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जब मुंबई की एक बड़ी स्टोरी से गायब हो जाती है नेशनल मीडिया...
सुजीत ठमके टीवी दर्शक ।। लाइफ ओके चैनल पर प्रसारित होने वाला क्राइम बेस्ड शो सावधान इंडिया- फाइट्स बैक नाउ या फिर सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाला शो क्राइम पेट्रोल दस्तक डायल- 100 दोनों शो टीआरपी के मामले में हिट है। एंकर अनूप सोनी की बेहतर, सूझब
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
सुजीत ठमके
टीवी दर्शक ।।लाइफ ओके चैनल पर प्रसारित होने वाला क्राइम बेस्ड शो सावधान इंडिया- फाइट्स बैक नाउ या फिर सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाला शो क्राइम पेट्रोल दस्तक डायल- 100 दोनों शो टीआरपी के मामले में हिट है। एंकर अनूप सोनी की बेहतर, सूझबूझ वाली एंकरिंग, समूचे टीम द्वारा स्टोरी का चयन, प्रस्तुतीकरण, भाषा, शब्द, मुहावरे, संवेदनशीलता, गंभीरता तथा वास्तविक घटनाओं पर बने शो की गरिमा को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने की कसौटी पर अनूप सोनी 100% फीसदी खरे उतरे है। वहीं लाइफ ओके पर प्रसारित होने वाला शो सावधान इंडिया - फाइट्स बैक नाउ के एंकर सुशांत सिंह कभी-कभी गंभीर एवं संवेदनशील मुद्दों को उठाते हैं। चूंकि सावधान इंडिया- फाइट्स बैक नाउ शो में अतिरंगकता ज्यादा होती है, लेकिन दोनों शो वास्तविक घटना पर आधारित है।
हालही में सावधान इंडिया- फाइट्स बैक नाउ में एक शो को प्रसारित किया गया। मुंबई बेस्ड स्टोरी थी। स्टोरी भी बेहद पुरानी नहीं जो आज के सूचना, मीडिया क्रान्ति के दौर में दब जाए। बावजूद स्टोरी नेशनल मीडिया का हिस्सा नहीं बनी। एक राजनीतिक पार्टी के दफ्तर में पति- पत्नी पार्टी की सदस्यता लेने जाते है। पति से प्राथमिक सदस्यता का फॉर्म भरवाया जाता है। पत्नी को दूसरे केबिन में जाने को कहा जाता है। चन्द सेकेण्ड में उनकी पत्नी लापता हो जाती है। पति राजनेताओं से पूछता है मेरी पत्नी कहां गई, नेता कहता है आप तो अकेले आये थे। नेता के सुर में सुर पार्टी दफ्तर में बैठे उनके कार्यकर्ता भी मिलाते हैं। बेबस पति पुलिस थाने में दरवाजा खटखटाता है।
नेता का बड़ा रसूख पुलिस अफसर पर भारी पड़ता है। पुलिस अफसर एफआईआर लेने से मना करता है। थाने के बाहर बेबस पति टकटकी लगाकर बैठता है। उसका दर्द सुने। उतने में एक खोजी महिला रिपोर्टर थाने में आती है। महिला रिपोर्टर कहती है मुझे बताइये मैं खोजी पत्रकार हूं। बेबस पति उस खोजी महिला पत्रकार को उनकी पत्नी पार्टी दफ्तर से गुमशुदा होने की बात कहता है। खोजी महिला पत्रकार स्पाई कैमरा के जरिये स्टोरी के कई पहलुओं को खंगालने में लग जाती है और एक बड़ी स्टोरी हाथ में लग जाती है। महिला पत्रकार नाम बदलकर लेती है। पार्टी दफ्तर में जाकर पार्टी की सदस्यता लेती है। धीरे-धीरे खोजी पत्रकार को बड़ी खबर की बू आने लगती है। नेताओं के दफ्तर में आते ही कई महिला लापता हो जाती हैं। कई को मार दिया जाता है। कई महिलाओं को नेताजी फार्म हाउस में बंधक बनाकर रखते है और कई महिलाओं को सेक्स रैकेट में धकेल दिया जाता है। महिला खोजी पत्रकार को भी बंधक बनाया जाता है। उसे मरवाने की पूरी साजिश नेता करवाते है। मुंबई सपनो की नगरी है। हर दिन देश दुनिया की बड़ी उठापठक यहां होती रहती है। मुंबई में एक से बढ़कर एक खोजी पत्रकार हैं और वो हमेशा चौकन्ना रहते हैं। बावजूद मुंबई की इतनी बड़ी स्टोरी नेशनल मीडिया से गायब हो जाती है।
(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं।)
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