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स्टेट बैंक बॉन्ड का नंबर कब बताएगा? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

चंदा देने वालों कंपनियों की लिस्ट आ गई है। देश के सबसे धनी अंबानी और अदाणी इस लिस्ट में पहली नजर में कहीं नजर नहीं आते हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago

मिलिंद खांडेकर, मैनेजिंग एडिटर, तक चैनल्स, टीवी टुडे नेटवर्क।

पिछले महीने चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद मैंने किंतु परंतु करते हुए लिखा था कि कोई अड़चन नहीं आईं तो 15 मार्च तक पता चल जाएगा कि कौन सी कंपनी ने किस पार्टी को कितना चंदा दिया? अड़चन आ गई। बॉन्ड बेचने वाली स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने पूरा डेटा नहीं दिया। अभी इतना ही चल पाया है कि किस कंपनी या व्यक्ति ने चंदा दिया? किस पार्टी को दिया यह नहीं पता है। सोमवार यानी आज सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई है कि स्टेट बैंक बॉन्ड का नंबर कब बताएगा? हिसाब किताब इस बार चुनावी बॉन्ड का। किसने चंदा दिया? चंदा देने वालों कंपनियों की लिस्ट आ गई है।

देश के सबसे धनी अंबानी और अदाणी इस लिस्ट में पहली नज़र में कहीं नज़र नहीं आते हैं। ढूँढने पर रिलायंस से जुड़ी एक कंपनी क्विक सप्लाई चैन मिली। इस कंपनी से रिलायंस ने कोई संबंध होने से इनकार कर दिया है। लिस्ट में ज़्यादातर कंपनियाँ ऐसी हैं जिनका नाम पहले कभी सुना नहीं गया है। लिस्ट से दो बातें साफ़ समझ में आती है। पहली बात यह है कि सबसे ज़्यादा चंदा देने वाली 30 कंपनियों में से 14 के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों जैसे CBI, ED या इनकम टैक्स ने छापा मारा और उसके आगे पीछे इन कंपनियों ने चुनावी बॉन्ड ख़रीदें।

दूसरी बात यह है कि कुछ कंपनियों ने अपने मुनाफ़े से कई गुना ज़्यादा पैसे बॉन्ड ख़रीदने के लिए लगा दिए। कुछ उदाहरण देखिए। Future गेमिंग एंड होटल ने सबसे ज़्यादा 1368 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। यह कंपनी लॉटरी बेचने का काम करती है। रियल इस्टेट का भी काम है। 2022 के अप्रैल, जुलाई और सितंबर में कंपनी पर छापा पड़ा। तीनों बार छापे के बाद कंपनी ने बॉन्ड ख़रीद लिए। अप्रैल और मई 2023 में छापा पड़ा। फिर बॉन्ड ख़रीद लिए। 2019 से 2023 तक इसका मुनाफ़ा ₹250 करोड़ था। यानी कंपनी मुनाफ़े से 6 गुना ज़्यादा बॉन्ड ख़रीदने पर लगा दिए। मेघ इंजीनियरिंग लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। मुख्य रुप से कंस्ट्रक्शन का काम करती है।

अक्टूबर 2019 में छापा पड़ने के बाद कंपनी ने बॉन्ड ख़रीदे। इस कंपनी पर विपक्ष का आरोप है कि चंदा देने के बाद इसको सरकार से बड़े प्रोजेक्ट मिले। जैसे मुंबई में ठाणे बोरिवली टनल। 2019 से 2023 तक कंपनी का मुनाफ़ा 6392 करोड़ रुपये था जबकि चंदा दिया 966 करोड़ रुपये। यानी मुनाफ़े का क़रीब 15% चंदे में दे दिया। तीसरे नंबर क्विक सप्लाई चैन से है, इसके डायरेक्टर रिलायंस की दूसरी कंपनियों से जुड़े हुए है। इस कंपनी का मुनाफ़ा 2019 से 2023 तक 110 करोड़ रुपये है। चंदा दिया 410 करोड़ रुपये। ये तीन उदाहरण तो सिर्फ़ झांकी है।

लिस्ट में जितनी गहराई से छानबीन करेंगे उतना जानकारी निकलेगी। बड़ी कंपनियाँ लिस्ट में नीचे हैं। उनसे ज़्यादा चंदा छोटी कंपनियों ने दिया है। वेदान्ता ग्रुप 375 करोड़। भारती एयरटेल 247 करोड़। जिंदल ग्रुप 195 करोड़। आदित्य बिरला ग्रुप 175 करोड़। DLF ग्रुप 160 करोड़। बजाज ग्रुप 48 करोड़। पिरामल ग्रुप 48 करोड़। महिन्द्रा ग्रुप 26 करोड़। TVS 26 करोड़। ITC 6.5 करोड़। (स्रोत-इंडियन एक्सप्रेस)

चंदा देने में कोई दिक़्क़त नहीं है। सवाल उठ रहे हैं कि चंदे के बदले में लेनदेन हुआ है क्या? अगर लेनदेन हुआ है तो वोटर को जानने का अधिकार है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कह रही हैं कि यह सिर्फ़ अनुमान है कि छापे पड़ने के बाद चंदा दिया गया। उनकी बात सही है कि हम अभी अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन यह अनुमान सवाल तो खड़े करते ही हैं। हमें यह भी नहीं पता है कि चंदा सत्ताधारी पार्टी को मिला है या विरोधी पार्टी को। इसका जवाब जानने के सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतज़ार कीजिए। हर बॉन्ड पर Alpha Numeric Number है जैसे किसी करेंसी नोट पर होता है। बैंक बॉन्ड ख़रीदने और भुनाने वाले के नंबर जारी कर देगा तो यह पता चल जाएगा कि यह संयोग है या प्रयोग?

(वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर 'टीवी टुडे नेटवर्क' के 'तक चैनल्स' के मैनेजिंग एडिटर हैं और हर रविवार सोशल मीडिया पर उनका साप्ताहिक न्यूजलेटर 'हिसाब किताब' प्रकाशित होता है।)


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