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Father's Day Spl: एक पत्रकार बेटे की भावुक कहानी, जिसने अनोखी जिद है ठानी

महज 12 साल की उम्र, जब बच्चे अपने पिता की उंगुली पकड़ जीवन की राह पर चलना सीख रहे होते हैं, इसी उम्र में एक बेटे ने अपने पिता खो दिया। अब यह बेटा पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। दरअसल इस बेटे ने तब लोगों जिंदगियों का बचाने का प्रण लिया, जब उसे अपने पिता की मौत की सच्चाई का पता चला। अब तक यह बेटा 35 से ज्यादा जिंदगिया बचा चुका है। दरअसल यह कहानी ह

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

महज 12 साल की उम्र, जब बच्चे अपने पिता की उंगुली पकड़ जीवन की राह पर चलना सीख रहे होते हैं, इसी उम्र में एक बेटे ने अपने पिता खो दिया। अब यह बेटा पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। दरअसल इस बेटे ने तब लोगों जिंदगियों का बचाने का प्रण लिया, जब उसे अपने पिता की मौत की सच्चाई का पता चला। अब तक यह बेटा 35 से ज्यादा जिंदगिया बचा चुका है। दरअसल यह कहानी है लखनऊ के रहने वाले रोहित पांडे की। ‘फादर्स डे’ के अवसर पर रोहित ने पत्रिका डॉट कॉम से बातचीत में अपनी पूरी कहानी बताई, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं: रात का समय था दिन गुरुवार 28 नवंबर 2002 ठंड दस्तक दे चुकी थी। मैं भी लाइट के इंतजार में था की अभी लाइट आएगी और डीडी वन पर 'आंखे ' धारावाहिक देखूंगा। लेकिन लाइट नहीं आई। तब तक घर में कुछ हलचल सुनाई दी पता चला की पापा का एक्सिडेंट हो गया है। तब मेरी उम्र 12 साल थी। मैं सुना तो सोचने लगा आखिर क्या हो गया। लेकिन जो हुआ उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। फिर घर में कोहराम मच गया सब लोग गोंडा गए। मैं घर पर ही रुका। मां को यह विश्वास दिलाया कि मम्मी तुम रोओ मत मैं पूजा करने जा रहा हूं पापा मेरे ठीक हो जायेंगे। घर में जो पैसे हैं रख लो पता नही कितना क्या लगे मैं कल गोंडा आऊंगा। रात जैसे तैसे कटी रात भर फोन बजता रहा लेकिन कोई फोन ऐसा नही आया की जो यह कहे की निखिल पापा ठीक हैं। सुबह का दृश्य कुछ और ही था लोग जुटना शुरू हो गए। सुबह नहा धोकर तड़के ही उठ गया की पूजा करनी है तब तक ताई जी आ गईं रोते हुये मैंने पूछा रो काहे रही हैं बोलीं की छोटकनू (पापा का घर का नाम, परिवार में सबसे छोटे थे) अब नहीं रहे। घर के बाहर का दृश्य ही कुछ और था, बांस काटा जा रहा था। लकड़ियों का इंतजाम हो रहा था लोग बाट जोह रहे थे ,की लाश कब आएगी। सभी के आंखों में आंसू थे किसी को विश्वास नही था कि उमेश चन्द्र पांडे इस दुनिया में नहीं रहे। उसी दिन अलविदा की नवाज थी। दोपहर तक लगभग 2 हजार से अधिक लोग दुआरे पर जमा हो गए। सैकड़ों मुस्लिम भाई उस दिन अलविदा की नमाज तक नही अदा किए। दोपहर लगभग 3 बजे लाश आई......ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते मैने उन्हें मुख्याग्नि दी। 2009 को मैं बहराइच जनपद के जरवल रोड स्थित भभुआ गया जहां पापा का एक्सिडेंट हुआ था। तो पता चला की एक्सिडेंट के बाद भी वह 45 मिनट जिन्दा थे यह बात एक स्थानीय नागरिक ने बताई उसने यह भी कहा की शायद वह बच जाते यदि कोई उन्हें हॉस्पिटल ले जाता। इतना सुनते ही मेरे आंखों से आंसू आ गए।फिर वहीं यह संकल्प लिया कि अब मेरे देखते हुये कोई इलाज के अभाव में दम नही तोड़ेगा। तभी से अबतक यह सिलसिला बदस्तूर जारी है यदि कोई भी सड़क पर घायल मिल जाये तो उसे हॉस्पिटल जरूर पहुंचाता हूं। 1- बात 2009 की है जुलाई माह का एक लड़का घायल दिखा मेरे गांव के पास उतरौला रोड पर उसको हॉस्पिटल ले गया जो पैसा था उसी में लगा दिया पैसा माँ ने दिया था घर की पुताई हो रही थी उसी के लिये रंग लाना था। फिर उसे घर छोड़ने गया। 2- एक बार एक मजदूर दम्पति जा रहे थे कहीं किसी गाड़ी ने ठोकर मार दी पति घायल हो गया। पत्नी बैठी रो रही थी फिर उसे हॉस्पिटल भेजा। 3- एक बार प्रतापगढ़ से वापस आ रहा था लखनऊ की ओर गोसाईगंज के पास एक अमेठी कस्बा है वहा जेसीबी और टेम्पो में टक्कर हो गई थी। जिसमें चालक तुरन्त मर गया एक गंभीर रूप से घायल था वह घंटो रोड पर पड़ा रहा भीड़ जमा थी लेकिन कोई मदद को तैयार नहीं। जब वहां पहुंचा, मेरे साथ एक साथी अभिषेक जी के साथ एक प्राइवेट गाड़ी से घायल को हॉस्पिटल ले गया। उसके बाद घटना स्थल पर आया जहां बॉडी पड़ी थी, उसका पंचनामा भरने वाला कोई नहीं, फिर पंचनामा करवाया। 4- एक शादी के प्रोग्राम से लौट रहा था रात के 11 बज रहे थे वह रिंग रोड पर घायल पड़ा था लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया। 5- एक अधेड़ उम्र का आदमी अपने बेटे के लिए जो की हॉस्पिटल में भर्ती था उसके लिए खाना लेकर जा रहा था किसी अज्ञात वाहन ने उसे जियामऊ डीजीपी ऑफिस के सामने टक्कर मार दी जो गम्भीर रूप से घायल हो गया खाना पूरा रोड पर बिखरा पड़ा हुआ। कोई मदद को तैयार नहीं फिर एक रिजर्व बैंक की अधिकारी की गाड़ी से सिविल हॉस्पिटल ले गया। साथ में दो मित्रों के सहयोग से। 7- अपने प्लाट से लौट रहा था अमराई गांव इंदिरा नगर लखनऊ में एक दुर्घटना हुई जिसमें बाइक चालक बाइक लेकर एक कच्चे मकान की दीवार को भेदता हुआ अंदर जा गिरा पीछे बैठा हुआ व्यक्ति नाले में गिर गया। लोग जुटे हुए थे लेकिन कोई मदद को तैयार नहीं, वहां से कोई आसपास वाहन की व्यव्स्था भी नहीं। फिर पुलिस की मदद से ऑटो लिया और सिविल ले गया जहां उसने दो दिन बाद दम तोड़ दिया। 8- एक व्यक्ति लोहिया पथ पर घायल पड़ा था डिवाइडर से टकरा गया था जिसे सिविल हॉस्पिटल ले गया, फिर ट्रॉमा। दूसरे दिन होश आया वह शाहजहांपुर का था। दीपावली के लगभग की घटना है। 9- बीते 17 तारीख की बात है लखनऊ में दफ्तर से लौटा सेविंग करवाने के लिए दुकान पर बैठा ही था की एक बाइक सवार को किसी वाहन ने ठोकर मार दी वो घायल हो गया जिसे गोमतीनगर स्थित लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। उसी दिन देर शाम एक व्यक्ति को और हॉस्पिटल ले गया। ऐसे 3 दर्जन से अधिक घटनाए हैं जिनमें 2 की इलाज के दौरान मौत हो गई और जितनों को भर्ती कराया सब बचे। बाइक में हमेशा फर्स्ट ऐड की किट रखे रहता हूं। (साभार: पत्रिका डॉट कॉम)   समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।  


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