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अनिल अंबानी की कहानी, बुलंदी से बदहाली तक का सफर : पढ़ें 'हिसाब किताब'
कभी दुनिया के छठे सबसे अमीर व्यक्ति रहे अनिल अंबानी आज खुद को कंगाल घोषित कर चुके हैं। जानिए कैसे लोन, घोटालों और गलत फैसलों ने उनके साम्राज्य को गिरा दिया, और अब उनके पास क्या बचा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
आज अनिल अंबानी अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी के सामने कहीं नहीं ठहरते हैं। क़रीब 20 साल पहले दोनों भाई लगभग बराबरी पर खड़े थे। 2008 में अनिल अंबानी के पास 42 बिलियन डॉलर की संपत्ति थी और वे दुनिया के छठे सबसे अमीर व्यक्ति थे, जबकि मुकेश अंबानी 43 बिलियन डॉलर के साथ पाँचवें नंबर पर थे। लेकिन आज मुकेश की संपत्ति 125 बिलियन डॉलर के आसपास पहुँच चुकी है, वहीं अनिल अंबानी खुद को कंगाल घोषित कर चुके हैं। अब हिसाब-किताब करते हैं अनिल अंबानी का।
Enforcement Directorate (ED) ने गुरुवार को अनिल अंबानी की कंपनियों पर छापे मारे हैं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का आरोप है। दूसरी तरफ़ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी मुश्किल खड़ी कर दी है। उसने अनिल अंबानी की कंपनी RCom के लोन को फ़्रॉड घोषित किया है। अब CBI को केस भेजने की तैयारी हो रही है। दोनों ही मामले लोन के दुरुपयोग से जुड़े हुए हैं।
अनिल अंबानी की कंपनियों ने Yes Bank से ₹3000 करोड़ का लोन लिया था। आरोप है कि लोन जिस उद्देश्य से लिया गया था, उसकी जगह इस रकम का एक हिस्सा शेल कंपनियों में फर्जी सौदों के जरिए भेजा गया। फिर उन्हीं कंपनियों ने यह पैसा अनिल अंबानी की कंपनियों में वापस भेजा। इस पैसे का उपयोग पुराने लोन चुकाने में किया गया। यानि लोन के पैसे को घुमाकर पुराने लोन को चुकता किया गया। इसके अलावा Yes Bank के अधिकारियों को लोन के बदले में रिश्वत दी गई, जो इन शेल कंपनियों के माध्यम से चुकाई गई।
स्टेट बैंक ने अनिल अंबानी की कंपनी RCOM को ₹2200 करोड़ का लोन दिया था, जिसे इधर-उधर घुमाकर पुराने कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया गया। दरअसल, अनिल अंबानी तेज़ी से बिज़नेस फैलाने के चक्कर में लोन के जाल में ऐसे फँसे कि फिर बाहर नहीं निकल पाए। एक-एक करके उनकी कंपनियाँ डूबती गईं।
रिलायंस कैपिटल का 2008 में मार्केट कैप HDFC से ज़्यादा था। रिलायंस इंफोकॉम देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी थी। रिलायंस के पास दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में बिजली बेचने का काम था। रिलायंस के पास सबसे ज़्यादा मल्टीप्लेक्स थे। कंपनी बॉलीवुड और हॉलीवुड में फिल्में बना रही थी। धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद जब दोनों बेटों में बँटवारा हुआ, तो अनिल के हिस्से टेलीकॉम, बिजली, फाइनेंस और एंटरटेनमेंट जैसे उभरते हुए बिज़नेस आए, जबकि मुकेश के पास ऑयल, गैस और पेट्रोकेमिकल्स। आज मुकेश अंबानी वही सारे बिज़नेस कर रहे हैं, जो कभी अनिल के पास थे। बिजली को छोड़कर।
अब अनिल अंबानी के पास दो प्रमुख कंपनियाँ बची हैं। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर। यह कंपनियाँ अब मुनाफा कमाने लगी हैं। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का कर्ज उतर चुका है। रिलायंस पावर का कर्ज घट रहा है। एक साल में इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर 78% और पावर के शेयर 91% तक बढ़ गए हैं। दोनों कंपनियों ने खुद को अनिल अंबानी के खिलाफ कार्रवाई से अलग कर लिया है।
पिछले साल SEBI ने रिलायंस हाउसिंग में गड़बड़ी के आरोपों पर अनिल अंबानी को किसी भी लिस्टेड कंपनी में 5 साल तक कोई पद लेने से रोका है। वहाँ भी कर्ज बाँटने के नाम पर पैसे घुमाने का ही आरोप था। अब जबकि उनकी दो कंपनियाँ थोड़ा स्थिर हो रही हैं, पुराने आरोप और केस उनका पीछा नहीं छोड़ रहे।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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