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प्रसून जी कुछ दिन चुप रहेंगे, उनकी शुभचिंतक ब्रिगेड लगातार कहेगी, वो खुद नहीं कहेंगे
खबर है कि पुण्य प्रसून जी ने 'सूर्य' नमस्कार कर लिया है। इस पुष्ट/अपुष्ट खबर के साथ ही उनकी 'शुभचिंतक ब्रिगेड'...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
खबर है कि पुण्य प्रसून जी ने 'सूर्य' नमस्कार कर लिया है। इस पुष्ट/अपुष्ट खबर के साथ ही उनकी 'शुभचिंतक ब्रिगेड' बवाल काटने में लग गई है कि प्रसून जी को एक बार फिर केंद्र सरकार ने दबाने की कोशिश की है। लोग कह रहे हैं कि चैनल के मालिक पर मोदी सरकार ने पुण्य प्रसून को बाहर करने के लिए फिर से दबाव डाला है.....लेकिन सवाल यह है कि अब होगा क्या?
अब होगा ये कि प्रसून जी कुछ दिन चुप रहेंगे, बिल्कुल मौन धारण कर लेंगे। क्योंकि उन्हें सिर्फ चैनल पर बोलना ही पसंद है। लेकिन उनकी शुभचिंतक ब्रिगेड लगातार बोलेगी। आरोप-प्रत्यारोप चलेंगे, लेकिन प्रसून जी कुछ नहीं बोलेंगे। फिर एक दिन खबर आएगी की प्रसून जी ने कोई नया चैनल जॉइन कर लिया है। नए चैनल में नए शो के टीजर के साथ प्रसून जी फिर प्रकट हो जाएंगे। नए प्रोग्राम के बारे में खूब लिखेंगे, लेकिन पुराने से क्यों निकाले गए, ये नहीं बताएंगे। उनकी शुभचिंतक ब्रिगेड लगातार कहेगी कि मोदी सरकार ने निकलवाया। वो खुद नहीं कहेंगे।
मैं ये नहीं कह रहा कि सरकारें पत्रकारों की आवाज को नहीं दबाती हैं। पत्रकारों की आवाज़ को दबाने का गुण नेताओं में जन्म के साथ ही आ जाता है। राजनीतिक दल अपने हिसाब से पत्रकारों की 'सेटिंग्स' करके रखते हैं, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जो पत्रकार चैनल पर सरकार से मुखर होकर सवाल पूछता है तो वही पत्रकार किसी सरकार के दबाव के कारण निकाले जाने पर चुप क्यों हो जाता है। जब चारों तरफ उसको लेकर शोर होता है तो वो खुद चुप क्यों हो जाता है। जब वो नई जॉइनिंग को लेकर माहौल बनाते हैं तो फिर 'दबाव' में निकाले जाने पर माहौल क्यों नहीं बनाते?
दूसरी बात ये है कि अगर पुण्य प्रसून पर सरकार बार-बार दबाव बना रही है तो फिर वो छोटे-मोटे चैनलों में नौकरी क्यों करना चाह रहे हैं? क्यों नहीं वो डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हुए अपनी 'क्रांतिकारिता' करते हैं। वहां उन्हें कोई रोकने वाला भी नहीं होगा। यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म से खर्चे लायक कमाई तो हो ही जाएगी। इतने लोग कर रहे हैं। जिस चैनल में अब प्रसून जी काम कर रहे हैं, उस चैनल से ज्यादा रीच यूट्यूब पर उनकी खुद की हो जाएगी। लेकिन पता नहीं क्यों पूंजीपतियों को लगातार कोसने वाले प्रसून जी पूंजीपतियों के चैनलों की तरफ भाग रहे हैं? आइये डिजिटल में.....यहां से कोई नहीं निकालेगा।
(पत्रकार श्याम त्यागी की फेसबुक वॉल से)
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