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सुनंदन भंजा चौधरी: कॉर्पोरेट भारत में नेतृत्व निर्माण के शिल्पकार हैं आप
सुनंदन ने अपनी शिक्षा फिजिक्स ऑनर्स के साथ सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से शुरू की और फिर फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री ली।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 days ago
देश के कॉर्पोरेट जगत में ऐसे विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने लीडर्स को आकार देने और संस्थानों के भविष्य को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे ही एक नाम हैं सुनंदन भंजा चौधरी (Sunandan Bhanja Chaudhury)। आज उनके जन्मदिन के मौके पर उनके करियर और योगदान को याद किया जा रहा है।
सुनंदन ने अपनी शिक्षा फिजिक्स ऑनर्स के साथ सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से शुरू की और फिर फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री ली। इसने उन्हें न केवल तार्किक सोच बल्कि व्यावसायिक निर्णय लेने की क्षमता भी दी।
उन्होंने ऐडवर्टाइजिंग और कम्युनिकेशंस की दुनिया में शानदार करियर बनाया। J. Walter Thompson, McCann Erickson, Grey Worldwide, और Lowe Lintas जैसी कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर काम करते हुए उन्होंने बिजनेस बढ़ाने और टीमों को प्रेरित करने में अपनी अहम भूमिका निभाई।
वर्ष 1998 में वे Portland India के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रेजिडेंट बने, जो उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ था। इसके बाद उन्होंने एग्जिक्यूटिव सर्च और लीडरशिप सलाहकार के क्षेत्र में कदम रखा और देश की कई बड़ी कंपनियों के लिए टॉप लीडरशिप की नियुक्तियां कीं। उनके क्लाइंट्स में Nestlé, Unilever, Kellogg's, Sony Entertainment Television, Viacom, Raymond Ltd, Apollo Tyres, L’Oréal, Godrej और Dalmia Bharat जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।
सुनंदन की विशेषज्ञता सी‑सूट भर्ती, उत्तराधिकार योजना, सलाहकार बोर्ड संरचना, और नेतृत्व पाइपलाइन विकास में है। उन्होंने लीडरशिप पर कई लेख भी लिखे हैं, जिनमें CEOs पर मानसिक दबाव, संगठनात्मक वृद्धि में भावनात्मक बुद्धिमत्ता, विविधता का महत्व और मानव व्यवहार की सूक्ष्म समझ जैसे विषय शामिल हैं।
उनकी फिलॉसफी सरल है: सही लीडर को सही जगह पर लाना किसी “घास के ढेर में सुई ढूंढने” जैसा काम है, और यह अनुभव और सटीकता पर निर्भर करता है।
सुनंदन भंजा चौधरी की विशेषज्ञता केवल पदों या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि उन लीडर्स में दिखाई देती है जिन्हें उन्होंने ढाला और नियुक्त किया। उनके योगदान ने कंपनियों, इंडस्ट्रीज और अंततः देश की आर्थिक संरचना पर दूरगामी प्रभाव डाला है। आज उनके जन्मदिन पर उनकी कड़ी मेहनत, विशेषज्ञता और नेतृत्व निर्माण की भूमिका को याद किया जा रहा है।
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