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सुधीर तैलंग को कुछ इस तरह याद किया कार्टूनिस्ट इरफान ने...
सुधीर तैलंग को कुछ इस तरह याद किया कार्टूनिस्ट इरफान ने...
समाचार4मीडिया के आग्रह पर आज के चर्चित कार्टूनि्स्ट इरफान ने मशहूर कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग को याद करते हुए उन्हें इस शब्दों के जरिए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पिल की है।
इरफ़ान खान
कार्टूनिस्ट
समाचार4मीडिया ब्यूरो
9 years ago
समाचार4मीडिया के आग्रह पर आज के चर्चित कार्टूनि्स्ट इरफान ने मशहूर कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग को याद करते हुए उन्हें इस शब्दों के जरिए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पिल की है।
इरफ़ान खान
कार्टूनिस्ट
हर कला में कलाकार एक से एक होते हैं मगर ‘स्टार’ इक्का-दुक्का ही होते हैं। कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग उन्हीं विरले व्यक्तित्व में से थे, जिनमें कला के साथ-साथ एक स्टारडम भी था।
उनकी ख़ास बात थी कि उनके मित्र बहुत सारे थे। वह चाहे मीडिया हो,फिल्म जगत हो,संगीत या,फैशन की दुनिया हो या पेज थ्री की महफ़िल हो सभी जगह उनके इफरात में मित्र मिलते थे। उनके उम्दा काम के अलावा उनके बात करने का स्टाइल भी लाजवाब था। वह अपने पेशे को बहुत सम्मान करते थे और हमेशा लोगों से उसका सम्मान करने को कहते थे। इसके लिए उन्हें चाहे जितना संघर्ष करना पड़े। इसलिए जब भी कभी कार्टून कला के सम्मान की चैनलों पर या मीडिया में कहीं भी बात आती थी उनमे वह सबसे पहले दिखाई देते थे। अपने काम से वह राजनेताओं में काफी चर्चा में रहते थे। वह पूरे समय ब्रश से काम करते थे जो बहुत धैर्य वाला काम था।
अखबार के अलावा वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और संचार के कई माध्यमों में वह अपने काम से मौजूद रहते थे। पिछले दस सालों में उन्होंने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर बहुत आक्रामक कार्टून बनाये, जिनकी एक किताब भी प्रकाशित हुई। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा के प्रतिष्ठित कार्टूनिस्ट थे। मेरी उनसे पहली मुलाकात तब हुई जब मैं अपनी कार्टून प्रदर्शनी के लिए दिल्ली आया तब नवभारत टाइम्स के दफ्तर में उन्होंने ही मुझे गाइड किया था कि मैं किस साइज़ में कार्टून प्रदर्शनी में लगाऊं। मेरा सौभाग्य था कि उनके हिन्दुस्तान टाइम्स जाने के बाद मेरा चयन नवभारत टाइम्स में हुआ। मैं यह नहीं कह सकता कि मैंने उनके खाली स्थान को भरा मगर मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा। उनके काम में बहुत ताकत थी।
आज एक साल के अंतराल में देश ने कार्टून जगत के दो सिरों को खो दिया है। पिछले साल आर.के. लक्ष्मण और अब युवा कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग। दुखद यह और भी तब है जब कार्टून कला अपनी अंतिम सांसे गिन रही है ऐसे में हमें कई लक्ष्मनों और सुधीर तैलंगों की ज़रुरत है। कहना होगा कि देश के तमाम युवा कार्टूनिस्टों ने आज अपना हीरो खो दिया है।
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