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भारत-पाक के बीच मुठभेड़ नहीं, संवाद का समय, बोले वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक
डॉ. वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार ।। भारत-पाकः मुठभेड़ नहीं, संवाद का समय भारत और पाकिस्तान के बीच जो फौजी झड़पें आजकल चल रही हैं, उनका मकसद क्या है? इन मुठ
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
डॉ. वेद प्रताप वैदिक
वरिष्ठ पत्रकार ।।
भारत-पाकः मुठभेड़ नहीं, संवाद का समय
भारत और पाकिस्तान के बीच जो फौजी झड़पें आजकल चल रही हैं, उनका मकसद क्या है? इन मुठभेड़ों से दोनों देशों को क्या लाभ है? ज्यादा से ज्यादा लाभ यही है कि दोनों देशों के नेता अपनी-अपनी जनता को यह बता सकते हैं कि हमने अपनी नाक नीचे नहीं होने दी। उन्होंने हमारे 3 मारे तो हमने उनके 13 मार दिए। वे हमारी सीमा में 2 किमी घुस आए तो हम उनकी सीमा में 9 किमी घुस गए। दोनों देशों की फौजें अपनी बहादुरी के जो दावे करती हैं, उन्हें सत्य मानने के अलावा लोगों के पास चारा ही क्या है? लेकिन नौजवान फौजियों और सीमांत के नागरिकों की लाशें जब उनके घर लौटती हैं तो दोनों तरफ क्रोध और प्रतिशोध की भावनाएं भड़कने लगती हैं।
यहां असली प्रश्न यह खड़ा होता है कि इस रक्तपात से किस देश की फौजी श्रेष्ठता का सिक्का कायम होता है? किसी का नहीं! दोनों तरफ के जवान फिजूल मारे जाते हैं। उनकी मौत से कोई राजनीतिक लक्ष्य भी सिद्ध नहीं होता। पिछले कुछ सप्ताहों में सीमांत पर जितने लोग मारे गए, उतने समय में पिछले 13 साल में कभी नहीं मारे गए। 2003 के युद्ध-विराम के बाद का यह सबसे मुश्किल समय है।
2003 में वह सीमांत-शांति हुई ही इसलिए थी कि जम्मू-कश्मीर का कोई सर्वसम्मत हल निकाला जाए। लेकिन आज कश्मीर की घाटी का हाल क्या है? बिल्कुल बेकाबू है। दोनों राष्ट्र आपस में बात करने की बजाय लात चला रहे हैं। न पठानकोट और न ही उड़ी के आतंकी हमले की कोई संतोषजनक जांच पाकिस्तान ने की और न ही भारत ने अपनी तरफ से किसी पहल को आगे बढ़ाया।
इधर भारत में नोटबंदी ने मोदी सरकार की जान आफत में फंसा रखी है और उधर सेनापति राहील शरीफ की सेवा-निवृत्ति पर खदबदाहट चल रही है। मियां नवाज के और भी कई सिरदर्द हैं। ऐसे बेजा हालात में सीमांत की ये खूनी मुठभेड़ें बिल्कुल अनावश्यक हैं। डर यही है कि ये छोटी-मोटी हरकतें कहीं युद्ध का रुप धारण न कर लें। ऐसे नाजुक माहौल में अमृतसर में होने वाला ‘एशियाई हृदय’ सम्मेलन कुछ आशा बंधाता है। उसमें दर्जनों राष्ट्र अफगानिस्तान के बारे में बहस करेंगे। पाकिस्तान से सरताज अजीज भी आ रहे हैं। इस अवसर का इस्तेमाल भारत-पाक संवाद को दुबारा कायम करने के लिए भी हो सकता है।
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