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अडानी को लेकर झूठे निकले हिंडनबर्ग के दावे: रजत शर्मा
हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए थे। कोई तो ऐसा तरीका होना चाहिए कि इन लोगों के नुकसान की भरपाई हो और नुकसान पहुंचाने वालों को सज़ा मिले।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 months ago
रजत शर्मा, इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।
देश के बड़े औद्योगिक समूह अडानी समूह को बड़ी राहत मिली। प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने शेयरों में हेरा-फेरी करने और अंदरूनी कारोबार (इनसाइडर ट्रेडिंग) के आरोपों से अडानी समूह को क्लीन चिट दे दी। अमेरिका की शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने गौतम अडानी और उनके समूह की कंपनियों, अडानी पोर्ट्स और अडानी पावर, पर विदेश से फंडिंग के ज़रिए अपने समूह में पैसे लगवाने और अंदरूनी कारोबार करने के आरोप लगाए थे लेकिन जांच में ये सारे आरोप बेबुनियाद और झूठे साबित हुए।
सेबी के सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने अपने आदेश में कहा कि अडानी समूह पर शेयरों की हेराफेरी के जो आरोप लगाए गए थे, उन्हें साबित करने वाला एक भी सबूत नहीं मिला। सारे आरोप निराधार पाए गए। हिंडनबर्ग ने जनवरी 2023 में अडानी समूह के ख़िलाफ़ अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि अडानी समूह की कंपनियां अंदरूनी कारोबार कर रही हैं, शेयरों में हेरफेर (स्टॉक मैनिपुलेशन) करके उनकी कीमतें बढ़ा रही हैं।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाकर मामले की जांच कराई थी। एसआईटी ने भी अडानी समूह को हिंडनबर्ग के लगाए इल्ज़ामों से क्लीन चिट दे दी थी लेकिन सेबी शेयर बाज़ार से जुड़े आरोपों की जांच कर रही थी। आज अडानी समूह को सेबी ने भी क्लीन चिट दे दी। क्लीन चिट मिलने पर गौतम अडानी ने एक बयान में कहा कि उनकी कंपनी शुरू से कह रही थी कि हिंडनबर्ग के आरोप बेबुनियाद और झूठे हैं।
सेबी की अडानी को क्लीन चिट बिलकुल स्पष्ट है। इसमें कोई अगर-मगर नहीं है। हिंडनबर्ग के दावे झूठे निकले। अडानी समूह की सारी लेन-देन (ट्रांजैक्शन) को वास्तविक करार दे दिया गया। न कोई धोखाधड़ी साबित हुई, न धन की हेराफेरी (फंड सिफोनिंग) के सबूत मिले। सारे कर्ज़ ब्याज के साथ लौटा दिए गए। सेबी को किसी नियम-कानून का उल्लंघन नहीं मिला।
अडानी समूह की कंपनियों को तो राहत मिल गई। सवाल ये है कि हिंडनबर्ग की फर्जी रिपोर्ट के कारण हज़ारों निवेशकों का जो नुकसान हुआ, उसके जिम्मेदार कौन हैं? झूठी कहानी (नेरेटिव) के कारण अडानी के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए थे। कोई तो ऐसा तरीका होना चाहिए कि इन लोगों के नुकसान की भरपाई हो और नुकसान पहुँचाने वालों को सज़ा मिले।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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