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विनोद, सच कहूं तो तुम्हारी ‘सोच’ सुन मैं डरा था : अजीत अंजुम

दो साल की बच्ची से एक्टिंग कैसे करा पाओगे? करीब साढ़े तीन साल पहले जब पत्रकार से...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago

अजीत अंजुम

वरिष्ठ पत्रकार ।।

पत्रकार से फिल्मकार बने विनोद कापड़ी की फिल्म पीहूका ट्रेलर सबको डरा क्यों रहा है?

दो साल की बच्ची से एक्टिंग कैसे करा पाओगे? करीब साढ़े तीन साल पहले जब पत्रकार से फिल्मकार बने विनोद कापड़ी ने छोटी सी बच्ची ‘पीहू’ को लेकर फिल्म बनाने का आइडिया मुझसे शेयर किया था तो मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी। उसने कहा था- ‘हो जाएगा यार। करवाएंगे न। यही तो खास बात होगी इस फिल्म की कि इतनी छोटी बच्ची ही फिल्म के लीड रोल में होगी’। जब विनोद ये बता रहा था तो उसके हाथ में बालकनी से झांक रही गुड़िया सी एक बच्ची की तस्वीर थी। मैं सपनीले उत्साह से लबरेज उसके मुस्कुराते चेहरे को देखकर अपना अविश्वास जता रहा था और वो एक ही बात कह रहा था कि हो जाएगा। करते हैं। देखते हैं। फिर उसने बताया कि पीहू नाम है इस बच्ची का और ‘आजतक’ में काम करने वाले रोहित विश्वकर्मा की बेटी है।


अगर मुझे ठीक से याद है तो कई दिनों तक विनोद उस तस्वीर को अपने साथ लेकर घूमता रहा था। कई मौकों पर उसने अपने भीतर बुनी जा रही फिल्म का जिक्र किया, लेकिन हमारा मन सशंकित था कि विनोद कह तो रहा है, लेकिन पता नहीं इतनी छोटी सी बच्ची को लेकर फिल्म बना कैसे पाएगा। रोने, हंसने, खेलने और सोने के अलावा अपनी तुतलाती जुबान से सिर्फ मम्मी-पापा बोल सकने वाली बच्ची कैसे समझेगी कि उसे कैमरे के सामने क्या करना है और क्या नहीं करना है। कब कुछ करना है और कब रुक जाना है।

तमाल सवाल थे पीहू को लेकर कि कैमरे सामने कैसे एक्टिंग करेगी? कैसे फिल्म की स्क्रिप्ट के हिसाब से रोल अदा करेगी? दो साल की बच्ची, जो कभी सोने लगती है तो कभी रोने लगती है। कभी खेलने लगती है। कभी खाने की जिद करती है। कभी रुठ जाती है। कभी मां-बाप को छोड़कर किसी के पास जाने से इनकार कर देती है। ये सब करने वाली बच्ची किसी फिल्म में अभिनय कैसे करेगी?

दो साल की बच्ची भाव-भंगिमा कैसे बनाएगी? निर्देशक के कहने पर कैसे हिरोइन की तरह काम करेगी? ऐसे कई सवाल मेरे जेहन में आए थे। मैंने विनोद कापड़ी से पूछा भी था लेकिन वो अपनी सोच,अपने आइडिया और अपनी दो साल की हिरोइन को लेकर आश्वस्त थे। उनके जेहन में बहुत कुछ पक रहा था। कहानी बुनी जा रही थी। किरदार रचा जा रहा था। फिल्म की तस्वीरें आकार ले रही थी। कुछ दिनों बाद पता चला कि ग्रेटर नोएडा में विनोद की फिल्म की शूटिंग हो रही है। दोस्त के नाते भी और जिज्ञासावश भी, हम ग्रेटर नोएडा उसकी फिल्म की लोकेशन पर गए। जिस तरह से वो फिल्म के सीन की शूटिंग कर रहा था, देखकर मैं दंग रह गया। एक बड़े से फ्लैट को सेट में बदल दिया गया था। पूरी टीम पीहू के मूड के हिसाब से ही कैमरा ऑन-ऑफ करती थी। या कहें कि पूरी टीम पीहू के डिस्पोजल पर थी। फिल्म की कहानी के हिसाब से माहौल रच दिया गया था। खेल-खेल में पीहू से ऐसे एक्टिंग कराई जा रही थी कि उसे भी नहीं पता चल रहा था कि हो क्या रहा है। कई बार वो सामने कैमरा और लोगों को देखकर चुपचाप हो जाती थी। कभी रोने भी लगती थी। फिर तो सब बंद। पीहू के मम्मी-पापा उसे चुप कराते। खाना खिलाते। थोड़ी देर उसके साथ खेलकर सहज करते। फिर उसी शूटिंग रूम में पीहू और कैमरे का खेल शुरू होता। हम ताक-झांक करके शूटिंग देखकर अपने भीतर सौ सवाल समेटे हुए वापस लौटे। पता नहीं कैसे पूरी होगी फिल्म? डबिंग कैसे होगी? हां, एक बात पक्के तौर पर मुझे लगता था कि अगर ये फिल्म जैसा विनोद कापड़ी चाहते हैं, वैसी बन गई तो नाम जरूर कमाएगी। सुर्खियां,चर्चा और तारीखें इसके हिस्से में जरूर आएंगी। वही हुआ। फिल्म बनी। वैसी ही बनी जैसी विनोद बनाना चाहते थे। नतीजा सामने है।

पीहू का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। एक ही दिन में लाखों लोग न सिर्फ पीहू के ट्रेलर को देख चुके हैं बल्कि दो साल की बच्ची को लेकर किए गए प्रयोग के लिए विनोद कापड़ी की तारीफें कर रहे हैं। लोग हैरत में हैं कि ये फिल्म कैसे शूट हो पाई होगी। अमिताभ बच्चन जैसे महानायक से लेकर मनोज वायपेयी जैसे एक्टर तक और अनुभव सिन्हा से लेकर कई नामचीन निर्देशक तक ने सोशल मीडिया पर इस फिल्म के किरदार को लेकर हैरानी जताई है। किसी ने इसे सिनामाई चमत्कार का दर्जा दिया है।


ट्रेलर में दिखता है कि दो साल की बच्ची घर में अकेली है। उसकी मां का बेजान जिस्म बेड पर पड़ा है। बच्ची कभी अपनी मां को जगाने की कोशिश कर रही है। कभी फ्रिज में बंद हो जाती है। कभी ऊंची बालकनी में झांकती है। कभी मम्मा-मम्मा करते हुए बेड पर बेजान मां को उठाना चाहती है। कभी बिजली का स्विच ऑन कर देती है। कुल मिलाकर एक डरावने माहौल में अकेली बच्ची क्या-क्या कर रही है, इस ट्रेलर में तो इतनी ही दिखता है लेकिन जो दिखता है, वो डराता है।


ये फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्मी दुनिया के तमाम लोग ट्रेलर देखकर विनोद कापड़ी के सिनेनाई स्किल की तारीफ कर रहे हैं। अभिताभ बच्चन ने अपने ट्विटर पर लिखा- एक फिल्म सिर्फ एक कलाकार पर? सिर्फ एक बच्ची? जो भी ट्रेलर देखेगा, वो पहली बार शायद यही कहेगा- ओह माई गॉड। ट्रेलर का आखिरी सीन लोगों को जिज्ञासा के चरम पर ले जाकर छोड़ देता है कि उस बच्ची के साथ क्या हुआ?

यहां देखें 'पीहू' का ट्रेलर-

पिछले साल गोवा फिल्म महोत्सव में ओपनिंग फिल्म के तौर पर तारीफें बटोर चुकी ‘पीहू’ अगले महीने 16 तारीख को रिलीज हो रही है। सिनेमाघरों के पर्दे पर दो साल की पीहू होगी। उसकी कहानी होगी और एक ऐसा संदेश होगा, जो दर्शकों के दिलों में उतर जाएगा।

विनोद कापड़ी की जिद, जुनून और क्षमताओं ने इस फिल्म को न सिर्फ अंजाम तक पहुंचाया, बल्कि दुनिया भर में ‘पीहू’ ने शोहरत भी हासिल की। पीहू की कामयाबी के बारे में ताजा जानकारी ये है कि दो साल की हिरोइन वाली ये फिल्म इस बार फिल्म गोवा फिल्म महोत्सव में इंडियन पैनोरमा की ओपनिंग फिल्म होगी। जर्मनी, कैलिफोर्निया, कनाडा, मोरक्को, अर्जेंटीना और ईरान समेत कई देशों के फिल्म फेस्टिवल में धाक जमा चुकी ‘पीहू’ के अब सिनेमा घरों के पर्दे पर उतरने का समय आ गया है।

दर्शक चौंकेंगे, दो साल की बच्ची की अदाकारी और फिल्मकार विनोद कापड़ी की प्रयोगधर्मिता पर। विनोद के शब्दों में- ‘पीहू फ़िल्म को बना लेना और पीहू को आज जो कामयाबी मिल रही है, वो मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं है। यक़ीन नहीं होता कि ये सब हुआ है, क्योंकि जब सिर्फ सोचा भी था कि सिर्फ एक किरदार और वो भी सिर्फ दो साल की बच्ची के साथ फ़िल्म, तो बड़े-बड़े धुरंधरों और स्टूडियो ने हाथ खड़े कर दिए कि इस तरह कोई कैसे फ़िल्म बना लेगा और बन भी गई तो बोरिंग हो जाएगी। ऐसे में किशन कुमार मेरे दोस्त पीछे खड़े हो गए और बोले कि भाई बनाओ। आज किशन इस दुनिया में नहीं है और मुझे लगता है कि अब वो ऊपर से बैठकर मेरे लिए और पीहू के लिए इतने बड़े चमत्कार कर रहा है…’


विनोद के मुताबिक, उसके जेहन में इस फिल्म का आइडिया करीब तीन साल पहले आया था। कैसे? इसका जवाब भी विनोद ही देते हैं- ‘पीहू फ़िल्म की कहानी 2014 में मन में आई थी, जब दिल्ली में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। उस घटना में पांच साल का बच्चा था। मुझे लगा कि फ़िल्म की कहानी में बच्ची होनी चाहिए, क्योंकि मुझे बेटियों से बहुत प्यार है और उसकी उम्र दो वर्ष के आसपास होनी चाहिए। फिर एक दिन एक पार्टी में पीहू टकरा गई। रोहित विश्वकर्मा और प्रेरणा की बेटी। तब वो एक साल 10 महीने की थी। पहली नज़र में ही प्यार हो गया उस बच्ची से। इतना प्यार कि पार्टी के बाद उसे घर तक छोड़ने गया। तय कर लिया कि यही बच्ची मेरी हिरोइन होगी। अगले दिन माता पिता से बात की। दोनों मान गए और फ़िल्म का नाम भी फिर बच्ची के नाम पर ही रख दिया’


खास बात ये भी है कि ‘पीहू’ को सिद्धार्थ रॉय कपूर और रोनी स्क्रूवाला के प्रॉडक्शन हाउस के बैनर तले रिलीज किया जा रहा है।

विनोद लंबे वक्त तक टीवी की दुनिया के चर्चित संपादक रहे हैं। ‘ZEE NEWS’,‘स्टार न्यूज’ से लेकर ‘इंडिया टीवी’ के ऊंचे ओहदों पर रहे। दर्जनों चर्चित शोज बनाए। कुछ साल पहले उसे सनक चढ़ी कि ये सब छोड़कर फिल्म बनानी है। पहली फिल्म ‘मिस टनकपुर हाजिर हो’ बनाई और अब ‘पीहू’। उम्मीद है कि दर्शक इस फिल्म को पसंद करेंगे और महसूस करेंगे कि भले ही बड़े सितारों से सजी फिल्मों की भीड़ में ‘पीहू’ खास क्यों हैं?


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