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'रवीश बाबू आप खुद कहां सवालों के जवाब देते हैं, वैसे भी आपको सवाल पूछने का शौक है, जवाब देने का नहीं '
नीरज बधवार न्यूज एडिटर, NBT ऑनलाइन ।। रवीश बाबू शिकायत कर रहे हैं कि पत्रकार सवाल नहीं पूछेगा तो क्या करेगा। सही बात है मगर याद रहे कि ये वही रवीश कुमार हैं जो खुद लोगों के सवालों से बचने के लिए डेढ़ साल पहले
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
नीरज बधवार
न्यूज एडिटर, NBT ऑनलाइन ।।
रवीश बाबू शिकायत कर रहे हैं कि पत्रकार सवाल नहीं पूछेगा तो क्या करेगा। सही बात है मगर याद रहे कि ये वही रवीश कुमार हैं जो खुद लोगों के सवालों से बचने के लिए डेढ़ साल पहले Twitter छोड़कर जा चुके हैं। देश में बढ़ रही असहिष्णुता पर दसियों प्रोग्राम कर चुके हैं मगर खुद में इतना धैर्य नहीं कि दो-चार लोग उल्टा-सीधा कह दें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ कर ट्विटर पर बने रह सकें। बहाना ये है कि लोग मुझे और परिवार को गाली देते हैं... मैं पूछना चाहता हूं कि ऐसा कौन है जिसे सोशल मीडिया पर गाली न पड़ती हो। अगर गालियां ही वजह है तो मोदी को अब तक प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर अहमदाबाद में ढोकले की दुकान खोल लेनी चाहिए थी।
एक तरफ आप शिकायत करते हैं कि पत्रकार लोगों के बीच नहीं जाते और खुद फेसबुक-ट्विटर पर लोगों ने आपसे सवाल पूछे, तो आप भाग खड़े हुए। हम सड़क पर गाड़ी चलाते हैं, तो क्या ये तय कर सकते हैं कि बाकी लोग कैसे चलाएंगे? हर आदमी अपने तरीके से नियम मानते और तोड़ते हुए सड़क पर चलता है, तो क्या इस खुंदक में हम सड़क पर निकलना ही छोड़ दें? हमें क्या ये ज़िद्द पाल लेनी चाहिए कि जब तक सारी दुनिया रोड सैंस में डिप्लोमा नहीं कर लेती, मैं बाहर नहीं जाऊंगा? अगर वहां ऐसा नहीं करते, तो सोशल मीडिया से ऐसा पलायन क्यों?
मैं जानना चाहता हूं ये कौनसी मानसिकता है जो ज़रा सा विरोध बर्दाश्त नहीं कर सकती। ये कौनसी सोच है जिसे ट्विटर पर पौने चार लाख फॉलोअर्स तो दिखाई नहीं देते, हर ट्वीट पर मिलने वाले सैंकड़ों रीट्वीट भी नहीं दिखते, मगर खुद को पड़ने वाली दस-बीस गालियां विचलित कर देती है।
आलोचना आपसे बर्दाश्त नहीं होती, जो करता है आप उसे ब्लॉक कर देते हैं, लोगों के सवालों के जवाब आप देना नहीं चाहते और फिर आंखों में आंसू ला दुनिया से पूछते हैं कि पत्रकार सवाल नहीं पूछेगा तो क्या करेगा... अरे भाई, पत्रकार को सरकार से सवाल पूछने का हक है, तो क्या लोगों को उन्हीं पत्रकारों से सवाल पूछने का हक नहीं?
ये कैसी इकतरफा सोच है जो हक तो मांगती है मगर जवाबदेही से बचती है! आप टीवी पर गुस्सा ज़ाहिर कर रहे थे कि सिमी के लोग तो आरोपी भी साबित नहीं हुए फिर मीडियवाले उन्हें आंतकी क्यों लिख रहे थे। सिमी कार्यकर्ताओं पर दलीलें हैं ही, बुरहान वानी तो घोषित आतंकी था, आपने तो उसके लिए भी अपने शो में कह दिया था कि मुझे नहीं पता उसने ऐसा क्या किया है कि उसे आतंकी माना जाए। तब क्या शो से पहले आपको किसी ने नहीं बताया था कि वो हिजबुल का एरिया कमांडर था, आतंकियों की भर्ती करता था, उस पर दस लाख का इनाम था, कश्मीर पुलिस पर हमले की धमकी दे चुका था, कश्मीरियों की बस्ती बनाने पर उसे बर्बाद करने की बात कह चुका था। क्या इन सब बातों की बिना जानकारी के ही आप मुंह उठाकर शो करने बैठ गए थे? क्या आपने अगले दिन अपनी अज्ञानता के लिए जनता से माफी मांगी? नहीं मांगी। मैंने भी इसी ट्विटर पर आपसे ये सवाल किए थे, कितने ही लोगों ने आपको टैग कर आपसे जवाब मांगा था, मगर आप जवाब कैसे देते? आप तो खुद कब से ट्विटर से भाग चुके हैं... वैसे भी आपको सवाल पूछने का शौक है, जवाब देने का नहीं!
(साभार: फेसबुक वॉल से)
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