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‘ये सारी बातें साफ तस्वीर पेश करती हैं कि आने वाला साल मीडिया इंडस्ट्री का ही है’
बिजनेस मीडिया की इस तेज ग्रोथ में वही टिकेगा और आगे बढ़ेगा-जो सही, सटीक और स्पष्ट जानकारी व सलाह देगा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
अनिल सिंघवी।।
हमने मंदी का दौर देखा, हमने कोरोना का दौर देखा, महंगाई को बढ़ते देखा। ऐसे कई दौर से हर बार हमारी मीडिया इंडस्ट्री भी गुजरी है और कई बार बदलाव आए हैं. लेकिन, हमेशा हालात एक से नहीं रहते। तभी तो कहा गया है...
'खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,
जमीन नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है...'
हर दौर में वक्त के साथ-साथ लोगों की जरूरतें बदलती हैं, पसंद बदलती हैं। हम भी टेलीफोन से मोबाइल और उसके बाद स्मार्टफोन की दुनिया में पहुंच चुके हैं। लोगों का कमाई बढ़ रही है, उनका लाइफस्टाइल बदल रहा है और अब वो नौकरी से आगे बढ़कर स्टार्ट-अप के बारे में सोच रहे हैं, बचत से आगे बढ़कर निवेश के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। ऐसे में लाजिमी है कि बिजनेस मीडिया की डिमांड बढ़ने ही वाली है।
जैसे हम शेयर बाजार को देखते हैं, भले ही कितने हिचकोले आएं, कितना बुरा दौर आ जाए, विदेशी बाजारों में हाहाकार मचा हो, लेकिन हम खड़े हुए हैं, हमारे बाजार लड़े हैं। ऐसे ही देश का चौथा स्तंभ हमारी मीडिया इंडस्ट्री भी हर बुरे दौर से गुजर कर अपनी ऊंचाइयों तक पहुंची है।
कोरोना महामारी के बाद मीडिया इंडस्ट्री में बहुत बड़ा बदलाव आया है। लेकिन, आने वाला वक्त हमारा है। साल 2023 मीडिया के नाम होगा। खासकर बिजनेस मीडिया का साल होगा। इसके पीछे कई कारण हैं। हमारी इकोनॉमी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी है। कोरोना के वक्त दुनिया को हमने वैक्सीन दी। यहां तक कि दुनिया के सबसे विकसित देश अमेरिका ने भी हमसे ही मदद मांगी। पांच ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना साकार होने जा रहा है। आर्थिक सुधारों के लिए जिस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं, उससे साफ है कि हम दुनिया के विकसित देशों के साथ सबसे आगे खड़े नजर आएंगे।
दुनिया को आईना कौन दिखाता है? दुनिया तक हमारे देश में क्या चल रहा है कौन बताता है? हमारी मीडिया इंडस्ट्री और अब तो हमारी पहुंच भी ग्लोबल है। 2020-21 में बुरे दौर के बाद डिजिटल मीडिया का वर्चस्व जिस तेजी से बढ़ा है और जिस तरह की ग्रोथ रही है, उससे स्थिरता आई है। मौजूदा वक्त में भी मीडिया इंडस्ट्री काफी तेजी से बढ़ रही है, इसमें सबसे बड़ा और अहम योगदान डिजिटल मीडिया का है। सोशल मीडिया की ताकत तो सबने देखी ही है। अब एडवर्टाइजर भी इस पर शिफ्ट हो रहे हैं। तो ये सारी बातें साफ तस्वीर पेश करती हैं कि आने वाला वक्त और साल मीडिया इंडस्ट्री का ही है। मीडिया इंडस्ट्री में अभी ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं हैं। भविष्य का मीडिया भी डिजिटल मीडिया है। इसमें अभी और बड़ी ऊंचाइयां देखनी हैं.
आपने और हमने देखा कोरोना के वक्त हालात कैसे थे। नौकरियां गईं, वर्क फ्रॉम होम कल्चर आया, जिससे कईं लोगों की सैलरी भी कम हुई होगी। बड़े-बड़े संस्थानों के लिए ये मुश्किल दौर था, क्योंकि, मीडिया का काम बिना घर से निकले नहीं हो सकता है। लेकिन, डिजिटल मीडिया एक ऐसा हथियार है, जो कहीं से भी और कभी भी एक्टिव हो सकता है। कोरोना के दौरान न्यूज चैनल्स पर सबसे ज्यादा असर हुआ। लोगों ने अखबार खरीदने से मना कर दिया। लेकिन, इससे हमारी इंडस्ट्री डरी नहीं। इसे भी एक चैलेंज के तौर पर लेते हुए फिर आगे बढ़ रही है।
बिजनेस मीडिया का दौर अब आएगा:
मीडिया इंडस्ट्री तो अच्छा करेगी ही इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन, इसमें भी बिजनेस मीडिया का दौर अब आ गया है और आने वाला भी है। क्यों? क्योंकि, ये ही वो इंडस्ट्री है, जिसने लोगों को बचत के बाद अब निवेश करना सिखाया है। इसका जीता जागता उदाहरण है कि नए लोग अब शेयर बाजार में आए हैं। अगर आप डीमैट अकाउंट की बात करें तो सिर्फ अक्टूबर 2022 में इसमें 41 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली। कुल डीमैट अकाउंट 10 करोड़ 60 लाख के पार निकल गए। अगस्त में पहली बार 100 मिलियन (10 करोड़) डीमैट अकाउंट का आंकड़ा पार हुआ। अब लोग सिर्फ पैसा बचाने की नहीं, बल्कि निवेश करने की सोचते हैं। कोरोना के दो साल में मार्केट को नए इन्वेस्टर्स मिले। इसमें सबसे ज्यादा युवा और महिलाएं भी शामिल हुईं। जिन महिलाओं को सिर्फ घर चलाते देख रहे थे, वो अब मार्केट में अपनी भूमिका निभा रही हैं। जो युवा पढ़ाई के बाद सिर्फ नौकरी की तरफ देखते थे, वो अब मार्केट से अपना भविष्य प्लान कर रहे हैं। ये राह उन्हें बिजनेस मीडिया ने ही दिखाई है।
एडवर्टाइजिंग कंपनियों की पसंद बना बिजनेस मीडिया:
बिजनेस मीडिया से सिर्फ दर्शकों या निवेशकों का ही भला नहीं हो रहा, अब तो कंपनियों को भी विज्ञापन के लिए ये अच्छा प्लेटफॉर्म दिखने लगा है। मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग कंपनियों को अब ये लगने लगा है कि बिजनेस चैनल के दर्शकों के पास अच्छी ‘परचेजिंग पावर’ है। एक दौर था जब बिजनेस की बात करना सिर्फ एलीट क्लास के लोगों का काम माना जाता था लेकिन अब ये भी भ्रम टूटता जा रहा है। स्टार्ट-अप कल्चर जोर पकड़ने के बाद अब बिजनेस की बात हिंदी से धड़ल्ले में होती है। हिंदी बिजनेस मीडिया का बाजार और बड़ा होता दिख रहा है. यही वजह है कि पिछले कुछ वक्त में ट्रेडिशनल मीडिया समूहों ने बिजनेस मीडिया की ओर रुख किया है और कोई आश्चर्य नहीं होगा कि आने वाले दिनों में आपको कुछ और बिजनेस चैनल और वेबसाइट दिखें।
डिजिटल मीडिया और बड़ा होगा:
आने वाला दौर डिजिटल मीडिया का क्यों है? इसके पीछे आप देखिए अब ज्यादातर लोग टीवी देखने के बजाय स्मार्टफोन पर आसानी से पढ़ने और देखना वाला कंटेंट देखते हैं। हिंदी भाषा का मार्केट काफी बड़ा हो गया है। आपने देखा होगा कि बड़े-बड़े पत्रकार भी अब मेन स्ट्रीम मीडिया को छोड़ डिजिटल मीडिया तरफ रुख कर रहे हैं। निवेश और बिजनेस से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं। ऐसे में उन्हें सुनने या पसंद करने वाले दर्शकों का रुझान भी डिजिटल की तरफ बढ़ा है। लोगों ने अखबार पढ़ना कम कर दिया है। ईपेपर काफी सरल है और ज्यादातर डिजिटल पोर्टल पर फ्री में उपलब्ध है। यूट्यूब ने पिछले चार साल में 30 फीसदी की रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की है। साल 2021 में उसने $28.8 बिलियन का रेवेन्यू हासिल किया। वहीं, साल 2020 में ये 46 फीसदी की ग्रोथ से बढ़ा। यूट्यूब के दुनिया भर में 2.5 बिलियन (250 करोड़) से भी ज्यादा एक्टिव यूजर हैं। ये डिजिटल मीडिया की ग्रोथ को दिखाता है।
मेरा मानना है डिजिटल मीडिया का बाजार अभी और बढ़ेगा और उसमें रोजगार के अवसर बनेंगे। सबसे बड़ी बात है कि इस मीडियम को शुरू करने में कोई भारी भरकम खर्च नहीं है। आने वाले साल में कई बड़े इवेंट हैं। साल 2024 में देश के आम चुनाव हैं और चुनाव के दौरान डिजिटल मीडिया की ताकत को तो हमने देखा ही है। डिजिटल मीडिया के पास यूजर्स हैं और नए यूजर्स जोड़ने के कई विकल्प भी मौजूद हैं। ऐसे में 2023 मीडिया इंडस्ट्री का रहने वाला है और जैसा मैंने कहा- बिजनेस मीडिया इसे और तेजी से आगे ले जाएगा।
डिजिटल मीडिया तरक्की तो कर रहा है लेकिन विश्वसनीयता के लिहाज से अभी थोड़ा पीछे है। फिलहाल, यूजर्स को उन्हीं डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा है जो किसी भरोसेमंद न्यूजपेपर या न्यूज चैनल से जुड़े हैं। बहुत सी न्यूज वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल्स पर अच्छे कंटेंट की कमी है। व्यूज और सब्सक्राइबर बढ़ाने के चक्कर में ये गलत और आधी-अधूरी जानकारी देते हैं और लोगों को नुकसान होता है। ऐसे में बिजनेस मीडिया की इस तेज ग्रोथ में वही टिकेगा और आगे बढ़ेगा- जो सही, सटीक और स्पष्ट जानकारी और सलाह देगा।
'इतिहास लिखने के लिए कलम नहीं, हौसलों की जरूरत होती है।'
...और ये हौसला मीडिया के पास था, है और हमेशा रहेगा...।
(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर हैं।)
टैग्स पत्रकार मीडिया अनिल सिंघवी मैनेजिंग एडिटर वरिष्ठ पत्रकार ईयरएंडर 2022