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ट्रेड डील कहाँ फँस गईं है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

ट्रेड डील का मतलब है भारत जब अमेरिका को कोई सामान बेचेगा तो अमेरिका उस पर कितना टैक्स लगाएगा, उसी तरह जब अमेरिका हमारे यहाँ सामान बेचेगा तो हम कितना टैक्स लगाएँगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पिछले तीन महीनों में सात बार बयान दे चुके हैं। यह बयान बदलते रहते हैं। ताज़ा उदाहरण इस हफ़्ते का है, पहले उन्होंने कहा कि चीन से डील कर ली है, भारत से बहुत बड़ी डील होने ही वाली है। फिर पलट गए और कहा कि भारत बाज़ार नहीं खोल रहा है। हिसाब किताब में चर्चा करेंगे कि ट्रेड डील क्या है? इसे पूरा करने में क्या अड़चन आ रही है? शेयर बाज़ार को इस डील का इंतज़ार क्यों है?

ट्रेड डील का मतलब है भारत जब अमेरिका को कोई सामान बेचेगा तो अमेरिका उस पर कितना टैक्स लगाएगा, उसी तरह जब अमेरिका हमारे यहाँ सामान बेचेगा तो हम कितना टैक्स लगाएँगे। ट्रंप की शिकायत है कि भारत ही नहीं दुनिया के ज़्यादातर देश उसके सामान पर ज़्यादा टैक्स लगाते हैं जबकि अमेरिका बाहर से आने वाले सामान पर कम टैक्स लगाता है। इससे अमेरिका को व्यापार घाटा होता है।

नौकरियाँ भी कम होती है। उन्होंने चुनाव से पहले जो वादा किया था उसके मुताबिक़ 9 अप्रैल से सभी देशों से आने वाले सामान पर टैक्स लगा दिया था। भारत के सामान पर टैक्स 26% था। इससे शेयर बाज़ार और बॉन्ड बाज़ार में भारी उथल-पुथल मच गई। तब ट्रंप ने फ़ैसले पर 90 दिन रोक लगा दी। बाज़ार ने राहत की साँस ली। अब फिर साँस अटकी पड़ी हैं क्योंकि नौ जुलाई से पहले समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से टैक्स लगा सकता है।

भारत और अमेरिका सरकार के प्रतिनिधि लगातार ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं लेकिन बात फँसी हुई है। यही कारण है कि ट्रंप समय समय पर दबाव बनाते रहते हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत ऑटो मोबाइल ख़ासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहन, दवाइयों पर टैक्स कम कर दें। मामला फँसा है कृषि उत्पादों को लेकर। अमेरिका चाहता है कि दूध, डेयरी उत्पाद, पिस्ता, बादाम, सोया, मक्का और गेहूं पर टैक्स कम कर दें। हमें यह मंज़ूर नहीं है। हमारे लगभग आधे लोग खेतों में काम करते हैं। अमेरिका से सस्ता सामान आने से उनकी रोज़ी रोटी पर संकट आ सकता है। भारत ने UK और ऑस्ट्रेलिया भी ट्रेड डील में कृषि उत्पादों को शामिल नहीं किया है।

एक और बड़ी छूट अमेरिका चाहता है कि अमेजन, वाल मार्ट जैसी कंपनियों को बाज़ार में सीधे माल बेचने दिया जाएँ। अभी वो भारतीय कंपनियों के ज़रिए सामान बेचते हैं। उन्हें सस्ता सामान बेचने की छूट हो। छोटे दुकानदारों को बचाने के लिए भारत सरकार इस पर राज़ी नहीं हो रही है। अब सवाल है कि आगे क्या होगा?

शेयर बाज़ार में शुक्रवार को इस ख़बर से तेज़ी रही कि डील होने वाली है। अब अगर डील फँसती है तो बाज़ार परेशान हो सकता हैं। हालाँकि, संभावना इस बात की है कि नौ जुलाई तक कोई रास्ता निकल आएगा। बड़ी डील की जगह मिनी डील हो सकती है। यानी दोनों देश जिस बात पर राज़ी हो उस पर समझौता कर लिया जाएगा। बाक़ी बातें आगे होती रहेगी। मिनी डील नहीं भी हुई तब भी ट्रंप टैक्स की छूट डील होने तक जारी रख सकते हैं। उनके बयानों की अनिश्चितता को देखते हुए नौ जुलाई तक इंतज़ार करना ही बेहतर होगा।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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