZEE5 इंडिया के बिजनेस हेड और AI एवं इनोवेशन प्रमुख तेजकरण सिंह बजाज ने कहा कि कंपनी बदलती दर्शक पसंद और ब्रांड की जरूरतों के हिसाब से अपने प्लेटफॉर्म को लगातार विकसित कर रही है। ZAP के जरिए कंपनी कंटेंट, दर्शकों की पहुंच और ऑडियंस इंटेलिजेंस को एक साथ लाना चाहती है, ताकि ब्रांड अपने कारोबारी उद्देश्यों के मुताबिक दर्शकों से जुड़ सकें।

उन्होंने बताया कि ZEE5 पर प्रीमियम SVOD कंटेंट, Free5, स्पोर्ट्स, KidZ, टीवी शो, कोरियन और चाइनीज ड्रामा, एनीमे, माइक्रो-ड्रामा, न्यूज, क्रिएटर आधारित कंटेंट और अलग-अलग भाषाओं की अंग्रेजी फिल्मों की पेशकश मौजूद है।

कैंपेन की क्लिक-थ्रू रेट में बढ़ोतरी का दावा

ZEEL में ब्रॉडकास्ट और डिजिटल विज्ञापन से होने वाली कमाई के प्रमुख प्रशांत शेट्टी ने कहा कि ZAP की खासियत यह है कि यह दर्शकों से जुड़ी जानकारी को विज्ञापन के काम आने वाले अवसरों में बदलता है और साथ ही डेटा की प्राइवेसी का भी ध्यान रखता है।

उन्होंने Saptharushi के पहले के इस्तेमाल से मिले नतीजों का जिक्र करते हुए बताया कि कुछ अभियानों में ब्रांड के मौजूदा कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट (CRM) ऑडियंस के मुकाबले क्लिक-थ्रू रेट (CTR) में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है। CTR का मतलब है कि विज्ञापन देखने वाले लोगों में से कितने लोगों ने उस पर क्लिक किया।

Saptharushi के संस्थापक और CEO गौतम रघोत्तमन ने कहा कि विज्ञापन के लिए सिर्फ ज्यादा लोगों तक पहुंचना काफी नहीं है, बल्कि ऐसे दर्शकों की पहचान करना भी जरूरी है, जिनके लिए किसी ब्रांड का प्रोडक्ट प्रासंगिक हो। उनके मुताबिक, यह काम यूजर्स का निजी डेटा साझा किए बिना और उनकी सहमति के साथ किया जा सकता है।

ZAP के जरिए ZEE5 का लक्ष्य अपने अलग-अलग भाषाओं, शैलियों और फॉर्मेट वाले कंटेंट की पहुंच का इस्तेमाल करते हुए विज्ञापनदाताओं को ज्यादा सटीक ऑडियंस टारगेटिंग और नए जुड़ाव के विकल्प उपलब्ध कराना है।

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HT Media व HMVL के दूसरी तिमाही के नतीजे 5 नवंबर को होंगे जारी, निवेशकों के साथ होगी चर्चा

मीडिया कंपनी HT मीडिया लिमिटेड और हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) 5 नवंबर, 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजे जारी करेंगी।

Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
HTMedia8745

मीडिया कंपनी HT मीडिया लिमिटेड और हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) 5 नवंबर, 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजे जारी करेंगी। कंपनी ने इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी दी है।

HT Media की ओर से 2 नवंबर को BSE और NSE को भेजी गई सूचना के मुताबिक, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक गुरुवार, 5 नवंबर को होगी। इस बैठक में 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा और उन्हें मंजूरी दी जाएगी।

इसके साथ ही HT Media Group ने अपने सीनियर मैनेजमेंट के साथ एनालिस्ट्स और निवेशकों के लिए एक रिजल्ट्स वेबिनार भी आयोजित करने की जानकारी दी है। यह वेबिनार 5 नवंबर को दोपहर 2:30 बजे (भारतीय समयानुसार) होगा।

इस वेबिनार में HT Media और Hindustan Media Ventures के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों पर चर्चा की जाएगी। इसमें निवेशक और एनालिस्ट्स कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट से बातचीत कर सकेंगे।

 

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Quint Digital में 9 प्रस्ताव मंजूर, संबंधित पक्षों से लेनदेन व कर्ज देने का रास्ता साफ

क्विंट डिजिटल (Quint Digital) के शेयरधारकों ने पोस्टल बैलेट के जरिए कंपनी की ओर से रखे गए सभी 9 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Monday, 02 November, 2026
QuintDigital5210

क्विंट डिजिटल (Quint Digital) के शेयरधारकों ने पोस्टल बैलेट के जरिए कंपनी की ओर से रखे गए सभी 9 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इनमें कंपनी की संपत्तियों पर चार्ज या गिरवी बनाने, दो कंपनियों को कर्ज देने और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। कंपनी ने 31 अक्टूबर को शेयर बाजार को वोटिंग के नतीजों और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट की जानकारी दी।

कंपनी के मुताबिक, ये प्रस्ताव 1 अक्टूबर 2026 को जारी पोस्टल बैलेट नोटिस के तहत शेयरधारकों के सामने रखे गए थे। इन पर 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन वोटिंग कराई गई। स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के आधार पर सभी 9 प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए हैं। इन्हें 31 अक्टूबर 2026 से मंजूर माना जाएगा, क्योंकि यह ऑनलाइन वोटिंग का आखिरी दिन था।

किन प्रस्तावों को मिली मंजूरी?

शेयरधारकों ने पहले प्रस्ताव के तहत कंपनी की संपत्तियों पर गिरवी, चार्ज या अन्य तरह का भार बनाने की मंजूरी दी है। यह प्रस्ताव कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 180 के प्रावधानों के तहत रखा गया था। इस विशेष प्रस्ताव के पक्ष में कुल पड़े वोटों में से 99.8789% वोट मिले।

दूसरे प्रस्ताव में RB Diversified Private Limited को कर्ज देने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव कंपनी अधिनियम की धारा 185 के तहत रखा गया था। इसे भी 99.8789% वोटों के साथ मंजूरी मिली।

तीसरे प्रस्ताव में RB Diversified Private Limited के साथ संबंधित पक्ष के लेनदेन को मंजूरी देने की बात थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में पड़े वोटों में से 98.8851% वोट मिले।

चौथे प्रस्ताव के तहत Shvaas Creations Private Limited को कर्ज देने की मंजूरी मांगी गई थी। इस विशेष प्रस्ताव को 99.8789% वोटों के साथ मंजूरी मिली।

इसके अलावा, शेयरधारकों ने Make A Difference Hospitality Private Limited के साथ संबंधित पक्ष के लेनदेन को भी मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के पक्ष में 98.8851% वोट पड़े।

Quintype से जुड़े लेनदेन को भी मंजूरी

पोस्टल बैलेट में Quintype से जुड़ी कंपनियों के बीच होने वाले कुछ संबंधित पक्ष के लेनदेन के प्रस्ताव भी रखे गए थे। इनमें Quintype Technologies India Limited और Quintype Technologies Inc. के बीच लेनदेन, Quintype Technologies Inc. और Quintype Services India Private Limited के बीच लेनदेन और Quintype Technologies India Limited तथा Quintype Services India Private Limited के बीच लेनदेन शामिल हैं।

इन तीनों प्रस्तावों को 98.8851% वोटों के समर्थन के साथ मंजूरी मिली। नौवें प्रस्ताव में RBD Real Estate Inc. के साथ संबंधित पक्ष के लेनदेन को मंजूरी देने की बात थी। इसे भी 98.8851% वोट मिले।

कितने शेयरधारकों ने किया मतदान?

कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 25 सितंबर 2026 की कट-ऑफ तारीख पर कुल 6,970 शेयरधारक थे। पहले प्रस्ताव पर कुल 3,42,44,876 वोट पड़े, जिनमें से 3,42,03,421 वोट पक्ष में और 41,455 वोट विरोध में थे।

RB Diversified Private Limited को कर्ज देने वाले दूसरे प्रस्ताव पर भी 3,42,44,876 वोट पड़े। इनमें 3,42,03,421 वोट पक्ष में और 41,455 वोट विरोध में रहे। वहीं, Shvaas Creations Private Limited को कर्ज देने वाले चौथे प्रस्ताव के पक्ष में 3,42,03,413 वोट पड़े और 41,463 वोट विरोध में रहे।संबंधित पक्ष के लेनदेन से जुड़े प्रस्तावों पर कुल 37,18,417 वोट पड़े। इनमें 36,76,962 वोट पक्ष में और 41,455 वोट विरोध में रहे।

कंपनी ने बताया कि वोटिंग के नतीजों के साथ स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट उसकी वेबसाइट के इन्वेस्टर रिलेशंस सेक्शन में भी उपलब्ध है।

 

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डिजिटल विज्ञापन के बढ़ते बाजार के बीच क्या न्यूज वेबसाइट्स को हो रहा फायदा?

भारत में डिजिटल विज्ञापन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां सर्च इंजन, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और दूसरी डिजिटल सेवाओं पर विज्ञापन खर्च कर रही हैं।

Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
NewsPublishers65231

भारत में डिजिटल विज्ञापन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां सर्च इंजन, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और दूसरी डिजिटल सेवाओं पर विज्ञापन खर्च कर रही हैं। लेकिन इस बढ़ते बाजार में एक अहम सवाल है- क्या इसका फायदा न्यूज वेबसाइट्स को भी उसी अनुपात में मिल रहा है?

हालिया इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिजिटल विज्ञापन का बाजार बढ़ रहा है, लेकिन डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के विज्ञापन कारोबार की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी है। हालांकि, न्यूज वेबसाइट्स की कुल कमाई का कोई ऐसा ताजा, एकीकृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं मिला, जिसके आधार पर पूरे इंडस्ट्री की वास्तविक आय का दावा किया जा सके।

2025 में डिजिटल विज्ञापन खर्च ₹93,156 करोड़ रहा

पिच मैडिसन की 2026 की विज्ञापन बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का डिजिटल विज्ञापन खर्च विस्तारित गणना के आधार पर ₹93,156 करोड़ रहा। इस गणना में मुख्य डिजिटल विज्ञापन के अलावा क्विक कॉमर्स और छोटे-मध्यम कारोबारों का डिजिटल विज्ञापन खर्च भी शामिल है। इस आधार पर डिजिटल की हिस्सेदारी कुल विज्ञापन बाजार में करीब 60% रही।  

इसी रिपोर्ट में मुख्य डिजिटल विज्ञापन बाजार का 2025 का आंकड़ा ₹53,342 करोड़ दिया गया है। इस गणना में डिजिटल विज्ञापन की हिस्सेदारी करीब 46% थी। दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि इनकी गणना का दायरा अलग-अलग है। इसलिए ₹93,156 करोड़ को भारत में डिजिटल विज्ञापन बाजार का विस्तारित आकार कहना सही होगा, लेकिन इसे केवल वेबसाइट्स या न्यूज वेबसाइट्स की विज्ञापन कमाई नहीं माना जा सकता।

2026 के आंकड़े को वास्तविक कमाई न समझें

पिच मैडिसन की इसी रिपोर्ट में 2026 के लिए भी डिजिटल विज्ञापन खर्च बढ़ने का अनुमान दिया गया है। विस्तारित गणना के आधार पर डिजिटल विज्ञापन बाजार के 2026 में करीब ₹1.12 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह पूर्वानुमान है, 2026 में अब तक हुई वास्तविक कमाई का अंतिम आंकड़ा नहीं।  

यह फर्क इसलिए जरूरी है क्योंकि बाजार का अनुमान और कंपनियों की वास्तविक विज्ञापन आय दो अलग चीजें हैं। इसी तरह पूरे डिजिटल विज्ञापन बाजार के आंकड़ों से यह पता नहीं चलता कि न्यूज वेबसाइट्स को कितना पैसा मिला।

जनवरी-जुलाई 2026 में डिजिटल विज्ञापन इम्प्रेशन 44% बढ़े

TAM AdEx की डिजिटल विज्ञापन रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान डिजिटल विज्ञापनों के इम्प्रेशन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 44% बढ़े। रिपोर्ट में डिजिटल विज्ञापन इम्प्रेशन का सूचकांक 2025 की समान अवधि के 100 से बढ़कर 144 बताया गया।  

इम्प्रेशन का मतलब है कि विज्ञापन कितनी बार दिखाया गया। यह विज्ञापन गतिविधि और पहुंच का संकेत है, लेकिन इससे सीधे यह पता नहीं चलता कि विज्ञापन से कितनी कमाई हुई। विज्ञापन की कीमत, वेबसाइट पर आने वाले पाठकों की संख्या, विज्ञापन की जगह और विज्ञापनदाता की मांग भी कमाई को प्रभावित करती है।

इसी रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-जुलाई 2026 में सर्विसेज क्षेत्र की हिस्सेदारी डिजिटल विज्ञापन इम्प्रेशन में 47% रही। डिस्प्ले विज्ञापनों की हिस्सेदारी 91% और वीडियो विज्ञापनों की 9% थी। प्रोग्रामेटिक खरीदारी का हिस्सा 96% बताया गया।  

ये आंकड़े पूरे डिजिटल विज्ञापन माध्यम से जुड़े हैं। इन्हें न्यूज वेबसाइट्स की कमाई या न्यूज विज्ञापनों की वृद्धि के आंकड़ों के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

न्यूज पब्लिशर्स की विज्ञापन वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी

21 सितंबर 2026 को एक्सचेंज4मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्मों पर डिस्प्ले विज्ञापन और ब्रैंडेड समाधानों को मिलाकर इंडस्ट्री की वृद्धि करीब 7–8% आंकी गई। इसी रिपोर्ट में भारत के पूरे डिजिटल विज्ञापन बाजार की वृद्धि करीब 20% बताई गई।  

ये दरें इंडस्ट्री के अनुमानों पर आधारित हैं, न्यूज पब्लिशर्स की कुल आय के ऑडिटेड आंकड़े नहीं हैं। इसलिए इनसे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर न्यूज वेबसाइट की कमाई 7–8% बढ़ी है। लेकिन ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि न्यूज पब्लिशर्स को डिजिटल विज्ञापन बाजार की कुल वृद्धि का पूरा फायदा नहीं मिल रहा है।

न्यूज वेबसाइट्स को पूरा फायदा क्यों नहीं मिल रहा?

डिजिटल विज्ञापन का बाजार अब केवल न्यूज वेबसाइट्स तक सीमित नहीं है। विज्ञापनदाता सोशल मीडिया, सर्च, वीडियो, ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स जैसे माध्यमों पर भी पैसा खर्च कर सकते हैं। ऐसे में न्यूज वेबसाइट्स को विज्ञापन बजट के लिए पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

एक्सचेंज4मीडिया की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बताया कि विज्ञापनदाता अब ऐसे माध्यमों पर भी खर्च कर रहे हैं जहां विज्ञापन को क्लिक, खरीदारी या दूसरे व्यावसायिक नतीजों से जोड़कर देखा जा सकता है। न्यूज वेबसाइट्स के लिए केवल विज्ञापन दिखाने या पेज व्यू बढ़ाने से उतनी ही कमाई हासिल करना हमेशा संभव नहीं होता। 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई डिजिटल पब्लिशर्स के लिए सरकारी विज्ञापन आय का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और सरकारी विज्ञापन दरों में वृद्धि सीमित रहने से कमाई पर दबाव पड़ता है। हालांकि, सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता हर पब्लिशर के लिए एक जैसी नहीं है।  

इस चुनौती से निपटने के लिए न्यूज संस्थान सीधे ब्रैंड्स के साथ विज्ञापन समझौते, प्रायोजित सामग्री, विशेष कार्यक्रम और पाठकों के साथ मजबूत संबंध बनाने जैसे विकल्पों पर काम कर सकते हैं। सदस्यता और अन्य आय के स्रोत भी मददगार हो सकते हैं, लेकिन इनसे मिलने वाली कमाई संस्थान के कारोबार और पाठकों पर निर्भर करेगी।

सितंबर 2026 तक डिजिटल विज्ञापन गतिविधि में तेजी

TAM AdEx के आंकड़ों पर आधारित एक्सचेंज4मीडिया की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जुलाई से 28 सितंबर 2026 के बीच डिजिटल विज्ञापन गतिविधि का सूचकांक 124.5 रहा, जबकि तुलना का आधार 100 था। इसी अवधि में टीवी का सूचकांक 91.4 और प्रिंट का 94.7 रहा। 

इसका अर्थ है कि इस माप में डिजिटल विज्ञापन गतिविधि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 24.5% अधिक थी। लेकिन यह विज्ञापन गतिविधि का सूचकांक है, न कि डिजिटल विज्ञापन कंपनियों की वास्तविक आय में 24.5% की वृद्धि का प्रमाण। इससे न्यूज वेबसाइट्स की कमाई में हुई बढ़ोतरी का भी पता नहीं चलता।

असली सवाल: न्यूज वेबसाइट्स की कमाई कितनी बढ़ी?

उपलब्ध हालिया रिपोर्ट्स से तीन बातें सामने आती हैं। पहली, भारत में डिजिटल विज्ञापन बाजार का आकार बड़ा हो चुका है। दूसरी, 2026 के दौरान डिजिटल विज्ञापन इम्प्रेशन और विज्ञापन गतिविधि में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तीसरी, इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक डिजिटल न्यूज में डिस्प्ले विज्ञापन और ब्रैंडेड समाधानों की वृद्धि पूरे डिजिटल विज्ञापन बाजार की तुलना में धीमी है।

लेकिन इन आंकड़ों से यह बताना संभव नहीं है कि 2026 में भारत की सभी न्यूज वेबसाइट्स ने मिलकर कुल कितनी विज्ञापन आय अर्जित की या उनकी कुल कमाई कितने प्रतिशत बढ़ी। इसके लिए न्यूज पब्लिशर्स की आय के ताजा, तुलनीय और अलग-अलग आंकड़ों की जरूरत होगी।

डिजिटल विज्ञापन बाजार की वृद्धि के आंकड़े न्यूज वेबसाइट्स की कमाई का विकल्प नहीं हैं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट्स बताती हैं कि डिजिटल विज्ञापन गतिविधि बढ़ रही है, जबकि न्यूज पब्लिशर्स के विज्ञापन कारोबार की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी आंकी गई है।  

 

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Quint Digital में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 52.84% हुई, 29.32 लाख CCPS खरीदे

मीडिया कंपनी Quint Digital Limited में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

Last Modified:
Thursday, 29 October, 2026
QuintDigital541

क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी पूरी तरह शेयरों में बदलने की संभावना के आधार पर बढ़कर 52.84% हो गई है। प्रमोटर ग्रुप की कंपनी RB Diversified Private Limited ने 29,32,138 कंपल्सरीली कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर (CCPS) खरीदे हैं। कंपनी की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह खरीद 23 अक्टूबर 2026 तक खुले बाजार से की गई।

Quint Digital ने 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के तहत शेयर बाजार में यह खुलासा दाखिल किया। इसमें प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी और खरीदे गए CCPS की जानकारी दी गई है।

48.27% से बढ़कर 52.84% हुई हिस्सेदारी

कंपनी के खुलासे के मुताबिक, इस खरीद से पहले प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी पूरी तरह शेयरों में बदलने की संभावना के आधार पर 48.27% थी। 29,32,138 CCPS खरीदने के बाद यह बढ़कर 52.84% हो गई है।

CCPS ऐसे शेयर होते हैं जिन्हें तय शर्तों के मुताबिक भविष्य में इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है। इसलिए इस मामले में 52.84% का आंकड़ा संभावित रूप से पूरी तरह शेयरों में बदलने के आधार पर है। इसे कंपनी की मौजूदा वोटिंग हिस्सेदारी नहीं समझना चाहिए।

वोटिंग अधिकार 65.56% पर बरकरार

CCPS की खरीद के बावजूद प्रमोटर ग्रुप के मौजूदा वोटिंग अधिकारों में बदलाव नहीं हुआ है। कंपनी के खुलासे के अनुसार, प्रमोटर ग्रुप के पास 65.56% वोटिंग अधिकार बने हुए हैं। इसकी वजह यह है कि खरीदे गए CCPS गैर-वोटिंग और गैर-भागीदारी वाले हैं।

इसलिए कंपनी में प्रमोटर ग्रुप की संभावित हिस्सेदारी बढ़ने और उसके मौजूदा वोटिंग अधिकारों में बढ़ोतरी होने को अलग-अलग समझना जरूरी है।

खरीद खुले बाजार से हुई

कंपनी की ओर से दाखिल खुलासे में इस खरीद का तरीका खुले बाजार (Open Market) बताया गया है। CCPS को मूल रूप से राइट्स इश्यू के तहत जारी किया गया था, लेकिन RB Diversified Private Limited की मौजूदा खरीद खुले बाजार से हुई। यानी शेयरों को जारी किए जाने का तरीका और इस खरीद का तरीका अलग-अलग हैं।

कंपनी के खुलासे में यह भी कहा गया है कि इन CCPS पर वोटिंग अधिकार नहीं होने के कारण इस खरीद से SEBI के संबंधित नियमों के तहत अनिवार्य ओपन ऑफर लाने की बाध्यता नहीं बनती।

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‘रूरल बैरोमीटर रिपोर्ट 2026’ : ग्रामीण भारत में जेन जी बने नए ग्रोथ ड्राइवर

रूरल बैरोमीटर रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, ग्रामीण जेन जी उपभोक्ता तेजी से अहम ग्रोथ ड्राइवर बन रहे हैं। उनका प्रोडक्ट बास्केट, ऑनलाइन एक्टिविटी और एआई टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा है।

Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
ruralgenz

डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) और कंतार (Kantar) की ‘रूरल बैरोमीटर रिपोर्ट 2026’ में ग्रामीण भारत के जेन जी (Gen Z) उपभोक्ताओं को ब्रांड्स के लिए तेजी से अहम ग्रोथ ड्राइवर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस उम्र वर्ग के उपभोक्ता ज्यादा प्रोडक्ट कैटेगरी में खरीदारी कर रहे हैं और ऑनलाइन भी अधिक सक्रिय हैं। वे दूसरे आयु समूहों की तुलना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल भी ज्यादा कर रहे हैं।

रिपोर्ट में 12 राज्य समूहों के ग्रामीण मोबाइल फोन यूजर्स के बीच कंज्यूमर सेंटिमेंट, खर्च की प्राथमिकताओं और कम्युनिकेशन बिहेवियर का अध्ययन किया गया। जून 2026 में हुए क्वांटिटेटिव स्टडी के नतीजों की तुलना फरवरी 2025 के आंकड़ों से की गई है। इसमें ग्रामीण भारत में बदलती खपत की आदतों, डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते असर और ग्रामीण ई-कॉमर्स में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी देखा गया है।

18 से 29 वर्ष की उम्र वाले जेन जी ग्रामीण मोबाइल यूजर्स का 33 फीसदी हैं। ये हर महीने औसतन 19.1 प्रोडक्ट कैटेगरी से खरीदारी करते हैं। फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 17 कैटेगरी था। रिपोर्ट में शामिल सभी आयु समूहों में जेन जी का प्रोडक्ट बास्केट सबसे बड़ा है।

30 से 45 वर्ष के मिलेनियल्स हर महीने औसतन 18 कैटेगरी से खरीदारी करते हैं, जो 2025 में 17.5 थी। वहीं, 45 वर्ष से अधिक उम्र के उपभोक्ताओं के लिए यह संख्या 17.2 से घटकर 16.7 रह गई। जेन जी के बीच गैर-जरूरी और वेलनेस से जुड़ी खरीदारी में खास बढ़ोतरी हुई है। सुविधा वाले खाद्य उत्पादों की कैटेगरी में 27 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 5.9 कैटेगरी तक पहुंच गई। ग्रामीण भारत में इस श्रेणी की कुल वृद्धि 18 फीसदी रही।

हेल्थ और वेलनेस से जुड़े प्रोडक्ट्स का जेन जी बास्केट 36 फीसदी बढ़ा, जबकि पूरे ग्रामीण भारत में यह वृद्धि 21 फीसदी रही। पर्सनल ग्रूमिंग कैटेगरी में भी जेन जी के बीच 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि ग्रामीण बाजार में यह लगभग स्थिर रही।

डिजिटल एक्टिविटी भी इस ट्रेंड को मजबूत कर रही है। जेन जी उपभोक्ता रोजाना औसतन 115 मिनट ऑनलाइन बिताते हैं, जबकि ग्रामीण भारत का औसत 93 मिनट है। इस समूह में ऑनलाइन खरीदारी की हिस्सेदारी 39.4 फीसदी है, जबकि पूरे ग्रामीण भारत में यह 29.6 फीसदी है।

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DPDP कानून के खिलाफ मीडिया संगठनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून (DPDP Act), 2023 को चुनौती देने वाली मीडिया संगठनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून (DPDP Act), 2023 को चुनौती देने वाली मीडिया संगठनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि इस कानून को समाचार संगठनों पर लागू करने से खोजी पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है, पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की पहचान उजागर होने का खतरा बढ़ सकता है और न्यूजरूम के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

यह याचिका डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने दायर की है, जो कई प्रमुख समाचार संगठनों का प्रतिनिधित्व करती है।

पत्रकारों को जांच के लिए लेनी पड़ सकती है सहमति: याचिकाकर्ता

सुनवाई के दौरान DNPA की ओर से पेश वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने दलील दी कि कानून के कुछ प्रावधानों के कारण पत्रकारों को उन लोगों से ही सहमति लेनी पड़ सकती है, जिनके कामकाज या गतिविधियों की वे जांच कर रहे हैं। इससे पत्रकारों के लिए स्वतंत्र रूप से जानकारी जुटाना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यह कानून पत्रकारिता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया था, लेकिन समाचार संगठनों पर इसे लागू करने से खबरों के प्रकाशन से पहले ही रोक जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने अदालत से मामले में अंतरिम राहत देने की भी मांग की।

प्रेस की आजादी और नागरिकों की निजता के बीच संतुलन जरूरी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा और प्रेस की आजादी के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। पीठ ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञ होने के नाते याचिकाकर्ता कानून के संभावित दुरुपयोग की पहचान करने और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार तथा अदालत की मदद कर सकते हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि दूसरे पक्ष को सुने बिना इस स्तर पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

मई 2027 से लागू होने हैं कानून के कई अहम प्रावधान

याचिका में निजी डेटा जुटाने, उसके इस्तेमाल, उसे अपने पास रखने और हटाने से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए गए हैं। DNPA का कहना है कि समाचार संगठनों पर इन प्रावधानों को लागू करने से खबरें जुटाने की प्रक्रिया और पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। खबर के मुताबिक, कानून के कई अहम प्रावधान मई 2027 से लागू होने हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान और वकील अनुज तिवारी अदालत में पेश हुए।

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जानिए, FAST सेवाओं पर TRAI की सिफारिशों से क्या बदलेगा

इस प्रस्ताव का खास संबंध फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन यानी FAST सेवाओं से है। इन सेवाओं में दर्शक मुफ्त में टीवी चैनल देख सकते हैं और प्लेटफॉर्म विज्ञापनों के जरिए कमाई कर सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
TV521

इंटरनेट पर टीवी देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब दर्शक केवल केबल टीवी या डीटीएच कनेक्शन के जरिए ही चैनल नहीं देखते, बल्कि स्मार्ट टीवी, मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए भी तय कार्यक्रमों वाले टीवी चैनल तक पहुंच सकते हैं। इसी बदलते तरीके को ध्यान में रखते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट आधारित टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं के लिए अलग मंजूरी व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है।

इस प्रस्ताव का खास संबंध फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन यानी FAST सेवाओं से है। इन सेवाओं में दर्शक मुफ्त में टीवी चैनल देख सकते हैं और प्लेटफॉर्म विज्ञापनों के जरिए कमाई कर सकते हैं। हालांकि, TRAI की सिफारिशों का दायरा केवल FAST तक सीमित नहीं है। इसमें उन ऐप और वेबसाइट को भी शामिल करने का प्रस्ताव है, जो इंटरनेट के जरिए रैखिक यानी तय क्रम में चलने वाले टीवी चैनलों का डिस्ट्रीब्यूशन करते हैं।

TRAI ने 26 अक्टूबर 2026 को एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) सेवाओं के लिए मंजूरी व्यवस्था से जुड़ी सिफारिशें जारी कीं। इनमें ऐप संचालकों की जिम्मेदारी, टीवी चैनलों के पंजीकरण, उपभोक्ता शिकायतों, स्मार्ट टीवी और ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों की भूमिका तथा दर्शक संख्या मापने की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं।  

इस प्रस्ताव की अहमियत केवल एक नई मंजूरी व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ा है कि जब पारंपरिक टीवी चैनल इंटरनेट आधारित ऐप के जरिए दर्शकों तक पहुंचते हैं, तो उनके डिस्ट्रीब्यूशन, जवाबदेही और दर्शक संख्या को किस तरह मापा जाना चाहिए।

FAST सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी?

FAST सेवाओं का मॉडल पारंपरिक टीवी और इंटरनेट स्ट्रीमिंग के बीच एक अलग जगह बनाता है। दर्शकों को इन सेवाओं पर तय कार्यक्रमों के क्रम में चैनल देखने का अनुभव मिलता है, लेकिन वे इंटरनेट से जुड़े उपकरणों के जरिए उन तक पहुंचते हैं।

पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन में केबल, डीटीएच और अन्य व्यवस्थाओं के जरिए चैनल दर्शकों तक पहुंचते हैं। दूसरी ओर, इंटरनेट आधारित सेवाओं में यही अनुभव ऐप, वेबसाइट या स्मार्ट टीवी में पहले से मौजूद एप्लिकेशन के जरिए मिल सकता है।

इस बदलाव के साथ नियमन से जुड़े कुछ सवाल भी सामने आते हैं। उदाहरण के लिए, इंटरनेट पर टीवी चैनल दिखाने वाली सेवा को किस श्रेणी में रखा जाए? उस सेवा को चलाने वाली कंपनी की क्या जिम्मेदारी हो? उसके जरिए दिखाए जाने वाले चैनलों के पास जरूरी अनुमति होनी चाहिए या नहीं? और अगर दर्शक को शिकायत हो, तो वह किससे संपर्क करे?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को TRAI से FAST सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचे पर सिफारिशें देने को कहा था। मंत्रालय के संदर्भ में नियामकीय समानता, सामग्री के प्रति जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण जैसे पहलुओं पर विचार करने की बात थी। इसके बाद TRAI ने 6 अप्रैल 2026 को संबंधित मुद्दों पर परामर्श पत्र जारी किया।

इस प्रक्रिया में 207 टिप्पणियां और 11 जवाबी टिप्पणियां मिलीं। इसके अलावा, 10 जून 2026 को खुली चर्चा आयोजित की गई। इन सुझावों और अपने विश्लेषण के आधार पर TRAI ने अब अपनी सिफारिशें जारी की हैं।

केवल ऐप को मंजूरी नहीं, चैनलों के पंजीकरण का भी प्रस्ताव

TRAI की सिफारिशों में ALTD सेवाओं को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत प्रसारण सेवाओं की मंजूरी व्यवस्था में टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं की एक अलग उप-श्रेणी बनाने का प्रस्ताव है।

इस व्यवस्था में ऐप संचालक को सेवा उपलब्ध कराने की मंजूरी लेने और संबंधित शर्तों का पालन करने के लिए मुख्य जिम्मेदार इकाई बनाने की सिफारिश की गई है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सेवा क्षेत्र, शुरुआत में 20 साल की मंजूरी और उसके बाद लगातार 10-10 साल के लिए नवीनीकरण का प्रस्ताव है।

TRAI ने आवेदन प्रक्रिया के लिए 10,000 रुपये और एकमुश्त प्रवेश शुल्क के रूप में 1 लाख रुपये की सिफारिश की है। इसके साथ नियमित मंजूरी शुल्क, बैंक गारंटी और सुरक्षा जमा नहीं रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

यहां एक अहम बात यह है कि प्रस्ताव में ऐप संचालक की मंजूरी और उसके जरिए दिखाए जाने वाले चैनलों की अनुमति या पंजीकरण को अलग-अलग महत्व दिया गया है। अधिकृत ALTD सेवा प्रदाता केवल उन्हीं टीवी चैनलों का डिस्ट्रीब्यूशन कर सकेगा, जिनके पास केंद्र सरकार की वैध अनुमति, मंजूरी या निर्धारित व्यवस्था के तहत पंजीकरण होगा।

TRAI ने इंटरनेट के लिए बनाए गए रैखिक टीवी चैनलों के लिए सरल पंजीकरण व्यवस्था की भी सिफारिश की है। इससे जुड़े प्रस्ताव में ऐसे चैनलों के नाम और लोगो की मंजूरी का भी उल्लेख है। इसका उद्देश्य इंटरनेट आधारित टीवी डिस्ट्रीब्यूशन के लिए एक निर्धारित ढांचा तैयार करना है, जिसमें सेवा उपलब्ध कराने वाली इकाई और उसके जरिए दिखाए जाने वाले चैनलों की स्थिति स्पष्ट हो। 

स्मार्ट टीवी और ऐप स्टोर पर भी पड़ेगा असर

इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं की पहुंच केवल मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं है। कुछ ऐप स्मार्ट टीवी में पहले से उपलब्ध होते हैं, जबकि कुछ को डाउनलोड करके इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में टीवी निर्माता कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वालों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ‘मास्टर ALTD ऐप रिपॉजिटरी’ बनाए रखने की सिफारिश की है। प्रस्ताव के मुताबिक, टीवी निर्माता कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वालों को अपने उपकरणों और ऐप स्टोर पर केवल अधिकृत ALTD ऐप उपलब्ध कराने होंगे। उन्हें मंत्रालय को निर्धारित प्रारूप में सालाना अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

इस प्रस्ताव के लागू होने पर स्मार्ट टीवी और ऐप स्टोर के जरिए दर्शकों तक पहुंचने वाली ALTD सेवाओं के लिए मंजूरी की स्थिति अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐप संचालकों के साथ-साथ उपकरण और ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी कंपनियों को भी अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देना होगा।

हालांकि, इसे सभी वीडियो ऐप पर लागू होने वाला नियम समझना सही नहीं होगा। TRAI की प्रस्तावित परिभाषा और दायरा खास तौर पर इंटरनेट के जरिए रैखिक टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित है।

किन प्लेटफॉर्म को बाहर रखने की सिफारिश?

TRAI ने प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ अपवाद भी रखे हैं। इसमें ऐसे प्रसारक-स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो केवल अपने चैनल या अपनी होल्डिंग अथवा सहायक कंपनी के चैनल वितरित करते हैं। सोशल मीडिया मंचों पर होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग को भी इस व्यवस्था से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंटरनेट पर उपलब्ध हर वीडियो सेवा का काम एक जैसा नहीं होता। कुछ प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से मांग पर वीडियो उपलब्ध कराते हैं, जबकि कुछ तय कार्यक्रमों वाले टीवी चैनलों को एक जगह लाकर दर्शकों तक पहुंचाते हैं। TRAI का प्रस्ताव दूसरी तरह की सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था बनाने पर केंद्रित है।

इसलिए इस प्रस्ताव को सभी OTT सेवाओं, वीडियो प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर होने वाले हर प्रसारण के लिए एक समान मंजूरी व्यवस्था के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

दर्शकों की शिकायतों के लिए किसकी होगी जिम्मेदारी?

TRAI ने ALTD सेवा से संबंधित उपभोक्ता शिकायतों और उनके समाधान के लिए ऐप संचालक को मुख्य संपर्क बिंदु बनाने की सिफारिश की है।

इंटरनेट आधारित टीवी सेवा में दर्शक ऐप के जरिए चैनल देखते हैं। ऐसे में सेवा से जुड़ी शिकायत होने पर ऐप संचालक की भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है। प्रस्तावित व्यवस्था इसी जिम्मेदारी को निर्धारित करने की दिशा में कदम है।

यह व्यवस्था उपभोक्ता संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर तब जब दर्शक अलग-अलग उपकरणों और ऐप के जरिए टीवी चैनलों तक पहुंचते हैं। हालांकि, शिकायतों के समाधान की पूरी प्रक्रिया और उसकी विस्तृत शर्तें अंतिम रूप से अधिसूचित नियमों से ही स्पष्ट होंगी।

टीवी रेटिंग में इंटरनेट पर देखे जाने वाले चैनलों को शामिल करने की सिफारिश

TRAI की सिफारिशों का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा टीवी दर्शक संख्या मापने की व्यवस्था से जुड़ा है। प्राधिकरण ने ALTD ऐप के जरिए देखे जाने वाले टीवी चैनलों की दर्शक संख्या को टीवी ऑडियंस मेजरमेंट फ्रेमवर्क में शामिल करने की सिफारिश की है।

इसके साथ अधिकृत ALTD ऐप संचालकों को टीवी रेटिंग नीति, 2026 के अनुरूप अनाम यानी दर्शक की पहचान उजागर किए बिना समय-समय पर व्यूअरशिप डेटा प्रकाशित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंटरनेट आधारित ऐप के जरिए टीवी चैनल देखने वाले दर्शकों की संख्या को भी टीवी देखने की व्यापक तस्वीर में शामिल करने की जरूरत हो सकती है। अगर इस प्रस्ताव पर अमल होता है, तो पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन माध्यमों के साथ इंटरनेट आधारित ऐप से होने वाली व्यूअरशिप को मापने की व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।

लेकिन यहां दो बातों में अंतर करना जरूरी है। पहली, ऐप पर उपलब्ध व्यूअरशिप डेटा को टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में शामिल करना। दूसरी, ऐप संचालकों को अपना अनाम व्यूअरशिप डेटा प्रकाशित करने की अनुमति देना। TRAI ने इन दोनों पहलुओं को अपनी सिफारिशों में शामिल किया है।

वास्तविक मापन पद्धति, आंकड़ों की तुलना और इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे तय होने वाली व्यवस्था पर निर्भर करेगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि इंटरनेट आधारित टीवी की दर्शक संख्या पहले ही मौजूदा टीवी रेटिंग में शामिल कर दी गई है।  

मीडिया उद्योग के लिए इसका क्या महत्व है?

TRAI की सिफारिशों को मीडिया उद्योग के लिए तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

पहला, इंटरनेट के जरिए रैखिक टीवी चैनल वितरित करने वाली सेवाओं के लिए अलग मंजूरी व्यवस्था का प्रस्ताव है। इससे इस श्रेणी की सेवाओं के लिए नियमों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की दिशा में काम हो सकता है।

दूसरा, स्मार्ट टीवी निर्माताओं और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वालों को अधिकृत ऐप उपलब्ध कराने और सालाना अनुपालन रिपोर्ट जमा करने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है। इससे ऐप की मंजूरी की स्थिति उपकरणों और ऐप स्टोर के स्तर पर भी प्रासंगिक हो सकती है।

तीसरा, इंटरनेट आधारित ऐप पर देखे जाने वाले टीवी चैनलों की व्यूअरशिप को टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में शामिल करने की सिफारिश है। इससे भविष्य में टीवी चैनलों के दर्शकों की संख्या मापने के तरीकों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, इन प्रस्तावों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इससे किसी खास प्लेटफॉर्म की कमाई बढ़ेगी, विज्ञापन दरें बदलेंगी या किसी मौजूदा सेवा को बाजार में नुकसान होगा। ऐसे प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि सरकार सिफारिशों को किस रूप में स्वीकार करती है और अंतिम नियमों में क्या प्रावधान रखे जाते हैं।

अब सरकार के अगले कदम पर नजर

TRAI ने ALTD सेवाओं के लिए हल्की नियामकीय व्यवस्था की सिफारिश की है। इसमें मंजूरी, चैनल पंजीकरण, ऐप उपलब्ध कराने, उपभोक्ता शिकायतों और व्यूअरशिप से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। प्राधिकरण ने मंजूरी, पंजीकरण और रिपोर्टिंग की प्रक्रियाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने की भी सिफारिश की है।

इन शर्तों को दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 56 के तहत नियमों के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव है। इसलिए अभी इन सिफारिशों को लागू हो चुके नियमों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

आगे सरकार के फैसले और अंतिम नियमों से यह स्पष्ट होगा कि ALTD सेवाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया कैसी होगी, इंटरनेट के लिए बनाए गए टीवी चैनलों का पंजीकरण कैसे होगा और व्यूअरशिप मापन की नई व्यवस्था किस तरह काम करेगी।

कुल मिलाकर, TRAI की सिफारिशें इंटरनेट आधारित टीवी डिस्ट्रीब्यूशन को एक स्पष्ट नियामकीय ढांचे में लाने की कोशिश हैं। इनका महत्व केवल FAST सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन ऐप और वेबसाइट से भी जुड़ा है, जो इंटरनेट के जरिए पारंपरिक टीवी चैनलों जैसा देखने का अनुभव उपलब्ध कराते हैं।

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