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जल संरक्षण की दिशा में काबिले तारीफ है मोदी की ये पहल: डॉ. सिराज कुरैशी, वरिष्ठ पत्रकार

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सिराज कुरैशी ने कहा, जल को कल के लिये बचाना होगा

डॉ. सिराज कुरैशी 6 years ago

डॉ. सिराज कुरैशी, वरिष्ठ पत्रकार।।

माननीय नरेन्द्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की कुर्सी संभालते ही सबसे पहले ‘जल’ (पानी) को ‘कल’ के लिये बचाने की हिदायत देते हुये ‘जल शक्ति मंत्रालय’ का ही गठन करके मंत्री विशेष के ऊपर जिम्मेदारी भी डाल दी। 6 जुलाई को जब मोदी अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी पहुंचे औऱ वहां पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की मूर्ति का अनावरण करने के बाद जो भाषण दिया, उसमें सबसे ज्यादा फोकस ‘जल’ पर था और रहना भी चाहिये था, क्योंकि जब टीवी पर कई प्रदेशों की जनता को ‘पानी’ के लिये परेशान दिखाया जाता है तथा पानी का टैंकर आने पर जब जनता उसका पानी लेने के लिये (बल्कि लूटने के लिये) एक-दूसरे के साथ मारा-मारी करती दिखाई देती है. तब पानी की अहमियत मालूम पड़ती है।

शायद मोदी देश की जनता की इस तकलीफ और परेशानी से पूरी तरह वाकिफ हो गये हैं, इसलिये उन्होंने वर्ष 2024 तक पाइप के जरिये घर-घर स्वच्छ जल पहुंचाने का लक्ष्य भी तय कर दिया है। मोदी जी के इस कदम से यह लगने लगा है कि उनकी मंशा उसी तरह की है, जिस तरह पिछली बार की ‘उज्ज्वलता योजना’ थी, जिससे देश के हर गली-मोहल्ले के घर में गैस सिलेंडर-सौभाग्य योजना के तहत विद्युत कनेक्शन और स्वच्छ भारत अभियान के तहत ‘शौचालय’ उपलब्ध करने की रही थी, जो अब पूरी होती दिखाई दे रही है।

यह शत-प्रतिशत सच है कि जल संरक्षण के लिए सरकार का साथ देने के लिए सामाजिक संगठनों और देश से प्रेम करने वालों को आगे आना ही होगा, जिससे जल संरक्षण अभियान में आम जनता में जागृति उत्पन्न हो। यह सच्चाई भी किसी से नहीं छुपी है कि आबादी के लिहाज से भारत में विश्व की 18 प्रतिशत आबादी निवास करती है, जबकि देश में पीने लायक पानी केवल 4 प्रतिशत ही उपलब्ध है।

इस कमी को ‘प्लानिंग कमीशन’ पहले ही उजागर कर चुका है। अगर विशेष ध्यान नहीं दिया गया तो दो तीन सालों में देश के लगभग 20-22 शहरों में भूजल पूरी तरह खत्म हो जायेगा, जबकि आने वाले 10-12 सालों मे पानी की मांग दुगनी होने की संभावना दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वास्तव में बधाई के पात्र हैं जो पानी और पानी संरक्षण जैसे विषय पर गम्भीरता से सोचते हुए कदम उठा रहे हैं, जबकि यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों की ही बनती है।

मोदी सरकार को इस विषय पर दिक्कत वहां आ सकती है, जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, वह इस विषय पर कोई भी कारण बताते हुए रुकावट खड़ी कर सकते हैं। हां, जिन प्रदेशों में भाजपा की सरकार है, वहां की जनता को जल्द और अच्छी सहूलियत इसलिये मिल सकती है कि मोदी के हुक्म के सामने भाजपा की सरकार का कोई मुख्यमंत्री हिम्मत नहीं कर सकता बोलने की। यह सच है कि इस गंभीर विषय पर अगर सियासत होने लगेगी तो रुकावट आना संभव है।

यह लेख लिखते समय डा. मनमोहन सिंह सरकार के समय की वह बात याद आ रही है, जब उसी समय से ‘समेकित वाटर शेड डवलपमेंट प्रोग्राम’ को पीएम कृषि सिंचाई योजना का ही हिस्सा बना दिया था। खैर, यह सच्चाई भी देश की जनता के सामने है कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच स्वीकृत कोई भी परियोजना दिये हुए समय पर पूरी ही नहीं हो पाई थी, जबकि उस समय की केन्द्र सरकार ने जनता को तत्काल लाभ पहुंचाने का वादा किया था।

एक बुजुर्गवार का यह कहना उचित लगा कि बारिश का ज्यादातर पानी बह जाता है। अगर उस पानी को नियंत्रित कर लें तो काफी राहत मिल सकती है। इससे 50 प्रतिशत शहरी आबादी तथा 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी (खासकर कृषि क्षेत्र के लिए) की जल की आवश्यकता इस भूजल से ही पूरी हो जायेगी। हां, ऐसी फसल पर भी विशेष ध्यान देना होगा, जिसमें पानी की खपत कम होती हो।

यह पूरी तरह सच है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निगाह 130 करोड़ की जनता की हर परेशानी दूर करने में लगी दिखाई देती है। (शायद मोदी विरोधियों को नहीं) क्योंकि वह जमीन से जुड़ते हुये प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं। वह यह भी देख रहे हैं कि देश के कई राज्य ऐसे हैं, जहां एक बाल्टी पानी के लिये 20-30 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। यही वजह है कि 2019 में पीएम की कुर्सी संभालते ही पानी की समस्या पर खास ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि ‘जल ही जिन्दगी है’, यह ऐसा मुद्दा रहा है जिसकी हमेशा उपेक्षा होती रही है। शायद यही सोच कर उन्होंने ‘जल शक्ति मंत्रालय’ ही बना डाला, जिसकी जनता ने सराहना ही नहीं की, बल्कि पीएम को बधाई भी दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने जब 6 जुलाई को वाराणसी में ‘जल संरक्षण’ पर विस्तार से बताया तो लगा कि जल शक्ति मंत्रालय की कार्य पद्धति की मॉनीटरिंग भी मोदी स्वयं ही कर रहे हैं, क्योंकि यह आम जनता से जुड़ा मुद्दा है। मोदी ने इस विषय को पूरी तरह इस मंत्रालय के मंत्री पर ही नहीं छोड़ा है, ऐसा प्रतीत हो रहा है इसके लिये एक बार पुनः पीएम मोदी को बधाई प्रेषित करता हूं।

(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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