होम / विचार मंच / पहलगाम हादसे के बाद इंटरनल सिक्योरिटी चिंता तो है : नीरज बधवार
पहलगाम हादसे के बाद इंटरनल सिक्योरिटी चिंता तो है : नीरज बधवार
हादसे के बाद हमें पता लगता है कि अरे, अहमदाबाद में ये हज़ारों बांग्लादेशी अवैध तरीके से झुग्गियां बनाकर क्यों रह रहे हैं। मेरठ के ईंट भट्टों पर दस साल से 90 बांग्लादेशी अवैध तरीके से रह रहे थे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
नीरज बधवार, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।
पहलगाम हादसे से लेकर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी की घटनाओं पर नज़र डालें तो साफ है कि हमारी इंटरनल सिक्योरिटी के साथ कुछ तो भारी गड़बड़ है। मतलब, पहलगाम हादसा होता है तो पता चलता है कि हज़ारों पाकिस्तानी महिलाएं सालों-साल से बिना भारत की नागरिकता लिए भारत में रह रही हैं। कश्मीर में सीआरपीएफ के जवान ने बिना विभाग को बताए पाकिस्तानी महिला से शादी कर ली है। पाकिस्तानी लड़का 17 सालों से अवैध तरीके से कश्मीर में पढ़ने-रहने के बाद यहां का वोटर बन जाता है।
हादसे के बाद हमें पता लगता है कि अरे, अहमदाबाद में ये हज़ारों बांग्लादेशी अवैध तरीके से झुग्गियां बनाकर क्यों रह रहे हैं। आज की ख़बर है कि मेरठ के ईंट भट्टों पर दस साल से 90 बांग्लादेशी अवैध तरीके से रह रहे थे। एक यूट्यूबर एक-दो साल में तीन बार पाकिस्तान चली जाती है। वहां की उच्चायोग में पार्टियां कर रही है। वहां के जासूसों से इश्क फरमा रही है।
पहलगाम हादसे से पहले और बाद में पाकिस्तान जाती है। ट्विटर पर बैठा एक शख्स ये नोट कर-करके इस मुद्दे को उठाता है, मगर हमारी एजेंसियां ऐसा कोई पैटर्न नहीं देख पातीं। दुश्मन देश तुर्की की फौज से रिटायर्ड पायलट हमारे हवाई अड्डों पर आ जा रहे हैं। ये बात भी हमें दो दिन पहले पता लगती है।
ये कोई छोटी-मोटी गलतियां नहीं हैं। ये तो कुछ मामले हैं जो सामने आए हैं। ऐसे न जाने कितने लोग अब भी देश में मौजूद हैं। ऊपर से हमारे यहां सारे मैसेजिंग ऐप भी विदेशी यूज़ करते हैं। देश में बिकने वाले कुल मोबाइल फोन में 75 परसेंट उस चाइना के हैं जो हमारी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
इन फोन्स के ज़रिए किस तरह का यूज़र डेटा लिया जा रहा है, किसी को नहीं पता। इज़राइल ने जिस तरह लेबनान में पेजर धमाके किए थे, उससे ये पहले ही प्रूव हो चुका है कि किसी भी तरह की कम्यूनिकेशन डिवाइस आप ही के खिलाफ हथियार बन सकती है। बावजूद इसके, इससे निपटने की क्या तैयारी है, कोई नहीं जानता।
एक कड़वी सच्चाई ये है कि इंटरनल सिक्योरिटी में इस बात की कोई शाबाशी नहीं मिलती कि आपने सौ में से 97 हमले रोक दिए। उसी तरह जैसे कोई बैट्समैन एक ओवर में दो इनस्विंगिंग यॉर्कर डिफेंड कर ले तो उसकी कोई शाबाशी नहीं, लेकिन अगर वो उसी ओवर में बाउंसर पर आउट हो गया तो ये माना जाएगा कि उसकी तकनीक अच्छी नहीं है। अगर पिच मुश्किल हो तो आपका डिफेंस सौ प्रतिशत एरर-प्रूफ होना चाहिए।
अगर 100 में से एक हमले की भी गुंजाइश बनी हुई है तो आप चैन से नहीं बैठ सकते। लेकिन पिछले तीन हफ्तों में सामने आए मामले बताते हैं कि ऐसे हमलों के लिए हमारे यहां खुला मैदान है, और हमारी तैयारी शायद उतनी गंभीर नहीं है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
टैग्स