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वेदांता में क्या चल रहा है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
हिंडनबर्ग आपको याद होगा। अदाणी ग्रुप पर रिपोर्ट निकालने से पहले उसने शेयरों में शॉर्ट पोज़ीशन ले रखी थी। यानी शेयरों के भाव गिरने से उसको फ़ायदा हुआ।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
अनिल अग्रवाल के वीडियो आपने देखे होंगे। वो बताते हैं कि कभी पटना में कबाड़ बेचने का काम करते थे। 19 साल की उम्र में पटना से मुंबई में सूटकेस लेकर पहुँचे थे। अब लंदन में रहते हैं। क़रीब 35 हज़ार करोड़ रुपये की संपत्ति है। वेदांता रिसोर्सेज़ लिमिटेड ( VRL) के चेयरमैन हैं। यह सपने जैसा सफ़र है। अब अमेरिकी रिसर्च कंपनी वायसराय ने VRL पर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि यह कंपनी भारतीय बाज़ार में लिस्ट वेदांता लिमिटेड (VEDL) की ‘पैरासाइट’ है। डिवीडेंड और ब्रांड फ़ीस लेकर काम चला रही है। ‘दिवालियेपन की स्थिति’ है। वेदांता ने ज़ाहिर तौर पर इसका खंडन किया है। हिसाब किताब में समझेंगे कि क्या है पूरा मामला?
हिंडनबर्ग आपको याद होगा। अदाणी ग्रुप पर रिपोर्ट निकालने से पहले उसने शेयरों में शॉर्ट पोज़ीशन ले रखी थी यानी शेयरों के भाव गिरने से उसको फ़ायदा हुआ। उसी तरह वायसराय ने VRL के क़र्ज़ यानी बॉन्ड पर शॉर्ट पोज़ीशन ले रखी है। उसको लगता है कि रिपोर्ट के बाद VRL की पोल खुलेगी। उसे क़रीब 40 हज़ार करोड़ रुपये का लोन चुकाने में दिक़्क़त आएगी। बॉन्ड के दाम गिरेंगे। वायसराय को फ़ायदा मिलेगा।
वायसराय का दावा है कि VRL का अपना कोई बिज़नेस नहीं है। वो वेदांता ग्रुप की कंपनियों से डिवीडेंड, ब्रांड फ़ी और क़र्ज़ लेकर क़र्ज़ चुकाता है। वेदांता ग्रुप में वेदांता लिमिटेड के अलावा हिंदुस्तान जिंक, BALCO, Cairns energy जैसी कंपनियाँ है। मुख्य रुप से यह ग्रुप मेटल का कारोबार करता है। कॉपर, एल्यूमिनियम, जिंक जैसे क्षेत्रों में। इसके अलावा ऑयल गैस का भी काम है। हिंदुस्तान जिंक और BALCO अनिल अग्रवाल ने भारत सरकार से ख़रीदी थी। इसमें अब भी सरकार के शेयर हैं बल्कि हिंदुस्तान जिंक ग्रुप की आँख का तारा है। लगभग आधी कमाई इस कंपनी से आती है।
वायसराय का आरोप है कि VEDL ने पिछले तीन सालों में डिवीडेंड के ज़रिए VRL को क़रीब 42 हज़ार करोड़ रुपये दिए। अगर डिवीडेंड प्रोफ़िट से दिया जाता को कोई दिक़्क़त नहीं थी। डिवीडेंड देने के लिए VEDL ने क़र्ज़ लिया। उसका क़र्ज़ पिछले तीन साल में 200% बढ़ गया है। इसी तरह VRL अपनी कंपनियों से ब्रांड फ़ी लेती है वेदांता ब्रांड इस्तेमाल करने के लिए। वायसराय का कहना है कि हिंदुस्तान जिंक जैसी कंपनी ब्रांड का इस्तेमाल नहीं करती है। फिर भी फ़ी देती है। उसका दावा है कि यह पैसा नहीं आने पर VRL का दिवाला निकल जाएगा। वह क़र्ज़ नहीं चुका पाएगी।
वायसराय की रिपोर्ट के बाद वेदांता ग्रुप के शेयरों में गिरावट आई थी, फिर रिकवरी हुई। इसी तरह VRL के बॉन्ड में भी गिरावट आयी थी अब रिकवरी हो गई है। ध्यान रहे कि VRL के बॉन्ड की क़ीमत गिरने में ही वायसराय का फ़ायदा है। रिपोर्ट आने के बाद वेदांत ग्रुप ने कहा कि कि यह रिपोर्ट ग़लत है। कुछ भी नयी बात नहीं है। सारी बातें पहले ही कंपनी शेयर बाज़ार को दे चुकी है। अब देखना है कि अनिल अग्रवाल इस चुनौती से कैसे निपटते हैं? विवाद उनके लिए नए नहीं है पर इस बार आरोप बड़ा है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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