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मुफ्त बिजली पर सीएम नीतीश कुमार ने पलटी मारी : रजत शर्मा
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी सरकार के इस फैसले से गरीबों को काफी राहत मिलेगी क्योंकि ज्यादातर गरीब परिवार हर महीने 125 यूनिट से कम बिजली खर्च करते हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
रजत शर्मा , इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।
सीएम नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले फिर एक नया दांव चला। बिहार में 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने का एलान कर दिया। जुलाई का बिजली का जो बिल आएगा, उसमें 125 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वालों का बिल जीरो होगा और बाकी लोगों के बिल में 125 यूनिट बिजली का पैसा कम किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस फैसले से बिहार के एक करोड़ 82 लाख परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी सरकार के इस फैसले से गरीबों को काफी राहत मिलेगी क्योंकि ज्यादातर गरीब परिवार हर महीने 125 यूनिट से कम बिजली खर्च करते हैं।
बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार पहले भी बिजली में 80 परसेंट सब्सिडी दे रही थी लेकिन caste census के बाद पता चला था कि 94 लाख ऐसे परिवार हैं, जो बेहद गरीब हैं, बिजली का खर्च उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है, इसलिए उन्हें राहत देने के लिए ये फैसला लिया गया है।
RJD के नेता मनोज झा ने कहा कि तेजस्वी ने 200 यूनिट बिजली फ्री देने का वादा किया था, इसलिए नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले 125 यूनिट बिजली मुफ्त कर दी। तेजस्वी ने बुजुर्गों की पेंशन बढ़ाने का वादा किया, नीतीश कुमार ने उसे लागू कर दिया। मनोज झा ने कहा कि नीतीश कुमार तेजस्वी की लाइन पर चल रहे हैं, इसलिए अब तो उन्हें भी मान लेना चाहिए कि तेजस्वी में मुख्यमंत्री बनने के सारे गुण हैं।
नेता कुछ भी कहें, लेकिन ये तो सही है कि यही नीतीश कुमार पहले मुफ्त की योजनाओं का विरोध करते थे। उन्होंने मुफ्त बिजली देने को भी गलत बताया था लेकिन अब वही नीतीश कुमार 125 यूनिट बिजली मुफ्त दे रहे हैं।
इसीलिए अगर JD-U के नेता ये मान लें कि ये फैसला चुनाव को देखकर किया गया है, तो कोई पहाड़ नहीं टूट जाएगा। आज कल सारे नेता, सारी पार्टियां चुनाव से पहले इस तरह के फैसले करती हैं। तेजस्वी यादव मुफ्त बिजली, बुजुर्गों, विधवाओं और बेरोजगारों को पेंशन के जो वादे कर रहे हैं, वो भी तो चुनावी रणनीति का हिस्सा है। जनता सब जानती है। इसलिए नेताओं को इधर-उधर की बातें करने के बजाए सीधी-सीधी साफ-साफ बात करनी चाहिए।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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