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मुस्लिमों के लिए बहुत ही फायदेमंद है मोदी की ये योजना, बोले वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सिराज कुरैशी
डॉ. सिराज कुरैशी वरिष्ठ पत्रकार ।। ‘प्रधानमंत्री नई मंजिल’ योजना मुस्लिम वर्ग के बच्चों के भविष्य के लिये बहुत फायदेमंद साबित हुई है। हमारे हिन्दुस्तान में दोनों मदरसों की तादात दिन व दिन बढ़ती जा रही है। इन मदर
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
डॉ. सिराज कुरैशी
वरिष्ठ पत्रकार ।।
‘प्रधानमंत्री नई मंजिल’ योजना मुस्लिम वर्ग के बच्चों के भविष्य के लिये बहुत फायदेमंद साबित हुई है। हमारे हिन्दुस्तान में दोनों मदरसों की तादात दिन व दिन बढ़ती जा रही है। इन मदरसों से तालीम अभी तक सिर्फ दीनी ही दिलायी जा रही थी जिसको हासिल करके बच्चा, हाफिज, कारी, मुफ्ती और इमाम बन सकता था, लेकिन इसके अलावा अगर वह आगे चलकर किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या कॉलेज में किसी दूसरें विषय को हासिल करने के लिए दाखिला लेना चाहता था तो वह नहीं ले सकता था क्योंकि जिस मदरसे में उसने दीनी तालीम हासिल की है। वह सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं है।
शायद ऐसे बच्चों के उज्जवल भविष्य बनाने को मद्देनजर रखते हुए केन्द्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री नई मंजिल’ योजना की शुरुआत करके एक बेहतरीन कदम उठाया है। इस योजना से अब दीनी मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को (जिनकी उम्र 17 से 35 वर्ष की भी हो) आसानी से सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में दाखिला भी मिल सकेगा।
देश में लगभग तीन लाख मदरसे हैं। हर साल 100 से ज्यादा इंटर कक्षा की पढ़ाई भी पूरी करते हैं लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें किसी कॉलेज में दाखिला नहीं मिलता और वह भटकते रहते हैं क्योंकि उनके पास मान्यता प्राप्त का सर्टिफिकेट नहीं होता और उस 12वीं पास विद्यार्थी को कोई अच्छी नौकरी भी नहीं मिल सकती। यही नहीं, इस नई मंजिल योजना के तहत मुस्लिम बच्चों के लिए एक साल का कोर्स भी शुरू किया गया है। इस कोर्स के अंतर्गत बच्चा ड्राइविंग, सिक्योरिटी गार्ड, कारपेन्ट्री, मोटर कार मैकेनिक वगैरह-वगैरह भी सिखाया जाएगा, जिससे वह खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
यह कोर्स देश के सभी विश्व विद्यालयों को मान्य होगा। इस योजना से मदरसों में पढ़ने वाला बच्चा अपनी मंजिल को मनचाहे तरीके से हासिल कर सकता है। अभी तक पांच हजार छात्रों की पहली शिफ्ट बनाई जा चुकी है। इस नई मंजिल योजना को चलाने की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार ने ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउन्डेशन’ को दी है। यही नहीं बल्कि 3165 करोड़ रुपए का बजट भी अलॉट कर दिया है। फाउन्डेशन ही टीचरों की भर्ती करेगा, जोकि छात्रों की रुचि के अनुसार उन्हें शिक्षा देगें या दस्तकारी सिखायेंगे।
देखा गया है कि किसी बच्चे को पढ़ाई में कोई रुचि नहीं होती। उसको लेकर उसके बालिदेन काफी परेशान भी रहते हैं, इसलिये सरकार ने इस योजना में दस्तकारी सिखाने का भी दरवाजा खोल रखा है। जब अगस्त 2016 में इस नई मंजिल योजना की शुरुआत केन्द्र सरकार ने बिहार प्रदेश से की थी तो देश के अन्य राज्यों ने भी इस ओर अपनी रुचि दिखाई। राज्यों की रुचि को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र सरकार ने देश के सभी राज्यों में भी इस योजना को लागू कर दिया है।
लेंकिन इस योजना के अंतर्गत अभी लड़कियों को शामिल नहीं किया गया है। हां बहुत जल्द मदरसों में पढ़ने वाली बच्चियों को और 12वीं तक मजहबी तालीम पढ़ने वाली लड़कियों को भी इंटर कॉलेजों और डिग्री कॉलेजों में भी दाखिले की सुविधा मोहिया कराई जा सकती है। अगर कोई लड़की हैन्डीक्राफ्ट की कला, पेन्टिंग, फैशन डिजाइन या कोई दूसरा हुनर सीखना चाहेगी तो उसका भी इंतजाम किया जा सकता है। लड़कों को इस योजना में पहले इसलिये रखा गया है कि वह आगे पढ़ लिखकर या अच्छा हुनर सीखकर अपने वालिद का हाथ बटा सकें और घर-परिवार चलाने में सहुलियत दिला सके। इस योजना को लाने में मुस्लिम समाज में वह भ्रम भी दूर हो गया है कि केन्द्र सरकार मुस्लिम वर्ग के लिये कुछ नहीं कर रही।
जिन लड़को को हैन्डीक्राफ्ट वर्क, ड्राइविंग, कारपेन्ट्री, मैकेनिक बगैरह का जहां काम सिखाया जाएगा, उसे ‘ओपिनियन स्कूल’ का नाम दिया गया है। वहां पर जो भी कोच रखा जाएगा, वह मौलाना आजाद एजुकेशन फाउन्डेशन ही रखेगा और फाउन्डेशन ही उनका वेतन देगा। बिना पढ़े-लिखे छात्रों के हाथों में जब उनका पंसदीदा हुनर आ जाएगा, तब फाउन्डेशन ही उसे सर्टिफिकेट देगा। सर्टिफिकेट एक वर्ष से पहले नहीं दिया जायेगा।
प्रधानमंत्री नई मंजिल योजना के शुरू होने से मुस्लिम वर्ग में खुशी की लहर दौड़ती दिखाई दे रही है। कुछ लोग इस योजना को वोट की सियासत रुपी चश्में से भी देखने की कोशिश में लग गये हैं जो कि मेरे ख्याल से सही नहीं है। बुजुर्गो का यह कहना पूरी तरह सही है कि हमेशा अच्छी चीज को या उम्दा योजना को सही ही कहे तो ठीक रहता है। यह 100 प्रतिशत सही है कि इस योजना से मदरसों में पढ़ने वाले उन छात्रों का बहुत भला होगा जो आगे पढ़कर बढ़ना चाहेंगे।
लेंकिन यह योजना अभी पूरी तरह अमल में ही नहीं लायी गई है कि कई सियासी पार्टियों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है। एक सियासी पार्टी के सीनियर लीडर ने स्वयं मेरे से कहा कि भाजपा कभी भी मुसलमानों के हित में सोच ही नहीं सकती है। अगर वास्तव में इस योजना का लाभ मदरसों में पढ़ने वाले मुस्लिम बच्चों को पहुंचाना ही केन्द्र सरकार का मकसद है तो इस योजना का प्रचार-प्रसार आखिर सरकार तेजी के साथ क्यों नहीं कर रही। अगर समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा अन्य योजनाओं की तरह इस योजना का भी विज्ञापन दे तो इस समुदाय के बच्चों को लाभ पहुंच सकता है। यही नहीं अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) के कार्यकर्ताओं को ही इस योजना के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सौंप दें तो भी इससे मदरसा के मैनेजर और मुस्लिम समुदाय के पढ़े लिखे लोग वाकिफ हो सकते हैं।
खैर सियासी लोगों का यह प्रचलन बन गया है कि सत्ताधारी कोई भी योजना या कोई भी लाभकारी निर्देश लागू करें। उसे उसका विरोध ही करना है। जैसे आजकल नोटबन्दी के आदेश को ही लें। इस आदेश के लागू होने से निर्धन और मध्यम वर्ग के लोग भारी परेशानी झेलते हुए भी मोदी जी के इस कदम की तथा केन्द्र सरकार के फैसले की प्रशंसा भी करते देखे जा सकते हैं, जबकि कई सियासी पार्टियों के मुखिया इसका कड़ा विरोध भी कर रहे हैं। शायद यह सियासी लोग यह भूल जाते हैं कि शासन को चलाने की जिम्मेदारी सिर्फ अवाम के द्वारा ही मिलती है अगर किसी योजना का लाभ उस वर्ग को नहीं मिलता है तो वह वर्ग वर्तमान सरकार कथनी और करनी को मद्देनजर रखते हुए भविष्य में उस सत्ताधारी पार्टी (जिसने योजना लागू की है) से दूरी बनाने से भी नहीं चूकता। हां अगर वास्तव में लागू की गई योजना या आदेश से कोई विशेष वर्ग या आम जनता को फायदा पहुंचता है तो वह उसका गुणगान गाने से भी नहीं थकती और भविष्य में भी उस पार्टी की हिमायती बन जाती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मेरी नजर में ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो हर योजना और आदेश को देश की अवाम के सामने पेश करने से पहले उसका गुणा-भाग भी लगा लेते हैं। प्रधानमंत्री नई मंजिल योजना हो या नोटबंदी का आदेश इससे उनकी ही पार्टी (भाजपा) के अनेकों सदस्य ऐसे हैं जिनके गले शायद यह नहीं उतर रही है क्योंकि वह केवल अपने स्वार्थ और सियासी नम्बर का चश्मा लगाये हुए हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो चश्मा लगाये हुए हैं। उस चश्में का नम्बर ‘देश के उत्थान’ रुपी है। इसलिये मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि चाहे नोटबंदी का आदेश हो या नई मंजिल योजना वह देश के भविष्य के लिये लाभकारी सिद्ध होगी।
(लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार है और कबीर पुरस्कार से सम्मानित है)
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