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ऑनलाइन गेम्स पर पाबंदी सरकार का ऐतिहासिक कदम: रजत शर्मा

ये कानून बनने के बाद अगर कोई ऑनलाइन मनी गेम खिलाता है, तो उसे तीन साल तक की कैद होगी और एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा। प्रमोशन पर भी पाबंदी होगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago

रजत शर्मा, इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।

देश में ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का कानून पारित हो गया है। जिन ऑनलाइन खेलों में किसी भी प्रकार से पैसों का लेन-देन होता है, वे सभी अब प्रतिबंधित होंगे। इसका अर्थ है कि खेलों के नाम पर ऑनलाइन सट्टेबाज़ी और किसी भी प्रकार का धन लेन-देन पूरी तरह अवैध होगा। न कोई पैसा लगाएगा, न कोई जीतेगा, न कोई हारेगा और न कोई कमाएगा। जिन ऑनलाइन खेलों में लोग धन लगाते थे, वे सभी प्लेटफ़ॉर्म बंद कर दिए जाएंगे।

इससे सरकार को लगभग बीस हज़ार करोड़ रुपये के कर राजस्व का नुकसान होगा, जबकि FICCI की रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक इन कंपनियों से सरकार को 78 हज़ार 500 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती थी। ऑनलाइन गेमिंग का दायरा कितना विशाल है, इसे समझने के लिए फैंटेसी क्रिकेट की कंपनी ड्रीम-11 का उदाहरण दिया जा सकता है, जिसमें टीम बनाने के लिए धन देना पड़ता है और जिसका मूल्यांकन 70 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। इसके ब्रांड एंबेसडर महेंद्र सिंह धोनी, ऋषभ पंत और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी हैं।

भारत में 15 करोड़ से अधिक लोग रियल मनी गेम्स खेलते हैं, जिनमें फैंटेसी स्पोर्ट्स, रमी, पोकर जैसे खेल शामिल हैं, और प्रतिदिन लगभग 11 करोड़ लोग इन खेलों में भाग लेते हैं। नए कानून के बाद ड्रीम-11, मोबाइल प्रीमियर लीग, माय 11 सर्किल, विन्ज़ो, एसजी-11 फैंटेसी, जंगली गेम्स और गेम्सक्राफ्ट जैसी कंपनियों के ऑनलाइन रियल मनी गेम्स बंद हो जाएंगे।

सरकार ने ई-स्पोर्ट्स और कौशल-आधारित खेलों को इस प्रतिबंध से छूट दी है तथा इन्हें प्रोत्साहन देने के लिए ई-स्पोर्ट्स प्राधिकरण गठित करने की घोषणा की है, जिससे रणनीतिक सोच, मानसिक चपलता और शारीरिक दक्षता को बढ़ावा मिलेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ऑनलाइन मनी गेम्स का सबसे बुरा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा था। शीघ्र धन कमाने की लालसा में लोग इनकी लत के शिकार हो रहे थे, जिससे मानसिक विकार, आर्थिक संकट और आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे गेमिंग विकार घोषित किया है। इसीलिए जिन ऑनलाइन खेलों में पैसों का लेन-देन होता है, उन सबको बंद करने का निर्णय लिया गया है। नए कानून के अंतर्गत यदि कोई ऑनलाइन मनी गेम खिलाता है, तो उसे तीन वर्ष तक की कारावास और एक करोड़ रुपये तक का दंड हो सकता है, जबकि इनका प्रचार-प्रसार करने पर दो वर्ष तक की कैद और पचास लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जो लोग ऐसे खेल खेलते हुए पाए जाएंगे, उन्हें पीड़ित माना जाएगा और उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी।

यह सत्य है कि ऑनलाइन गेमिंग का बाज़ार अत्यंत बड़ा है और इस प्रतिबंध से न केवल 20 हज़ार करोड़ रुपये का राजस्व घटेगा, बल्कि हज़ारों लोग बेरोज़गार भी होंगे, फिर भी सरकार ने युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह जोखिम उठाया है। क्योंकि इन खेलों से होने वाला मानसिक और सामाजिक नुकसान धनहानि से कहीं अधिक गंभीर और खतरनाक है।

ये खेल युवाओं को आत्महत्या की ओर उकसाते हैं, उन्हें मानसिक रूप से बीमार बनाते हैं और उनकी ज़िंदगियाँ तबाह करते हैं। कई उदाहरण हमारे आस-पास मौजूद हैं, जहाँ कुछ लोगों को पैसा जीतता दिखाकर लाखों लोगों को गुमराह कर उनकी कमाई लूट ली जाती है। यदि देश के युवाओं को मानसिक बीमारियों और आत्मविनाश से बचाने के लिए सरकार 20 हज़ार करोड़ रुपये का त्याग करती है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। अश्विनी वैष्णव का यह कदम ऐतिहासिक है, जो युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने, गरीबों की मेहनत की कमाई बचाने और अन्य देशों को भी ऑनलाइन गेमिंग के खतरे से बचाने का मार्ग दिखाता है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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