होम / विचार मंच / मीडिया और सरकार: 2025 में कंटेंट से कंट्रोल तक बदलता परिदृश्य
मीडिया और सरकार: 2025 में कंटेंट से कंट्रोल तक बदलता परिदृश्य
साल 2025 भारत के मीडिया सेक्टर के लिए सिर्फ बदलावों का साल नहीं रहा, बल्कि यह वह दौर भी रहा जब सरकार ने मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर अपनी नीतियों को और साफ व सख्त किया।
Vikas Saxena 1 month ago
साल 2025 भारत के मीडिया सेक्टर के लिए सिर्फ बदलावों का साल नहीं रहा, बल्कि यह वह दौर भी रहा जब सरकार ने मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर अपनी नीतियों को और साफ व सख्त किया। न्यूज चैनल हों, OTT प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया या इंफ्लुएंसर्स, हर सेक्टर पर सरकार की नजर इस साल और गहरी होती दिखी।
इस साल सरकार की मीडिया पॉलिसी का फोकस तीन बड़े मुद्दों पर साफ तौर पर दिखा- राष्ट्रीय सुरक्षा, गलत सूचना पर रोक और डिजिटल युग में जवाबदेही।
सबसे पहले बात राष्ट्रीय सुरक्षा की। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एडवाइजरी जारी की, जिसमें साफ कहा गया कि सैन्य या सुरक्षा अभियानों की रियल-टाइम लाइव कवरेज नहीं की जाए। सरकार का तर्क था कि ऐसी कवरेज से संवेदनशील जानकारी दुश्मन तक पहुंच सकती है। इस कदम का असर यह हुआ कि टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ब्रेकिंग न्यूज की होड़ में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।
दूसरा बड़ा मुद्दा रहा फेक न्यूज और गलत सूचना। सरकार ने साफ संकेत दिए कि अब फेक न्यूज को सिर्फ नैतिक मुद्दा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का मामला माना जाएगा। इसी कड़ी में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव सामने आया, ताकि डिजिटल मीडिया, इंफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को भी इसके दायरे में लाया जा सके। इसका मकसद यह है कि सोशल मीडिया पर खबर या जानकारी देने वाले लोग भी उसी तरह जवाबदेह हों, जैसे पारंपरिक मीडिया होता है।
डिजिटल और OTT प्लेटफॉर्म्स पर भी इस साल सरकार का रुख और सख्त दिखा। अश्लीलता, भ्रामक कंटेंट और साइबर अपराधों को लेकर IT नियमों के तहत प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बढ़ाई गई। कंटेंट हटाने, शिकायत निवारण और यूजर सुरक्षा को लेकर प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। इसका सीधा असर OTT कंटेंट, वेब सीरीज और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर पड़ा।
2025 की सबसे बड़ी नई बहस रही AI और डीपफेक कंटेंट को लेकर। सरकार ने ड्राफ्ट IT नियमों के जरिये यह संकेत दिया कि AI से बने फोटो, वीडियो और ऑडियो को लेकर अब सख्त पहचान और नियंत्रण की जरूरत है। डीपफेक से जुड़े मामलों में प्लेटफॉर्म्स और पब्लिशर्स की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना गया। आने वाले समय में मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को यह साफ बताना पड़ सकता है कि कौन सा कंटेंट AI-जनरेटेड है।
इंफ्लुएंसर मार्केटिंग भी सरकार की रडार पर रही। फेक प्रमोशन, भ्रामक विज्ञापन और गलत जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई के संकेत दिए गए। इससे डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री को यह संदेश मिला कि अब 'क्रिएटर' होना सिर्फ फॉलोअर्स का खेल नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी मामला है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध और कंटेंट ब्लॉकिंग भी देखने को मिली। इससे यह साफ हुआ कि सरकार इंटरनेट और मीडिया को पूरी तरह अनियंत्रित स्पेस के तौर पर नहीं देखती।
कुल मिलाकर, 2025 की मीडिया पॉलिसी यह बताती है कि सरकार अब 'फ्रीडम विद रिस्पॉन्सिबिलिटी' के मॉडल की ओर बढ़ रही है। एक तरफ डिजिटल विस्तार, AI और नए प्लेटफॉर्म्स हैं, तो दूसरी तरफ कंटेंट पर निगरानी और जवाबदेही। मीडिया, मार्केटिंग और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के लिए यह साल एक साफ संदेश छोड़ता है- अब सिर्फ रचनात्मकता नहीं, नियमों की समझ भी उतनी ही जरूरी है।
गुजरते हुए साल के लिहाज से देखें तो 2025 वह साल रहा जब सरकार और मीडिया का रिश्ता पहले से ज्यादा नियमों और जवाबदेही से बंधा नजर आया।
टैग्स