होम / विचार मंच / राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मीडिया शिक्षा का भविष्य : प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मीडिया शिक्षा का भविष्य : प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी

जनसंचार का सबसे प्राचीन उदाहरण तो हमारे धर्मग्रंथों में देवर्षि नारद द्वारा सूचनाओं के सम्‍प्रेषण और महाभारत में संजय द्वारा धृतराष्‍ट्र के लिए युद्ध के सीधे प्रसारण में ही देखने को मिल जाता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 months ago

प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी, पूर्व महानिदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली।

जनसंचार हमारे समाज की एक ऐसी आवश्‍यकता है, जिस पर इसका विकास, प्रगति और गतिशीलता सर्वाधिक निर्भर करती है। एक विषय के तौर पर यह भले ही नया प्रतीत होता हो, लेकिन समाज के एक अभिन्‍न अंग के रूप में यह शताब्‍दियों से हमारे साथ विद्यमान रहा है और एक समाज के तौर पर हमें हमेशा मजबूती, गति व दिशा देता रहा है। फर्क यही आया है कि पहले जनसंचार एक नैसर्गिक प्रतिभा होता था, अब एक कौशल बन गया है, जिसे प्रशिक्षण से विकसित किया जा सकता है।

पारिभाषिक रूप से जनसंचार वह प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत सूचनाओं को पाठ्य, श्रव्‍य या दृश्‍य रूप में बड़ी संख्‍या में लोगों तक पहुंचाया जाता है। आम तौर पर इस कार्य के लिए समाचार पत्र- पत्रिकाओं, टेलीविजन, रेडियो, सोशल नेटवर्किंग, न्‍यूज पोर्टल आदि विभिन्न माध्यमों का प्रयोग किया जाता है। पत्रकारिता, विज्ञापन, इवेंट मैनेजमेंट और जनसंपर्क, जनसंचार के कुछ लोकप्रिय स्‍वरूप हैं।

सदियों से अस्तित्‍व में है जनसंचार

अगर हम इतिहास की बात करें तो जनसंचार का सबसे प्राचीन उदाहरण तो हमारे धर्मग्रंथों में देवर्षि नारद द्वारा सूचनाओं के सम्‍प्रेषण और महाभारत में संजय द्वारा धृतराष्‍ट्र के लिए युद्ध के सीधे प्रसारण में ही देखने को मिल जाता है। यद्यपि आधुनिक युग के हिसाब से जनसंचार का विधिवत आगमन 15वीं सदी के अंत में माना जा सकता है, जब गुंटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्‍कार किया और शब्‍दों के लिखित रूप को जन-जन तक पहुंचाने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके करीब एक शताब्‍दी बाद, वर्ष 1604 में जर्मनी में पहले मुद्रित समाचार पत्र ‘रिलेशन एलर फर्नेममेन एंड गेडेनक्वुर्डिगेन हिस्टोरियन’ से इसे एक संस्‍थागत स्‍वरूप मिला। इसके बाद वर्ष 1895 में मार्कोनी ने रेडियो की खोज कर शब्‍दों का श्रव्‍य रूप लोगों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्‍त किया और वर्ष 1925 में जॉन लोगी बेयर्ड ने दुनिया को टेलीविजन के रूप में ऐसी सौगात दी, जिसने शब्‍दों और ध्‍वनियों के साथ-साथ दृश्‍यों को भी हम तक पहुंचाया।

इंटरनेट ने संचार को दी नई ताकत

संचार की दुनिया में सबसे बड़ी क्रांति का सूत्रपात 1990 में ‘वर्ल्‍ड वाइड वेब’ यानि इंटरनेट की खोज से हुआ। यह एक ऐसी सुविधा थी, जिसने एक साधारण व्‍यक्ति को भी संचारक बनने का अवसर उपलब्‍ध कराया। बीते 30 सालों में इसमें बहुत बदलाव आए हैं और संचार पहले की तुलना में काफी सुगम, सुलभ, सस्‍ता और द्रुतगति वाला हो गया है। आज लाखों लोग, बहुत कम बजट में और बहुत कम वक्‍त में अपनी बात दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में सक्षम हैं। अनुमान है कि ऐसे लोगों की संख्‍या चार खरब से भी ज्‍यादा है, जो इंटरनेट या WWW तक पहुंच रखते हैं।

जनसंचार के इसी फैलते क्षेत्र और व्‍यापक प्रभाव ने इसे एक अकादमिक अध्‍ययन का विषय बनाया है और आज यह व्‍यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत पढ़े जाने वाले सर्वाधिक पसंदीदा विषयों में से एक है। आज दुनिया के लगभग सभी प्रमुख विश्‍वविद्यालयों और विभिन्‍न शैक्षणिक संस्‍थानों में जनसंचार अथवा मास कम्‍युनिकेशन को स्‍नातक, स्‍नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रम या स्‍नातकोत्तर डि‍प्‍लोमा पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाता है और इनसे हर साल हजारों की संख्‍या में पत्रकार, जनसंपर्क एवं विज्ञापन विशेषज्ञ तथा संचारक प्रशिक्षित होते हैं और विभिन्‍न संस्‍थानों से जुड़कर अपनी कैरियर यात्रा आरंभ करते हैं।

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति और जनसंचार

शिक्षा के क्षेत्र में इक्विटी (भागीदारी), अफोर्डेबिलिटी (किफायत), क्वालिटी (गुणवत्ता), एक्सेस (सब तक पहुंच) और अकाउंटेबिलिटी (जवाबदेही) सुनिश्चित करने के लिए हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति पेश की थी। शिक्षा को सुलभ, सरल और अधिक उपयोगी बनाने के उद्देश्‍य से इसमें कई नए प्रावधान सम्मिलित किये गये हैं। हालांकि इसमें स्‍पष्‍ट रूप से मीडिया व जनसंचार जैसे विषयों का उल्‍लेख नहीं किया गया है। लेकिन, सच तो यह है कि ऐसे बहुत सारे विषय हैं, जो प्रत्‍यक्ष या परोक्ष रूप से मीडिया या कम्‍युनिकेशन पर निर्भर हैं।

जनसंचार में प्रौद्योगिकी के प्रवेश ने इसके प्रभाव क्षेत्र को बहुत व्‍यापक और विस्‍तृत कर दिया है। लेकिन, जिस तरह से बीते दो दशकों में मीडिया के क्षेत्र में प्रशिक्षण संस्‍थानों की संख्‍या में जो कल्‍पनातीत वृद्धि हुई है, उसे देखते हुए यह बहुत आवश्‍यक हो गया है कि इसमें भी जवाबदेही और गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने पर विचार किया जाए। मीडिया और जनसंचार लगभग सौ सालों से एक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। इन सौ सालों में समाज के स्‍वरूप, स्‍वभाव, अपेक्षाओं और आवश्‍यकताओं में बहुत बदलाव आया है। इस बदलती हुई दुनिया के अनुरूप पत्रकारिता के प्रशिक्षण में भी बदलाव आवश्‍यक हैं।

नया मीडिया : संभावनाएं और चुनौतियां

21वीं सदी में जिस मीडिया उदय हुआ है, वह प्रिंट, टीवी या रेडियो तक सीमित नहीं है। इंटरनेट की पहुंच और प्रभाव ने मीडिया को बहुत सारी नई चीजें दी हैं, जिनमें समृद्धि और सफलता के लिए बहुत सारी नई संभावनाएं उत्‍पन्‍न हुई हैं। ऑनलाइन एजुकेशन, गेमिंग, एनिमेशन, ओटीटी, मल्‍टीमीडिया, ब्‍लॉकचेन, मेटावर्स जैसे ऐसे अनेक विकल्‍प हैं, जिनमें प्रशिक्षित पेशेवरों की बहुत जरूरत है।

ये वे क्षेत्र हैं, जिनके विशाल बाजार और भविष्‍य की संभावनाओं के आकलन अचंभित करते हैं। उदाहरण के लिए वीडियो गेमिंग को ही लें इसके व्यवसाय के वर्ष 2030 तक 583.69 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

इसी प्रकार, एनिमेशन इंडस्‍ट्री है। एनिमेशन मार्केट 2030 तक बढ़कर 587.1 बिलियन डॉलर हो जायेगा। ओटीटी वीडियो भी ऐसा ही तेजी से बढ़ता हुआ मार्केट है, जिसके यूजर्स की संख्‍या 2027 तक बढ़कर 4216.3 मिलियन हो जायेगी। जाहिर है कि जब बाजार इतना बड़ा है, तो इसे संभालने के लिए इतनी ही बड़ी संख्‍या में कुशल व प्रशिक्षित प्रतिभाओं की आवश्‍यकता भी पड़ेगी। इस जरूरत को पूरा करने में मीडिया और जनसंचार प्रशिक्षण संस्‍थान काफी सशक्‍त योगदान दे सकते हैं।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल ने इस आवश्‍यकता को अनुभव करते हुए काफी पहले से ही काम आरंभ कर दिया था। वर्ष 2011 में ‘न्यू मीडिया मीडिया विभाग’ आरंभ एक बड़ा कदम था। 2022 में भारतीय जन संचार संस्थान ने भी डिजिटल मीडिया का पाठ्यक्रम प्रारंभ किया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल विकास और आत्मनिर्भर बनने पर काफी जोर दिया गया है। जनसंचार की शिक्षा में भी हमें इसी का ध्‍यान रखते हुए अपेक्षित बदलाव लाने होंगे, तभी हम परिवर्तन के साथ सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


टैग्स
सम्बंधित खबरें

मधुसूदन आनंद हमेशा यादों में बने रहेंगे : अनिल जैन

आनंद जी ने जर्मनी में 'डायचे वेले' (द वाॅयस ऑफ जर्मनी) में कुछ सालों तक काम किया और वे 'वाॅयस ऑफ अमेरिका' के नई दिल्ली स्थित संवाददाता भी रहे।

6 hours ago

प्रवक्ता, अहंकार और संवाद की संवेदनहीनता का सबक: नीरज बधवार

चूंकि समाज के अवचेतन में अंग्रेज़ी को लेकर एक हीन भावना मौजूद है, इसलिए जो व्यक्ति अंग्रेज़ी में प्रभावशाली ढंग से बोल लेता है, वह अक्सर खुद को विद्वान भी मान बैठता है।

11 hours ago

समस्य़ाओं को हल करने के लिए हो एआई का इस्तेमाल: रजत शर्मा

मेरा यह मानना है कि सबसे ज़रूरी है, AI का इस्तेमाल रोज़मर्रा की जिंदगी में आने वाली समस्य़ाओं को हल करने के लिए हो। भारी भरकम शब्दों से इसे परिभाषित करके उससे डराया न जाए।

1 day ago

मैट शूमर के लेख का मतलब क्या है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

मैट ने सबको सलाह दी है कि हर रोज AI का इस्तेमाल गंभीरता से शुरू करें। ChatGPT , Gemini जैसे टूल को गूगल सर्च की तरह इस्तेमाल नहीं करें। उससे अपने रोजमर्रा के काम करवाए।

3 days ago

सभ्यतागत चेतना की पुनर्स्थापना का संकल्प: अनंत विजय

जब प्रधानमंत्री मोदी 2047 में विकसित भारत की बात करते हुए आध्यत्मिकता की बात करते हैं तो हमें स्मरण होता है कि यही काम तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपने देश में कर रहे हैं।

3 days ago


बड़ी खबरें

PM मोदी ने लॉन्च किया ‘MANAV विजन’, इंसान-केंद्रित AI में भारत की नई पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में “MANAV- इंडिया’स ह्यूमन विजन फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” पेश किया।

7 hours ago

JioStar ने बदली अपनी रेवेन्यू स्ट्रैटजी, टीवी व डिजिटल सेल्स अब अलग-अलग

'जियोस्टार' (JioStar) ने एक बार फिर अपनी कमाई यानी रेवेन्यू की स्ट्रैटजी में बड़ा बदलाव किया है।

8 hours ago

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

1 hour ago

Tips Films के ऑफिस में GST विभाग की जांच, कंपनी ने कहा– कामकाज सामान्य

मुंबई की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी Tips Films Limited के दफ्तरों पर जीएसटी विभाग ने जांच शुरू की है।

9 hours ago

इस बड़े पद पर Reliance Industries Limited की टीम में शामिल हुईं रीमा एच कुंदननी

यहां उन्होंने अपनी भूमिका संभाल ली है। कुंदननी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘लिंक्डइन’ (LinkedIn) पर खुद यह जानकारी शेयर की है।

5 hours ago