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सोने की लत से हारी सरकार, पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
सरकार के लिए यह घाटे का सौदा साबित हुआ। स्कीम बंद नहीं की है लेकिन इस साल सरकार कोई नया बॉन्ड नहीं लायीं। 2032 तक सरकार को 1.12 लाख करोड़ रुपये बॉन्ड धारकों को चुकाने होंगे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
आपको पता है कि हर साल भारत में 700 टन से ज़्यादा सोना विदेश से आता है। इस पर 3.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा विदेशी मुद्रा खर्च होती है। केंद्र सरकार ने सोने की लत छुड़ाने के लिए दस साल पहले बड़ी योजना बनाई थी ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सकेगी। दस साल बाद सरकार ने भी घुटने टेक दिए हैं। सोने का इंपोर्ट कम ही नहीं हो रहा है। Gold Monetization Scheme को बंद कर दिया गया है जबकि इस साल कोई नया गोल्ड बॉण्ड जारी नहीं किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में सोने के लिए तीन स्कीम लाँच की थीं। Gold Monetization Scheme मतलब आप अपना सोना बैंक में जमा करिए और हर साल 2.5% ब्याज पाते रहें। घर या मंदिरों में जो सोना रखा है उस पर कोई आमदनी नहीं हो रही है। यहाँ ब्याज मिलेगा। अवधि ख़त्म होने पर सोना वापस ले जाइये। बैंक सोने को सुनारों को क़र्ज़ पर देगा। सुनार गहने बनाकर बेचेंगे। विदेश से सोना कम मँगवाना पड़ेगा।
देश में उस समय 20 हज़ार टन सोना था। हर साल 5% यानी 1 हज़ार टन सोना भी बैंकों में आ जाता तो इंपोर्ट की ज़रूरत नहीं होती। बैंकों में सोना दस साल में आया सिर्फ़ 31 टन। स्कीम फेल होने का बड़ा कारण रहा गहनों से लोगों का लगाव। बैंक में गहने जमा करने पर उन्हें पिघलाया जाता था ताकि ज्वैलर नये गहने बना सकें। अवधि पूरी होने पर बैंक आपको ब्याज समेत सोना लौटाता था, गहने नहीं मिलते थे। सोने की सिल्ली मिलती थी।
स्कीम में सोना जमा करने के लिए तीन अवधि थी , लाँग टर्म ( 12-15 साल), मीडियम टर्म (5-7 साल) और शॉर्ट टर्म (1-3 साल) , सरकार ने लाँग टर्म और मीडियम टर्म स्कीम को 26 मार्च से बंद कर दिया है। जिन्होंने पहले से सोना जमा कर रखा है उन्हें अवधि पूरी होने तक ब्याज मिलेगा। शॉर्ट टर्म स्कीम चलाना है या नहीं? यह फ़ैसला बैंकों पर छोड़ दिया गया है।
दूसरी स्कीम थी Sovereign Gold Bond, रिज़र्व बैंक ने भारत सरकार की तरफ़ से बॉन्ड जारी किए। आइडिया था कि असली सोना मत ख़रीदिए, काग़ज़ का सोना ख़रीदिए। अवधि पूरी होने पर काग़ज़ का सोने का दाम उतना ही मिलेगा जितना बाज़ार में असली सोने का चल रहा है। इसके ऊपर ब्याज भी मिलेगा। यह स्कीम सरकार को ही उलटी पड़ गई। सरकार ने सोचा था कि 2.5% ब्याज पर पैसा मिलेगा जो बाज़ार के 8-9% से सस्ता है। सरकार ने यह नहीं सोचा था कि सोने के दाम तीन गुना बढ़ जाएँगे। 2015 में दस ग्राम सोना ₹25 हज़ार में मिलता था और अब ₹90 हज़ार।
सरकार के लिए यह घाटे का सौदा साबित हुआ। स्कीम बंद नहीं की है लेकिन इस साल सरकार कोई नया बॉन्ड नहीं लायीं है। अनुमान है कि 2032 तक सरकार को 1.12 लाख करोड़ रुपये बॉन्ड धारकों को चुकाने होंगे। दस साल में लोगों ने 147 टन काग़ज़ का सोना यानी इतनी क़ीमत के बॉन्ड ख़रीदें लेकिन असली सोने की माँग भी बढ़ती रहीं। स्कीम का मक़सद फेल हो गया।
तीसरी स्कीम थी सोने के सिक्के सरकार खुद ही बेच रही थीं। यह सोना Gold Monetization Scheme से आना था। यह भी चल नहीं सकीं, तीनों स्कीम की नाकामी यह बात साबित करती है कि सोने की लत भारतीय लोगों में इतनी ज़्यादा है कि सरकार भी इसे छुड़ा नहीं सकीं। हमने पिछले हफ़्ते ही लिखा था कि सोने को सेफ़ मानकर ख़रीदा जाता है। शेयर बाज़ार के मुक़ाबले यह यह बेहतर या बराबरी का इन्वेस्टमेंट साबित हुआ है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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