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मधुसूदन आनंद हमेशा यादों में बने रहेंगे : अनिल जैन
आनंद जी ने जर्मनी में 'डायचे वेले' (द वाॅयस ऑफ जर्मनी) में कुछ सालों तक काम किया और वे 'वाॅयस ऑफ अमेरिका' के नई दिल्ली स्थित संवाददाता भी रहे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 hours ago
अनिल जैन, वरिष्ठ पत्रकार।
वरिष्ठ पत्रकार, कहानीकार और नवभारत टाइम्स, नईदुनिया, दैनिक जागरण आदि अखबारों के संपादक रहे श्री मधुसूदन आनंद नहीं रहे। आनंद जी अपने करियर में लंबे समय तक नवभारत टाइम्स में रहे और वहां संपादक बनने से पहले उन्होंने राजेन्द्र माथुर के नेतृत्व में भी काम किया। उनकी पत्रकारिता और उनके सरोकारों पर माथुर साहब के लोकतांत्रिक मिज़ाज, उनकी विश्व दृष्टि और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों का गहरा असर दिखता था। आनंद जी के साथ नईदुनिया (दिल्ली) में काम करने का मुझे भी अवसर मिला।
उस दौरान मैंने उनसे काफी कुछ सीखा-समझा। मैंने विभिन्न अखबारों में जितने संपादकों के साथ काम किया, उनमें आनंद जी को मैं सर्वश्रेष्ठ संपादक मानता हूं। आनंद जी अखबारों में उन संपादकों की आखिरी पीढ़ी के थे जो खुद भी पढ़ते-लिखते थे और अपने सहयोगियों को भी इसके लिए प्रेरित करते थे।
उनकी लिखी कहानियों, कविताओं और निबंधों के कई संग्रह प्रकाशित हुए हैं। कुछ किताबों का संपादन भी उन्होंने किया। बेहद शालीन, संवेदनशील, विद्वान, स्वाभिमानी और ईमानदार व्यक्तित्व के धनी आनंद जी जितने बड़े पत्रकार-संपादक थे, उतने ही बड़े वे इनसान भी थे।
नईदुनिया की मिल्कियत बदलने के बाद वे भारतीय ज्ञानपीठ की पत्रिका 'नया ज्ञानोदय' के संपादक हो गए थे। कुछ समय बाद केंद्र में सत्ता परिवर्तन होने पर मीडिया संस्थानों के माहौल में और उनके मालिकों के मिज़ाज में आमूल चूल बदलाव आया। वहां पेशागत ईमानदार, स्वाभिमानी और पढ़ने-लिखने वाले पत्रकारों की जरुरत खत्म हो गई।
नईदुनिया के नए मालिक का रिकॉर्ड तो पहले से खराब था, सो उसने तत्कालीन लठैत संपादक के जरिये मुझे भी परेशान कर बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया था। नईदुनिया से मेरे बाहर होने के बाद आनंद जी अक्सर मेरी खैर-खबर लेते रहते थे। आनंद हमेशा यादों में बने रहेंगे। उनकी प्रेरक स्मृति को मेरे सादर प्रणाम।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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