YouTube का माइक्रो-ड्रामा पर बड़ा दांव, भारत में ₹25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है मार्केट

अब इस बढ़ते चलन को देखते हुए YouTube भी इस बाजार में अपनी भूमिका मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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मोबाइल पर छोटे वीडियो देखने की आदत अब मनोरंजन की एक नई विधा को जन्म दे रही है। इसी चलन से माइक्रो-ड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें दर्शकों को लंबी फिल्म या वेब सीरीज के बजाय छोटी-छोटी कड़ियों में पूरी कहानी देखने को मिलती है। हर कड़ी के अंत में ऐसा मोड़ रखा जाता है, जो दर्शकों को अगला एपिसोड देखने के लिए उत्सुक करता है। अब इस बढ़ते चलन को देखते हुए YouTube भी इस बाजार में अपनी भूमिका मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने Shorts Series फीचर पेश किया है, जिसके जरिए क्रिएटर्स अपने छोटे वीडियो को सीजन और एपिसोड के रूप में व्यवस्थित कर सकेंगे।

YouTube की यह पहल ऐसे समय आई है, जब भारत में माइक्रो-ड्रामा का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इससे कमाई की बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं। Redseer Strategy Consultants के अनुमानों के मुताबिक, भारत का माइक्रो-ड्रामा बाजार वित्त वर्ष 2026 के करीब 2,300 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2032 तक 23,500 से 25,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में YouTube का नया कदम सिर्फ वीडियो देखने के अनुभव में बदलाव नहीं है, बल्कि छोटे वीडियो के जरिए सीरीज बनाने, दर्शकों को जोड़े रखने और कमाई के नए रास्ते खोलने की कोशिश भी है।

YouTube पर माइक्रो-ड्रामा को मिले 6.5 अरब से ज्यादा व्यूज

YouTube के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में उसके प्लेटफॉर्म पर माइक्रो-ड्रामा को 6.5 अरब से ज्यादा व्यूज मिले। इस दौरान इस तरह के कंटेंट का वॉच टाइम सालाना आधार पर 50 फीसदी से अधिक बढ़ा। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में माइक्रो-ड्रामा से जुड़े व्यूज में भी सालाना आधार पर 70 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इस फॉर्मेट में आमतौर पर करीब 60 सेकंड के छोटे दृश्यों के जरिए कहानी आगे बढ़ाई जाती है। इसमें घटनाएं तेजी से बदलती हैं और हर एपिसोड के अंत में कोई नया सवाल, रहस्य या मोड़ छोड़ दिया जाता है। यही वजह है कि दर्शक एक वीडियो देखने के बाद अगली कड़ी पर भी पहुंच जाते हैं। YouTube पर जापान का GOKKO CLUB और भारत का Shorts Break इस तरह के कंटेंट के उदाहरण हैं।

YouTube के मुताबिक, माइक्रो-ड्रामा की खास बात यह भी है कि इसके एपिसोड प्रकाशित होने के कई दिनों बाद भी दर्शक उन्हें देख रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर 40 फीसदी व्यूज और 30 फीसदी क्लिक वीडियो प्रकाशित होने के 30 दिन से ज्यादा समय बाद आए। इससे पता चलता है कि किसी सीरीज का पहला एपिसोड शुरुआती दिनों के बाद भी नए दर्शकों तक पहुंच सकता है। पुराने एपिसोड लंबे समय तक व्यूज और विज्ञापन से कमाई का जरिया बने रह सकते हैं।

Shorts Series से क्या बदलेगा?

YouTube का Shorts Series फीचर क्रिएटर्स को अपने Shorts वीडियो को सीजन और एपिसोड के हिसाब से व्यवस्थित करने की सुविधा देता है। इसके साथ कस्टम थंबनेल और क्रम से वीडियो चलाने जैसे विकल्प भी दिए गए हैं। इससे दर्शकों को किसी सीरीज की अगली कड़ी ढूंढने के लिए अलग-अलग वीडियो तलाशने की जरूरत कम होगी। वे एक एपिसोड के बाद सीधे अगले एपिसोड तक पहुंच सकेंगे।

कंपनी का कहना है कि Shorts Series के साथ क्रिएटर्स के लिए कमाई के नए अवसर भी खोले जाएंगे। आने वाले हफ्तों में मोबाइल पर केवल चैनल सदस्यता लेने वाले दर्शकों के लिए उपलब्ध एपिसोड देखने का अनुभव भी बदला जाएगा। दर्शक जिस कंटेंट को देख रहे होंगे, उसे छोड़े बिना चैनल की सदस्यता लेकर अगली कड़ियां देख सकेंगे।

यह बदलाव उन क्रिएटर्स के लिए अहम हो सकता है, जो अब तक अलग-अलग Shorts वीडियो बनाते रहे हैं, लेकिन उन्हें एक पूरी कहानी या सीरीज के रूप में पेश करना चाहते हैं। इससे छोटे वीडियो बनाने वाले क्रिएटर्स को भी एक व्यवस्थित मनोरंजन फॉर्मेट तैयार करने का मौका मिलेगा। YouTube के लिए भी यह दर्शकों को प्लेटफॉर्म पर अधिक समय तक जोड़े रखने का एक तरीका बन सकता है।

भारत में रोज देखे जा रहे हैं 80 करोड़ माइक्रो-ड्रामा एपिसोड

भारत में इस फॉर्मेट की लोकप्रियता के आंकड़े भी इसकी बढ़ती पहुंच की ओर इशारा करते हैं। Redseer के 28 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित विश्लेषण के मुताबिक, भारत में रोज देखे जाने वाले माइक्रो-ड्रामा एपिसोड की संख्या अक्टूबर 2025 के करीब 22 करोड़ से बढ़कर जून 2026 में लगभग 80 करोड़ हो गई। यानी करीब आठ महीने में रोजाना देखे जाने वाले एपिसोड की संख्या तीन गुने से ज्यादा हो गई।

इसी अवधि में इस बाजार से होने वाली मासिक कमाई में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई। Redseer के मुताबिक, अप्रैल 2025 में माइक्रो-ड्रामा से करीब 35 करोड़ रुपये का मासिक राजस्व आ रहा था, जो जून 2026 में बढ़कर लगभग 383 करोड़ रुपये हो गया। ये आंकड़े बताते हैं कि यह फॉर्मेट सिर्फ दर्शकों का समय ही नहीं ले रहा, बल्कि इससे कारोबार खड़ा करने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।

Redseer के 600 लोगों के सर्वे में करीब 64 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्हें पहली बार माइक्रो-ड्रामा के बारे में सोशल मीडिया और छोटे वीडियो के जरिए पता चला। करीब 20 फीसदी लोगों ने इसे दोस्तों और परिवार के माध्यम से जाना। इससे यह भी समझ आता है कि Shorts और दूसरे छोटे वीडियो प्लेटफॉर्म इस तरह के कंटेंट के लिए दर्शक जुटाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

विज्ञापन से खुलेगी 5,500 करोड़ रुपये तक की कमाई की राह

माइक्रो-ड्रामा कारोबार में अभी कमाई का सबसे बड़ा जरिया सब्सक्रिप्शन है। कई प्लेटफॉर्म पर दर्शक अगले एपिसोड अनलॉक करने या पूरी कहानी देखने के लिए भुगतान करते हैं। हालांकि, हर दर्शक नियमित रूप से किसी ऐप या प्लेटफॉर्म की सदस्यता नहीं लेना चाहता। ऐसे दर्शकों तक पहुंचने के लिए विज्ञापन आधारित वीडियो ऑन डिमांड यानी AVOD को अहम माना जा रहा है। इस मॉडल में दर्शक मुफ्त में कंटेंट देखते हैं और वीडियो या एपिसोड के बीच विज्ञापन दिखाए जाते हैं।

Redseer की 3 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत के माइक्रो-ड्रामा कारोबार की करीब 99 फीसदी कमाई सब्सक्रिप्शन से आई। विज्ञापन से इस दौरान लगभग 24 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। हालांकि, अनुमान है कि विज्ञापन से होने वाली कमाई वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर करीब 210 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2032 तक 5,000 से 5,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में विज्ञापन इस कारोबार की कमाई का एक बड़ा जरिया बन सकता है। Redseer के मुताबिक, विज्ञापन आधारित माइक्रो-ड्रामा देखने वाले रोजाना सक्रिय दर्शकों की संख्या वित्त वर्ष 2032 तक 14 से 15 करोड़ तक पहुंच सकती है। वहीं, अभी हर महीने माइक्रो-ड्रामा के लिए भुगतान करने वाले दर्शकों की संख्या करीब 1.5 से 1.7 करोड़ है, जबकि करीब 4 करोड़ लोग कम से कम एक बार इस तरह के कंटेंट के लिए भुगतान कर चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बाजार में भुगतान करने की क्षमता रखने वाले संभावित दर्शकों का दायरा 25 से 28 करोड़ तक है।

प्लेटफॉर्म और विज्ञापनदाताओं के लिए नया मौका

माइक्रो-ड्रामा की बढ़ती लोकप्रियता से कंटेंट बनाने वाली कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और विज्ञापनदाताओं के लिए नए अवसर बन रहे हैं। छोटे एपिसोड और तेजी से आगे बढ़ती कहानियां दर्शकों को बार-बार वापस ला सकती हैं। इससे किसी सीरीज के अलग-अलग एपिसोड के बीच विज्ञापन दिखाने के अवसर भी बनते हैं। ब्रांड अपनी कहानी या उत्पाद को सीधे विज्ञापन के बजाय सीरीज के हिस्से के रूप में भी पेश कर सकते हैं। YouTube के ब्लॉग में जापान के GOKKO CLUB का उदाहरण दिया गया है, जो ब्रांड के संदेश को अपनी छोटी कहानियों में शामिल कर रहा है।

हालांकि, इस बाजार की वृद्धि सिर्फ दर्शकों की संख्या पर निर्भर नहीं करेगी। प्लेटफॉर्म को लगातार नई और अच्छी कहानियां तैयार करनी होंगी। अलग-अलग भाषाओं में कंटेंट, मजबूत कहानी, बेहतर वीडियो गुणवत्ता और दर्शकों की पसंद के मुताबिक सुझाव देना भी जरूरी होगा। YouTube के मुताबिक, कई भाषाओं में ऑडियो, एआई की मदद से सबटाइटल का स्थानीयकरण और स्थानीय भाषा के अनुसार मेटाडेटा जैसे विकल्प किसी एक देश में बनी सीरीज को दूसरे देशों के दर्शकों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, माइक्रो-ड्रामा अब छोटे वीडियो का एक प्रयोग भर नहीं रह गया है। भारत में तेजी से बढ़ते एपिसोड व्यूज, दर्शकों की देखने की आदत और विज्ञापन से कमाई की संभावनाएं इसे डिजिटल मनोरंजन के एक बड़े कारोबार में बदल सकती हैं। YouTube का Shorts Series फीचर इस बदलाव को और गति दे सकता है। हालांकि, यह देखना अहम होगा कि क्रिएटर्स कितनी मजबूत कहानियां बना पाते हैं और प्लेटफॉर्म दर्शकों की बढ़ती संख्या को टिकाऊ कमाई में कितना बदल पाते हैं।

 

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MIB ने OTT व डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी की ये नई एडवाइजरी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने OTT प्लेटफॉर्म्स, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और इंटरनेट इंटरमीडियरीज (Intermediaries) के लिए नई एडवाइजरी जारी की है।

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Published - Wednesday, 04 November, 2026
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Wednesday, 04 November, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने OTT प्लेटफॉर्म्स, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और इंटरनेट इंटरमीडियरीज (Intermediaries) के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें ऑनलाइन कंटेंट के प्रकाशन और प्रसारण को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 और इसके तहत बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन करने की बात कही गई है।

2 नवंबर 2026 को जारी इस एडवाइजरी में मंत्रालय ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर से कुछ कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने पर चिंता जताई है। साथ ही कंटेंट की जांच, संपादकीय निगरानी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी के साथ जानकारी साझा करने को लेकर कई निर्देश दिए हैं।

यह एडवाइजरी ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट (OTT) के सभी पब्लिशर्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज और करेंट अफेयर्स कंटेंट प्रकाशित करने वालों और इंटरनेट इंटरमीडियरीज के लिए जारी की गई है। इसमें कुल नौ प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने को कहा गया है। इनमें पुरानी तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल, आतंकवाद विरोधी अभियानों की कवरेज, हिंसा और अपराध से जुड़ा कंटेंट, आपदाओं की रिपोर्टिंग, भारत के नक्शे, सांप्रदायिक सौहार्द, यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार कंटेंट शामिल हैं।

पुरानी तस्वीरों और वीडियो के इस्तेमाल में बरतें सावधानी

मंत्रालय ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को पुरानी तस्वीरों और वीडियो के इस्तेमाल में ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है। एडवाइजरी में कहा गया है कि कई बार पहले रिकॉर्ड किए गए वीडियो और तस्वीरों को मौजूदा घटनाओं से जोड़कर इस तरह प्रसारित किया जाता है, जिससे दर्शकों को लगता है कि ये हाल की घटना के ही दृश्य हैं।

इससे लोगों के बीच गलत जानकारी फैल सकती है और किसी घटना को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। मंत्रालय ने सलाह दी है कि किसी भी पुरानी तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल करते समय उसकी मूल तारीख, स्थान और संदर्भ की जानकारी जरूर दी जाए।

अगर तस्वीर या वीडियो सोशल मीडिया सहित किसी बाहरी स्रोत से लिया गया है तो उसका स्रोत और टाइमस्टैम्प (समय की जानकारी) भी बताना चाहिए।

आतंकवाद विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचें

मंत्रालय ने सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जाने वाले आतंकवाद विरोधी अभियानों की रिपोर्टिंग को लेकर भी निर्देश दिए हैं। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को ऐसे अभियानों की लाइव कवरेज से बचने की सलाह दी गई है।

एडवाइजरी के मुताबिक, किसी ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती, उनकी लोकेशन, आवाजाही, आने-जाने के रास्तों और दूसरी रणनीतिक जानकारियों का रियल टाइम में खुलासा नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी जानकारी सामने आने से अभियान प्रभावित हो सकता है और सुरक्षा बलों के साथ आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

मंत्रालय ने सलाह दी है कि मीडिया संस्थान अधिकृत अधिकारियों की ओर से दी जाने वाली समय-समय पर जानकारी के आधार पर रिपोर्टिंग करें। ऑपरेशन पूरा होने तक केवल वही जानकारी साझा की जाए, जिसे कानूनी रूप से प्रकाशित किया जा सकता है। साथ ही वीडियो और तस्वीरों पर तारीख और समय की जानकारी देने को भी कहा गया है।

हिंसा और अपराध से जुड़े कंटेंट की हो सही जांच

OTT प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को हिंसक, डरावने और परेशान करने वाले दृश्यों के इस्तेमाल में भी संपादकीय सावधानी बरतने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर ऐसे दृश्यों को ब्लर या मास्क करने की सलाह दी गई है।

मंत्रालय ने अपराध और हिंसा से जुड़ी खबरों में इस्तेमाल होने वाले विजुअल्स को भी सत्यापित तथ्यों पर आधारित रखने को कहा है। इसके अलावा हेडलाइन, थंबनेल और कैप्शन ऐसे नहीं होने चाहिए, जो खबर में बताई गई घटना की वास्तविकता को गलत तरीके से पेश करें।

महिलाओं और बच्चों से जुड़े कंटेंट के मामले में भी विशेष सावधानी और संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी गई है।

आपदाओं की खबरों में केवल सत्यापित जानकारी दें

प्राकृतिक आपदाओं, बड़े हादसों और अन्य दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग को लेकर भी मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को ऐसी घटनाओं के बारे में केवल सत्यापित जानकारी ही प्रकाशित करने की सलाह दी गई है।

मंत्रालय के मुताबिक, बिना पुष्टि की जानकारी और पुराने विजुअल्स का इस्तेमाल लोगों के बीच अनावश्यक डर और घबराहट पैदा कर सकता है। इसलिए ऐसी खबरों में तस्वीरों और वीडियो के साथ तारीख और समय का उल्लेख करना जरूरी है।

भारत के नक्शे और समुदायों से जुड़ी खबरों पर भी निर्देश

एडवाइजरी में भारत के नक्शों के इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। OTT प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को केवल भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) की ओर से प्रकाशित प्रामाणिक नक्शों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा धार्मिक, भाषाई और अन्य समुदायों से जुड़ी खबरों में भी संपादकीय सावधानी बरतने को कहा गया है। मंत्रालय ने खासतौर पर ऐसे मामलों में इस्तेमाल होने वाले बयानों, तस्वीरों, अनुवाद और आरोपों को सही संदर्भ में पेश करने पर जोर दिया है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि कंटेंट प्रकाशित करते समय हिंसा भड़काने और गैरकानूनी तरीके से समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने से जुड़े लागू कानूनों का पालन किया जाना चाहिए।

यौन अपराध के पीड़ितों की पहचान उजागर न करें

मंत्रालय ने यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा को लेकर भी मौजूदा कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने को कहा है।

इस संबंध में एडवाइजरी में सुप्रीम कोर्ट के मामले निपुण सक्सेना एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य (Nipun Saxena & Another v. Union of India & Others), रिट याचिका संख्या 565/2012 का जिक्र किया गया है।

इसके तहत पब्लिशर्स को पीड़ितों की सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पहचान उजागर करने वाली किसी भी जानकारी को प्रकाशित करने से बचना होगा। इसमें उनकी तस्वीरें, परिवार से जुड़ी जानकारी, रहने का इलाका और ऐसे दूसरे विवरण शामिल हैं, जिनसे पीड़ित की पहचान सामने आ सकती है। हालांकि, कानून या अदालत के आदेश के तहत जहां इसकी अनुमति हो, वहां अलग बात है।

AI से तैयार कंटेंट पर भी मंत्रालय की नजर

एडवाइजरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सिंथेटिक कंटेंट के बढ़ते इस्तेमाल को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। मंत्रालय ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को AI से तैयार या बड़े स्तर पर बदली गई तस्वीरों, वीडियो और ऑडियो की सही तरीके से जांच करने की सलाह दी है।

अगर किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना के संदर्भ में सिंथेटिक कंटेंट का इस्तेमाल किया जाता है तो उसके बारे में उचित जानकारी देना भी जरूरी बताया गया है। ऐसे कंटेंट को असली वीडियो, तस्वीर या बयान के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए, जिससे दर्शक भ्रमित हों।

मंत्रालय ने इस संबंध में IT Act, 2000 की धारा 79 और IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के Part-II के तहत इंटरनेट इंटरमीडियरीज की जिम्मेदारियों की ओर भी ध्यान दिलाया है।

इंटरमीडियरीज को इन नियमों के नियम 3, 4 और 5 के तहत लागू उचित सावधानी (Due Diligence) और अन्य जिम्मेदारियों का पालन करने को कहा गया है। खासतौर पर नियम 3(3) और 4(1A) के तहत सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन से जुड़े प्रावधानों पर ध्यान देने की बात कही गई है।

एडिटोरियल और कंटेंट रिव्यू सिस्टम मजबूत करने की सलाह

मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को अपने आंतरिक संपादकीय और कंटेंट रिव्यू सिस्टम को मजबूत करने की सलाह भी दी है। इसके तहत कंटेंट तैयार करने और प्रकाशित करने वाले कर्मचारियों को IT Act, इसके तहत बनाए गए नियमों और अन्य लागू कानूनों की जानकारी देने पर जोर दिया गया है।

इसके लिए वर्कशॉप, ट्रेनिंग प्रोग्राम और जागरूकता सत्र आयोजित करने की सलाह दी गई है, ताकि कंटेंट से जुड़े फैसले लेते समय सभी जरूरी कानूनी प्रावधानों और संपादकीय जिम्मेदारियों का ध्यान रखा जा सके।

इस नई एडवाइजरी के जरिए मंत्रालय ने साफ किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट प्रकाशित करने की आजादी के साथ उसकी सत्यता, संदर्भ और कानूनी जिम्मेदारियों का ध्यान रखना भी जरूरी है। खासतौर पर AI कंटेंट, पुरानी तस्वीरों के इस्तेमाल और संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग को लेकर पब्लिशर्स को अपनी संपादकीय प्रक्रियाओं में ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। 

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Jio की ग्लोबल विस्तार की तैयारी, Comcast और Charter को टेक्नोलॉजी लाइसेंस देने पर बातचीत

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) अपने कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है।

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Published - Wednesday, 04 November, 2026
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Wednesday, 04 November, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) अपने कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है। इसी कड़ी में कंपनी ने अमेरिका की दिग्गज कंपनियों Comcast और Charter Communications के साथ अपनी वायरलेस ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी का लाइसेंस देने को लेकर बातचीत की है। इस संभावित समझौते के तहत जियो अपनी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का अधिकार देने के बदले इन कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जियो कई कंपनियों के साथ इस तरह की साझेदारी पर चर्चा कर रही है। कंपनी का मकसद अपनी खास वायरलेस ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी के जरिए दूसरे देशों के बाजारों में पहुंच बनाना है। खास बात यह है कि जियो विदेशों में अपना नेटवर्क खड़ा करने के बजाय वहां की स्थापित कंपनियों के साथ साझेदारी करके अपनी टेक्नोलॉजी का विस्तार करना चाहती है।

हालांकि, Comcast और Charter के साथ बातचीत अभी किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंची है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल किसी भी कंपनी के साथ सौदा पूरा होने की समयसीमा तय नहीं है।

क्या है जियो की वायरलेस ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी?

जियो की इस टेक्नोलॉजी को अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो (Unlicensed Band Radio-UBR) कहा जाता है। यह बिना लाइसेंस वाले वाई-फाई फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करती है। इसकी मदद से पारंपरिक केबल कनेक्शन बिछाए बिना घरों और इमारतों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है।

इस तकनीक में आसपास के टावरों या इमारतों की छतों पर ट्रांसमीटर लगाए जाते हैं, जिनसे वाई-फाई फ्रीक्वेंसी के जरिए सिग्नल भेजे जाते हैं। इन सिग्नल को दूसरी इमारतों पर लगे रिसीवर प्राप्त करते हैं और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराते हैं।

इसका सबसे बड़ा फायदा इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत कम होना है। पारंपरिक केबल नेटवर्क बिछाने या मोबाइल नेटवर्क के जरिए इंटरनेट पहुंचाने के मुकाबले यह एक किफायती विकल्प बन सकता है। जियो का मानना है कि इस तकनीक के जरिए वह अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडबैंड बाजार में अपनी जगह बना सकती है।

दुनियाभर में 10 से 15 पार्टनर बनाने का लक्ष्य

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो ने अपनी इस टेक्नोलॉजी के लिए दुनियाभर में 10 से 15 पार्टनर बनाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी विकसित और विकासशील, दोनों तरह के बाजारों में इस तकनीक को पहुंचाना चाहती है।

जियो के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने हाल ही में एनालिस्ट कॉल में कहा था कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी UBR टेक्नोलॉजी को लेकर आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन इन बाजारों का चयन काफी सोच-समझकर किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जियो विदेशों में टेक्नोलॉजी आधारित कारोबार पर ध्यान देना चाहती है।

इस मॉडल में जियो को दूसरे देशों में खुद नेटवर्क बनाने और बड़े स्तर पर निवेश करने की जरूरत कम होगी। इसके बजाय स्थानीय कंपनियां उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके बदले जियो को लाइसेंसिंग से जुड़ा कारोबारी फायदा और संभावित इक्विटी हिस्सेदारी मिल सकती है।

अमेरिकी बाजार पर क्यों है जियो की नजर?

अमेरिका में ब्रॉडबैंड इंटरनेट का बाजार इस समय प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रहा है। वहां टेलीकॉम कंपनियां फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस सेवाओं के जरिए केबल ऑपरेटरों को चुनौती दे रही हैं। ऐसे में Comcast और Charter जैसी कंपनियों के लिए कम लागत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना अहम हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर के अंत तक Comcast के करीब 2.83 करोड़ रेजिडेंशियल ब्रॉडबैंड ग्राहक थे, जबकि Charter के पास जून में लगभग 2.94 करोड़ इंटरनेट ग्राहक थे। दोनों कंपनियों को फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस सेवाओं से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

जियो की UBR टेक्नोलॉजी इन कंपनियों को बिना महंगा टेलीकॉम स्पेक्ट्रम खरीदे ब्रॉडबैंड सेवाएं देने में मदद कर सकती है। हांगकांग स्थित काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर नील शाह के मुताबिक, इस तकनीक के जरिए Comcast और Charter जैसी कंपनियां ऐसे स्पेक्ट्रम पर निर्भर हुए बिना बेहतर ब्रॉडबैंड सेवाएं दे सकती हैं, जिसे खरीदने के लिए उन्हें बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती।

रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि अमेरिका में 2024 के अंत तक रेजिडेंशियल ब्रॉडबैंड कनेक्शन में केबल की हिस्सेदारी 62 फीसदी थी। ऐसे बाजार में अपनी सेवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना केबल कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है।

MTN Group के साथ बातचीत क्यों नहीं बनी?

जियो ने अपनी टेक्नोलॉजी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए दक्षिण अफ्रीका की टेलीकॉम कंपनी MTN Group के साथ भी बातचीत की थी। हालांकि, दोनों कंपनियों के बीच वैल्यूएशन और लाइसेंसिंग से जुड़ी शर्तों पर सहमति नहीं बन पाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, MTN जियो को ऐसे वैल्यूएशन पर निवेश के लिए राजी नहीं कर सका, जिसे जियो स्वीकार कर सके। इसके चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई। इस संभावित साझेदारी की वित्तीय शर्तों का भी खुलासा नहीं हुआ है।

MTN ने इस मामले पर बाजार में चल रही अटकलों को लेकर टिप्पणी करने से इनकार किया। वहीं Comcast और Charter ने भी जियो के साथ बातचीत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

500 मिलियन से ज्यादा ग्राहक और 65 लाख से अधिक UBR यूजर्स

जियो भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल है और उसके मोबाइल ग्राहकों की संख्या 50 करोड़ से अधिक है। इसके अलावा कंपनी के पास करीब 1.5 करोड़ वायर्ड ब्रॉडबैंड यूजर्स भी हैं।

रिपोर्ट्स्स के मुताबिक, रिलायंस ने बताया है कि जियो की UBR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्या 65 लाख से ज्यादा हो चुकी है। कंपनी अब इसी अनुभव और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल दूसरे देशों में कारोबार बढ़ाने के लिए करना चाहती है।

गौरतलब है कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में 3.2 अरब डॉलर का आईपीओ पूरा किया है, जिसे भारत की सबसे बड़ी लिस्टिंग बताया गया। अब कंपनी का फोकस केवल भारतीय टेलीकॉम बाजार तक सीमित रहने के बजाय अपनी टेक्नोलॉजी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने पर भी है।

Comcast और Charter के साथ संभावित साझेदारी जियो के इसी विस्तार अभियान का हिस्सा है। हालांकि, अभी बातचीत शुरुआती स्तर पर है और किसी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जियो अपनी टेक्नोलॉजी के बदले विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल करने की इस रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है।

 

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Vikas Saxena by
Published - Saturday, 31 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 31 October, 2026
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देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्मों, वेब सीरीज और दूसरे वीडियो कंटेंट की बढ़ती पहुंच के साथ उनके नियमन और निगरानी का मुद्दा भी अहम हो गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी दर्शक को ओटीटी पर दिखाए जा रहे किसी कंटेंट से शिकायत है, तो वह कहां और कैसे अपनी बात रख सकता है? सरकार इन प्लेटफॉर्म पर किस तरह नजर रखती है और शिकायत मिलने पर क्या कार्रवाई होती है?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में ओटीटी प्लेटफॉर्म की निगरानी, शिकायतों के निपटारे और नियमों के पालन को लेकर कई अहम जानकारियां दी गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत तीन स्तरों वाली शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई गई है। इस व्यवस्था में पहले प्लेटफॉर्म, फिर स्व-नियामक संस्था और अंत में केंद्र सरकार की भूमिका होती है।

2021 के नियमों के तहत मंत्रालय के दायरे में आए OTT प्लेटफॉर्म

सरकार ने 25 फरवरी 2021 को आईटी नियम, 2021 अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तीसरे भाग यानी पार्ट-3 का प्रशासन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय करता है। इसके दायरे में डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के साथ ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट यानी ओटीटी प्लेटफॉर्म भी आते हैं।

इन नियमों के तहत ओटीटी प्लेटफॉर्म को तय आचार संहिता का पालन करना होता है। साथ ही, उन्हें सरकार को जरूरी जानकारी देनी होती है और दर्शकों की शिकायतों के निपटारे के लिए व्यवस्था भी बनानी होती है।

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 4,300 से ज्यादा डिजिटल पब्लिशर्स ने सरकार को निर्धारित प्रारूप में जानकारी दी थी। इनमें 66 ओटीटी प्लेटफॉर्म शामिल थे। बाकी में डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और अन्य डिजिटल प्रकाशक शामिल हैं। यह आंकड़ा रिपोर्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है।

शिकायतों के निपटारे के लिए तीन स्तरों की व्यवस्था

ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायतों को देखने के लिए तीन स्तरों वाला सिस्टम बनाया गया है। इसका मकसद यह है कि दर्शक की शिकायत पहले संबंधित प्लेटफॉर्म तक पहुंचे और जरूरत पड़ने पर उसे आगे की व्यवस्था में ले जाया जा सके।

पहला स्तर: खुद OTT प्लेटफॉर्म करेगा शिकायत का समाधान

पहले स्तर पर संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी होती है कि वह दर्शकों की शिकायत सुने और उसका निपटारा करे। इसके लिए हर प्लेटफॉर्म को शिकायत अधिकारी यानी ग्रिवेंस ऑफिसर नियुक्त करना होता है। इस अधिकारी का नाम और संपर्क जानकारी प्लेटफॉर्म की वेबसाइट और ऐप पर उपलब्ध होनी चाहिए।

दर्शक किसी फिल्म, वेब सीरीज या दूसरे कंटेंट को लेकर अपनी शिकायत संबंधित प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी के पास दर्ज करा सकते हैं। मंत्रालय ने भी प्लेटफॉर्म को शिकायत अधिकारी की जानकारी साफ और प्रमुखता से दिखाने के निर्देश दिए हैं।

दूसरा स्तर: स्व-नियामक संस्था के पास जा सकती है शिकायत

अगर शिकायतकर्ता पहले स्तर पर मिले समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो वह दूसरे स्तर पर संबंधित स्व-नियामक संस्था के पास जा सकता है। ये संस्थाएं ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए तय आचार संहिता के पालन और शिकायतों की समीक्षा का काम करती हैं।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, उसने कुल 11 स्व-नियामक संस्थाओं को पंजीकृत किया था। इनमें 9 डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के लिए और 2 ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए हैं।

ओटीटी क्षेत्र की इन दो संस्थाओं में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) के तहत बनी डिजिटल पब्लिशर्स कंटेंट ग्रिवेंस काउंसिल (DPCGC) और डिजिटल मीडिया कंटेंट रेगुलेटरी काउंसिल (DMCRC) शामिल हैं।

तीसरा स्तर: केंद्र सरकार की निगरानी और अंतर-विभागीय समिति

तीसरे स्तर पर केंद्र सरकार की निगरानी व्यवस्था आती है। इसके तहत इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी यानी अंतर-विभागीय समिति शिकायतों और संबंधित मामलों की समीक्षा करती है। इस समिति में महिला एवं बाल विकास, कानून एवं न्याय, गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हैं।

DPCGC ने जनवरी 2026 तक निपटाईं 137 शिकायतें

मंत्रालय की रिपोर्ट में शिकायतों के निपटारे को लेकर एक अहम आंकड़ा दिया गया है। इसके मुताबिक, DPCGC ने सितंबर 2021 से जनवरी 2026 के बीच कुल 137 शिकायतों का निपटारा किया।

रिपोर्ट में DPCGC की ओर से की गई एक महत्वपूर्ण कार्रवाई का भी जिक्र है। संस्था के शिकायत निवारण बोर्ड ने जून 2023 में एक सदस्य ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ वेब सीरीज के कंटेंट पर गंभीर आपत्ति जताई थी। इसके बाद प्लेटफॉर्म को इन सीरीज को हटाने और अपनी लाइब्रेरी के दूसरे कंटेंट की भी समीक्षा करने की सलाह दी गई। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद संबंधित प्लेटफॉर्म ने अगस्त 2023 में 109 वेब सीरीज हटा दी थीं।

इसके अलावा, DPCGC ने प्लेटफॉर्म को उम्र के हिसाब से कंटेंट की रेटिंग, कंटेंट से जुड़ी जानकारी और बच्चों के लिए पैरेंटल कंट्रोल की व्यवस्था बेहतर करने की सलाह भी दी थी।

मंत्रालय को तीसरे स्तर पर मिली सिर्फ एक शिकायत

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन स्तरों वाली शिकायत निवारण व्यवस्था के तीसरे स्तर पर मंत्रालय को एक शिकायत मिली थी। इसे अंतर-विभागीय समिति के पास भेजा गया। समिति की सिफारिश के बाद संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म को अपने कंटेंट के विज्ञापनों में भी उम्र के हिसाब से रेटिंग और दर्शकों के लिए जरूरी चेतावनी दिखाने की सलाह दी गई।

यह सलाह प्रिंट, टेलीविजन और रेडियो जैसे माध्यमों पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों के लिए भी थी, क्योंकि इन माध्यमों तक सभी उम्र के लोग पहुंचते हैं। साथ ही, प्लेटफॉर्म को अपनी वेबसाइट और ऐप पर शिकायत अधिकारी की जानकारी ज्यादा प्रमुखता से दिखाने को कहा गया। इस संबंध में मंत्रालय ने 18 जुलाई 2023 को सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए एडवाइजरी भी जारी की थी।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि 137 शिकायतें DPCGC की ओर से निपटाई गई थीं, जबकि एक शिकायत मंत्रालय को तीसरे स्तर पर मिली थी। ये दोनों अलग-अलग आंकड़े हैं।

आपत्तिजनक कंटेंट पर सरकार ने की कार्रवाई

मंत्रालय की रिपोर्ट में आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट दिखाने वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी जिक्र है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 में 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इनसे जुड़े 19 वेबसाइट और 10 ऐप को भारत में सार्वजनिक पहुंच के लिए बंद किया गया था।

इसके बाद 23 जुलाई 2025 को 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनसे जुड़े 26 वेबसाइट और 14 ऐप को भारत में सार्वजनिक पहुंच के लिए बंद किया गया। मंत्रालय के अनुसार, इन 25 प्लेटफॉर्म में से 5 ऐसे थे जिनके खिलाफ मार्च 2024 में भी कार्रवाई की गई थी, लेकिन उन्होंने नए डोमेन के जरिए दोबारा आपत्तिजनक कंटेंट उपलब्ध कराना शुरू कर दिया था।

रिपोर्ट में ALTT और ULLU का भी जिक्र है। अगस्त 2025 में मंत्रालय की ओर से इन दोनों प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद DPCGC ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म को इससे पहले भी संस्था की ओर से चेतावनी और निर्देश दिए गए थे।

OTT कंटेंट के लिए उम्र के हिसाब से रेटिंग जरूरी

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट को उम्र के हिसाब से वर्गीकृत करना भी जरूरी है। नियमों के तहत प्लेटफॉर्म को कंटेंट की श्रेणी और उसकी प्रकृति बताने वाली जानकारी देनी होती है, ताकि दर्शक यह तय कर सकें कि कौन-सा कंटेंट उनके या उनके बच्चों के लिए उपयुक्त है।

इसके तहत U, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+ और A जैसी आयु आधारित श्रेणियों का इस्तेमाल किया जाता है। प्लेटफॉर्म को कंटेंट की शुरुआत में जरूरी चेतावनी और जानकारी भी दिखानी होती है। बच्चों की पहुंच को नियंत्रित करने के लिए पैरेंटल कंट्रोल जैसे उपाय भी जरूरी हैं।

सरकार समय-समय पर जारी करती है एडवाइजरी

मंत्रालय ओटीटी प्लेटफॉर्म को नियमों के पालन के लिए समय-समय पर एडवाइजरी भी जारी करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2025 को गैंगस्टर और अपराधियों पर आधारित फिल्मों, वेब सीरीज, बायोपिक और डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी।

इसके अलावा 8 मई 2025 को पाकिस्तान से जुड़े कंटेंट को बंद करने, 22 अप्रैल 2025 को दिव्यांगजनों के अधिकारों और आईटी नियमों के पालन तथा 19 फरवरी 2025 को भारतीय कानूनों और आचार संहिता का पालन करने से जुड़ी एडवाइजरी जारी की गई थी।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़े कंटेंट पर शिकायत मिलने पर उसे सीधे संबंधित प्लेटफॉर्म को भेजा जा सकता है या नियमों के तहत उसका जवाब दिया जा सकता है। इसके अलावा आईटी कानून की धारा 69A के तहत कुछ खास कानूनी आधारों पर कंटेंट को ब्लॉक करने की अलग व्यवस्था भी है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के नोडल अधिकारियों की व्यवस्था बनाई गई है।

कुल मिलाकर, मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म की निगरानी के लिए शिकायत अधिकारी से लेकर स्व-नियामक संस्थाओं और केंद्र सरकार तक तीन स्तरों की व्यवस्था मौजूद है। इसके साथ ही उम्र आधारित रेटिंग, बच्चों के लिए नियंत्रण, एडवाइजरी और आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। दर्शकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि किसी कंटेंट को लेकर शिकायत करने की शुरुआत संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी से की जा सकती है।

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5G की रफ्तार, ग्राहकों का भरोसा और बढ़ता मुनाफा, जियो ने यूं बदली दूसरी तिमाही की तस्वीर

जियो प्लेटफॉर्म्स ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन किया है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 31 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 31 October, 2026
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जियो प्लेटफॉर्म्स ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन किया है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का परिचालन से मिलने वाला राजस्व सालाना आधार पर 11.4 फीसदी बढ़कर 40,475 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कंपनी का शुद्ध मुनाफा 13.7 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 8,387 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या 54.24 करोड़ हो गई, जबकि 5G सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या 30 करोड़ के पार पहुंच गई।

कंपनी ने 30 अक्टूबर को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के नतीजे जारी किए। नतीजों के मुताबिक, पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व 36,332 करोड़ रुपये था, जो इस बार बढ़कर 40,475 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कंपनी का कुल राजस्व 11.3 फीसदी बढ़कर 47,485 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की दूसरी तिमाही में यह 42,652 करोड़ रुपये था।

EBITDA में 16.6 फीसदी की बढ़ोतरी

कंपनी के कामकाज से होने वाली कमाई यानी EBITDA में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में EBITDA 16.6 फीसदी बढ़कर 21,879 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 18,757 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 54.1 फीसदी हो गया, जो एक साल पहले 51.6 फीसदी था। यानी इसमें 2.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई।

EBITDA किसी कंपनी की ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई को दर्शाता है। इसे कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन को समझने का एक अहम पैमाना माना जाता है।

पहली छमाही में भी दोहरे अंकों में बढ़ा राजस्व

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान जियो प्लेटफॉर्म्स का परिचालन राजस्व 11.6 फीसदी बढ़कर 79,648 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 71,364 करोड़ रुपये था।

इस दौरान कंपनी का EBITDA 42,744 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की पहली छमाही में यह 36,892 करोड़ रुपये था। वहीं, पहली छमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 16,151 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 14,485 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

54.24 करोड़ हुआ जियो का ग्राहक आधार

ग्राहकों की संख्या के लिहाज से भी कंपनी ने बढ़त दर्ज की है। सितंबर 2026 के अंत तक जियो का कुल ग्राहक आधार बढ़कर 54.24 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 50.64 करोड़ थी। यानी सालाना आधार पर कंपनी के ग्राहक आधार में करीब 3.6 करोड़ की बढ़ोतरी हुई।

दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी ने 91 लाख नए ग्राहक जोड़े। वहीं, 5G सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़कर 30 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 23.44 करोड़ थी। कंपनी ने बताया कि तिमाही के दौरान उसके 5G ग्राहक आधार में करीब 1.5 करोड़ की बढ़ोतरी हुई।

कंपनी के मुताबिक, चीन के बाहर वह दुनिया की सबसे बड़ी 5G ऑपरेटर है।

ARPU बढ़कर 218.8 रुपये हुआ

जियो के प्रति ग्राहक औसत मासिक कमाई यानी ARPU में भी बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तिमाही में यह 3.5 फीसदी बढ़कर 218.8 रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 211.4 रुपये था।

इसके साथ ही ग्राहकों की डेटा खपत भी बढ़ी है। कंपनी के मुताबिक, प्रति ग्राहक औसत मासिक डेटा इस्तेमाल 44.2 GB तक पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 38.7 GB था। इससे पता चलता है कि जियो के ग्राहक पहले के मुकाबले ज्यादा डेटा इस्तेमाल कर रहे हैं।

होम ब्रॉडबैंड और एयरफाइबर में भी बढ़त

कंपनी ने होम ब्रॉडबैंड कारोबार में भी विस्तार किया है। सितंबर 2026 के अंत तक जियो के होम ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल यह संख्या 2.27 करोड़ थी।

वहीं, एयरफाइबर ग्राहकों की संख्या भी बढ़कर 1.51 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 96 लाख थी। कंपनी के लिए होम ब्रॉडबैंड और एयरफाइबर कारोबार भविष्य में कमाई के नए अवसर तैयार कर सकते हैं।

कैपिटल खर्च के बाद भी बेहतर रही कमाई

कंपनी की प्रस्तुति के मुताबिक, EBITDA में से नकद पूंजीगत खर्च घटाने के बाद बची रकम यानी EBITDA Less Cash Capex दूसरी तिमाही में 15,449 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान अवधि में यह 10,129 करोड़ रुपये थी। इस तरह इसमें 52.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

वहीं, 30 सितंबर 2026 के अंत में कंपनी का शुद्ध कर्ज 8,822 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 41,161 करोड़ रुपये था। कंपनी का नेट लीवरेज अनुपात भी घटकर 0.10 गुना रह गया, जो पिछले साल 0.55 गुना था।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि सितंबर के अंत का कर्ज का आंकड़ा कंपनी की अक्टूबर में पूरी हुई शेयर बाजार में लिस्टिंग और आईपीओ से मिली रकम को शामिल नहीं करता। इसलिए इसे आईपीओ से मिली रकम के बाद की कर्ज स्थिति नहीं समझना चाहिए।

डिजिटल सेवाओं और नए कारोबार पर भी जोर

जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार अब केवल मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। कंपनी डिजिटल सेवाओं, कंटेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, गेमिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और एंटरप्राइज सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है।

कंपनी की पेशकश में जियो टीवी प्लस और जियोगेम्स जैसी सेवाएं शामिल हैं। वहीं, जियोपीसी के जरिए क्लाउड आधारित कंप्यूटर सुविधा देने पर भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वित्तीय सेवाओं और क्लाउड से जुड़े कारोबार में भी अवसर तलाश रही है।

कुल मिलाकर, दूसरी तिमाही के नतीजे बताते हैं कि जियो प्लेटफॉर्म्स के राजस्व और मुनाफे में बढ़ोतरी के साथ उसके 5G, होम ब्रॉडबैंड और डिजिटल सेवाओं का कारोबार भी आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में कंपनी के लिए यह देखना अहम होगा कि वह अपने बड़े ग्राहक आधार और बढ़ते डेटा इस्तेमाल को किस तरह कमाई के नए अवसरों में बदलती है।

 

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नेपाल पहुंचा JioHotstar, DGO के साथ की साझेदारी

भारत के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म JioHotstar ने नेपाल में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए स्थानीय स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म DGO के साथ साझेदारी की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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भारत के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म JioHotstar ने नेपाल में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए स्थानीय स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म DGO के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत नेपाल के दर्शक DGO के जरिए जियोहॉटस्टार की फिल्में, ओरिजिनल सीरीज, टीवी कार्यक्रम, रियलिटी शो और बच्चों से जुड़ा कंटेंट देख सकेंगे।

इस सेवा का सब्सक्रिप्शन DGO के मोबाइल और प्लस प्लान के तहत मिलेगा। इसकी शुरुआती कीमत 249 नेपाली रुपये प्रति माह रखी गई है। इस कदम के साथ जियोहॉटस्टार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने विस्तार को आगे बढ़ाया है। इससे पहले प्लेटफॉर्म ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर और मध्य पूर्व व उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा चुका है।

‘12वीं फेल’ से ‘स्पेशल ऑप्स’ तक मिलेगा कंटेंट

नेपाल में जियोहॉटस्टार के कंटेंट कैटलॉग में कई लोकप्रिय भारतीय फिल्में और सीरीज शामिल होंगी। इनमें ‘भेड़िया’, ‘12वीं फेल’, ‘केसरी चैप्टर 2’, ‘सुपर 30’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

इसके अलावा दर्शकों को जियोहॉटस्टार की ओरिजिनल सीरीज भी देखने को मिलेंगी। इनमें ‘हुंकार’, ‘प्रीतम एंड पेड्रो’, ‘अली बाबा और 40 भूत’, ‘स्पेशल ऑप्स’ और ‘चिरैया’ जैसे नाम शामिल हैं।

प्लेटफॉर्म पर ‘बिग बॉस’, ‘कॉफी विद करण’ और ‘इंडिया का टॉप 1 परसेंट’ जैसे लोकप्रिय टीवी और रियलिटी शो भी उपलब्ध होंगे।

क्षेत्रीय कंटेंट को भी इस पेशकश में जगह दी गई है। ‘बेथलेहम कुडुंबा यूनिट’ और ‘थुडक्कम’ जैसे क्षेत्रीय शीर्षक हिंदी में उपलब्ध होंगे।

क्या हैं DGO के सब्सक्रिप्शन प्लान?

नेपाल में दर्शकों के लिए DGO ने दो तरह के प्लान रखे हैं। इनकी कीमत इस प्रकार है:

प्लान

एक महीने

तीन महीने

एक साल

मोबाइल

NPR 249

NPR 699

NPR 2,499

प्लस

NPR 399

NPR 899

NPR 2,699

दर्शक DGO की वेबसाइट www.watchdgo.com या उसके ऐप के जरिए सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं। यह ऐप आईओएस, एंड्रॉयड, एंड्रॉयड टीवी और स्मार्ट टीवी पर उपलब्ध है।

जियोहॉटस्टार का कंटेंट DGO पर पहले से मौजूद नेपाली फिल्मों और कार्यक्रमों के साथ मिलेगा। DGO की योजना हर हफ्ते एक नई नेपाली फिल्म जोड़ने की भी है।

खेल प्रेमियों को भी मिलेगा फायदा

इस साझेदारी में मनोरंजन के साथ खेलों को भी जगह दी गई है। DGO के मौजूदा सब्सक्रिप्शन के तहत दर्शक ला लीगा (LaLiga), मोटोजीपी (MotoGP) और काराबाओ कप (Carabao Cup) जैसे अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का लाइव प्रसारण देख सकेंगे। इनके लिए अलग से भुगतान नहीं करना होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन आयोजनों की कवरेज से जुड़ी विस्तृत शर्तें नहीं बताई गई हैं।

जियोहॉटस्टार के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मिलेगी मजबूती

जियोस्टार में अंतरराष्ट्रीय कारोबार के प्रमुख अमित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी भारत में तैयार किए गए अपने कंटेंट और विदेशों में भारतीय मनोरंजन की मांग को एक साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने नेपाल को इस विस्तार का अहम बाजार बताया, जहां कई पीढ़ियों से भारतीय फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों को पसंद किया जाता रहा है।

उनके मुताबिक, DGO के साथ साझेदारी से नेपाली दर्शकों को स्थानीय प्लेटफॉर्म की सुविधा के साथ भारतीय मनोरंजन की बड़ी पेशकश मिलेगी।

वहीं, DGO के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोशन निरौला ने इस साझेदारी को प्लेटफॉर्म और नेपाल के मनोरंजन उद्योग के लिए अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय मनोरंजन, नई नेपाली फिल्मों और अंतरराष्ट्रीय खेलों को एक ही सब्सक्रिप्शन के तहत उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

स्थानीय प्लेटफॉर्म के साथ विस्तार की रणनीति

नेपाल में शुरुआत जियोहॉटस्टार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी विदेशी बाजारों में स्थानीय प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी कर रही है। इससे उसे हर देश में अलग से अपना प्लेटफॉर्म खड़ा करने के बजाय वहां पहले से मौजूद सेवाओं के जरिए दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिलता है।

नेपाल में भारतीय फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों की लोकप्रियता को देखते हुए यह साझेदारी जियोहॉटस्टार को नए दर्शकों तक पहुंचने में मदद कर सकती है। साथ ही, DGO को भी अपने मौजूदा नेपाली कंटेंट के साथ भारतीय मनोरंजन और अंतरराष्ट्रीय खेलों की पेशकश करने का मौका मिलेगा। 

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Amazon Prime Video पर लगा जुर्माना, ग्राहक को लौटाने होंगे 9499 रुपये

एमेजॉन प्राइम वीडियो को ग्राहक की पेड सालाना मेंबरशिप के दौरान विज्ञापन दिखाना महंगा पड़ा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
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एमेजॉन प्राइम वीडियो को ग्राहक की पेड सालाना मेंबरशिप के दौरान विज्ञापन दिखाना महंगा पड़ा है। हैदराबाद की जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए प्लेटफॉर्म को ग्राहक को कुल 9,499 रुपये देने का आदेश दिया है। इसमें सालाना सब्सक्रिप्शन के 1,499 रुपये का रिफंड, 5,000 रुपये मुआवजा और 3,000 रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर शामिल हैं।

आयोग का यह आदेश 1 अक्टूबर 2026 का है। मामले के मुताबिक, कोंढोबा राजेश नाम के एक वकील ने 11 मई 2025 को 1,499 रुपये में एमेजॉन प्राइम की सालाना मेंबरशिप ली थी। शिकायत और उससे जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, इस पैकेज में मोबाइल फोन, टीवी और लैपटॉप पर प्राइम वीडियो का कंटेंट 12 महीने तक बिना विज्ञापनों के देखने की सुविधा शामिल थी।

सब्सक्रिप्शन खत्म होने से पहले दिखने लगे विज्ञापन

राजेश ने शिकायत में कहा कि शुरुआत में प्राइम वीडियो पर विज्ञापन नहीं आते थे, लेकिन 17 जून 2025 से विज्ञापन दिखने लगे, जबकि उनकी सालाना मेंबरशिप अभी खत्म नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विज्ञापनों के बिना कंटेंट देखने के लिए उनसे अलग से 699 रुपये मांगे गए।

राजेश ने ग्राहक सहायता टीम से संपर्क कर पहले वाली सुविधा बहाल करने या सब्सक्रिप्शन की पूरी रकम लौटाने की मांग की। हालांकि, शिकायत के मुताबिक, प्लेटफॉर्म ने दोनों मांगें स्वीकार नहीं कीं और केवल इस्तेमाल की अवधि के हिसाब से आंशिक रिफंड देने की पेशकश की।

राजेश का तर्क था कि जब उन्होंने सालाना मेंबरशिप खरीदी थी, तब विज्ञापन-मुक्त स्ट्रीमिंग उस पैकेज का हिस्सा थी। सब्सक्रिप्शन की अवधि पूरी होने से पहले इस सुविधा को हटाना और इसे जारी रखने के लिए अतिरिक्त पैसे मांगना तय शर्तों में बदलाव था।

आयोग ने क्या कहा?

आयोग की अध्यक्ष बी. उमा वेंकट सुब्बा लक्ष्मी और सदस्य सी. लक्ष्मी प्रसन्ना व बी. राजी रेड्डी की पीठ ने सब्सक्रिप्शन से जुड़े दस्तावेजों और शिकायत की जांच की।

आयोग ने पाया कि विज्ञापन उस समय दिखाए जाने लगे, जब ग्राहक की सालाना मेंबरशिप अभी चालू थी। साथ ही, प्लेटफॉर्म यह साबित नहीं कर पाया कि मेंबरशिप खरीदते समय ग्राहक को बताया गया था कि पेड अवधि के दौरान विज्ञापन-मुक्त सुविधा वापस ली जा सकती है या इसके लिए अलग से शुल्क देना पड़ सकता है।

एमेजॉन की ओर से आयोग में न तो कोई प्रतिनिधि पेश हुआ और न ही लिखित जवाब दाखिल किया गया। इसके बाद कंपनी को जवाब देने का अधिकार नहीं दिया गया और आयोग ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर मामले का फैसला किया।

आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि तय विज्ञापन-मुक्त अवधि के दौरान विज्ञापन दिखाना और उस सुविधा को जारी रखने के लिए अतिरिक्त भुगतान मांगना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। इसके बाद आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।

45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान

आयोग ने प्लेटफॉर्म को 45 दिनों के भीतर 1,499 रुपये का सब्सक्रिप्शन शुल्क लौटाने, 5,000 रुपये मुआवजा देने और 3,000 रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर चुकाने का निर्देश दिया है। इस तरह कुल भुगतान 9,499 रुपये होगा।

गौरतलब है कि शिकायतकर्ता ने मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 25,000 रुपये मुआवजे और मुकदमे के खर्च के लिए 10,000 रुपये की मांग की थी। हालांकि, आयोग ने इससे कम रकम देने का आदेश दिया। 

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Netflix-Hoichoi की साझेदारी, बंगाली वेब सीरीज अब हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी होंगी रिलीज

ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix ने बंगाली स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Hoichoi के साथ साझेदारी की है।

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Published - Saturday, 24 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
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ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix ने बंगाली स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Hoichoi के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत Hoichoi की आने वाली बंगाली वेब सीरीज अगले दो साल में Netflix पर हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में भी रिलीज की जाएंगी। ये सीरीज अपनी मूल भाषा बंगाली में Hoichoi पर भी उपलब्ध होंगी।

इस समझौते में Hoichoi की पहले से रिलीज हो चुकी 14 सीरीज भी शामिल हैं। इनमें ‘Eken Babu’, ‘Sampurna’, ‘Lajja’, ‘Madam Inspector’, ‘Mahanagar’ और ‘Parineeta: A Love Story’ जैसे टाइटल शामिल हैं। इन सीरीज में क्राइम, जासूसी, हॉरर और रोमांस जैसे अलग-अलग विषय देखने को मिलते हैं।

6 नवंबर को रिलीज होगी पहली नई सीरीज

इस साझेदारी के तहत आने वाली पहली नई सीरीज ‘The Cursed Temple of Kauriburi’ होगी। यह हॉरर सीरीज 6 नवंबर को रिलीज होगी। इसमें जीतू कमल, सोलंकी रॉय और पाओली दाम मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। सीरीज की कहानी लोककथाओं और डरावने रहस्य पर आधारित है।

Hoichoi की कहानियों पर बनेंगी नई सीरीज

इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां Hoichoi की चुनिंदा ओरिजिनल सीरीज पर आधारित नए शो भी विकसित करेंगी। इनका निर्माण Hoichoi Studios करेगा। हालांकि, इन नई सीरीज की कहानी, कलाकारों और रिलीज से जुड़ी जानकारी अभी साझा नहीं की गई है।

क्षेत्रीय कंटेंट को मिलेगा बड़ा दर्शक वर्ग

Netflix के साथ यह साझेदारी Hoichoi के बंगाली कंटेंट को बंगाली भाषी दर्शकों से आगे ले जाने में मदद कर सकती है। हिंदी, तमिल और तेलुगु में उपलब्धता से इन कहानियों को देश के दूसरे हिस्सों में भी दर्शक मिल सकेंगे।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर क्षेत्रीय भाषा की कहानियों को दूसरी भाषाओं में पेश करने का चलन बढ़ रहा है। ऐसे में यह साझेदारी Hoichoi के कंटेंट की पहुंच बढ़ाने के साथ Netflix के भारतीय भाषाओं वाले कंटेंट को भी मजबूत कर सकती है। 

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Jioप्लेटफॉर्म्स के IPO ने बनाया रिकॉर्ड, एक करोड़ से ज्यादा मिले आवेदन

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने आवेदन के मामले में नया रिकॉर्ड बना दिया है। 23 अक्टूबर को बोली लगाने की समयसीमा खत्म होने से करीब पांच घंटे पहले ही इस आईपीओ को 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे।

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Published - Saturday, 24 October, 2026
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Saturday, 24 October, 2026
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जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ ने आवेदन के मामले में नया रिकॉर्ड बना दिया है। 23 अक्टूबर को बोली लगाने की समयसीमा खत्म होने से करीब पांच घंटे पहले ही इस आईपीओ को 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे। इस तरह कंपनी ने वारी एनर्जीज (Waaree Energies) के करीब 97 लाख आवेदनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, यह किसी आईपीओ के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवेदन आंकड़ा है।

इससे पहले बजाज हाउसिंग फाइनेंस और भारत कोकिंग कोल के आईपीओ में करीब 90-90 लाख आवेदन आए थे। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में बोली लगाने की प्रक्रिया उस समय जारी थी, इसलिए आवेदन की अंतिम संख्या और बढ़ने की संभावना थी।

आईपीओ को मिला 7.5 गुना सब्सक्रिप्शन

23 अक्टूबर को दोपहर 12:40 बजे तक जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को कुल 7.5 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। यानी कंपनी की ओर से सार्वजनिक पेशकश में उपलब्ध कराए गए शेयरों की तुलना में 7.5 गुना बोलियां मिली थीं। उस समय उपलब्ध 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने बड़ी संख्या में बोलियां लगाई थीं।

निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों में संस्थागत निवेशकों की मांग सबसे ज्यादा रही। वहीं, गैर-संस्थागत और खुदरा निवेशकों की ओर से भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली।

संस्थागत निवेशकों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी

आईपीओ में निवेशकों की श्रेणी के हिसाब से सब्सक्रिप्शन के आंकड़े इस प्रकार रहे:

  • क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs): इनके लिए आरक्षित हिस्से को 16.27 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इस श्रेणी के निवेशकों ने 4.9 करोड़ शेयरों के मुकाबले 79.75 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं।
  • गैर-संस्थागत निवेशक (NIIs): इनके हिस्से को 10.44 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इस श्रेणी में 3.64 करोड़ शेयरों के मुकाबले 38.04 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां आईं।
  • खुदरा निवेशक (Retail Investors): इनके लिए आरक्षित हिस्से को 2.14 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। खुदरा निवेशकों ने 8.5 करोड़ शेयरों के मुकाबले 18.18 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि आईपीओ में सबसे ज्यादा मांग बड़े संस्थागत निवेशकों की ओर से आई। हालांकि, खुदरा निवेशकों ने भी अपने लिए आरक्षित शेयरों से दोगुने से ज्यादा शेयरों के लिए आवेदन किया।

100 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ था आईपीओ

रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को बोली शुरू होने के महज 100 मिनट के भीतर ही जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को पूरा सब्सक्रिप्शन मिल गया था। उस समय इसे भारत के बड़े आईपीओ में सबसे तेजी से पूरी तरह सब्सक्राइब होने वाले इश्यू के तौर पर बताया गया था। आखिरी दिन 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिलने से इस आईपीओ ने एक और बड़ा आंकड़ा पार कर लिया।

Hyundai और LG के आईपीओ से कैसे अलग है Jio का इश्यू?

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ हाल के कुछ बड़े आईपीओ से इस मामले में अलग है कि यह फ्रेश इश्यू है। हुंडई मोटर इंडिया और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के आईपीओ में मुख्य रूप से मौजूदा शेयरधारकों ने अपने शेयर बेचे थे।

फ्रेश इश्यू में कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाती है और इससे मिलने वाली रकम कंपनी को मिलती है। इसके उलट, ऑफर फॉर सेल (OFS) में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं और बिक्री की रकम उन्हें मिलती है।

इसलिए जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को कंपनी के लिए सीधे पूंजी जुटाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

एंकर निवेशकों से पहले ही जुटाए 8,109.85 करोड़ रुपये

सार्वजनिक आईपीओ खुलने से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स ने 212 एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित करके 8,109.85 करोड़ रुपये जुटाए थे। एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें आईपीओ खुलने से पहले तय प्रक्रिया के तहत शेयर आवंटित किए जाते हैं।

कंपनी ने शेयरों का मूल्य दायरा 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर रखा था। एंकर निवेशकों को ऊपरी मूल्य यानी 1,119 रुपये प्रति शेयर पर शेयर आवंटित किए गए।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, एंकर निवेशकों की ओर से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की मांग आई थी, जो उनके लिए उपलब्ध आवंटन से 30 गुना से ज्यादा थी। सार्वजनिक आईपीओ के दौरान मिली बोलियों को मिलाकर कुल मांग करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।

केवल सार्वजनिक इश्यू में करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं। हालांकि, ये आंकड़े निवेशकों की ओर से लगाई गई बोलियों की कुल रकम बताते हैं, न कि कंपनी की ओर से वास्तव में जुटाई गई पूंजी।

28 अक्टूबर को शेयर बाजार में लिस्टिंग की उम्मीद

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 23 अक्टूबर को समाप्त होनी थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कंपनी के शेयरों की बाजार में लिस्टिंग 28 अक्टूबर को प्रस्तावित थी। लिस्टिंग के बाद निवेशक शेयर बाजार में इन शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे।

1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिलना आईपीओ के लिए एक बड़ा आंकड़ा है, लेकिन निवेशकों की दिलचस्पी को समझने के लिए केवल आवेदन संख्या ही काफी नहीं है। अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े, शेयरों का आवंटन और लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन भी अहम होगा।

फिलहाल, उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ में आवेदन का नया रिकॉर्ड बनाया है। संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग और खुदरा निवेशकों की भागीदारी ने इस इश्यू को बाजार की प्रमुख गतिविधियों में शामिल कर दिया है। 

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फ्री OTT या पेड सब्सक्रिप्शन: दर्शक किस मॉडल को कर रहे हैं ज्यादा पसंद?

भारत में OTT बाजार का विस्तार जारी है, लेकिन अब इस कारोबार के सामने एक अहम सवाल है कि दर्शक मनोरंजन के लिए पैसे खर्च करना चाहते हैं या विज्ञापन देखकर मुफ्त कंटेंट देखना पसंद करते हैं।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 23 October, 2026
Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
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भारत में OTT बाजार का विस्तार जारी है, लेकिन अब इस कारोबार के सामने एक अहम सवाल है कि दर्शक मनोरंजन के लिए पैसे खर्च करना चाहते हैं या विज्ञापन देखकर मुफ्त कंटेंट देखना पसंद करते हैं। OTT कंपनियों के लिए यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी कमाई का आधार केवल सब्सक्रिप्शन नहीं, बल्कि विज्ञापन और दर्शकों को लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखना भी है।

सितंबर 2026 में जारी ऑरमैक्स मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सक्रिय पेड OTT सब्सक्रिप्शन की संख्या 2026 में 17.26 करोड़ रहने का अनुमान है। यह 2025 के 14.82 करोड़ के मुकाबले 16 फीसदी अधिक है। इन सब्सक्रिप्शन में टेलीकॉम कंपनियों के बंडल और एग्रीगेटर के जरिये मिलने वाली सेवाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट का सर्वेक्षण जून-जुलाई 2026 में 15,000 लोगों के बीच किया गया था।

यह आंकड़ा बताता है कि पेड OTT की पहुंच बढ़ रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में 17.26 करोड़ अलग-अलग लोग सब्सक्रिप्शन के लिए भुगतान कर रहे हैं। एक ही व्यक्ति के पास कई सेवाओं की सदस्यता हो सकती है और कुछ सेवाएं टेलीकॉम पैकेज में भी मिलती हैं।

66.49 करोड़ लोगों तक पहुंचा ऑनलाइन वीडियो

ऑरमैक्स मीडिया की इसी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन वीडियो देखने वाले दर्शकों की संख्या 2026 में 66.49 करोड़ पहुंच गई है। 2025 में यह संख्या 60.12 करोड़ थी। इस तरह दर्शकों के आधार में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट में उस व्यक्ति को OTT दर्शक माना गया है, जिसने पिछले एक महीने में कम से कम एक ऑनलाइन वीडियो देखा हो। इसमें मुफ्त और पेड, दोनों तरह का कंटेंट शामिल है। इसलिए 66.49 करोड़ दर्शकों को पेड OTT सब्सक्राइबर्स कहना सही नहीं होगा।

यह अंतर बाजार को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन वीडियो देखने वालों का बड़ा वर्ग मुफ्त वीडियो से भी जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर, पेड सेवाओं के सब्सक्राइबर खास फिल्मों, वेब सीरीज, खेलों और दूसरे प्रीमियम कंटेंट के लिए भुगतान कर सकते हैं। इससे पता चलता है कि OTT कंपनियों के सामने केवल दर्शकों की संख्या बढ़ाने की चुनौती नहीं है। उन्हें यह भी तय करना है कि कितने दर्शकों को मुफ्त कंटेंट के जरिये विज्ञापन दिखाए जाएं और कितने दर्शक पेड सेवाओं के लिए भुगतान करने को तैयार हैं।

मुफ्त मॉडल में विज्ञापन से कमाई का मौका

मुफ्त OTT मॉडल को एवीओडी (AVOD) कहा जाता है। इसमें दर्शक वीडियो देखने के लिए सीधे सब्सक्रिप्शन फीस नहीं देता। इसके बदले प्लेटफॉर्म कंटेंट के पहले, बीच में या उसके आसपास विज्ञापन दिखाकर कमाई करता है। इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्लेटफॉर्म उन दर्शकों तक भी पहुंच सकता है, जो हर महीने सब्सक्रिप्शन का खर्च नहीं उठाना चाहते या भुगतान नहीं करना चाहते। हालांकि, दर्शकों की संख्या बढ़ने से विज्ञापन की कमाई अपने आप नहीं बढ़ती। इसके लिए विज्ञापनदाताओं की मांग, विज्ञापन की कीमत और दर्शकों की भागीदारी भी जरूरी है।

सितंबर 2026 में रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट ने भारत में माइक्रोड्रामा बाजार के जरिये इस अवसर को समझाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोड्रामा के लिए संभावित दर्शक वर्ग 25 से 28 करोड़ लोगों का है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में औसतन 1.5 से 1.7 करोड़ लोग हर महीने इसके लिए भुगतान कर रहे थे।

रेडसीर का अनुमान है कि माइक्रोड्रामा से विज्ञापन की कमाई वित्त वर्ष 2026 के करीब 24 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2032 तक 5,000 से 5,500 करोड़ रुपये हो सकती है। यह भविष्य का अनुमान है, सितंबर-अक्टूबर 2026 की वास्तविक विज्ञापन आय नहीं। यह आंकड़ा पूरे OTT बाजार का भी नहीं, बल्कि माइक्रोड्रामा श्रेणी का है।

इससे संकेत मिलता है कि विज्ञापन आधारित मॉडल छोटे वीडियो और धारावाहिक कहानियों वाले कंटेंट में कमाई का नया रास्ता बन सकता है।

पेड सब्सक्रिप्शन की कीमत भी है अहम

पेड OTT मॉडल में दर्शक हर महीने या साल के हिसाब से भुगतान करता है। इसके बदले उसे प्लेटफॉर्म के प्लान के अनुसार फिल्में, वेब सीरीज, खेल और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन दर्शक किसी सेवा के लिए कितना खर्च करेगा, यह उसकी जरूरत, बजट और कंटेंट की पसंद पर निर्भर करता है।

12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित कीमतों की तुलना के अनुसार, जियोहॉटस्टार मोबाइल का शुरुआती प्लान 79 रुपये प्रति माह, नेटफ्लिक्स मोबाइल का 149 रुपये, एमेजॉन प्राइम का 299 रुपये और सोनीलिव प्रीमियम का 399 रुपये प्रति माह है। ये शुरुआती प्लान की कीमतें हैं और सुविधाओं में अंतर हो सकता है।

मसलन, जियोहॉटस्टार के सबसे सस्ते मोबाइल प्लान में विज्ञापन आते हैं और यह मोबाइल डिवाइस तक सीमित है। नेटफ्लिक्स के भारतीय प्लान विज्ञापन रहित हैं। एमेजॉन प्राइम वीडियो में विज्ञापन आते हैं, जबकि विज्ञापन रहित देखने के लिए अतिरिक्त भुगतान का विकल्प उपलब्ध है। सोनीलिव के प्रीमियम प्लान में भी कुछ तरह के कंटेंट पर विज्ञापन दिख सकते हैं।

इसलिए केवल कीमत देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कौन-सा प्लान सबसे बेहतर है। दर्शक को यह भी देखना होगा कि वह किस डिवाइस पर कंटेंट देखना चाहता है, उसे कितनी स्क्रीन की जरूरत है और क्या उसके पसंदीदा कार्यक्रम उस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

हाइब्रिड मॉडल से बढ़ सकती है कमाई

OTT बाजार में विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन को साथ लेकर चलने वाला मॉडल भी महत्वपूर्ण हो रहा है। इसे हाइब्रिड मॉडल कहा जा सकता है। इसमें प्लेटफॉर्म मुफ्त विज्ञापन आधारित कंटेंट के साथ पेड प्लान भी उपलब्ध कराता है।

इसका फायदा यह है कि कम खर्च करना चाहने वाले दर्शक विज्ञापन देखकर वीडियो देख सकते हैं, जबकि खास कंटेंट या अधिक सुविधाएं चाहने वाले दर्शक सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं।

रेडसीर की अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत के माइक्रोड्रामा कारोबार की हर 100 रुपये की कमाई में करीब 99 रुपये सब्सक्रिप्शन से और एक रुपये से भी कम विज्ञापन से आया। रिपोर्ट का अनुमान है कि विज्ञापन की कमाई आगे चलकर इस श्रेणी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस आंकड़े को पूरे OTT उद्योग पर लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन यह दिखाता है कि माइक्रोड्रामा जैसे बाजार में विज्ञापन की कमाई बढ़ाने की गुंजाइश है। इसके लिए प्लेटफॉर्म को दर्शकों की संख्या के साथ विज्ञापनदाताओं का भरोसा भी बढ़ाना होगा।

बड़ी स्क्रीन पर बढ़ रही ऑनलाइन वीडियो की पहुंच

OTT बाजार में एक और बदलाव कनेक्टेड टीवी के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ा है। ऑरमैक्स मीडिया की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कनेक्टेड टीवी पर ऑनलाइन वीडियो देखने वाले दर्शकों की संख्या 20.69 करोड़ पहुंच गई है। 2025 में यह संख्या 12.92 करोड़ थी। यानी एक साल में करीब 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

यह बदलाव विज्ञापनदाताओं और स्ट्रीमिंग कंपनियों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। बड़ी स्क्रीन पर फिल्में, वेब सीरीज और दूसरे कार्यक्रम देखने वाले दर्शकों तक विज्ञापन पहुंचाने के नए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, कनेक्टेड टीवी पर वीडियो देखने वाले सभी लोग पेड सब्सक्राइबर नहीं हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में फास्ट (FAST) चैनलों का अनुमानित दर्शक वर्ग 3.52 करोड़ है। इन चैनलों पर इंटरनेट के जरिये लगातार कंटेंट दिखाया जाता है और कमाई मुख्य रूप से विज्ञापन से होती है। यह मॉडल उन दर्शकों के लिए एक विकल्प है, जो पारंपरिक टीवी की तरह लगातार कार्यक्रम देखना चाहते हैं, लेकिन इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

सब्सक्राइबर को बनाए रखना भी बड़ी चुनौती

OTT प्लेटफॉर्म के लिए नए सब्सक्राइबर जोड़ने के साथ पुराने सब्सक्राइबरों को बनाए रखना भी जरूरी है। कारोबार में इसे चर्न कहा जाता है, यानी वे सब्सक्राइबर जो सब्सक्रिप्शन बंद कर देते हैं या सेवा का इस्तेमाल छोड़ देते हैं।

उदाहरण के लिए, कोई दर्शक किसी खास फिल्म या क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए एक महीने का सब्सक्रिप्शन ले सकता है। कंटेंट देखने के बाद अगर उसे आगे कुछ खास नहीं मिलता, तो वह अगली अवधि में भुगतान बंद कर सकता है।

ऐसे में प्लेटफॉर्म को बार-बार नए सब्सक्राइबर जोड़ने पर खर्च करना पड़ता है। दूसरी ओर, मुफ्त सेवाओं में भी चुनौती है कि विज्ञापन बहुत ज्यादा होने पर दर्शक वीडियो देखना बंद कर सकते हैं।

सितंबर-अक्टूबर 2026 के उपलब्ध स्रोतों में पूरे भारतीय OTT बाजार के लिए सब्सक्राइबरों के सब्सक्रिप्शन छोड़ने की कोई एक समान, सत्यापित दर नहीं मिली है। इसलिए यह दावा करना सही नहीं होगा कि बाजार में एक निश्चित प्रतिशत सब्सक्राइबर हर महीने सेवा छोड़ रहे हैं।

दोनों मॉडलों की अपनी जगह

सितंबर और अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत में मुफ्त और पेड, दोनों तरह के OTT मॉडल के लिए अवसर मौजूद हैं। सक्रिय पेड सब्सक्रिप्शन में 16 फीसदी की अनुमानित वृद्धि भुगतान आधारित सेवाओं की पहुंच बढ़ने का संकेत देती है। वहीं, माइक्रोड्रामा के लिए रेडसीर के अनुमान बताते हैं कि विज्ञापन आधारित मॉडल भविष्य में अतिरिक्त कमाई का स्रोत बन सकता है।

हालांकि, उपलब्ध आंकड़े यह साबित नहीं करते कि दर्शक मुफ्त मॉडल को पेड मॉडल से ज्यादा पसंद कर रहे हैं या इसका उलटा सच है। इसके लिए दोनों मॉडलों के इस्तेमाल, भुगतान की इच्छा और दर्शकों की पसंद पर तुलनात्मक सर्वेक्षण की जरूरत होगी।

OTT कंपनियों के लिए असली चुनौती यही है कि वे दर्शकों को पसंद का कंटेंट दें, कीमत को उनकी क्षमता के अनुसार रखें और विज्ञापनों से होने वाली कमाई को बढ़ाते हुए देखने का अनुभव खराब न होने दें। आने वाले समय में मुफ्त, पेड और हाइब्रिड मॉडल का साथ-साथ इस्तेमाल ही भारतीय स्ट्रीमिंग बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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Jio Platforms IPO ने एंकर निवेशकों से जुटाए 8110 करोड़, LIC सबसे बड़ा निवेशक

रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ को लेकर निवेशकों में काफी दिलचस्पी देखने को मिल रही है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ को लेकर निवेशकों में काफी दिलचस्पी देखने को मिल रही है। कंपनी ने शेयर बाजार में आम निवेशकों के लिए आईपीओ खुलने से पहले ही एंकर निवेशकों से 8,110 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं। इस निवेश में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) सबसे आगे रहा है। एलआईसी ने कंपनी के शेयरों में करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

नियामकीय जानकारी के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स की आईपीओ समिति और बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स ने एंकर निवेशकों को कुल 7,24,74,066 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। इन शेयरों का आवंटन 1,119 रुपये प्रति शेयर की दर से किया गया है, जो तय मूल्य दायरे का ऊपरी स्तर है। हर शेयर का मूल मूल्य 10 रुपये है, जबकि इसमें 1,109 रुपये का प्रीमियम शामिल है।

LIC ने लगाए करीब 500 करोड़ रुपये

एंकर निवेशकों में एलआईसी को सबसे बड़ा आवंटन मिला है। कंपनी को 44,68,128 शेयर आवंटित किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 499.98 करोड़ रुपये है। एंकर निवेशकों को किए गए कुल शेयर आवंटन में एलआईसी की हिस्सेदारी 6.17 प्रतिशत रही।

एलआईसी के अलावा कई बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और संस्थानों ने भी जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों में निवेश किया है। न्यू वर्ल्ड फंड इंक ने करीब 486.27 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि सिंगापुर सरकार को 340.93 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए गए। वहीं, बीएनपी पारिबा फाइनेंशियल मार्केट्स को 303.25 करोड़ रुपये के शेयर मिले।

कई बड़े वैश्विक निवेशकों ने दिखाई दिलचस्पी

जियो प्लेटफॉर्म्स के एंकर निवेशकों की सूची में दुनिया के कई बड़े निवेश संस्थान शामिल हैं। इनमें कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, ब्लैकरॉक, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट और श्रोडर्स जैसे नाम शामिल हैं।

इसके अलावा, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े सरकारी निवेश संस्थानों ने भी इसमें हिस्सा लिया है। घरेलू म्यूचुअल फंड और बीमा क्षेत्र से जुड़े निवेश संस्थानों ने भी शेयरों के लिए निवेश किया है।

एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें आईपीओ खुलने से पहले शेयर आवंटित किए जाते हैं। इनके निवेश को बाजार में कंपनी के प्रति संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी के संकेत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, इससे आईपीओ की सफलता या शेयर के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं मिलती।

21 अक्टूबर से आम निवेशकों के लिए खुलेगा IPO

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर से आम निवेशकों के लिए खुलेगा और शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है।

एंकर निवेशकों को शेयरों का आवंटन इसी मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर यानी 1,119 रुपये प्रति शेयर पर किया गया है। अब आम निवेशक तय अवधि के दौरान इस आईपीओ में आवेदन कर सकेंगे।

एंकर निवेशकों से जुटाई गई 8,110 करोड़ रुपये की रकम और वैश्विक निवेश संस्थानों की भागीदारी ने इस आईपीओ को लेकर बाजार की दिलचस्पी बढ़ा दी है। हालांकि, आम निवेशकों की प्रतिक्रिया और शेयर बाजार में कंपनी के प्रदर्शन की तस्वीर आईपीओ की सदस्यता और लिस्टिंग के बाद ही स्पष्ट होगी। 

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