होम / विचार मंच / वरिष्ठ पत्रकार निर्मलेंदु ने मशहूर लेखिका शोभा डे को यू दिखाया आइना...
वरिष्ठ पत्रकार निर्मलेंदु ने मशहूर लेखिका शोभा डे को यू दिखाया आइना...
निर्मलेंदु कार्यकारी संपादक, राष्ट्रीय उजाला
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
निर्मलेंदु
कार्यकारी संपादक,
राष्ट्रीय उजाला
लेखिका शोभा डे की इस तरह की टिप्पणी से इस बात का अहसास हो जाता है कि वह दूसरों का सम्मान करना नहीं जानतीं। और मुझे लगता है कि जो दूसरों का सम्मान नहीं करना जानतीं, वह अपना भी सम्मान नहीं कर पातीं। एयरकंडीशन कमरे में बैठकर लिखना बहुत आसान काम है, लेकिन फील्ड में जाकर काम करना, श्रम करना कितना मुश्किल काम है, यह तो कोई लेबर श्रेणी का इंसान ही कह सकता है। एथलीट बनना और उसके बाद फील्ड में जाकर प्रदर्शन करना मैं समझता हूं कि बड़ा ही कठिन काम है। अभी आपने पढ़ा होगा कि दीपा कर्मकार ने रियो ओलंपिक में जिम्नास्टिक में इतिहास रच दिया। वह वॉल्ट के फाइनल में पहुंच गईं। मेहनत की, तभी तो पहुंचीं न? हम आपको बता दें कि दीपा करमाकर ने जब पहली बार किसी जिमनास्टिक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, तब उनके पास जूते भी नहीं थे। प्रतियोगिता के लिए कॉस्ट्यूम भी उन्होंने किसी से उधार मांगा था, जो उन पर पूरी तरह से फिट भी नहीं हो रहा था। तमाम संघर्षों और आर्थिक तंगी का सामना करने के बाद दीपा करमाकर इतिहास रचने से मात्र एक कदम दूर हैं।
ऐसे में आप इस तरह का ट्वीट करके क्या साबित करना चाहती हैं? धन और अवसर की बर्बादी के बारे में आपने लिखा है। क्या आप जानती हैं कि धन की बर्बादी कैसे होती है। धन की बर्बादी पढ़े-लिखे लोग फाइव स्टार होटलों में करते हैं। यह माना कि कलम की ताकत होती है, लेकिन चूंकि आप लिख सकती हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होता कि आप किसी के बारे में कुछ भी लिख दें। ओलंपिक में अपना प्रदर्शन दिखाने के लिए वे भारतीय खिलाड़ी जिस तरह से मेहनत कर रहे हैं, वह जब तक आप खुद अपनी आंखों से नहीं देख लेतीं, तब तक आपको इस बात का अहसास ही नहीं होगा कि आपने क्या कहा? हमें समझ में नहीं आता कि इस तरह की सस्ती पब्लिसिटी पाने के लिए आप जैसी समझदार लेखिका क्यों ट्वीट का सहारा लेती हैं? अभिव्यक्ति की आजादी है, लिखने की आजादी है, बोलने की आजादी है, लेकिन हम कब कहां, कितना बोलें, कहां सेंसर करें, कहां आक्रामक हो, इस बात की जानकारी हमें अच्छी तरह से होनी चाहिए। हम कुछ भी लिखें इस बात की आजादी नहीं है।
सच तो यह है कि लेखक एक पत्रकार होने से पहले वह एक शिक्षक है, एक पथ प्रदर्शक है, एक अभिभावक है, एक अच्छा इनसान है, एक दोस्त है, एक सहनशील व्यक्ति होता है, लेकिन आपकी इस टिप्पणी से इस बात को कहने में हमें थोड़ा भी संकोच नहीं कि आप सोच कर नहीं लिखतीं, दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी यह सोच कर नहीं लिखतीं। शूटर अभिवन बिंद्रा ने सही कहा कि आपको एथलीट्स पर गर्व होना चाहिए। आपके ट्वीट पर किसी ने जवाब दिया है कि ऑनलाइन आओ, बिना मतलब की बात करो। सही है, आपने बिना मतलब की बातें की। क्या आप जानती हैं कि प्रशंसा वह हथियार है, जिससे शत्रु को भी मित्र बनाया जा सकता है। शायद नहीं जानतीं, अगर जानती होतीं, तो आप ऐसा नहीं लिख पातीं। दरअसल, आपको इस बात का भी ज्ञान नहीं कि हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि किसी की निंदा ना करें। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो जरूर बढ़ाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िए, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिए, और उन्हें उनके मार्ग पर जाने दीजिए। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि मानव के अंदर जो कुछ सर्वोत्तम है, उसका विकास प्रशंसा तथा प्रोत्साहन के द्वारा ही संभव है, अपमान करके बिल्कुल नहीं। हां, अगर उनसे कोई गलती हुई है, तो हम उन्हें तार्किक रूप से समझा सकते हैं, लेकिन उन्हें अनर्गल भाषा का प्रयोग करके दुख नहीं दे सकते। किसी को दुख देना, किसी को रिजेक्ट करना सबसे आसान काम है, लेकिन किसी की तारीफ करना, उन्हें सही राह दिखाना, उन्हें भटने से बचाना, उन्हें सिखाना पढ़ाना, सबसे कठिन काम है, अगर हम सब वही काम करें, तो बेहतर होगा। यह भी हमें याद रखना होगा कि अगर हम हल का हिस्सा नहीं हैं, तो हम समस्या हैं।
समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
टैग्स