DPDP कानून के खिलाफ मीडिया संगठनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून (DPDP Act), 2023 को चुनौती देने वाली मीडिया संगठनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून (DPDP Act), 2023 को चुनौती देने वाली मीडिया संगठनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि इस कानून को समाचार संगठनों पर लागू करने से खोजी पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है, पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की पहचान उजागर होने का खतरा बढ़ सकता है और न्यूजरूम के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

यह याचिका डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने दायर की है, जो कई प्रमुख समाचार संगठनों का प्रतिनिधित्व करती है।

पत्रकारों को जांच के लिए लेनी पड़ सकती है सहमति: याचिकाकर्ता

सुनवाई के दौरान DNPA की ओर से पेश वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने दलील दी कि कानून के कुछ प्रावधानों के कारण पत्रकारों को उन लोगों से ही सहमति लेनी पड़ सकती है, जिनके कामकाज या गतिविधियों की वे जांच कर रहे हैं। इससे पत्रकारों के लिए स्वतंत्र रूप से जानकारी जुटाना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यह कानून पत्रकारिता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया था, लेकिन समाचार संगठनों पर इसे लागू करने से खबरों के प्रकाशन से पहले ही रोक जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने अदालत से मामले में अंतरिम राहत देने की भी मांग की।

प्रेस की आजादी और नागरिकों की निजता के बीच संतुलन जरूरी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा और प्रेस की आजादी के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। पीठ ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञ होने के नाते याचिकाकर्ता कानून के संभावित दुरुपयोग की पहचान करने और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार तथा अदालत की मदद कर सकते हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि दूसरे पक्ष को सुने बिना इस स्तर पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

मई 2027 से लागू होने हैं कानून के कई अहम प्रावधान

याचिका में निजी डेटा जुटाने, उसके इस्तेमाल, उसे अपने पास रखने और हटाने से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए गए हैं। DNPA का कहना है कि समाचार संगठनों पर इन प्रावधानों को लागू करने से खबरें जुटाने की प्रक्रिया और पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब डिजिटल निजी डेटा संरक्षण कानून को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। खबर के मुताबिक, कानून के कई अहम प्रावधान मई 2027 से लागू होने हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान और वकील अनुज तिवारी अदालत में पेश हुए।

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‘रूरल बैरोमीटर रिपोर्ट 2026’ : ग्रामीण भारत में जेन जी बने नए ग्रोथ ड्राइवर

रूरल बैरोमीटर रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, ग्रामीण जेन जी उपभोक्ता तेजी से अहम ग्रोथ ड्राइवर बन रहे हैं। उनका प्रोडक्ट बास्केट, ऑनलाइन एक्टिविटी और एआई टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा है।

Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
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डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) और कंतार (Kantar) की ‘रूरल बैरोमीटर रिपोर्ट 2026’ में ग्रामीण भारत के जेन जी (Gen Z) उपभोक्ताओं को ब्रांड्स के लिए तेजी से अहम ग्रोथ ड्राइवर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस उम्र वर्ग के उपभोक्ता ज्यादा प्रोडक्ट कैटेगरी में खरीदारी कर रहे हैं और ऑनलाइन भी अधिक सक्रिय हैं। वे दूसरे आयु समूहों की तुलना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल भी ज्यादा कर रहे हैं।

रिपोर्ट में 12 राज्य समूहों के ग्रामीण मोबाइल फोन यूजर्स के बीच कंज्यूमर सेंटिमेंट, खर्च की प्राथमिकताओं और कम्युनिकेशन बिहेवियर का अध्ययन किया गया। जून 2026 में हुए क्वांटिटेटिव स्टडी के नतीजों की तुलना फरवरी 2025 के आंकड़ों से की गई है। इसमें ग्रामीण भारत में बदलती खपत की आदतों, डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते असर और ग्रामीण ई-कॉमर्स में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी देखा गया है।

18 से 29 वर्ष की उम्र वाले जेन जी ग्रामीण मोबाइल यूजर्स का 33 फीसदी हैं। ये हर महीने औसतन 19.1 प्रोडक्ट कैटेगरी से खरीदारी करते हैं। फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 17 कैटेगरी था। रिपोर्ट में शामिल सभी आयु समूहों में जेन जी का प्रोडक्ट बास्केट सबसे बड़ा है।

30 से 45 वर्ष के मिलेनियल्स हर महीने औसतन 18 कैटेगरी से खरीदारी करते हैं, जो 2025 में 17.5 थी। वहीं, 45 वर्ष से अधिक उम्र के उपभोक्ताओं के लिए यह संख्या 17.2 से घटकर 16.7 रह गई। जेन जी के बीच गैर-जरूरी और वेलनेस से जुड़ी खरीदारी में खास बढ़ोतरी हुई है। सुविधा वाले खाद्य उत्पादों की कैटेगरी में 27 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 5.9 कैटेगरी तक पहुंच गई। ग्रामीण भारत में इस श्रेणी की कुल वृद्धि 18 फीसदी रही।

हेल्थ और वेलनेस से जुड़े प्रोडक्ट्स का जेन जी बास्केट 36 फीसदी बढ़ा, जबकि पूरे ग्रामीण भारत में यह वृद्धि 21 फीसदी रही। पर्सनल ग्रूमिंग कैटेगरी में भी जेन जी के बीच 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि ग्रामीण बाजार में यह लगभग स्थिर रही।

डिजिटल एक्टिविटी भी इस ट्रेंड को मजबूत कर रही है। जेन जी उपभोक्ता रोजाना औसतन 115 मिनट ऑनलाइन बिताते हैं, जबकि ग्रामीण भारत का औसत 93 मिनट है। इस समूह में ऑनलाइन खरीदारी की हिस्सेदारी 39.4 फीसदी है, जबकि पूरे ग्रामीण भारत में यह 29.6 फीसदी है।

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जानिए, FAST सेवाओं पर TRAI की सिफारिशों से क्या बदलेगा

इस प्रस्ताव का खास संबंध फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन यानी FAST सेवाओं से है। इन सेवाओं में दर्शक मुफ्त में टीवी चैनल देख सकते हैं और प्लेटफॉर्म विज्ञापनों के जरिए कमाई कर सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
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इंटरनेट पर टीवी देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब दर्शक केवल केबल टीवी या डीटीएच कनेक्शन के जरिए ही चैनल नहीं देखते, बल्कि स्मार्ट टीवी, मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए भी तय कार्यक्रमों वाले टीवी चैनल तक पहुंच सकते हैं। इसी बदलते तरीके को ध्यान में रखते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट आधारित टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं के लिए अलग मंजूरी व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है।

इस प्रस्ताव का खास संबंध फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन यानी FAST सेवाओं से है। इन सेवाओं में दर्शक मुफ्त में टीवी चैनल देख सकते हैं और प्लेटफॉर्म विज्ञापनों के जरिए कमाई कर सकते हैं। हालांकि, TRAI की सिफारिशों का दायरा केवल FAST तक सीमित नहीं है। इसमें उन ऐप और वेबसाइट को भी शामिल करने का प्रस्ताव है, जो इंटरनेट के जरिए रैखिक यानी तय क्रम में चलने वाले टीवी चैनलों का डिस्ट्रीब्यूशन करते हैं।

TRAI ने 26 अक्टूबर 2026 को एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) सेवाओं के लिए मंजूरी व्यवस्था से जुड़ी सिफारिशें जारी कीं। इनमें ऐप संचालकों की जिम्मेदारी, टीवी चैनलों के पंजीकरण, उपभोक्ता शिकायतों, स्मार्ट टीवी और ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों की भूमिका तथा दर्शक संख्या मापने की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं।  

इस प्रस्ताव की अहमियत केवल एक नई मंजूरी व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ा है कि जब पारंपरिक टीवी चैनल इंटरनेट आधारित ऐप के जरिए दर्शकों तक पहुंचते हैं, तो उनके डिस्ट्रीब्यूशन, जवाबदेही और दर्शक संख्या को किस तरह मापा जाना चाहिए।

FAST सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी?

FAST सेवाओं का मॉडल पारंपरिक टीवी और इंटरनेट स्ट्रीमिंग के बीच एक अलग जगह बनाता है। दर्शकों को इन सेवाओं पर तय कार्यक्रमों के क्रम में चैनल देखने का अनुभव मिलता है, लेकिन वे इंटरनेट से जुड़े उपकरणों के जरिए उन तक पहुंचते हैं।

पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन में केबल, डीटीएच और अन्य व्यवस्थाओं के जरिए चैनल दर्शकों तक पहुंचते हैं। दूसरी ओर, इंटरनेट आधारित सेवाओं में यही अनुभव ऐप, वेबसाइट या स्मार्ट टीवी में पहले से मौजूद एप्लिकेशन के जरिए मिल सकता है।

इस बदलाव के साथ नियमन से जुड़े कुछ सवाल भी सामने आते हैं। उदाहरण के लिए, इंटरनेट पर टीवी चैनल दिखाने वाली सेवा को किस श्रेणी में रखा जाए? उस सेवा को चलाने वाली कंपनी की क्या जिम्मेदारी हो? उसके जरिए दिखाए जाने वाले चैनलों के पास जरूरी अनुमति होनी चाहिए या नहीं? और अगर दर्शक को शिकायत हो, तो वह किससे संपर्क करे?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को TRAI से FAST सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचे पर सिफारिशें देने को कहा था। मंत्रालय के संदर्भ में नियामकीय समानता, सामग्री के प्रति जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण जैसे पहलुओं पर विचार करने की बात थी। इसके बाद TRAI ने 6 अप्रैल 2026 को संबंधित मुद्दों पर परामर्श पत्र जारी किया।

इस प्रक्रिया में 207 टिप्पणियां और 11 जवाबी टिप्पणियां मिलीं। इसके अलावा, 10 जून 2026 को खुली चर्चा आयोजित की गई। इन सुझावों और अपने विश्लेषण के आधार पर TRAI ने अब अपनी सिफारिशें जारी की हैं।

केवल ऐप को मंजूरी नहीं, चैनलों के पंजीकरण का भी प्रस्ताव

TRAI की सिफारिशों में ALTD सेवाओं को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत प्रसारण सेवाओं की मंजूरी व्यवस्था में टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं की एक अलग उप-श्रेणी बनाने का प्रस्ताव है।

इस व्यवस्था में ऐप संचालक को सेवा उपलब्ध कराने की मंजूरी लेने और संबंधित शर्तों का पालन करने के लिए मुख्य जिम्मेदार इकाई बनाने की सिफारिश की गई है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सेवा क्षेत्र, शुरुआत में 20 साल की मंजूरी और उसके बाद लगातार 10-10 साल के लिए नवीनीकरण का प्रस्ताव है।

TRAI ने आवेदन प्रक्रिया के लिए 10,000 रुपये और एकमुश्त प्रवेश शुल्क के रूप में 1 लाख रुपये की सिफारिश की है। इसके साथ नियमित मंजूरी शुल्क, बैंक गारंटी और सुरक्षा जमा नहीं रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

यहां एक अहम बात यह है कि प्रस्ताव में ऐप संचालक की मंजूरी और उसके जरिए दिखाए जाने वाले चैनलों की अनुमति या पंजीकरण को अलग-अलग महत्व दिया गया है। अधिकृत ALTD सेवा प्रदाता केवल उन्हीं टीवी चैनलों का डिस्ट्रीब्यूशन कर सकेगा, जिनके पास केंद्र सरकार की वैध अनुमति, मंजूरी या निर्धारित व्यवस्था के तहत पंजीकरण होगा।

TRAI ने इंटरनेट के लिए बनाए गए रैखिक टीवी चैनलों के लिए सरल पंजीकरण व्यवस्था की भी सिफारिश की है। इससे जुड़े प्रस्ताव में ऐसे चैनलों के नाम और लोगो की मंजूरी का भी उल्लेख है। इसका उद्देश्य इंटरनेट आधारित टीवी डिस्ट्रीब्यूशन के लिए एक निर्धारित ढांचा तैयार करना है, जिसमें सेवा उपलब्ध कराने वाली इकाई और उसके जरिए दिखाए जाने वाले चैनलों की स्थिति स्पष्ट हो। 

स्मार्ट टीवी और ऐप स्टोर पर भी पड़ेगा असर

इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं की पहुंच केवल मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं है। कुछ ऐप स्मार्ट टीवी में पहले से उपलब्ध होते हैं, जबकि कुछ को डाउनलोड करके इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में टीवी निर्माता कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वालों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ‘मास्टर ALTD ऐप रिपॉजिटरी’ बनाए रखने की सिफारिश की है। प्रस्ताव के मुताबिक, टीवी निर्माता कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वालों को अपने उपकरणों और ऐप स्टोर पर केवल अधिकृत ALTD ऐप उपलब्ध कराने होंगे। उन्हें मंत्रालय को निर्धारित प्रारूप में सालाना अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

इस प्रस्ताव के लागू होने पर स्मार्ट टीवी और ऐप स्टोर के जरिए दर्शकों तक पहुंचने वाली ALTD सेवाओं के लिए मंजूरी की स्थिति अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐप संचालकों के साथ-साथ उपकरण और ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी कंपनियों को भी अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देना होगा।

हालांकि, इसे सभी वीडियो ऐप पर लागू होने वाला नियम समझना सही नहीं होगा। TRAI की प्रस्तावित परिभाषा और दायरा खास तौर पर इंटरनेट के जरिए रैखिक टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित है।

किन प्लेटफॉर्म को बाहर रखने की सिफारिश?

TRAI ने प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ अपवाद भी रखे हैं। इसमें ऐसे प्रसारक-स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो केवल अपने चैनल या अपनी होल्डिंग अथवा सहायक कंपनी के चैनल वितरित करते हैं। सोशल मीडिया मंचों पर होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग को भी इस व्यवस्था से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंटरनेट पर उपलब्ध हर वीडियो सेवा का काम एक जैसा नहीं होता। कुछ प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से मांग पर वीडियो उपलब्ध कराते हैं, जबकि कुछ तय कार्यक्रमों वाले टीवी चैनलों को एक जगह लाकर दर्शकों तक पहुंचाते हैं। TRAI का प्रस्ताव दूसरी तरह की सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था बनाने पर केंद्रित है।

इसलिए इस प्रस्ताव को सभी OTT सेवाओं, वीडियो प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर होने वाले हर प्रसारण के लिए एक समान मंजूरी व्यवस्था के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

दर्शकों की शिकायतों के लिए किसकी होगी जिम्मेदारी?

TRAI ने ALTD सेवा से संबंधित उपभोक्ता शिकायतों और उनके समाधान के लिए ऐप संचालक को मुख्य संपर्क बिंदु बनाने की सिफारिश की है।

इंटरनेट आधारित टीवी सेवा में दर्शक ऐप के जरिए चैनल देखते हैं। ऐसे में सेवा से जुड़ी शिकायत होने पर ऐप संचालक की भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है। प्रस्तावित व्यवस्था इसी जिम्मेदारी को निर्धारित करने की दिशा में कदम है।

यह व्यवस्था उपभोक्ता संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर तब जब दर्शक अलग-अलग उपकरणों और ऐप के जरिए टीवी चैनलों तक पहुंचते हैं। हालांकि, शिकायतों के समाधान की पूरी प्रक्रिया और उसकी विस्तृत शर्तें अंतिम रूप से अधिसूचित नियमों से ही स्पष्ट होंगी।

टीवी रेटिंग में इंटरनेट पर देखे जाने वाले चैनलों को शामिल करने की सिफारिश

TRAI की सिफारिशों का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा टीवी दर्शक संख्या मापने की व्यवस्था से जुड़ा है। प्राधिकरण ने ALTD ऐप के जरिए देखे जाने वाले टीवी चैनलों की दर्शक संख्या को टीवी ऑडियंस मेजरमेंट फ्रेमवर्क में शामिल करने की सिफारिश की है।

इसके साथ अधिकृत ALTD ऐप संचालकों को टीवी रेटिंग नीति, 2026 के अनुरूप अनाम यानी दर्शक की पहचान उजागर किए बिना समय-समय पर व्यूअरशिप डेटा प्रकाशित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंटरनेट आधारित ऐप के जरिए टीवी चैनल देखने वाले दर्शकों की संख्या को भी टीवी देखने की व्यापक तस्वीर में शामिल करने की जरूरत हो सकती है। अगर इस प्रस्ताव पर अमल होता है, तो पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन माध्यमों के साथ इंटरनेट आधारित ऐप से होने वाली व्यूअरशिप को मापने की व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।

लेकिन यहां दो बातों में अंतर करना जरूरी है। पहली, ऐप पर उपलब्ध व्यूअरशिप डेटा को टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में शामिल करना। दूसरी, ऐप संचालकों को अपना अनाम व्यूअरशिप डेटा प्रकाशित करने की अनुमति देना। TRAI ने इन दोनों पहलुओं को अपनी सिफारिशों में शामिल किया है।

वास्तविक मापन पद्धति, आंकड़ों की तुलना और इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे तय होने वाली व्यवस्था पर निर्भर करेगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि इंटरनेट आधारित टीवी की दर्शक संख्या पहले ही मौजूदा टीवी रेटिंग में शामिल कर दी गई है।  

मीडिया उद्योग के लिए इसका क्या महत्व है?

TRAI की सिफारिशों को मीडिया उद्योग के लिए तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

पहला, इंटरनेट के जरिए रैखिक टीवी चैनल वितरित करने वाली सेवाओं के लिए अलग मंजूरी व्यवस्था का प्रस्ताव है। इससे इस श्रेणी की सेवाओं के लिए नियमों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की दिशा में काम हो सकता है।

दूसरा, स्मार्ट टीवी निर्माताओं और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वालों को अधिकृत ऐप उपलब्ध कराने और सालाना अनुपालन रिपोर्ट जमा करने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है। इससे ऐप की मंजूरी की स्थिति उपकरणों और ऐप स्टोर के स्तर पर भी प्रासंगिक हो सकती है।

तीसरा, इंटरनेट आधारित ऐप पर देखे जाने वाले टीवी चैनलों की व्यूअरशिप को टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में शामिल करने की सिफारिश है। इससे भविष्य में टीवी चैनलों के दर्शकों की संख्या मापने के तरीकों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, इन प्रस्तावों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इससे किसी खास प्लेटफॉर्म की कमाई बढ़ेगी, विज्ञापन दरें बदलेंगी या किसी मौजूदा सेवा को बाजार में नुकसान होगा। ऐसे प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि सरकार सिफारिशों को किस रूप में स्वीकार करती है और अंतिम नियमों में क्या प्रावधान रखे जाते हैं।

अब सरकार के अगले कदम पर नजर

TRAI ने ALTD सेवाओं के लिए हल्की नियामकीय व्यवस्था की सिफारिश की है। इसमें मंजूरी, चैनल पंजीकरण, ऐप उपलब्ध कराने, उपभोक्ता शिकायतों और व्यूअरशिप से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। प्राधिकरण ने मंजूरी, पंजीकरण और रिपोर्टिंग की प्रक्रियाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने की भी सिफारिश की है।

इन शर्तों को दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 56 के तहत नियमों के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव है। इसलिए अभी इन सिफारिशों को लागू हो चुके नियमों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

आगे सरकार के फैसले और अंतिम नियमों से यह स्पष्ट होगा कि ALTD सेवाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया कैसी होगी, इंटरनेट के लिए बनाए गए टीवी चैनलों का पंजीकरण कैसे होगा और व्यूअरशिप मापन की नई व्यवस्था किस तरह काम करेगी।

कुल मिलाकर, TRAI की सिफारिशें इंटरनेट आधारित टीवी डिस्ट्रीब्यूशन को एक स्पष्ट नियामकीय ढांचे में लाने की कोशिश हैं। इनका महत्व केवल FAST सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन ऐप और वेबसाइट से भी जुड़ा है, जो इंटरनेट के जरिए पारंपरिक टीवी चैनलों जैसा देखने का अनुभव उपलब्ध कराते हैं।

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Yaap Digital ने Gozoop Online के अधिग्रहण के लिए चुकाए ₹12 करोड़

Yaap Digital Limited ने Gozoop Online Private Limited के अधिग्रहण से जुड़े भुगतान के तहत ₹12 करोड़ की राशि चुका दी है।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
Yaap89754

Yaap Digital Limited ने Gozoop Online Private Limited के अधिग्रहण से जुड़े भुगतान के तहत ₹12 करोड़ की राशि चुका दी है। कंपनी ने 21 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह रकम Gozoop के बेचने वाले शेयरधारकों को दी गई है।

कंपनी के मुताबिक, यह भुगतान अतिरिक्त शुद्ध कार्यशील पूंजी (Excess Net Working Capital यानी ENWC) के मद में किया गया है। यह राशि Gozoop के अधिग्रहण के पहले चरण यानी ट्रेंच-1 (Tranche 1) से जुड़ी है।

पूरा हुआ ₹12 करोड़ का भुगतान

Yaap Digital ने बताया कि 30 मार्च, 2026 को हुए शेयर खरीद और शेयरधारक समझौते (Share Purchase and Shareholders Agreement) की शर्तों के अनुसार यह भुगतान किया गया है। इसी समझौते के तहत कंपनी ने Gozoop के अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी।

कंपनी के अनुसार, इस भुगतान के साथ ट्रेंच-1 अधिग्रहण के लिए बेचने वाले शेयरधारकों को देय अतिरिक्त शुद्ध कार्यशील पूंजी की पूरी ₹12 करोड़ की राशि चुका दी गई है।  

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Quint Digital के वारंट धारकों को समय पर करना होगा किस्त का भुगतान, चूकने पर जब्ती का खतरा

क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने आंशिक भुगतान वाले वारंट धारकों के लिए पहली और अंतिम किस्त के भुगतान का नोटिस जारी किया है।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
Quint digital

क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने आंशिक भुगतान वाले वारंट धारकों के लिए पहली और अंतिम किस्त के भुगतान का नोटिस जारी किया है। कंपनी ने हर वारंट पर ₹5 का भुगतान करने को कहा है। इसके लिए भुगतान की अवधि 6 नवंबर से 20 नवंबर, 2026 तक तय की गई है।

कंपनी के मुताबिक, यह भुगतान उन वारंटों के लिए मांगा गया है, जिन्हें 19 अगस्त, 2026 को जारी ऑफर लेटर के तहत राइट्स इश्यू के माध्यम से जारी किया गया था। इस भुगतान के लिए वही धारक पात्र होंगे, जिनके नाम 15 अक्टूबर, 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में दर्ज थे।

इस कॉरपोरेट कार्रवाई को पूरा करने के लिए इन वारंटों में शेयर बाजारों पर कारोबार 16 अक्टूबर, 2026 से रोक दिया गया था।

20 नवंबर तक करना होगा भुगतान

कंपनी ने वारंट धारकों को तय समयसीमा के भीतर बकाया राशि जमा करने को कहा है। भुगतान में देरी होने पर 10 फीसदी सालाना की दर से ब्याज लग सकता है। यह ब्याज 21 नवंबर, 2026 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक लागू होगा, जब तक कि कंपनी इसे माफ नहीं करती।

कंपनी ने साफ किया है कि तय समय में भुगतान नहीं करने या केवल कुछ राशि जमा करने को भुगतान में चूक माना जाएगा।

भुगतान नहीं करने पर जब्त हो सकते हैं वारंट

कंपनी की ओर से जारी शर्तों के मुताबिक, अगर कोई धारक तय राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसके आंशिक भुगतान वाले वारंट जब्त किए जा सकते हैं। इसमें पहले जमा की गई ₹5 प्रति वारंट की राशि भी जब्त होने का जोखिम है।

आंशिक भुगतान को भी पूरा भुगतान नहीं माना जाएगा। इसलिए वारंट धारकों को निर्धारित समयसीमा में पूरी बकाया राशि जमा करनी होगी।

भुगतान के बाद इक्विटी शेयरों में बदलेंगे वारंट

कंपनी के अनुसार, पहली और अंतिम मांग की गई राशि का सफलतापूर्वक भुगतान होने के बाद आंशिक भुगतान वाले वारंट पूरी तरह भुगतान किए गए इक्विटी शेयरों में बदल जाएंगे। इन शेयरों का अंकित मूल्य ₹10 प्रति शेयर होगा।

भुगतान की अंतिम तारीख के बाद दो सप्ताह के भीतर शेयर आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद शेयर संबंधित धारकों के डीमैट खातों में जमा किए जाएंगे और शेयर बाजारों में कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे।

कंपनी ने यह भी कहा है कि भुगतान वारंट धारक के अपने बैंक खाते से किया जाना चाहिए। किसी तीसरे व्यक्ति के बैंक खाते से किया गया भुगतान अस्वीकार किया जा सकता है।

 

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NDTV छोड़कर अब डिजिटल मंच पर आए राजीव रंजन, शुरू किया अपना यूट्यूब चैनल

वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने एनडीटीवी इंडिया (NDTV India) से विदाई ले ली है। करीब 19 साल तक इस संस्थान से जुड़े रहने के बाद अब उन्होंने अपना नया सफर शुरू करने का फैसला किया है।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
RajeevRanjan541

वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने एनडीटीवी इंडिया (NDTV India) से विदाई ले ली है। करीब 19 साल तक इस संस्थान से जुड़े रहने के बाद अब उन्होंने अपना नया सफर शुरू करने का फैसला किया है। 'समाचार4मीडिया' से राजीव रंजन ने बताया कि वह अपने यूट्यूब चैनल (BharatDefX) के जरिए दर्शकों से जुड़ेंगे। उन्होंने एक संदेश के जरिए एनडीटीवी छोड़ने के फैसले और अपने पत्रकारिता के सफर के बारे में जानकारी दी है।

राजीव रंजन ने अपने संदेश में कहा कि पिछले कुछ समय से चीजें वैसी नहीं चल रही थीं, जैसी उन्हें चलनी चाहिए थीं। ऐसे में जब उन्हें लगा कि आगे बढ़ने का सही समय आ गया है, तो उन्होंने एनडीटीवी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने दिसंबर 2007 में एनडीटीवी जॉइन किया था और तब से वह रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद और देश की राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर कर रहे थे।

एनडीटीवी के साथ रहा करीब 19 साल का सफर

राजीव रंजन ने एनडीटीवी के साथ अपने लंबे सफर को याद करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब इस संस्थान से जुड़ना कई पत्रकारों का सपना हुआ करता था। हालांकि, उनका मानना है कि हर सफर का एक पड़ाव होता है और अब उनके लिए आगे बढ़ने का समय आ गया है।

उन्होंने अपने संदेश में दर्शकों के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताया। उनके मुताबिक, पत्रकारिता के इस लंबे सफर में उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार मिले, लेकिन दर्शकों का लगातार मिलता रहा भरोसा उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है।

विनोद दुआ के मार्गदर्शन में शुरू किया पत्रकारिता का सफर

राजीव रंजन ने बताया कि पत्रकारिता में उनकी शुरुआत 30 साल से भी पहले हुई थी। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के मार्गदर्शन में 'परख' और 'न्यूज वेव' जैसे कार्यक्रमों के लिए रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने दूरदर्शन के लिए 'परसेप्शन' और 'खोज खबर' जैसे खोजी कार्यक्रमों में काम किया।

इसके बाद वह एशिया न्यूज इंटरनेशनल (ANI) से जुड़े और जम्मू-कश्मीर से रिपोर्टिंग की। यह उनके करियर का एक चुनौतीपूर्ण दौर था। बाद में उन्होंने सहारा समय में रक्षा और गृह मंत्रालय से जुड़ी खबरों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने 'डिफेंस डायरी' नाम का साप्ताहिक कार्यक्रम भी तैयार किया।

दिसंबर 2007 में एनडीटीवी इंडिया से जुड़ने के बाद उन्होंने रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद और राजनीति से जुड़ी कई अहम खबरों को कवर किया।

'वतन के रखवाले' रहा यादगार कार्यक्रम

राजीव रंजन के पत्रकारिता करियर का एक खास पड़ाव 'वतन के रखवाले' कार्यक्रम रहा। इस कार्यक्रम के जरिए उन्होंने भारतीय सेना के जवानों के जीवन और उनके कामकाज को दर्शकों के सामने पेश किया। उन्होंने इस कार्यक्रम के 100 एपिसोड तैयार किए और उन्हें होस्ट भी किया।

राजीव रंजन के मुताबिक, यह उनके पत्रकारिता जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रहा। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें एनटी अवॉर्ड, ईएनबीए अवॉर्ड और चंद्रशेखर सम्मान समेत कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

नए मंच पर भी निष्पक्ष पत्रकारिता का वादा

अपने नए सफर को लेकर राजीव रंजन ने कहा कि मंच और काम करने का अंदाज नया होगा, लेकिन निष्पक्ष पत्रकारिता के बुनियादी उसूल नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना, तथ्यों की पड़ताल करना और खबरों के पीछे की सच्चाई दर्शकों तक पहुंचाना आगे भी उनकी प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने दर्शकों से आगे भी अपना साथ बनाए रखने की अपील की। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति जैसे विषयों पर लंबे समय तक रिपोर्टिंग करने वाले राजीव रंजन अपने नए यूट्यूब चैनल के जरिए किस तरह की खबरें और विश्लेषण दर्शकों के सामने लाते हैं।

 

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फेसबुक पेज ब्लॉक करने पर यूजर को देनी होगी सरकारी नोटिस की कॉपी: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए किसी सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजती है, तो उस नोटिस की कॉपी यूजर को भी तुरंत देनी होगी।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए किसी सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजती है, तो उस नोटिस की कॉपी यूजर को भी तुरंत देनी होगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने और यूजर को अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए जरूरी है।

जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 में यह साफ तौर पर नहीं लिखा है कि सरकार को सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजने से पहले प्रभावित यूजर को इसकी जानकारी देनी होगी। हालांकि, कोर्ट के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत कंपनी को भेजे गए नोटिस की कॉपी यूजर को देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत जरूरी है।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “इसलिए, जब सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजा जाए, उसी समय उसकी एक कॉपी यूजर को भी दी जानी चाहिए।”

क्या है पूरा मामला?

हाई कोर्ट हरियाणा 24 न्यूज नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कंपनी ने भारत में अपने फेसबुक पेज को ब्लॉक किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। यह पेज हरियाणा पुलिस की ओर से मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत भेजे गए नोटिस के बाद ब्लॉक किया गया था।

कंपनी का फेसबुक पेज 21 अगस्त, 2026 को ब्लॉक कर दिया गया था। कंपनी ने अदालत में कहा कि उसे न तो पहले कोई नोटिस दिया गया और न ही मेटा को भेजे गए नोटिस की कॉपी उपलब्ध कराई गई। इस वजह से उसे यह पता ही नहीं चला कि पेज ब्लॉक करने के पीछे क्या कारण थे और इसके लिए किन तथ्यों या सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।

एसपी के नोटिस जारी करने पर भी उठे सवाल

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि कंपनी के एक निदेशक पर एक आपराधिक मामले में आरोपी होने का आरोप है। सरकार के मुताबिक, वह फेसबुक पेज के जरिए वीडियो पोस्ट कर रहा था और संदेश भेजकर कथित तौर पर पीड़ित तथा गवाहों को डराने की कोशिश कर रहा था। इसी आधार पर यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने मेटा को फेसबुक पेज की पहुंच बंद करने के लिए नोटिस भेजा था।

हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि यह नोटिस पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी किया गया था, जबकि 2021 के नियमों के तहत ऐसे नोटिस जारी करने के लिए कम से कम पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक के अधिकारी का अधिकृत होना जरूरी है।

नियमों के मुताबिक, संबंधित सरकार की ओर से विशेष रूप से अधिकृत ऐसा पुलिस अधिकारी, जो डीआईजी रैंक से नीचे का न हो, पुलिस प्रशासन की तरफ से इस तरह का नोटिस जारी कर सकता है।

कोर्ट ने कहा कि जब नियमों में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी का न्यूनतम पद तय किया गया है, तो इस अधिकार को उससे नीचे के पद के अधिकारी को नहीं सौंपा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने माना कि संबंधित नोटिस अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया था।

शिकायत निवारण व्यवस्था के लिए कार्रवाई की जानकारी जरूरी

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि कंपनी को अपना फेसबुक पेज दोबारा शुरू कराने के लिए मेटा की शिकायत निवारण व्यवस्था का सहारा लेना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि 2021 के नियमों का नियम 3(2) यूजर्स को शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था देता है। लेकिन इस व्यवस्था का सही तरीके से इस्तेमाल तभी हो सकता है, जब प्रभावित यूजर को यह पता हो कि उसका कंटेंट किस आधार पर ब्लॉक किया गया है।

अदालत के मुताबिक, मेटा के शिकायत अधिकारी के सामने फैसले के बाद सुनवाई के दौरान यूजर को संबंधित नोटिस, उसमें लिखे कारणों और नोटिस जारी करने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री की जानकारी होनी चाहिए। इसके बिना यूजर अपना बचाव नहीं कर पाएगा और शिकायत निवारण व्यवस्था का मकसद भी पूरा नहीं होगा।

कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत अपनाई जाने वाली हर प्रक्रिया निष्पक्ष और उचित होनी चाहिए। इसके लिए प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का पालन जरूरी है, जिनमें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भी शामिल है।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले माध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड बनाम भारत संघ का भी हवाला दिया। हाई कोर्ट ने दोहराया कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और पक्षपात के खिलाफ अधिकार प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांत हैं।

कोर्ट ने कहा कि भले ही नियम 3(2) में सरकार की ओर से सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजने से पहले यूजर को जानकारी देने की स्पष्ट शर्त नहीं है, लेकिन नोटिस की कॉपी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को इस नियम का हिस्सा माना जाना चाहिए।

इस मामले में कंपनी को न तो पुलिस और न ही मेटा की ओर से नोटिस की कॉपी मिली थी। इस तरह उसे फेसबुक पेज ब्लॉक किए जाने की कार्रवाई के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में कंपनी को केवल मेटा की शिकायत निवारण व्यवस्था के पास जाने के लिए कहना बेअसर होगा और इससे अपना पक्ष रखने के उसके अधिकार पर गंभीर असर पड़ेगा।

फेसबुक पेज बहाल करने का आदेश

हाई कोर्ट ने 21 अगस्त, 2026 को यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी नोटिस को रद्द कर दिया। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के 24 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी मेटा को कंपनी का फेसबुक पेज पहले की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकार को लगता है कि कंपनी के फेसबुक पेज पर मौजूद कोई जानकारी या कंटेंट कानून के तहत प्रतिबंधित है और उसका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो अधिकृत अधिकारी की ओर से सोशल मीडिया कंपनी को भेजे जाने वाले किसी भी नोटिस की कॉपी कंपनी को तुरंत उपलब्ध करानी होगी।

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। 

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Quint Digital का दूसरी तिमाही में रेवेन्यू 372% बढ़ा, 36.78 करोड़ रुपये पर पहुंचा

डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी कंपनी Quint Digital Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार बढ़त दर्ज की है।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
QuintDigital548

डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी कंपनी Quint Digital Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार बढ़त दर्ज की है। कंपनी का जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 372 प्रतिशत बढ़कर 36.78 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने इस तिमाही में ब्याज लागत और कुछ गैर-नकद खर्चों को समायोजित करने के बाद 5.67 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है।

कंपनी ने 19 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे साझा किए। कंपनी के मुताबिक, उसकी कारोबारी रणनीति में बदलाव, मीडिया-टेक्नोलॉजी कारोबार की बढ़त और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधानों की मांग से कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।

पहली छमाही में 354% बढ़ा राजस्व

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान Quint Digital का परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 354 प्रतिशत बढ़कर 71.57 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में ब्याज लागत और कुछ अन्य खर्चों को समायोजित करने के बाद कंपनी का लाभ 10.62 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने बताया कि वह अपने कारोबार को वैश्विक मीडिया-टेक्नोलॉजी और एआई आधारित मंच के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है। इसके तहत मीडिया, टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी और अनुभव आधारित कारोबार में विस्तार किया जा रहा है।

Quintype बना कारोबार की बढ़त का प्रमुख आधार

कंपनी के मुताबिक, Quintype उसके कारोबार की बढ़त का प्रमुख आधार बना हुआ है। यह मंच एआई आधारित मीडिया-टेक्नोलॉजी समाधान उपलब्ध कराता है और दुनियाभर में अपने संस्थागत ग्राहकों का दायरा बढ़ा रहा है।

दूसरी तिमाही में Quintype के मीडिया-टेक कारोबार से 34.3 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। वहीं, पहली छमाही में इस कारोबार का राजस्व 67.13 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी का कहना है कि उसके एआई आधारित मीडिया-टेक मंच को वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है। इससे कारोबार का विस्तार करने और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।

दिल्ली में दिसंबर में शुरू होगा Time Out Market

Quint Digital अपने कारोबार को डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी से आगे बढ़ाकर हॉस्पिटैलिटी और मनोरंजन के क्षेत्र में भी विस्तार दे रही है। इसी रणनीति के तहत कंपनी नई दिल्ली के एयरोसिटी स्थित वर्ल्डमार्क में दिसंबर 2026 में भारत का पहला Time Out Market शुरू करने की तैयारी कर रही है।

इस केंद्र में खाने-पीने से जुड़े 11 चुने हुए कॉन्सेप्ट, दो खास बार, लाइव मनोरंजन और पूरे साल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य लोगों को एक ही जगह पर खानपान, संस्कृति और मनोरंजन का अनुभव देना है।

कंपनी ने इस परियोजना के लिए छह रणनीतिक खानपान साझेदारियां भी हासिल की हैं। इनमें Chard, Mizu, Bhawan, Delhi Food Walks और Levonne शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, अन्य प्रमुख साझेदारियों पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है। Mizu के साथ इस परियोजना के संबंध में रियायत समझौता किए जाने का प्रस्ताव है।

Lee Enterprises के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर

Quint Digital ने अमेरिकी मीडिया कंपनी Lee Enterprises में अपने निवेश को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। कंपनी इस साझेदारी को और मजबूत करने तथा भविष्य में कारोबार की बढ़त के नए अवसर तलाशने पर ध्यान दे रही है।

Lee Enterprises अमेरिका के 25 राज्यों के 72 बाजारों में स्थानीय समाचार और विज्ञापन सेवाएं देती है। कंपनी के पास करीब 350 डिजिटल मंच और प्रिंट प्रकाशन हैं। Quint Digital की इसमें महत्वपूर्ण अल्पांश हिस्सेदारी है।

इसके अलावा, Quint Digital ने न्यूयॉर्क स्थित सोशल मीडिया और डिजिटल विश्लेषण मंच ListenFirst Media का अधिग्रहण किया है। इससे कंपनी को एआई आधारित दर्शक विश्लेषण और लोगों की भागीदारी को समझने की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राइट्स इश्यू से जुटाए 90.87 करोड़ रुपये

कंपनी ने बताया कि उसने राइट्स इश्यू के जरिए 90.87 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस इश्यू को मौजूदा सार्वजनिक शेयरधारकों ने पूरी तरह सब्सक्राइब किया। इश्यू के आकार के मुकाबले 1.09 गुना बोलियां मिलीं।

कंपनी के मुताबिक, जुटाई गई रकम से भविष्य के कारोबारी कामकाज को समर्थन मिलेगा। Quint Digital का कहना है कि वह अपने कारोबार को विस्तार देने, परिचालन क्षमता बेहतर बनाने और लंबी अवधि में मूल्य बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।

Quint Digital के कारोबार में क्या-क्या शामिल है?

Quint Digital के प्रमुख डिजिटल मीडिया ब्रैंड्स में The Quint, The News Minute, Youth Ki Awaaz और Kisan India शामिल हैं। कंपनी का प्रमुख समाचार मंच The Quint वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। वहीं, Quintype का संपादकीय मंच दुनियाभर में 300 से अधिक प्रकाशकों को सामग्री तैयार करने से जुड़े समाधान उपलब्ध कराता है।

कंपनी बीएसई में सूचीबद्ध है और उसके शेयरों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार की अनुमति वाली श्रेणी में भी शामिल किया गया है।

कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में Quint Digital के राजस्व में तेज बढ़त दर्ज की गई है। कंपनी अब मीडिया-टेक्नोलॉजी और एआई कारोबार के साथ हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी कर रही है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की योजनाओं और कारोबारी प्रदर्शन से जुड़े अनुमान कई बाजार और नियामकीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। 

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हजारों करोड़ के GST नोटिस के बाद Delta Corp ने ₹444 करोड़ का किया प्रावधान

कैसीनो कारोबार से जुड़ी कंपनी Delta Corp ने जीएसटी (GST) देनदारी के लिए ब्याज सहित 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
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कैसीनो कारोबार से जुड़ी कंपनी Delta Corp ने जीएसटी (GST) देनदारी के लिए ब्याज सहित 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कंपनी ने यह प्रावधान सितंबर 2026 में समाप्त हुई तिमाही के वित्तीय नतीजों में दिखाया है। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब गेमिंग, सट्टेबाजी, जुआ और कैसीनो से जुड़े लेनदेन पर जीएसटी लागू होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के बाद कंपनियों पर पड़ने वाले वित्तीय असर का आकलन किया जा रहा है।

कंपनी को 2023 में हजारों करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस मिले थे। अब जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि के लिए जारी आदेशों में कैसीनो से जुड़े लेनदेन और मिश्रित आपूर्ति (मिक्स्ड सप्लाई) के आधार पर अलग-अलग देनदारी तय की गई है।

Delta Corp ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त छह महीने की अवधि के नतीजों में इस प्रावधान को असाधारण मद (Exceptional Item) के रूप में दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि वह इन मांगों को संबंधित अधिकारियों और मंचों पर चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखती है। खास तौर पर कंपनी ने मिक्स्ड सप्लाई से जुड़ी पूरी मांग और सीजीएसटी नियमों के नियम 31C के तहत तय जीएसटी देनदारी पर लगाए गए ब्याज को चुनौती देने की बात कही है।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि पहले जारी किए गए कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद आदेशों में तय की गई रकम और कंपनी की ओर से किए गए प्रावधान अलग-अलग हैं। 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान कंपनी के प्रबंधन के आकलन पर आधारित है और इसमें ब्याज भी शामिल है। इसे सभी लंबित जीएसटी विवादों का अंतिम निपटारा नहीं माना जाना चाहिए।

हजारों करोड़ के नोटिस से घटकर तय हुई देनदारी

Delta Corp और उसकी दो सहायक कंपनियों Highstreet Cruises & Entertainment तथा Delta Pleasure Cruise Company को 27 सितंबर 2023 को हैदराबाद स्थित जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) से कारण बताओ नोटिस मिले थे। इन नोटिसों में 1 जुलाई 2017 से 31 मार्च 2022 की अवधि के दौरान कुल 16,822.98 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया था।

कंपनी की पूर्व सहयोगी Deltatech Gaming को भी 28 अक्टूबर 2023 को कोलकाता स्थित DGGI से अलग नोटिस मिला था। इसमें जुलाई 2017 से नवंबर 2022 की अवधि के लिए 6,384.32 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया था।

इसके बाद कंपनी और संबंधित संस्थाओं ने अलग-अलग हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्हें जुलाई 2017 से नवंबर 2022 की अवधि से जुड़े मामलों की कार्यवाही पर रोक मिल गई थी। केंद्र सरकार ने भी उद्योग की ओर से अलग-अलग हाई कोर्ट में दायर इसी तरह की याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के बाद लंबित मामलों पर अदालत के तय सिद्धांतों और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत लागू मूल्यांकन प्रावधानों के अनुसार फैसला किया जाना था।

इसके बाद कंपनी को जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि के लिए समूह स्तर पर आदेश मिले। इन आदेशों में नियम 31C के तहत कैसीनो लेनदेन के लिए 151.15 करोड़ रुपये और मिक्स्ड सप्लाई के लिए 125.27 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी तय की गई।

वहीं, केवल Delta Corp के स्तर पर कैसीनो लेनदेन के लिए 78.56 करोड़ रुपये और मिक्स्ड सप्लाई के लिए 93.80 करोड़ रुपये की देनदारी तय की गई।

ये आंकड़े तय अवधि और संबंधित श्रेणियों के लिए जारी आदेशों से जुड़े हैं। इन्हें समूह की ओर से किए गए कुल प्रावधान के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रावधान में अतिरिक्त अवधि और ब्याज भी शामिल हैं।

ब्याज और बाद की अवधि को मिलाकर 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान

Delta Corp ने बताया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बताए गए सिद्धांतों और संबंधित आदेशों के आधार पर कैसीनो लेनदेन के लिए जुलाई 2017 से सितंबर 2023 तक और मिक्स्ड सप्लाई के लिए जुलाई 2017 से सितंबर 2025 तक की अवधि की जीएसटी देनदारी का आकलन किया है।

इस आधार पर 30 सितंबर 2026 तक समूह स्तर पर ब्याज सहित कुल 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसमें जून 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान दर्ज किए गए 306.73 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

केवल Delta Corp के स्तर पर यह प्रावधान 319.60 करोड़ रुपये रहा। इसमें जून तिमाही के दौरान दर्ज किए गए 200.62 करोड़ रुपये शामिल हैं।

कंपनी ने कहा कि उसने सावधानी बरतते हुए यह प्रावधान किया है, लेकिन संबंधित अधिकारियों और मंचों के सामने मांग को चुनौती देने के अपने सभी अधिकार सुरक्षित रखे हैं।

कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजों से जुड़े खुलासे में कहा, “कानूनी सलाह और प्रबंधन के आकलन के आधार पर कंपनी का मानना है कि उसके पास मिक्स्ड सप्लाई की पूरी मांग और नियम 31C के तहत तय जीएसटी मांग पर लगाए गए ब्याज को चुनौती देने के मजबूत आधार हैं।”

कंपनी ने यह भी बताया कि उसने बैलेंस शीट की तारीख के बाद जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि से जुड़े आदेश के तहत नियम 31C के अंतर्गत तय मूल देनदारी के लिए 80.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। केवल कंपनी के स्तर पर यह भुगतान 49 करोड़ रुपये बताया गया है।

यह भुगतान नियम 31C के तहत तय मूल देनदारी से संबंधित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मिक्स्ड सप्लाई और ब्याज समेत पूरा विवाद सुलझ गया है।

नए नोटिस से जीएसटी देनदारी को लेकर अनिश्चितता बरकरार

पहले जारी आदेशों के बाद भी Delta Corp के सामने जीएसटी से जुड़े मामले खत्म नहीं हुए हैं। कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों को गोवा के वाणिज्यिक कर आयुक्त की ओर से भी कारण बताओ नोटिस मिले हैं।

इन नोटिसों में 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 की अवधि के दौरान 1,883.96 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया है।

Delta Corp और Highstreet Cruises & Entertainment को ये नोटिस 17 मार्च 2026 को जारी किए गए थे, जबकि Delta Pleasure Cruise Company को 25 सितंबर 2026 को नोटिस मिला।

इन मामलों में आगे का फैसला जांच और सुनवाई की प्रक्रिया के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले और लागू मूल्यांकन नियमों के आधार पर होगा।

जीएसटी प्रावधान का सितंबर तिमाही के नतीजों पर असर

जीएसटी से जुड़े इस असाधारण खर्च का असर Delta Corp के सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों पर भी पड़ा। कंपनी ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में समूह स्तर पर 106.41 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी को 25.10 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस दौरान कंपनी की कामकाज से होने वाली आय घटकर 159.34 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 182.76 करोड़ रुपये थी।

असाधारण मदों और टैक्स को शामिल करने से पहले कंपनी का मुनाफा 21.57 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 34.69 करोड़ रुपये था।

सितंबर 2026 को समाप्त छह महीने की अवधि में भी समूह को 318.83 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 54.56 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस छह महीने की अवधि में कंपनी ने 443.65 करोड़ रुपये की असाधारण मद दर्ज की।

इस तरह, Delta Corp का जीएसटी प्रावधान कंपनी के वित्तीय नतीजों पर बड़ा असर डालने वाला रहा है। हालांकि, कंपनी ने मिक्स्ड सप्लाई और ब्याज से जुड़ी मांगों को चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखा है और कुछ मामलों में आगे की कार्यवाही अभी बाकी है। 

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YouTube पर सुन सकेंगे ऑडियोबुक, 2027 में लॉन्च करने की तैयारी

यूट्यूब (YouTube) अब वीडियो और म्यूजिक के साथ ऑडियोबुक के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
YoutubeAudio8541

यूट्यूब (YouTube) अब वीडियो और म्यूजिक के साथ ऑडियोबुक के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल के स्वामित्व वाला यह मंच बड़े बुक पब्लिशर्स के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि 2027 तक ऑडियोबुक की सुविधा शुरू की जा सके। इसके जरिए यूजर्स किताबों को पढ़ने के बजाय सुन सकेंगे।

इस सुविधा को यूट्यूब प्रीमियम (YouTube Premium) की मौजूदा सदस्यता के साथ जोड़ने या इसके लिए अलग से शुल्क लेने का विकल्प भी तलाशा जा रहा है। फिलहाल यूट्यूब प्रीमियम की सदस्यता की कीमत 15.99 डॉलर प्रति माह है। अगर यह योजना शुरू होती है, तो यूट्यूब का सीधा मुकाबला एमेजॉन की ऑडिबल (Audible) और स्पॉटिफाई (Spotify) जैसी सेवाओं से होगा।

पब्लिशर्स के लिए कमाई का नया मौका

बुक पब्लिशर्स के साथ यूट्यूब की बातचीत उनके लिए कमाई का नया रास्ता खोल सकती है। यूट्यूब के पास बड़ी संख्या में यूजर्स हैं, जिन तक ऑडियोबुक पहुंचाकर पब्लिशर अपनी किताबों से कमाई बढ़ा सकते हैं।

इसके साथ ही, मंच पर यूजर्स की ओर से अपलोड की गई बिना अनुमति वाली ऑडियोबुक पर भी लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल यूट्यूब पर कई ऐसे ऑडियोबुक अपलोड मौजूद हैं, जिन्हें संबंधित अधिकारधारकों की अनुमति के बिना साझा किया गया है।

हालांकि, इस सुविधा को किस तरह शुरू किया जाएगा और कमाई का बंटवारा कैसे होगा, इस पर अभी बातचीत चल रही है। संभावित योजनाओं में यूट्यूब प्रीमियम के सदस्यों को हर महीने एक ऑडियोबुक चुनने का मौका देना और उन्हें अलग-अलग किताबों की बदलती सूची उपलब्ध कराना शामिल है।

विज्ञापन से आगे बढ़कर कमाई बढ़ाने की तैयारी

यूट्यूब का यह कदम विज्ञापन से होने वाली कमाई के अलावा सदस्यता के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऑडियोबुक को जोड़ने से यूट्यूब प्रीमियम की सुविधाएं बढ़ेंगी और यूजर्स को सदस्यता लेने की एक और वजह मिल सकती है।

कंपनी पहले ही यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब प्रीमियम के 10 करोड़ से ज्यादा सशुल्क सदस्यों का आंकड़ा पार करने की घोषणा कर चुकी है। अब ऑडियोबुक की सुविधा जोड़कर कंपनी डिजिटल ऑडियो बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

दुनियाभर में ऑडियोबुक की लोकप्रियता बढ़ रही है और कई डिजिटल मंच इस क्षेत्र में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में यूट्यूब की इस संभावित पहल से ऑडियोबुक बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।

फिलहाल यह योजना बातचीत के स्तर पर है। यूट्यूब ने अभी तक इसके शुरू होने की तारीख, सदस्यता की कीमत और उपलब्ध किताबों की सूची को लेकर अंतिम जानकारी नहीं दी है। 

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Quint Digital ने Quintype Solutions के लिए दी 50 लाख डॉलर तक की कॉरपोरेट गारंटी

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने Quintype Solutions LLC के लिए कुल 50 लाख डॉलर (5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की कॉरपोरेट गारंटी दी है।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
Quint74

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने Quintype Solutions LLC के लिए कुल 50 लाख डॉलर (5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की कॉरपोरेट गारंटी दी है। कंपनी ने 17 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह गारंटी दो अलग-अलग मास्टर सर्विस एग्रीमेंट के तहत दी गई है। इन समझौतों के तहत कंपनी की अधिकतम गारंटी राशि 25-25 लाख डॉलर तय की गई है।

कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग नियमों के तहत बीएसई को यह जानकारी दी है। यह खुलासा सेबी के नियमों के तहत जरूरी जानकारी साझा करने के लिए किया गया है।

दो कंपनियों के साथ हुए समझौतों के लिए गारंटी

क्विंट डिजिटल ने बताया कि Quintype Solutions LLC ने दो अलग-अलग कंपनियों के साथ मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किए हैं। इनमें INN Partners, LLC, जो BLOX Digital के नाम से कारोबार करती है, और Lee Enterprises, Incorporated शामिल हैं।

इन दोनों समझौतों के तहत क्विंट डिजिटल ने Quintype Solutions की कुछ तय भुगतान संबंधी जिम्मेदारियों के लिए कॉरपोरेट गारंटी दी है। प्रत्येक समझौते में क्विंट डिजिटल की अधिकतम गारंटी की सीमा 25 लाख अमेरिकी डॉलर रखी गई है। इस तरह दोनों समझौतों के लिए कंपनी की कुल अधिकतम गारंटी राशि 50 लाख डॉलर तक है।

हालांकि, ये गारंटी संबंधित समझौतों के गारंटी से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद ही लागू होंगी। इनकी जिम्मेदारी संबंधित समझौतों में तय शर्तों, नियमों और सीमाओं के अधीन होगी।

Quintype Solutions में 10% हिस्सेदारी

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, Quintype Solutions LLC में क्विंट डिजिटल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Global Media Technologies Inc. के माध्यम से 10% इक्विटी हिस्सेदारी है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस लेनदेन में प्रमोटर, प्रमोटर समूह या समूह की कंपनियों का कोई हित नहीं है।

तत्काल नकदी खर्च होने की उम्मीद नहीं

क्विंट डिजिटल के मुताबिक, इन गारंटी के कारण कंपनी को तत्काल नकदी खर्च नहीं करनी पड़ेगी। कंपनी पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी तभी आ सकती है, जब संबंधित समझौतों में तय शर्तों के अनुसार कोई विशेष स्थिति पैदा होती है। कंपनी के मौजूदा आकलन के अनुसार, इन गारंटी से उसके वित्तीय प्रदर्शन पर किसी बड़े असर की उम्मीद नहीं है। 

 

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