दलेर मेहंदी पर नशे में प्रस्तुति देने के आरोप के बाद मीका सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की और विधायक सुबोध उनियाल से स्पष्टीकरण की मांग की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दलेर मेहंदी पर लगे आरोपों को लेकर गायक मीका सिंह (Mika Singh) ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) से बात की है। टिहरी में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक सुबोध उनियाल (Subodh Uniyal) ने दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) पर शराब के नशे में मंच पर प्रस्तुति देने का आरोप लगाया था।
इस विवाद के बाद मीका सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री धामी ने खुद उनसे फोन पर बात की थी। मीका ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि सुबोध उनियाल से एक स्पष्टीकरण वीडियो जारी करवाया जाए और दलेर मेहंदी पर नशे में प्रस्तुति देने का आरोप लगाने के लिए उनसे माफी मंगवाई जाए।
मीका ने मुख्यमंत्री धामी की तारीफ करते हुए कहा कि वह उन्हें अच्छी तरह जानते हैं और उनके प्रति उनके मन में काफी सम्मान है। उन्होंने कहा कि गलतफहमियां हो सकती हैं, लेकिन उन्हें बातचीत और सम्मान के साथ सुलझाया जा सकता है। मीका को उम्मीद है कि इस पहल से विवाद खत्म होगा और दलेर मेहंदी की प्रतिष्ठा भी बनी रहेगी।
Good morning! 🙏❤️ I have immense respect for the Hon’ble Chief Minister of Uttarakhand, @pushkardhami ji. He personally called me regarding the matter involving Daler Bhai, and I truly appreciate his gesture. I know Dhami Saab very well. He is a humble, down-to-earth person, and I have great respect for him. My only humble request to him is to please ask Shri @SubodhUniyal1 ji to make a simple video clarifying his statement and apologising to Daler Bhai for saying that he was drunk during the performance. I believe misunderstandings can happen, but they can also be resolved gracefully. I hope this small gesture will help put the matter to rest and ensure that Daler Bhai’s dignity and reputation are respected. I have faith in Dhami Saab’s understanding and leadership.
— King Mika Singh (@MikaSingh) October 23, 2026
टिहरी में नवरात्रि के एक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान मंत्री सुबोध उनियाल ने उन्हें गाना रोकने के लिए कहा और उन पर नशे में होने का आरोप लगाया। उनियाल का कहना था कि दलेर मेहंदी ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रस्तुति से नवरात्रि के कार्यक्रम और वहां मौजूद लोगों का अपमान हुआ।
सुबोध उनियाल ने यह भी कहा था कि कार्यक्रम के आयोजकों ने दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए थे। उनके मुताबिक, अगर गायक की तबीयत खराब थी तो उन्हें मंच पर प्रस्तुति नहीं देनी चाहिए थी।
ईशा और आकाश अंबानी 35 साल के हो गए हैं। दोनों रिलायंस समूह के प्रमुख उपभोक्ता कारोबार जियो और रिलायंस रिटेल की अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और नीता अंबानी (Nita Ambani) के जुड़वां बच्चे ईशा अंबानी (Isha Ambani) और आकाश अंबानी (Akash Ambani) आज 35 साल के हो गए हैं। 23 अक्टूबर 1991 को जन्मे दोनों अब रिलायंस समूह की अगली पीढ़ी के चेहरे होने के साथ उसके दो बड़े उपभोक्ता कारोबार की कमान भी संभाल रहे हैं।
ईशा और आकाश 2014 में रिलायंस के बोर्ड में शामिल हुए थे। शुरुआती दौर में दोनों का काम समूह के दूरसंचार और रिटेल कारोबार से जुड़ा रहा। समय के साथ उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) में फेसबुक, गूगल और दुनिया की दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के निवेश से जुड़ी चर्चाओं में भी दोनों की भूमिका रही।
जून 2022 में आकाश अंबानी ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम (Reliance Jio Infocomm) के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में व्यावसायिक रूप से शुरू हुई जियो ने सस्ती 4जी सेवा के जरिए भारत के मोबाइल डेटा बाजार में बड़ा बदलाव किया। आकाश शुरुआती दौर से ही जियो के उत्पादों और डिजिटल सेवाओं से जुड़े रहे हैं।
इसके कुछ ही दिनों बाद ईशा अंबानी को रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) की कमान सौंपी गई। यह कारोबार किराना, फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई उपभोक्ता ब्रांडों तक फैला हुआ है। 2022 की रिलायंस की वार्षिक आम बैठक में ईशा ने कंपनी के एफएमसीजी कारोबार में उतरने की घोषणा भी की थी। जियो और रिलायंस रिटेल की ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां भी उनके काम का हिस्सा रही हैं।
ईशा और आकाश की अब तक की यात्रा रिलायंस समूह में हो रहे बदलाव को भी दिखाती है। समूह की नई पीढ़ी ने दूरसंचार, रिटेल और डिजिटल सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली हैं। इसके साथ रिलायंस अपने उपभोक्ता कारोबार का विस्तार कर रहा है।
विज्ञापन और मार्केटिंग की दुनिया के लिए भी ईशा और आकाश के कारोबार खास महत्व रखते हैं। जियो और रिलायंस रिटेल बड़े उपभोक्ता ब्रांडों में शामिल हैं। इन कारोबारों की ब्रांड पोजिशनिंग, साझेदारियों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने से जुड़े फैसले कॉरपोरेट जगत से बाहर भी चर्चा में रहते हैं।
35 साल की उम्र में ईशा और आकाश अब केवल रिलायंस की अगली पीढ़ी नहीं हैं। वे समूह के कई बड़े कारोबारी दांव की जिम्मेदारी संभालने वाली पीढ़ी बन चुके हैं। उनके सामने कारोबार के बड़े स्तर को बनाए रखने के साथ बदलते बाजार और उपभोक्ताओं के बीच अपनी प्रासंगिकता कायम रखने की चुनौती भी है।
सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर डेब्यू करते हुए अपनी संस्मरण पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ की पहली झलक साझा की और निजी जीवन, राजनीति से जुड़े अनुभव बताए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम (Instagram) पर डेब्यू किया है। अपनी पहली पोस्ट में उन्होंने आगामी संस्मरण पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) की पहली झलक साझा की।
79 वर्षीय सोनिया गांधी ने वीडियो के साथ अपनी पहली पोस्ट में लिखा, “नमस्कार सभी को, मैं आप सभी के साथ ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ की पहली झलक साझा करते हुए बेहद आभारी हूं। यह प्यार, कर्तव्य, खोने और अपनेपन की जगह तलाशने की कहानी है। मैं इसे आपके साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं।”
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सोनिया गांधी की किताब की पहली प्रतियां भी अब उनके पास पहुंच गई हैं। प्रकाशकों ने उन्हें पुस्तक की पहली हार्डबैक प्रति भेंट की। इस दौरान उन्हें मिठाई का डिब्बा भी दिया गया। किताब हाथ में लेकर सोनिया गांधी ने तस्वीर खिंचवाई, जबकि आसपास मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उन्हें बधाई दी।
किताब देखते हुए सोनिया गांधी ने उसके पन्ने पलटे और अपनी बेटी प्रियंका गांधी को दिखाते हुए कहा, “बहुत सारी तस्वीरें हैं, प्रियंका।” ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ दुनियाभर में 10 नवंबर को जारी होगी। किताब में सोनिया गांधी ने अपने जीवन, राजनीति में आने और निजी अनुभवों से जुड़े कई पहलुओं को साझा किया है।
सोनिया गांधी ने कहा कि दिल टूटने और नुकसान के अनुभव ने उन्हें राजनीति की सार्वजनिक दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में आने से पहले तक उन्होंने अपनी निजता की पूरी तरह रक्षा की थी।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देशानुसार युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हेमांग जोशी ने 20 अक्टूबर 2026 को संगठन के नए पदाधिकारियों की नियुक्तियों की घोषणा की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘भारतीय जनता युवा मोर्चा’ (BJYM) ने अपूर्वा सिंह को राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी नियुक्त किया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देशानुसार युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हेमांग जोशी ने 20 अक्टूबर 2026 को संगठन के नए पदाधिकारियों की नियुक्तियों की घोषणा की।
अपूर्वा सिंह ने नई जिम्मेदारी सौंपे जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हेमांग जोशी के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता पर भरोसा जताने के लिए वह सभी की आभारी हैं। उन्होंने पार्टी को और मजबूत करने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करने और अधिक से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ने का प्रयास जारी रखने की बात भी कही।
.@BJYM के राष्ट्रीय 'सोशल मीडिया' इंचार्ज का दायित्व सौंपने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी गृहमंत्री @AmitShah जी BJP अध्यक्ष @NitinNabin जी राष्ट्रीय महामंत्री संगठन @blsanthosh जी और BJP युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष @drhemangjoshimp जी का बहुत बहुत आभार। मुझ जैसे सामान्य से कार्यकर्ता पर इतना भरोसा दिखाने के लिए आप सभी का धन्यवाद मैं आप सभी को पूर्ण विश्वास दिलाती हूँ, मैं पार्टी को और ज्यादा मजबूत करने के लिए पूरी ईमानदारी से कार्य करने का परिश्रम करूंगी, और भी युवा हमसे लगातार जुड़ते रहे इसका सदा प्रयास करती रहूंगी, पुनः आप सभी का आभार। 🙏🏻
— Apurva Singh (@iSinghApurva) October 20, 2026
अपूर्वा सिंह ने राजस्थान स्थित बनस्थली विद्यापीठ से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अपूर्वा ने ‘Vibes of Bharat’ की भी शुरुआत की है। यह पॉडकास्ट के माध्यम से सोशल मीडिया पर चलाया जाने वाला एक अभियान है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग पीढ़ियों और विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के लोगों को जोड़ना है। समाचार4मीडिया से बातचीत में अपूर्वा सिंह ने बताया कि वह पहले भी युवाओं के बीच कई कैम्पेन कर चुकी हैं जैसे- देश बदला, अब दिल्ली बदलो; मेरा UP मेरा गौरव; फिर एक बार मोदी सरकार; मैं हूं पुर्वांचली BJP के साथ हूं; सशक्त बिहार आदि।
समाचार4मीडिया की ओर से अपूर्वा सिंह को इस नई जिम्मेदारी के लिए ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं।
महिंद्रा मैनुलाइफ इंश्योरेंस ने निलेश कोठारी को सीएफओ नियुक्त किया है। जीवन बीमा उद्योग में 22 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले कोठारी वित्तीय रणनीति और गवर्नेंस संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
महिंद्रा मैनुलाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड (Mahindra Manulife Insurance Limited) ने निलेश कोठारी को चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर यानी सीएफओ (CFO) नियुक्त किया है। निलेश को जीवन बीमा उद्योग में 22 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्हें वित्तीय रणनीति, पूंजी और सॉल्वेंसी मैनेजमेंट, बिजनेस प्लानिंग, निवेश संचालन, गवर्नेंस और नियामकीय मामलों में व्यापक विशेषज्ञता हासिल है।
महिंद्रा मैनुलाइफ से जुड़ने से पहले वह पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस (PNB MetLife India Insurance) में सीएफओ के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले उन्होंने भारती एक्सा लाइफ (Bharti AXA Life) और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस (SBI Life Insurance) में सीएफओ और वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाएं संभाली हैं।
अपने करियर के दौरान निलेश ने कारोबार की वृद्धि और लाभप्रदता, परिचालन दक्षता तथा बड़े स्तर पर वित्तीय बदलाव से जुड़ी कई पहलों का नेतृत्व किया है। इसमें ईआरपी (ERP) और एनालिटिक्स आधारित आधुनिकीकरण कार्यक्रम भी शामिल रहे हैं।
महिंद्रा मैनुलाइफ में निलेश का फोकस ऐसी वित्तीय व्यवस्था तैयार करने पर रहेगा, जो कंपनी के सफल लॉन्च और लंबे समय तक टिकाऊ विकास को मजबूती दे। उनकी जिम्मेदारियों में मजबूत वित्तीय गवर्नेंस, पूंजी और सॉल्वेंसी मैनेजमेंट तथा बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले वित्तीय प्रक्रियाओं को स्थापित करना शामिल होगा।
सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अब ऐसे विज्ञापन चलाना मुश्किल हो सकता है, जो देखने में भद्दे हों, जरूरत से ज्यादा आक्रामक हों या लोगों को गुमराह करते हों।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अब ऐसे विज्ञापन चलाना मुश्किल हो सकता है, जो देखने में भद्दे हों, जरूरत से ज्यादा आक्रामक हों या लोगों को गुमराह करते हों। कंपनी के मालिक एलन मस्क ने घोषणा की है कि ऐसे विज्ञापन चलाने वाले विज्ञापनदाताओं पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत केवल किसी विज्ञापन को हटाने के बजाय संबंधित विज्ञापनदाता के खाते पर पूरी तरह रोक लगाने का कदम भी उठाया जा सकता है।
मस्क ने 16 अक्टूबर को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मंच पर दिखाए जाने वाले सभी विज्ञापनों को एक उचित और स्वीकार्य दृश्य मानक पर खरा उतरना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे ब्रैंड्स, जिनके विज्ञापन भद्दे, जरूरत से ज्यादा शोर मचाने वाले, आक्रामक या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हों, उन्हें मंच से पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है।
उन्होंने यूजर्स से यह भी कहा कि अगर उन्हें कोई ऐसा विज्ञापन दिखाई देता है, जो इन मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो वे इसकी जानकारी एक्स के आधिकारिक विज्ञापन खाते को दें।
विज्ञापन हटाने से आगे बढ़कर होगी कार्रवाई
एक्स की मौजूदा विज्ञापन नीतियों में पहले से ही भ्रामक दावों, तेजी से चमकने वाले दृश्यों, गलत व्याकरण और लोगों का ध्यान खींचने के लिए अपनाए जाने वाले बनावटी तरीकों पर रोक लगाने से जुड़े नियम शामिल हैं। हालांकि, मस्क की नई घोषणा इन नियमों को और सख्त करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
अब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी विज्ञापन को अस्वीकार करना या हटाना कार्रवाई का हिस्सा रहा है। लेकिन नई घोषणा के मुताबिक, एक्स ऐसे विज्ञापनदाताओं के खातों तक पहुंच भी स्थायी रूप से बंद कर सकता है। इसका मतलब है कि विज्ञापन की सामग्री को लेकर नियमों का उल्लंघन करने पर किसी ब्रैंड के लिए एक्स पर विज्ञापन देना पूरी तरह बंद हो सकता है।
विज्ञापनों के लिए तय नहीं किए गए स्पष्ट मानक
हालांकि, मस्क की इस घोषणा के बाद कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। कंपनी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि किसी विज्ञापन को भद्दा, आक्रामक या जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मानने के लिए किन मानकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा, नियमों को लागू करने की समयसीमा और विज्ञापनों की समीक्षा करने की प्रक्रिया के बारे में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। चूंकि किसी विज्ञापन का अच्छा या खराब दिखना काफी हद तक व्यक्ति की पसंद पर निर्भर करता है, इसलिए यह देखना अहम होगा कि एक्स इन नियमों को किस तरह लागू करता है।
खास तौर पर दृश्य और ध्वनि से जुड़े मानकों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने से विज्ञापनदाताओं के सामने अनिश्चितता बनी रह सकती है।
पहले भी विज्ञापनों के डिजाइन पर उठा चुके हैं सवाल
मस्क इससे पहले भी एक्स पर विज्ञापनों के डिजाइन और प्रस्तुति को लेकर सख्त रुख दिखा चुके हैं। जून 2025 में उन्होंने सशुल्क विज्ञापनों के टेक्स्ट में हैशटैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने का कदम उठाया था। उस समय उन्होंने हैशटैग को विज्ञापनों के लिए सौंदर्य की दृष्टि से खराब बताया था।
अब विज्ञापनों के दृश्य मानकों को लेकर की गई नई घोषणा से संकेत मिलता है कि एक्स विज्ञापन की सामग्री के साथ-साथ उसकी प्रस्तुति पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहता है।
हालांकि, नए नियमों का विज्ञापनदाताओं पर कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी इनके लिए कितने स्पष्ट मानक तय करती है और उनका पालन किस तरह सुनिश्चित करती है।
वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने टीवी चैनलों की चर्चाओं से दूरी बनाने की वजह बताई। उन्होंने धर्म पर बहस के तरीके, निष्पक्षता, घृणा, हिंसा और मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
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वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव (Rahul Dev) ने टीवी चैनलों की बहसों से दूरी बनाने के अपने फैसले के बारे में बताया है। फेसबुक (Facebook) पर लिखी पोस्ट में उन्होंने कहा कि पिछले साल दिल्ली छोड़ने से पहले उन्होंने कई चैनलों और उनके एंकरों को बता दिया था कि वह अब उनके कार्यक्रमों में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब भी बुलावे आते हैं, लेकिन वह विनम्रता से मना कर देते हैं।
राहुल देव ने कहा कि धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा था कि जब कोई चैनल और उसकी चर्चाएं निष्पक्ष और गरिमापूर्ण नहीं रह गई हैं तो उनमें शामिल होकर वे चैनलों को ही सम्मान और प्रतिष्ठा देते हैं और अपनी गरिमा को आहत करते हैं।
उन्होंने बताया कि एक चैनल की चर्चा के अनुभव ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का नाम ‘धर्म संकट’ था, जिसमें एक प्रसिद्ध हिंदू धर्मगुरु भी शामिल थे। राहुल देव के मुताबिक वह पहले भी इस कार्यक्रम में जा चुके थे, क्योंकि उनकी धर्म में रुचि है। उन्होंने धर्मगुरु को सज्जन, विनम्र और शालीन बताया।
राहुल देव ने कहा कि चर्चा में चार या पांच पैनलिस्ट थे और धर्म जैसे विषय पर भी बहस गरमा गई। उन्होंने सवाल उठाया कि धर्म जैसे गूढ़ विषय पर इतने कम समय में इतने अगंभीर तरीके से बातचीत कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर चैनलों पर लोग खुद को सही और दूसरे को गलत साबित करने के लिए आते हैं, विषय चाहे कोई भी हो।
उन्होंने कार्यक्रम के नाम ‘धर्म संकट’ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह मान लिया गया था कि धर्म संकट में है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भारत में धर्म शब्द आते ही उसे हिंदू धर्म से जोड़ दिया जाता है और हिंदू धर्म को सनातन धर्म मान लिया जाता है, जबकि दोनों के बीच अंतर को लेकर गंभीर चर्चा नहीं होती।
राहुल देव ने लिखा कि इसी बहस के दौरान उन्होंने धर्मगुरु से शांत तरीके से पूछा, “स्वामी जी, क्या जो सनातन है उस पर कोई संकट आ सकता है?” उनके मुताबिक धर्मगुरु गंभीर होकर सोचने लगे, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कहते, एंकर ने तुरंत दूसरा सवाल शुरू कर दिया और दूसरे पैनलिस्ट की ओर मुड़ गया। राहुल देव ने कहा कि उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि अब किसी टीवी चर्चा में नहीं जाएंगे।
उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि क्या सचमुच तथाकथित सनातन धर्म पर संकट है? जो सनातन है, क्या उसे तोड़ा, मारा या आहत किया जा सकता है? उन्होंने पूछा कि जिस पर संकट की बात की जा रही है, वह वास्तव में सनातन है या कुछ और और इस संकट की प्रकृति और स्रोत क्या हैं।
राहुल देव ने कहा कि धर्म-संकट की चर्चा में इन सवालों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए और पूरे समाज में इन पर संवाद होना चाहिए। उन्होंने टीवी बहसों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एंकरों का पूरा ध्यान चर्चा को गरमागरम और गतिशील बनाए रखने पर होता है, जबकि चैनल प्रबंधन की विचारधारा और उद्देश्य उनकी एंकरिंग पर हावी रहते हैं।
उन्होंने बताया कि जिस एंकर के कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे, वह उनके प्रिय एंकरों में रहा है और धर्म तथा शास्त्रों से भी अच्छी तरह परिचित है। राहुल देव ने कहा कि उन्होंने उसी समय एंकर से कहा था कि अब वह उसके चैनल में नहीं आएंगे। एंकर ने उन्हें गले लगाकर कहा, “सर आप तो सब समझते हैं।”
राहुल देव ने कहा कि इसके बाद से वह किसी टीवी चैनल पर नहीं गए हैं। हालांकि, यूट्यूब (YouTube) पर कुछ गिने-चुने लोगों की चर्चाओं में वह शामिल होते हैं, जिन्हें उन्हें जुड़ना ठीक लगता है। साथ ही उन्होंने माना कि वहां भी पत्रकारिता का संतुलन और निष्पक्षता कम ही दिखाई देती है।
उन्होंने खुद को पूरी तरह निष्पक्ष मानने से भी इनकार किया। राहुल देव के मुताबिक पूरी तरह निष्पक्ष और तटस्थ होना लंबी आध्यात्मिक-वैचारिक साधना और निस्संगता मांगता है। उन्होंने कहा कि वैचारिक रूप से वह किसी के साथ नहीं हैं, लेकिन वह स्पष्ट रूप से यह मानते हैं कि हर तरह की घृणा, धर्म-जाति-वर्ग के आधार पर द्वेष और भेदभाव, वैचारिक-वाचिक-शारीरिक हिंसा, प्रतिशोध और प्रतिहिंसा तथा धर्म के नाम पर होने वाले घोर अधर्म के खिलाफ होना जरूरी है।
नमन दत्ता एटरनल से जुड़े हैं, जहां वह जोमैटो ब्रांड विज्ञापन, पोस्ट-ऑर्डर स्क्रीन और नई विज्ञापन पहलों के लिए नॉन-एंडेमिक ब्रांड पार्टनरशिप की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नमन दत्ता एटरनल (Eternal) से जुड़ गए हैं, जहां वह जोमैटो ब्रांड विज्ञापन (Zomato Brand Ads) की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह जोमैटो (Zomato) की पोस्ट-ऑर्डर स्क्रीन और नई विज्ञापन पहलों के लिए नॉन-एंडेमिक ब्रांड पार्टनरशिप का नेतृत्व करेंगे।
नमन दत्ता ने ई4एम (e4m) से अपनी नियुक्ति की पुष्टि की है। एटरनल से जुड़ने से पहले वह क्रिकबज (Cricbuzz) में मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे। यहां उन्होंने वेबसाइट और ऐप पर स्टूडियो आधारित कंटेंट इंटीग्रेशन और विज्ञापन से जुड़े काम संभाले।
दत्ता के पास डिजिटल विज्ञापन, मीडिया सेल्स और ब्रांड पार्टनरशिप का अनुभव है। क्रिकबज से पहले वह द इंडियन एक्सप्रेस ऑनलाइन (The Indian Express Online), न्यूजरूम एआई इंडिया (Newsroom AI India) और इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) के साथ भी काम कर चुके हैं।
अक्षय गांदोतरा को मेटा में ग्लोबल मार्केटिंग लीड, बिजनेस मैसेजिंग नियुक्त किया गया है। वह व्हाट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म और बिजनेस एआई के लिए एग्जीक्यूटिव एंगेजमेंट प्रोग्राम तैयार करेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अक्षय गांदोतरा (Akshay Gandotra) को मेटा (Meta) में ग्लोबल मार्केटिंग लीड, बिजनेस मैसेजिंग (Global Marketing Lead, Business Messaging) नियुक्त किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
नई भूमिका में अक्षय व्हाट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म (WhatsApp Business Platform) और बिजनेस एआई (Business AI) के लिए एग्जीक्यूटिव एंगेजमेंट प्रोग्राम (Executive Engagement Program) तैयार करेंगे। उनका फोकस सी-सूट (C-suite) स्तर के अधिकारियों को यह समझाने पर होगा कि एआई और मैसेजिंग को एक साथ जोड़कर कारोबार के लिए किस तरह के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही, वह इन चर्चाओं को वास्तविक एंटरप्राइज बिजनेस ग्रोथ (Enterprise Business Growth) में बदलने की दिशा में भी काम करेंगे।
मेटा से पहले अक्षय गांदोतरा अमेजन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services) में ग्लोबल पार्टनर मार्केटिंग लीडर-एसएपी (Global Partner Marketing Leader-SAP) के पद पर थे। वह अगस्त 2021 में अमेजन से जुड़े थे और वहां पांच साल से ज्यादा समय तक काम किया।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के 1,000 से ज्यादा पूर्व एम्प्लॉयीज ने अपने एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) को भुनाने का समान अवसर देने की मांग की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के 1,000 से ज्यादा पूर्व एम्प्लॉयीज ने अपने एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) को भुनाने का समान अवसर देने की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन एम्प्लॉयीज ने Walmart और फ्लिपकार्ट के बोर्ड से अपील की है कि उन्हें भी कंपनी के मौजूदा एम्प्लॉयीज की तरह अपने शेयर विकल्पों से पैसा हासिल करने के मौके दिए जाएं। कंपनी के आईपीओ (IPO) को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण पूर्व एम्प्लॉयीज की चिंता बढ़ गई है।
इस सामूहिक अपील में फ्लिपकार्ट के अलावा Myntra, Cleartrip, Shopsy और Supermoney के पूर्व एम्प्लॉयी भी शामिल हैं। इन लोगों ने मौजूदा एम्प्लॉयीज के लिए उपलब्ध शेयरों को भुनाने के अवसरों तक पहुंच, कंपनी छोड़ने के बाद निहित स्टॉक विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए अधिक समय और Walmart व फ्लिपकार्ट के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए एक तय संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है।
अगली लिक्विडिटी योजना तक विकल्प इस्तेमाल करने की मांग
11 अक्टूबर को तैयार किए गए लिखित ज्ञापन में पूर्व एम्प्लॉयीज ने मांग की है कि कंपनी छोड़ने के बाद अपने निहित स्टॉक विकल्पों का इस्तेमाल करने की समय-सीमा को अगले लिक्विडिटी इवेंट तक बढ़ाया जाए। लिक्विडिटी इवेंट यानी ऐसा मौका, जब एम्प्लॉयी अपने शेयरों या स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल कर सकें।
पूर्व एम्प्लॉयीज का कहना है कि केवल कंपनी छोड़ देने के कारण उनके स्टॉक विकल्प खत्म नहीं होने चाहिए। उन्होंने अपनी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने की भी मांग की है। यह अपील कंपनी के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पहले भेजे गए पत्र के बाद आई है। उन अधिकारियों ने भी कंपनी में काम करने के दौरान अर्जित इक्विटी के मामले में उचित व्यवहार की मांग की थी।
मौजूदा और पूर्व एम्प्लॉयीज के लिए अवसरों में अंतर का मुद्दा
इस पूरे मामले का मुख्य मुद्दा मौजूदा और पूर्व एम्प्लॉयीज को अपने स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल करने के लिए मिलने वाले अवसरों में अंतर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लिपकार्ट के 30,000 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व एम्प्लॉयीज को Walmart की ओर से अभी सुविधा दिए जाने वाले ESOP बायबैक के जरिए सामूहिक रूप से करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 38,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इस अनुमानित राशि में करीब आधा हिस्सा पूर्व एम्प्लॉयीज का बताया गया है, जबकि मौजूदा एम्प्लॉयीज को लगभग 2 अरब डॉलर मिलने की संभावना है।
कई पूर्व एम्प्लॉयीज के पास एक दशक से ज्यादा पुराने स्टॉक विकल्प
फ्लिपकार्ट के कई पूर्व एम्प्लॉयीज को कंपनी के शुरुआती वर्षों यानी 2008 से 2016 के बीच स्टॉक विकल्प मिले थे। इनमें से कई एम्प्लॉयी इन विकल्पों को एक दशक से भी ज्यादा समय से अपने पास रखे हुए हैं।
पूर्व एम्प्लॉयीज का कहना है कि ये स्टॉक विकल्प उनके वेतन और मेहनत के बदले मिलने वाले मुआवजे का हिस्सा थे। उन्होंने कंपनी में काम करके इन्हें अर्जित किया था। इसलिए उन्हें अपने निहित स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल करने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
उनकी मांग है कि उन्हें भविष्य में होने वाले बायबैक में सीमित हिस्सेदारी देने के बजाय अपने पात्र स्टॉक विकल्पों को भुनाने का सार्थक अवसर दिया जाए।
IPO को लेकर अनिश्चितता से बढ़ी चिंता
फ्लिपकार्ट के आईपीओ को लेकर स्पष्ट समय-सीमा नहीं होने से भी पूर्व एम्प्लॉयीज की चिंता बढ़ गई है। कंपनी ने सार्वजनिक रूप से शेयर जारी करने यानी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना को अपनी रणनीति का हिस्सा बताया है, लेकिन अभी तक इसकी कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Walmart ने फ्लिपकार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कल्याण कृष्णमूर्ति से सार्वजनिक बाजार में उतरने की योजना पर आगे बढ़ने से पहले कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता को प्राथमिकता देने के लिए कहा है।
ऐसे में पूर्व एम्प्लॉयी चाहते हैं कि आईपीओ का इंतजार करते रहने के बजाय उन्हें अपने स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल करने के लिए उचित अवसर दिया जाए।
पहले भी एम्प्लॉयीज को मिल चुका है 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का लाभ
फ्लिपकार्ट पहले भी एम्प्लॉयीज के लिए कई लिक्विडिटी कार्यक्रम चला चुकी है। Moneycontrol के मुताबिक, जुलाई में हुए एक कार्यक्रम सहित इन योजनाओं के जरिए एम्प्लॉयीज को कुल 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा की वैल्यू हासिल हुई है।
पूर्व एम्प्लॉयीज का तर्क है कि कंपनी छोड़ने के कारण उन्हें भविष्य में मिलने वाले ऐसे अवसरों से अपने आप बाहर नहीं कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि शुरुआती निवेशकों, संस्थापकों और मौजूदा एम्प्लॉयीज को अपनी हिस्सेदारी से पैसा हासिल करने के अवसर मिले हैं, जबकि कई पूर्व एम्प्लॉयी अब भी इंतजार कर रहे हैं।
पूर्व एम्प्लॉयीज ने क्या मांग रखी है?
पूर्व एम्प्लॉयीज के समूह ने स्पष्ट किया है कि उनका ज्ञापन कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के उद्देश्य से नहीं है। वे केवल उचित और समान व्यवहार चाहते हैं। उन्होंने Walmart के बोर्ड से लिखित जवाब देने और पात्र पूर्व एम्प्लॉयीज को भी शेयर विकल्पों से पैसा हासिल करने के अवसर देने पर विचार करने का अनुरोध किया है।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा को अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट दिखाने के तरीके की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा को अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट दिखाने के तरीके की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से कहा है कि उसके एल्गोरिदम ऐसे कंटेंट को बार-बार बढ़ावा न दें, जो भ्रामक हो या अधूरी जानकारी के आधार पर लोगों को गुमराह कर सकता हो। सरकार ने खास तौर पर ऐसे कंटेंट को लेकर चिंता जताई है, जो सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने, भ्रम फैलाने या हिंसा की वजह बन सकता है।
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को जारी एक एडवाइजरी में मेटा को कई निर्देश दिए हैं। इनमें छेड़छाड़ की गई तस्वीरों, भ्रामक दावों और जरूरी संदर्भ के बिना साझा की गई पोस्ट पर निगरानी मजबूत करना शामिल है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाले ऐसे कंटेंट की पहचान की जाए, जो भ्रम, हिंसा या गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। ऐसे मामलों में जल्द कार्रवाई के लिए उन्हें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
एल्गोरिदम सीमित विचारों को ही न दिखाएं
मंत्रालय ने मेटा से कहा है कि उसके कंटेंट सुझाव देने और पोस्ट को ऊपर दिखाने वाले सिस्टम इस तरह काम करें कि यूजर्स को बार-बार भ्रामक या संदर्भ से हटाकर पेश की गई सामग्री ही न दिखाई जाए। इसके बजाय, प्लेटफॉर्म को लोगों तक अलग-अलग तरह की प्रासंगिक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए।
एडवाइजरी में कहा गया है कि कंटेंट सुझाने वाले सिस्टम की वजह से यूजर्स को किसी एक या सीमित तरह के विचारों और खबरों का जरूरत से ज्यादा सामना नहीं करना चाहिए।
पुराने वीडियो और भ्रामक तस्वीरों पर नजर
मंत्रालय ने सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों, वीडियो, ग्राफिक्स और दूसरी सामग्री को लेकर भी चिंता जताई है। खास तौर पर ऐसे मामलों में, जहां यूजर्स के लिए यह पता लगाना आसान नहीं होता कि कोई तस्वीर या वीडियो असली है या नहीं, उसे कब और कहां रिकॉर्ड किया गया था और उसका वास्तविक संदर्भ क्या है।
मेटा से कहा गया है कि वह ऐसे कंटेंट पर विशेष ध्यान दे, जिसमें पुराने या किसी दूसरी घटना के वीडियो को मौजूदा घटना बताकर साझा किया जाता है। इसके अलावा, चुनिंदा हिस्सों को काटकर या संपादित करके दिखाए गए दृश्य, आपात स्थिति और पाबंदियों से जुड़े अपुष्ट दावे तथा पुलिस की कार्रवाई या सरकारी कदमों के बारे में भ्रामक जानकारी भी मंत्रालय की चिंता के दायरे में हैं।
कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के वीडियो और अन्य सामग्री पर भी ज्यादा ध्यान देने को कहा गया है, खासकर तब, जब उसमें जरूरी जानकारी या संदर्भ मौजूद न हो। अगर ऐसे कंटेंट को प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचा रहा है, तो उसकी पहचान, समीक्षा और आगे की कार्रवाई के लिए मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए।
सरकार की चिंता केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि कोई भ्रामक पोस्ट प्लेटफॉर्म पर मौजूद है या नहीं। वह यह भी देखना चाहती है कि मेटा के एल्गोरिदम ऐसी सामग्री को कितने बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचा रहे हैं और बार-बार सुझाव दिए जाने से उसका असर कितना बढ़ सकता है।
सरकार ने छह प्रमुख जरूरतों पर जोर दिया
मंत्रालय ने एडवाइजरी में छह तरह की जरूरतों को सामने रखा है। इनमें नियमों के तहत प्रतिबंधित कंटेंट की पहचान और उससे निपटना, सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी सामग्री के साथ सही संदर्भ देना, कंटेंट सुझाने वाले एल्गोरिदम की समीक्षा करना और संभावित नुकसान पहुंचाने वाली पोस्ट को जल्द जांच के लिए आगे बढ़ाना शामिल है। मेटा को इन उपायों को तत्काल लागू करने और की गई कार्रवाई की जानकारी मंत्रालय को देने के लिए कहा गया है। साथ ही, कंपनी को कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अधिकृत सरकारी संस्थाओं के साथ तय समयसीमा में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।
IT एक्ट और 2021 के नियमों का दिया हवाला
सरकार ने अपने निर्देशों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 का हवाला दिया है। इन नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जरूरी सावधानी बरतनी होती है और यूजर्स को प्रतिबंधित सामग्री के बारे में जानकारी देनी होती है। इसमें ऐसी सामग्री भी शामिल है, जो सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है या उससे जुड़ा संज्ञेय अपराध भड़का सकती है।
हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों के तहत मेटा की ओर से उठाए जाने वाले कदम लागू कानूनों के अनुरूप होने चाहिए। साथ ही, लोगों की कानूनी अभिव्यक्ति की आजादी और जायज सार्वजनिक चर्चा का सम्मान किया जाना चाहिए।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच आया निर्देश
यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है, जब दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही हैं। ये प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे हैं। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाई गई है।
हालांकि, मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में किसी खास घटना को इसका कारण नहीं बताया है और न ही इन विरोध प्रदर्शनों को सीधे तौर पर अपने निर्देशों से जोड़ा है।
मेटा के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती
सरकार के निर्देशों के बाद मेटा के सामने दोहरी चुनौती है। उसे भ्रामक और संदर्भ से हटाकर पेश की गई सामग्री को एल्गोरिदम के जरिए तेजी से फैलने से रोकना होगा। वहीं, इस प्रक्रिया में वैध विचारों, खबरों और सार्वजनिक मुद्दों पर होने वाली चर्चा पर अनावश्यक रोक से भी बचना होगा।
अब यह देखना अहम होगा कि मेटा अपने कंटेंट सुझाव देने वाले सिस्टम में क्या बदलाव करता है और भ्रामक सामग्री पर निगरानी बढ़ाते हुए अभिव्यक्ति की आजादी और सार्वजनिक चर्चा के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है।