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अखिलेश-शिवपाल के बीच चल रहे दंगल से सपा का कैसे फायदा होगा, बताया वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक ने
‘पिछले तीन-चार दिनों से टीवी चैनलों और अखबारों पर अखिलेश और शिवपाल छाए हुए हैं। मुलायमसिंह के अलग-अलग मुद्राओं वाले जितने चित्र इधर दिखाई पड़े हैं, पिछले तीन-चार वर्षों में नहीं दिखे।’ हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं:
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
‘पिछले तीन-चार दिनों से टीवी चैनलों और अखबारों पर अखिलेश और शिवपाल छाए हुए हैं। मुलायमसिंह के अलग-अलग मुद्राओं वाले जितने चित्र इधर दिखाई पड़े हैं, पिछले तीन-चार वर्षों में नहीं दिखे।’ हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं:
अखिलेश की छवि में चार चांद
उत्तरप्रदेश की राजनीति के बारे में लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि आपकी प्रतिक्रिया क्या है? कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है? किसे फायदा होगा और किसे नुकसान? क्या समाजवादी पार्टी अपना भस्मासुर खुद बन गई है?
यदि घटनाओं की गहराई में न जाएं और सतही दृष्टि से देखें तो यही लगता है कि उप्र में चाचा-भतीजे की लड़ाई समाजवादी पार्टी की जीत पर ग्रहण लगा सकती है लेकिन थोड़ा थमें और गहराई से विचार करें तो लगता है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच चल रहे दंगल से आखिरकार सपा का ही फायदा होगा। कैसे होगा?
सबसे पहली बात तो यह है कि पिछले तीन-चार दिनों से टीवी चैनलों और अखबारों पर अखिलेश और शिवपाल छाए हुए हैं। मुलायमसिंह के अलग-अलग मुद्राओं वाले जितने चित्र इधर दिखाई पड़े हैं, पिछले तीन-चार वर्षों में नहीं दिखे। प्रांतीय नेताओं को जबर्दस्त अखिल भारतीय प्रचार मिल रहा है। अपने देश के सबसे बड़े प्रचार मंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह बेचैनी का बड़ा कारण हो सकता है।
दूसरी बात यह है कि उप्र का चुनाव यदि सपा जीतेगी तो वह सिर्फ अखिलेश की छवि के कारण ही जीतेगी। अखिलेश पर न कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगा, न अक्खड़पन का, न अशिष्टता का और न ही किसी गलतबयानी का! इस सारे दंगल से अखिलेश याने मुख्यमंत्री की छवि में चार चांद लग गए हैं।
सरकार के मुख्य सचिव को हटाना, शिवपाल से प्रमुख मंत्रालय छीन लेना याने अपने वाली पर उतर आना अपने आप में बड़ी बात है। अखिलेश ने देश को एक ही झटके में बता दिया कि उप्र का मुख्यमंत्री कौन है। इस समय अन्य पार्टियों के पास अखिलेश-जैसी स्वच्छ और आकर्षक छवि का कोई उम्मीदवार नहीं है। जहां तक यादव परिवार में अंदरुनी तनातनी का प्रश्न है, यह तो यादव-वंश के लिए कोई नई बात नहीं है लेकिन यहां सबसे बड़ी बात यह है कि मुलायमसिंह यादव की सर्वोच्चता अक्षुण्ण है। शिवपाल यादव अनुज की मर्यादा का पूरा पालन कर रहे हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि वे अपने बड़े भाई की आज्ञा का अक्षरशः पालन करें और सपा को जिताने में जी-जान से लग जाएं। इस दंगल में से अखिलेश चाहे विजेता की तरह उभर रहे हों, लेकिन यदि वे अपने चाचा के प्रति अतिशय विनम्रता का व्यक्तिगत प्रयत्न करेंगे तो उप्र की जनता के दिल को सम्मोहित करने में उन्हें विशेष सफलता मिलेगी।
(साभार: नया इंडिया)
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