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वो एक जीत, जो टूटे दिलों को जोड़ गई : नीरज बधवार
किंतु जब वह प्रतिफल ओवल जैसी ऐतिहासिक जीत के रूप में प्राप्त होता है, तो लगता है जैसे प्रेम सफल हो गया हो। धन्यवाद भारतीय टीम, हमारे प्रेम की मर्यादा रखने के लिए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
नीरज बधवार, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।
यदि किसी संबंध में आप अपना सब कुछ समर्पित करें और फिर भी दूसरा व्यक्ति आपको छोड़कर चला जाए, तो मन टूट जाता है। यह क्रिकेट श्रृंखला भारतीय टीम के लिए ठीक वैसी ही हो सकती थी। पूरे टूर्नामेंट में सबसे अधिक शतक हमने लगाए, एक श्रृंखला में सर्वाधिक रन का रिकॉर्ड बनाया, पहली बार सात बार साढ़े तीन सौ से अधिक का स्कोर खड़ा किया, शीर्ष पाँच रन स्कोररों में चार भारतीय थे, और सबसे अधिक विकेट भी हमारे गेंदबाज़ ने लिए।
फिर भी यदि भारत ओवल टेस्ट हारकर श्रृंखला 1-3 से हार जाता, तो यह पीड़ा भारतीय दर्शकों के लिए असहनीय होती। खिलाड़ियों द्वारा बनाए गए शतक और रिकॉर्ड बेमानी हो जाते। इस श्रृंखला का कोई भी दृश्य अगर भविष्य में कभी आँखों के सामने आता, तो वह केवल पीड़ा और कसक से भरा होता।
किंतु इस एक विजय ने पूरे देश को आजीवन संताप से बचा लिया। पाँच सत्र खेलकर चौथा टेस्ट बचाना हो या अंतिम टेस्ट में पचास रनों के भीतर छह विकेट चटकाकर हार के मुख से जीत छीन लाना, ये क्षण हर भारतीय के हृदय में सदा के लिए अंकित हो गए हैं। आप चाहे अभियंता हों, चिकित्सक, लेखक या वैज्ञानिक, हर व्यक्ति के भीतर एक खेल प्रेमी अवश्य होता है।
जब उसकी टीम जीतती है, तो वह स्वयं को भी विजयी अनुभव करता है। वह विजय केवल टीम की नहीं, उस खेल प्रेमी की भी व्यक्तिगत उपलब्धि बन जाती है। ऐसी उपलब्धि, जिस पर कोई पदक नहीं मिलेगा, कोई पुरस्कार नहीं मिलेगा, किंतु वह उसे उतना ही परिपूर्ण अनुभव कराएगी, जैसे कार्यस्थल पर मिली पदोन्नति या सराहना।
खेल प्रेमी होना एकतरफा प्रेम में पड़ने जैसा है, जहाँ आप सब कुछ समर्पित करते हैं, पर यह निश्चित नहीं होता कि आपकी निष्ठा का प्रतिफल क्या मिलेगा। किंतु जब वह प्रतिफल ओवल जैसी ऐतिहासिक जीत के रूप में प्राप्त होता है, तो लगता है जैसे प्रेम सफल हो गया हो। धन्यवाद भारतीय टीम, हमारे प्रेम की मर्यादा रखने के लिए।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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