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मैट शूमर के लेख का मतलब क्या है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

मैट ने सबको सलाह दी है कि हर रोज AI का इस्तेमाल गंभीरता से शुरू करें। ChatGPT , Gemini जैसे टूल को गूगल सर्च की तरह इस्तेमाल नहीं करें। उससे अपने रोजमर्रा के काम करवाए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 2 days ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

'Something Big Is Happening; इस शीर्षक का लेख पिछले दिनों से वायरल है। यह लेख मैट शूमर ने लिखा है। वो HyperwriteAI और OthersideAI जैसी कंपनियाँ चलाते हैं। उन्होंने AI की तुलना फ़रवरी 2020 में कोरोना वायरस के शुरुआती दिनों से की है। उस समय कोरोना वायरस को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा था लेकिन कुछ हफ्तों में हमारी दुनिया बदल गई। उनका मानना है कि यही स्थिति AI को लेकर है, ज़्यादातर लोगों को अंदाज़ा नहीं है कि आने वाले वर्षों में हमारी दुनिया कैसी होगी? हिसाब किताब में समझेंगे कि मैट शूमर के लेख का मतलब क्या है?

मैट का लेख बहुत बड़ा है। आपको समय निकालकर पढ़ना चाहिए। मोटे तौर पर वो तीन बातें बता रहे हैं। AI साल साल दर साल बेहतर हो रहा है। AI कौन से काम इंसान से बेहतर कर रहा है? AI का इस्तेमाल आप हर रोज़ कैसे करें? तो मैट ने लिखा है कि चार साल बाद अब AI की फ़ैसले लेने की क्षमता बेहतर है। वो अच्छे बुरे की पहचान कर सकता है। 2022 में AI छाती ठोक कर बताता था कि 7x8=54 होता है यानी गणित भी कमजोर था। 2023 में AI अमेरिका में वकील बनने की परीक्षा पास करने लग गया यानी गणित के अलावा बाकी विषयों पर भी पकड़ बनाने लगा।

2024 में AI ने कामचलाऊ सॉफ़्टवेयर लिखना शुरू किया और ग्रेजुएट लेवल का साइंस समझने लगा। 2025 में AI को दुनिया के कुछ बड़े इंजीनियर ने सॉफ़्टवेयर लिखने का काम दे दिया। 2026 में AI का जजमेंट और टेस्ट दोनों बेहतर हो गया। मैट के मुताबिक़ GPT 5.3 Codex और Anthropic Opus 4.6 उनके निर्देशों को समझ कर लागू करने लगा है। अच्छे बुरे की समझ बेहतर हुई।

मैट ने लिखा है कि रिसर्च, लंबे लेख, कोडिंग, मार्केटिंग जैसे काम AI इंसान के मुक़ाबले 5 से 10 गुना तेज़ी से कर लेता है। अगर आप उस पर नज़र रखेंगे तो आउटपुट अक्सर इंसानों से बेहतर होगा। उनका कहना है कि जो भी काम आप कम्प्यूटर पर बैठकर करते हैं वो काम AI कर सकता है जैसे लीगल, पत्रकारिता, मार्केटिंग, साफ्टवेयर कोडिंग, फ़ाइनेंशियल एनालिसिस, कस्टमर सपोर्ट आदि।

Anthropic के CEO दारियो अमोदेई भी कहते रहे हैं कि पाँच साल में आधे से ज़्यादा White Collar Jobs खत्म हो सकते हैं। मैट ने एक और दिलचस्प बात कही है कि AI Labs ने पहले सॉफ़्टवेयर बनाने पर ध्यान दिया। AI सॉफ़्टवेयर लिखने लगा। इससे AI के डेवलपमेंट में ही मदद मिली है। इसका मतलब यह नहीं है कि वो दूसरे क्षेत्रों को प्रभावित नहीं कर सकते हैं यानी ख़तरा सिर्फ IT कंपनियों तक सीमित नहीं है। पूरा सर्विस सेक्टर भी इसकी चपेट में आ सकता है।

मैट ने सबको सलाह दी है कि हर रोज AI का इस्तेमाल गंभीरता से शुरू करें। ChatGPT , Gemini जैसे टूल को गूगल सर्च की तरह इस्तेमाल नहीं करें। उससे अपने रोजमर्रा के काम करवाए। हर रोज आधे से एक घंटे तक AI चलाएँ। वो यह भी कहते है कि AI के Paid वर्जन इस्तेमाल करें क्योंकि यह फ्री मॉडल से ज़्यादा बेहतर है। भारत में तो ज़्यादातर Paid वर्जन अभी फ्री मिल रहे है। उनका कहना है कि जो लोग इसे गंभीरता से इस्तेमाल कर रहे हैं वो 5 से दस गुना ज़्यादा प्रॉडक्टिव है। अगर आप AI का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो पीछे छूट रहे हैं। यही बात मैं भी लगातार हिसाब किताब में कह रहा हूँ।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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