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‘2022 में उतार-चढ़ावों के बीच नया साल अधिक चुनौती और अवसरों का है’
दो वर्षों के कोरोना महामारी काल के बाद वर्ष 2022 में नई आशा प्रिंट, टीवी और डिजिटल में दिखने लगी। ‘जूम’ जैसे साधनों के बढ़ते उपयोग से सुविधाएं हुई।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
आलोक मेहता।।
दो वर्षों के कोरोना महामारी काल के बाद वर्ष 2022 में नई आशा प्रिंट, टीवी और डिजिटल में दिखने लगी। ‘जूम’ जैसे साधनों के बढ़ते उपयोग से सुविधाएं हुई। कई नए चैनल विभिन्न भाषाओं में आने से युवाओं के लिए अवसर बढ़ रहे हैं। प्रतियोगिता भी बढ़ रही है। आर्थिक समस्याएं संपूर्ण विश्व को प्रभावित कर रही हैं। इसलिए मीडिया में भी वित्तीय उतार-चढ़ाव की स्थिति 2022 में दिखती रही।
प्रिंट में कागज का मूल्य कई गुना बढ़ने से पत्र-पत्रिकाओं का प्रसार तेजी से नहीं हो पा रहा है, लेकिन हिंदी और भारतीय भाषाओँ के अखबार के पाठकों में कमी नहीं हुई। छपी हुई सामग्री डिजिटल और टीवी न्यूज चैनल के साथ देखने-पढ़ने का सिलसिला नहीं थमा है। मेरी राय में ये एक-दूसरे के पूरक हैं। अखबार में पढ़ने के बाद उसे देखने या सुनने की इच्छा बनी रहती है या टीवी के बाद उसका विवरण या विश्लेषण फुर्सत में पढ़ने का प्रयास होता है।
नया वर्ष 2023 अधिक चुनौती और अवसरों का है। यदि कोई समूह बड़े लक्ष्य और अंतर्राष्ट्रीय विस्तार के लिए पूंजी लगाएगा तो भारतीय मीडिया अधिक प्रतिष्ठित होगा। प्रदेशों में विस्तार और काम के अवसर बढ़ेंगे। पिछले डेढ़ वर्ष में कई क्षेत्रीय टीवी या यूट्यूब चैनल आए और उनके दर्शकों की संख्या भी बढ़ती गई |
मध्य प्रदेश में 'द सूत्र' जैसे यूट्यूब चैनल ने प्रदेश की समस्याओं, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और राजनीति पर जिस निष्पक्षता के साथ अपनी पहचान बनाई, वह इस बात का प्रमाण है कि केवल भंडाफोड़ या सरकार के विरुद्ध अभियान के बजाय तथ्यों के साथ सरकार की कमियों, गड़बड़ियों को उजागर करने से समाज और सरकार को कुछ उपयोगी जानकारी दी जा सकती है। असल में सत्ता परिवर्तन की ठेकेदारी को निष्पक्ष या साहसिक पत्रकारिता नहीं कहा जाना चाहिए। इसी तरह केवल सरकार या अपने मीडिया कर्म पर आत्ममुग्धता भी अच्छी नहीं है। इससे मीडिया की साख ही खराब होती है।
उम्मीद करनी चाहिए कि नए वर्ष में कुछ और नए संस्थान, चैनल या प्रकाशन भी स्वस्थ्य प्रतियोगिता और दूरगामी लक्ष्य के साथ भारत में आएंगे| वहीँ, वर्तमान में चल रहे संस्थान भी प्रगति के रास्ते बना सकेंगे| डिजिटल क्रांति का लाभ होगा। आर्थिक स्थिति में सुधार का असर मीडिया में भी होगा। मीडिया के लिए हर युग में चुनौतियों के बीच बढ़ने, संघर्ष और सफल होने के अवसर रहे हैं और रहेंगे। शुभकामनाएं।
(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक आईटीवी नेटवर्क, इंडिया न्यूज और दैनिक आज समाज के संपादकीय निदेशक हैं।)
टैग्स पत्रकार मीडिया आलोक मेहता वरिष्ठ पत्रकार ईयरएंडर 2022