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PM मोदी ने लॉन्च किया ‘MANAV विजन’, इंसान-केंद्रित AI में भारत की नई पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में “MANAV- इंडिया’स ह्यूमन विजन फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” पेश किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 hours ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में “MANAV- इंडिया’स ह्यूमन विजन फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” पेश किया। उन्होंने कहा कि यह भारत का दुनिया को दिया गया एक ऐसा फ्रेमवर्क है, जो बताएगा कि एआई का विकास इंसानों को ध्यान में रखकर और जिम्मेदारी के साथ कैसे किया जाए।
मोदी ने मंच से कहा, “आज मैं M-A-N-A-V यानी मानव विजन फॉर एआई पेश कर रहा हूं।” उन्होंने इसके हर अक्षर का मतलब भी समझाया। M का मतलब है नैतिक और सही सिस्टम, A का मतलब है जवाबदेह शासन व्यवस्था, N यानी राष्ट्रीय संप्रभुता, A यानी सबके लिए आसान और बराबरी वाला सिस्टम, और V यानी वैध और भरोसेमंद ढांचा। उनका साफ कहना था कि एआई कुछ गिनी-चुनी कंपनियों का एकाधिकार नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा साधन होना चाहिए जिससे हर किसी को फायदा मिले।
समिट में दुनिया के 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। मोदी ने कहा कि यह सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और बड़ा टेक टैलेंट है, इसलिए एआई के क्षेत्र में भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है।
प्रधानमंत्री ने एआई को मानव इतिहास का एक बड़ा मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि जैसे पहले कुछ तकनीकों ने दुनिया की दिशा बदल दी थी, वैसे ही एआई भी आने वाले समय में बड़ा बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि अभी जो असर दिख रहा है, वह तो सिर्फ शुरुआत है। असली बदलाव आगे और तेज रफ्तार से देखने को मिलेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि एआई जितना बड़ा मौका है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने परमाणु तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी ताकत इंसान के लिए फायदेमंद भी हो सकती है और नुकसानदेह भी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं। इसलिए जरूरी है कि एआई मशीन-केंद्रित नहीं बल्कि इंसान-केंद्रित रहे।
मोदी ने कहा कि कोई व्यक्ति सिर्फ डेटा का हिस्सा या कच्चा माल बनकर नहीं रह जाना चाहिए। एआई का मकसद लोगों को ताकत देना और उनके जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने आसान शब्दों में समझाया कि जैसे जीपीएस रास्ता दिखाता है, लेकिन जाना कहां है यह फैसला इंसान करता है, वैसे ही एआई दिशा दे सकता है, पर नियंत्रण इंसान के हाथ में रहना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि भारत का MANAV विजन 21वीं सदी में एआई के लिए मजबूत नींव साबित होगा। इससे साफ है कि भारत जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई के मामले में दुनिया में नेतृत्व की भूमिका निभाना चाहता है।
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