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'न्यूजरूम्स में लौटी रौनक, डिजिटल माध्यमों को खोजना होगा गूगल का विकल्प'
अच्छी-बुरी यादों को अपने आगोश में समेटे हुए वर्ष 2022 विदाई की दहलीज पर खड़ा है और हम सब नूतन वर्ष के रूप में वर्ष 2023 का अभिनंदन करने के लिए तैयार हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
प्रभाष झा।।
अच्छी-बुरी यादों को अपने आगोश में समेटे हुए वर्ष 2022 विदाई की दहलीज पर खड़ा है और हम सब नूतन वर्ष के रूप में वर्ष 2023 का अभिनंदन करने के लिए तैयार हैं। हर क्षेत्र की तरह मीडिया के लिए भी यह साल मिला-जुला ही रहा। कोरोना से कराह रही दुनिया धीरे-धीरे नॉर्मल होने लगी और अन्य दफ्तरों के साथ-साथ अखबारों, न्यूज चैनल्स और डिजिटल न्यूजरूम में भी में रौनक लौट आई।
वर्क फ्रॉम होम के मौहाल से निकलकर कामकाज दफ्तरों से शुरू हुआ और साथी पत्रकारों में बहस-ओ-मुबाहसा का दौर फिर से शुरू हुआ। हम सब जानते हैं कि चुनाव और उसके परिणाम की कवरेज न्यूज रूम में किसी उत्सव से कम नहीं होता है। इस साल की शुरुआत में ही तय योजना के हिसाब से यूपी समेत पांच राज्यों में चुनाव हुए और उत्तरार्ध में गुजरात व हिमाचल प्रदेश में। इन चुनावों की कवरेज ने दो साल के अंतराल पर न्यूज रूम्स को तेजी से ढर्रे पर लौटने में मदद की।
आर्थिक मोर्चे पर बात करें तो मीडिया में कोरोना पूर्व स्थिति बहाल होने में अभी कुछ और वक्त लगेगा। मंदी की आशंका से लोग खुलकर खर्च करने से डर रहे हैं और भारत समेत दुनियाभर में इसका असर करीब-करीब हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। मीडिया भी इससे अछूता नहीं है।
रूस-युक्रेन युद्ध की वजह से न्यूजप्रिंट पेपर की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसकी वजह से अखबारों की लागत काफी बढ़ गई है। डिजिटल मीडिया की बात करें तो हम सब जानते हैं कि समाचारों के डिस्ट्रीब्यूशन से लेकर राजस्व तक के लिए यह बहुत हद तक गूगल पर निर्भर है। आगे भी इस स्थिति में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है। आने वाले दिनों में डिजिटल माध्यमों को गूगल के अलावा दूसरे वैकल्पिक स्रोतों को भी तलाशना होगा।
(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक ‘हिन्दुस्तान’ की न्यूज वेबसाइट livehindustan.com में एडिटर हैं।)
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