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विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन नहीं होना चाहिए : रजत शर्मा
सालार मसूद की कब्र भी बहराइच में ही है। हर साल लाखों लोग सालार मसूद की मजार पर आते हैं। योगी ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव बहराइच की पहचान हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
रजत शर्मा, इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि औरंगज़ेब और सालार मसूद गाज़ी जैसे आक्रमणकारियों की शान में कसीदे नया भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। योगी ने बहराइच में कहा कि सनातन को खत्म करने की कोशिश करने वालों का, आस्था को रौंदने वालों का महिमामंडन करना देशद्रोह है। जिन आक्रांताओं ने भारत में जुल्म किए हों, उनका गुणगान नए भारत के लोगों को स्वीकार्य नहीं है।
यूपी में आजकल सालार मसूद गाजी की याद में लगने वाले नेजा मेले को लेकर विवाद चल रहा है। संभल में नेजा मेले की अनुमति नहीं दी गई, लेकिन सालार मसूद गाजी की याद में सबसे बड़ा मेला बहराइच में लगता है। इस मेले का भी विरोध हो रहा है। योगी ने कहा कि सन् 1034 में बहराइच में महाराजा सुहेलदेव ने चित्तौरा झील के किनारे सालार मसूद गाजी को युद्ध में मार गिराया था।
सालार मसूद की कब्र भी बहराइच में ही है। हर साल लाखों लोग सालार मसूद की मजार पर आते हैं। योगी ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव बहराइच की पहचान हैं, ऋषि बालार्क के नाम पर बहराइच का नाम है, यहां किसी आक्रांता के लिए कोई जगह नहीं है, बहराइच में किसी की चर्चा होनी चाहिए तो वो महाराजा सुहेलदेव की होना चाहिए, जिन्होंने एक विदेशी आक्रांता को ऐसी धूल चटाई कि डेढ़ सौ साल तक किसी ने भारत की तरफ आंख उठाने की हिम्मत तक नहीं की।
विश्व हिन्दू परिषद ने जिला प्रशासन से बहराइच मेले को इजाज़त न देने की मांग की है। परिषद का कहना है लोगों को ये भ्रम है कि उनकी मन्नत, उनकी बीमारियां सालार मसूद गाज़ी के चमत्कार की वजह से ठीक होती हैं, लेकिन सच ये है कि जिस जगह ये दरगाह बनी है, वहां सूर्य मंदिर था, सूर्य कुंड था, जिसमें स्नान करने से बीमारियां ठीक होती थीं। 12वीं सदी में फिरोज़ शाह तुगलक ने मंदिर को तोड़ दिया था।
इसलिए बहराइच में फिर से सूर्य मंदिर स्थापित होना चाहिए। योगी आदित्यनाथ की बात सही है कि विदेशी आक्रमणकारियों का महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए। इस देश की विरासत सबकी है। इस देश की संस्कृति पूरे समाज की है। जिसने इस विरासत को मिटाने की कोशिश की, संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की, उसका महिमामंडन कैसे हो सकता है?
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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