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ट्रंप की धमकी से पेट्रोल महँगा होगा? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
राष्ट्रपति बनने के बाद से वो दुनिया भर में लड़ाई रुकवाने में लगे हैं। फिर भी यूक्रेन और रुस की लड़ाई रोकने में कामयाबी नहीं मिली है। पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति का व्हाइट हाउस में अपमान किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति के रुप में दूसरी टर्म में सबको हिला रखा है। रोज कोई ना कोई नया फ़ैसला या नयी धमकी। रुस को 50 दिन में यूक्रेन के साथ युद्ध ख़त्म ना करने पर सेकेंडरी टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है यानी जो देश रुस के साथ कारोबार करते रहेंगे उन पर अमेरिका 100% टैरिफ़ लगा देगा। भारत अभी रुस से अपनी ज़रूरत का 35-40% कच्चा तेल ख़रीदता है। ट्रंप की धमकी के कारण यह रुक गया तो पेट्रोल डीज़ल 8-12 रुपये प्रति लीटर महँगा हो सकता है।
पहले समझ लीजिए कि ट्रंप ने कहा क्या है? राष्ट्रपति बनने के बाद से वो दुनिया भर में लड़ाई रुकवाने में लगे हैं। फिर भी यूक्रेन और रुस की लड़ाई रोकने में कामयाबी नहीं मिली है। पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति का व्हाइट हाउस में अपमान किया। मदद रोक दी लेकिन जल्द समझ में आ गया कि झगड़े की जड़ रुस है। उन्होंने 14 जुलाई को धमकी दी है कि 50 दिन के अंदर रुस ने युद्ध नहीं रोका तो वो सेकेंडरी टैरिफ़ लगा देंगे। यह डेडलाइन 2 सितंबर को ख़त्म होगी। रुस ने ट्रंप की धमकी पर कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं दी है, उसे गंभीरता से नहीं लिया है।
आपको याद होगा कि रुस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला बोला था तो अमेरिका और यूरोप के देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। उन्हें लगा था कि रुस दबाव में आ जाएगा। इससे उलट रुस ने भारत और चीन जैसे देशों के साथ कारोबार बढ़ा दिया। भारत 2022 से पहले 100 में से 2 बैरल कच्चा तेल रुस ख़रीदता था। अब वो हिस्सा बढ़ कर 35-40 बैरल तक पहुँच गया। भारत को शुरुआती दिनों में तो रुस का तेल बाक़ी देशों के मुक़ाबले 10-12 डॉलर प्रति बैरल सस्ता पड़ता था। अब यह अंतर 3-4 डॉलर पर आ गया है। रुस से सस्ता तेल मिलने के कारण ही युद्ध का बुरा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा। महंगाई क़ाबू में रही।
भारत अकेले रुस पर कच्चे तेल के लिए निर्भर नहीं है। 35-40 देशों से कच्चा तेल ख़रीदता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अमेरिका ने सेकेंडरी टैरिफ़ लगा दिया तो कच्चे तेल के दाम 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते हैं। उनका कहना है कि रुस दुनिया की ज़रूरत का 10% उत्पादन करता है। यह तेल बाज़ार में नहीं आएगा तो दाम बढ़ जाएँगे। भारत नहीं चाहेगा कि रुस से सस्ते तेल के चक्कर में अमेरिका से पंगा लें। वो दूसरे देशों से ही तेल ख़रीदना चाहेगा।
अनुमान है कि रुस से भारत को कच्चा तेल मिलना बंद हो जाएँ और कच्चे तेल के दाम 140 डॉलर प्रति बैरल हो जाएँ तो पेट्रोल डीज़ल की क़ीमतें प्रति लीटर 8-12 रुपये बढ़ सकते है। कुल मिलाकर अभी तो अमेरिका की ट्रेड डील फँसी हुई थी, अब ये नया सिरदर्द आ गया है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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