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Dream11 के साथ कौन सा खेल हो गया! पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
गेमिंग कंपनियां पिछले दो साल से GST को लेकर लॉबिंग कर रही थीं। उनकी दो मांग थीं। GST काउंसिल ने दोनों मांगे खारिज कर दीं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
मिलिंद खांडेकर, मैनेजिंग एडिटर, तक चैनल्स, टीवी टुडे नेटवर्क।
देश में क्रिकेट चलाने वाले BCCI ने अभी एक जुलाई को ही घोषणा की थी कि भारतीय क्रिकेट टीम अब Dream 11 की जर्सी पहनेगी। Dream 11 देश में हर मैच के लिए तीन करोड़ रुपए देगी और विदेश में एक करोड़ रुपए। BCCI को इस डील से 2026 तक 358 करोड़ रुपए मिलेंगे। Dream 11 की खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। GST यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स काउंसिल ने दस दिन बाद गेमिंग पर 28% टैक्स लगा दिया। अब खबर छपी है कि Dream 11 का मुनाफा 80% कम होने की आशंका है।
GST का मतलब हम पिछले साल हिसाब किताब में समझ चुके हैं। आप किसी सामान या सर्विस को लेते हैं तो उस पर सरकार टैक्स लेती है। पहले राज्य सरकार सामान पर सेल्स टैक्स लेती थी, जबकि केंद्र सरकार सर्विस जैसे मोबाइल बिल पर। 2017 में इस सबकी जगह देश भर में GST ने ले ली। केंद्र और राज्य सरकारों से मिलकर बनीं GST काउंसिल तय करती है कि किस पर कितना टैक्स लगेगा। काउंसिल ने 11 जुलाई को अपनी 50वीं बैठक की। इसमें तय हुआ कि ऑनलाइन गेमिंग, घुड़दौड़ और कैसीनो पर 28% GST लगाया जाएगा।
गेमिंग कंपनियां पिछले दो साल से GST को लेकर लॉबिंग कर रही थीं। उनकी दो मांग थीं। पहली मांग थी कि गेम ऑफ स्किल और गेम ऑफ चांस में फर्क किया जाए। अगर कोई क्रिकेट टीम बनाकर फैंटेसी लीग खेल रहा है तो वो दिमाग लगा रहा है। ये स्किल का खेल है जबकि लॉटरी चांस का खेल है। स्किल वाले गेम को छूट मिलना चाहिए। दूसरी मांग थी कि GST सिर्फ गेमिंग कंपनी की आमदनी पर लगाया जाए, खिलाड़ी के दांव की रकम पर नहीं। मान लीजिए मैंने 100 रुपए का दांव खेला। इसमें गेमिंग कंपनी ने 10 रुपए फीस ली तो GST फीस की रकम पर लगे, दांव की रकम पर नहीं।
GST काउंसिल ने दोनों मांगे खारिज कर दीं। गेम ऑफ स्किल और गेम ऑफ चांस दोनों पर एक ही रेट लगेगा। टैक्स पूरे 100 रुपए पर लगेगा यानी 28 रुपए। फीस पर लगता तो यह टैक्स 2.80 रुपए होता। गेमिंग कंपनियों का कहना है कि टैक्स उनको बर्बाद कर देगा। एक आकलन लगाया गया है कि अगर कोई व्यक्ति 100 रुपए का दांव चलेगा तो वो अधिक से अधिक 24 रुपए जीतेगा, जबकि नुकसान हुआ तो 100 रुपए का। ऐसा खेल कौन खेलेगा।
ऑनलाइन गेमिंग का कारोबार पिछले कुछ साल से तेजी से बढ़ रहा है। EY FICCI के मुताबिक पिछले साल 12 हजार करोड़ रुपए गेमिंग पर लगे थे, अगले साल 15 हजार करोड़ रुपए के पार जाने का अनुमान है। इसमें दो तरह की कंपनियां है। फैंटेसी टीम बनाकर खिलाड़ी पैसे लगाता है। ये गेम IPL या क्रिकेट के बाकी मैचों के साथ साथ खेला जाता है। दूसरा खेल है ताश के पत्तों का जैसे रमी, लूडो या शतरंज। इस खेल को चलाने वाली ज्यादातर बड़ी कंपनियां मुनाफे में है। अब उन्हें डर है कि कहीं खेलने वाले भाग ना जाएं।
GST काउंसिल ने गेमिंग पर टैक्स लगाने के लिए नैतिकता का हवाला दे दिया है। ये नशा है, बच्चे इसके आदी हो रहे हैं। इसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए। ज्यादातर पश्चिमी देशों में सट्टा कानूनी रूप से चलता है। आप दुकान में जाकर सट्टा लगा सकते हैं। भारत में ये गैर कानूनी है जब जब इसे कानूनी मान्यता देने की बात हुई तो नैतिकता के आधार पर विरोध किया जाता रहा है। गेमिंग सट्टा नहीं है लेकिन है तो पैसे का खेल और इसके साथ ही खेल हो गया है। बात चूंकि क्रिकेट से शुरू हुई थी लोग कह रहे हैं जो जो भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी खरीदता है वो बर्बाद हो जाता है। Byju’s पिछला स्पॉन्सर था, अब मुश्किल में है। Oppo फोन की हालत खराब है और सहारा का तो डिब्बा गोल है। देखते हैं कि अब Dream 11 जैसी कंपनी का क्या होता है?
(वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर 'टीवी टुडे नेटवर्क' के 'तक चैनल्स' के मैनेजिंग एडिटर हैं और हर रविवार सोशल मीडिया पर उनका साप्ताहिक न्यूजलेटर 'हिसाब किताब' प्रकाशित होता है।)
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