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क्या ईरान और लड़ेगा या सरेंडर करेगा: रजत शर्मा
जंग का एक सप्ताह बीत चुका है और हमले दोनों तरफ से जारी हैं। ईरान ने इजरायल पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया, तेल अवीव और दूसरे शहरों के नागरिक आबादी पर मिसाइल्स दागीं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
रजत शर्मा, इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।
ईरान-इजरायल जंग के आठवें दिन हमलों की वजह से तबाही जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने रात को ये ऐलान किया कि अभी वह ईरान पर हमले के बारे में दो हफ्ते के अंदर कोई अंतिम फैसला करेंगे। ट्रम्प ने अपनी प्रेस सचिव के जरिए एक वाक्य का बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि ईरान के साथ निकट भविष्य में बातचीत होने या न होने की प्रबल संभावना को देखते हुए मैं जंग में कूदने या न कूदने का कोई फैसला अगले दो हफ्तों के अंदर करूंगा।
प्लान तैयार है बस ट्रम्प की हरी झंडी का इंतज़ार है। ईरान के विदेश मंत्री के साथ ट्रम्प के विशेष दूत की फोन पर की बार बातचीत हो चुकी है और यूरोपीय देशों के नेता भी ईरान के विदेश मंत्री से बात कर रहे हैं। ईरान ने कहा है कि जब तक इज़रायल हमले नहीं रोकेगा, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी।
जंग का एक सप्ताह बीत चुका है और हमले दोनों तरफ से बदस्तूर जारी हैं। ईरान ने गुरुवार को इजरायल पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया, तेल अवीव और दूसरे शहरों के नागरिक आबादी पर मिसाइल्स दागीं। जवाब में इजरायल ने ईरान के मिसाइल लांच साइट्स को निशाना बनाया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने कहा कि ईरान की गुस्ताखी का जवाब ऐसा दिया जाएगा कि पूरी दुनिया देखेगी और खामेनेई के खात्मे तक जंग जारी रहेगी। ईरान ने इज़रायल पर हमले तो किए हैं, कई शहर तबाह तो किए हैं लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन हमलों से इजरायल को ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
ईरान इस बात पर संतोष तो कर सकता है कि उसकी मिसाइल्स तेल अवीव में आग बरसा रही हैं। ईरान को इस बात का भी संतोष होगा कि उसने इजरायल के iron dome डिफेंस सिस्टम को कई बार नाकाम कर दिया लेकिन दूसरी तरफ ईरान पर इजरायल के हमले सटीक और नियंत्रित हैं। इजरायल एक-एक करके ईरान के एटमी ठिकानों को तबाह कर रहा है।
गुरुवार को उसने ईरान की अरक न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला किया जहां हैवी वॉटर न्यूक्लियर रिएक्टर था। इज़रायल ने ईरान के सैनिक नेतृत्व को दो-दो बार खत्म कर दिया, अब ईरान की सेना की कमान तीसरी पंक्ति के नेतृत्व के हाथ में है। ईरान की मिसाइल्स का स्टॉक अब धीरे धीरे कम होता जा रहा है। फिलहाल बाहर से ईरान को कोई समर्थन नहीं मिल रहा है, जबकि इज़रायल के साथ अमेरिका पूरी ताक़त से खड़ा है। ईरान ऊपर से चाहे कुछ भी कहे, अंदर से वो चाहता है कि ये जंग बंद हो।
जाहिर है ये आत्मसम्मान की कीमत पर तो नहीं किया जा सकता। लेकिन ईरान यूरोपीय देशों से बातचीत के लिए तैयार है। ये काफी बड़ा संकेत है। जेनेवा में होने वाली बातचीत में इज़रायल कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। इजरायल का ईरान की वायुसीमा पर कब्जा है। वो जब चाहे, जहां चाहे, हमला कर सकता है। इसीलिए वो इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना चाहता है।
इजरायल का पहला लक्ष्य है, ईरान की परमाणु बम बनाने की क्षमता को खत्म करना। दूसरा निशाना है, ईरान में सत्ता को बदलना। अब इजरायल के निशाने पर ईरान के सबसे बड़े नेता आयतुल्ला अली खामेनेई हैं। लेकिन खामेनेई को खत्म करने से ईरान को कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। खामेनेई का बेटा उनकी जगह ले सकता है। मतलब ये कि अगर खामेनेई को कुछ हुआ तो इजरायल का ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इजरायल को अब इंतजार है कि अमेरिका इस जंग में कब और कैसे एंट्री लेता है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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