होम / विचार मंच / वरिष्ठ पत्रकार अजय शुक्ल बोले, आज तमाम अखबारों में दिखी पत्रकारिता की ये 'दरिद्रता'
वरिष्ठ पत्रकार अजय शुक्ल बोले, आज तमाम अखबारों में दिखी पत्रकारिता की ये 'दरिद्रता'
आज के दौर में पत्रकारिता के कुछ बुनियादी प्रश्नों का जवाब खोजा जाना बहुत जरूरी है। क्या चेहरा देखकर सम्मान की गरिमा बढ़ती है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
अजय शुक्ल, प्रधान संपादक, आईटीवी नेटवर्क।।
पत्रकार रवीश से तमाम लोगों की वैचारिक विभिन्नता हो सकती है। मैं भी उनमें से एक हूं। उनकी पत्रकारिता से भी बहुत लोग इत्तेफाक नहीं रखते हैं। पर रैमन मैगसायसाय जैसे सम्मानित पुरस्कार से कैसी मत विभिन्नता? किसी भारतीय को मिला यह सम्मान क्या हमारे लिए गर्व की बात नहीं? क्यों इससे पहले मिले रैमन मैगसायसाय पुरस्कार पेज वन की महत्वपूर्ण खबरों में शुमार हुए और क्यों आज यह खबर तमाम अखबारों के पहले पेज से गायब मिली, इस पर मंथन जरूरी है।
1. क्या पत्रकार रवीश की जगह किसी भारतीय समाजसेवी को यह पुरस्कार मिला होता, तब भी यह खबर प्रथम पेज पर नहीं होती?
2. क्या इस पुरस्कार का महत्व सिर्फ इस बात से कम हो गया क्योंकि यह हमारे प्रोफेशन से जुड़े किसी साथी को मिला है?
3. हिंदी पट्टी के पत्रकार और संपादक खुद को इस सम्मान के लायक ही नहीं समझते?
4. हिंदी अखबारों के संपादक इस कॉम्प्लेक्स में चले गए कि लंबे चौड़े ज्ञान तो वो देते हैं, फिर किसी अन्य पत्रकार को यह पुरस्कार कैसे मिल गया?
5. अगर पत्रकार को मिले पुरस्कार से दिक्कत थी, तब भी एनडीटीवी और पत्रकार शब्द हटाकर सिर्फ रवीश कुमार के नाम से यह खबर प्रकाशित की जा सकती थी या नहीं?
6. क्या सिर्फ किसी समाजसेवी को मिला रैमन मैगसायसाय पुरस्कार ही पेज वन की स्टोरी हो सकती है, क्यों नहीं पत्रकार खुद को समाजसेवी के रूप में देख सकने की हिम्मत पैदा करते हैं?
7. और अंतिम बात... क्या अगर रवीश या किसी अन्य पत्रकार को कभी नोबल पुरस्कार मिल जाए तो क्या वह खबर भी अखबारों के प्रथम पेज के लायक होगी या नहीं?
पत्रकार रवीश को मिला सम्मान देश का सम्मान है, इसका सेलिब्रेशन ठीक वैसे ही बनता है जैसे किसी नेता या अभिनेता को मिला सम्मान।
(यह लेखक के निजी विचार हैं)
टैग्स अजय शुक्ल रवीश कुमार रैमन मैगसायसाय अवॉर्ड