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छठ की भीड़, रेलवे से कहां चूक हुई : रजत शर्मा
अंबाला स्टेशन पर जबरदस्त भीड़ थी, अमृतसर से पूर्णिया की तरफ जाने वाली ट्रेन जैसे ही स्टेशन पर पहुंची तो धक्कामुक्की शुरू हो गई। तुंरत जालंधर से एक स्पेशल ट्रेन भेजी गई।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago
रजत शर्मा , इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।
बिहार के लोगों में महापर्व छठ को लेकर इस बार काफी उत्साह है। बिहार के जो लोग देश के दूसरे राज्यों में रहते हैं, वे छठ के मौके पर अपने घर लौटना चाहते हैं। यही वजह है कि ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। गुजरात के रेलवे स्टेशनों के बाहर दो किलोमीटर लंबी लाइनें लगी हुई देखी गईं। रेलवे ने छठ के लिए 13,000 विशेष ट्रेनों का इंतजाम किया है, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा है कि सारे इंतजाम कम पड़ रहे हैं।
गुरुवार को खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोर्चा संभाला। स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन और ट्रेनों की लोकेशन पर नजर रखने के लिए तीन वॉर रूम बनाए गए। इनकी फीड सीधे रेल भवन में बने मुख्य वॉर रूम में पहुंच रही थी, जहां रेल मंत्री स्वयं मौजूद थे। जिस स्टेशन पर ज्यादा भीड़ दिखती है, वहां तुरंत ट्रेन भेजी जा रही है।
जैसे अंबाला स्टेशन पर जबरदस्त भीड़ थी। अमृतसर से पूर्णिया की ओर जाने वाली ट्रेन जैसे ही स्टेशन पर पहुंची, धक्का-मुक्की शुरू हो गई। तुरंत जालंधर से एक स्पेशल ट्रेन भेजी गई और यात्री उस ट्रेन से बिहार के लिए रवाना हो गए। बीते सालों से सबक लेकर इस बार रेलवे ने भीड़ प्रबंधन के लिए नया मैकेनिज्म (mechanism) तैयार किया है।
देश के ऐसे 35 रेलवे स्टेशन चिह्नित किए गए हैं, जहां त्योहारों के वक्त सबसे ज्यादा भीड़ होती है। इन स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। किसी भी स्टेशन पर भीड़ बढ़ने पर स्थानीय अधिकारियों से फीडबैक लेकर तुरंत स्पेशल ट्रेन पहुंचाई जाती है।
छठ पूजा के लिए लोग पहले भी घर लौटते थे। ट्रेनों में भीड़ पहले भी होती थी। कई लोग ट्रेन की छत पर बैठकर सफर करते थे, कुछ ट्रेन से लटककर जान जोखिम में डालकर घर जाते थे और कोई इसकी परवाह नहीं करता था। रेलवे में इस तरह की यात्रा को कभी सामान्य (normal) माना जाता था।
भीड़ अब भी है, ट्रेनें अब भी कम पड़ रही हैं, लेकिन अब रेलवे को लोगों की परवाह है। इसकी वजह है रेल मंत्री की व्यक्तिगत दिलचस्पी। अश्विनी वैष्णव ने डेटा स्टडी (Data Study) करके प्लान बनाया, स्पेशल ट्रेनें चलाईं, सुविधाएं बढ़ाईं। पर जब लोगों को पता चला कि अब स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं और ज्यादा सहूलियतें हैं, तो जो लोग पहले छठ पर घर नहीं जाते थे, उन्होंने भी अपने बैग पैक कर लिए। नतीजा, भीड़ और बढ़ गई।
अंदाजा गलत निकला, इंतजाम कम पड़ने लगे। पर लोगों को इस बात का संतोष है कि रेलवे उनकी यात्रा और सुविधाओं की चिंता करता है और यह विश्वास, बहुत बड़ी बात है। एक बात और, सोशल मीडिया पर जो भी दावे किए जा रहे हैं, उन पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। सरकार की तरफ से जो औपचारिक जानकारी दी जाती है, उसी पर यकीन करें, क्योंकि आजकल सोशल मीडिया के चक्कर में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां होती हैं।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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