होम / विचार मंच / साल भर से सत्याग्रह कर रहे किसानों पर व्यवस्था का गुस्सा फूटने लगा: राजेश बादल

साल भर से सत्याग्रह कर रहे किसानों पर व्यवस्था का गुस्सा फूटने लगा: राजेश बादल

तो वह नौबत आ ही गई। गांधी मार्ग पर चलते हुए साल भर से सत्याग्रह कर रहे किसानों पर व्यवस्था का गुस्सा फूटने लगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago

राजेश बादल, वरिष्ठ पत्रकार ।।

तो वह नौबत आ ही गई। गांधी मार्ग पर चलते हुए साल भर से सत्याग्रह कर रहे किसानों पर व्यवस्था का गुस्सा फूटने लगा। कोई आंदोलन लंबे समय तक अहिंसक और शांतिपूर्वक तरीके से संचालित भी हो सकता है, किसान आंदोलन उसकी एक मिसाल है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जिस ढंग से इस किसान आंदोलन के बारे में अराजक और असंसदीय टिप्पणी की है, उसकी निंदा करने के अलावा और क्या हो सकता है। एक बैठक में उन्होंने कहा कि किसानों पर डंडे उठाने वाले कार्यकर्ता हर जिले में होने चाहिए। ऐसे पांच-सात सौ लोग जैसे को तैसा जवाब दे सकते हैं। एक निर्वाचित और संविधान की शपथ लेकर मुख्यमंत्री के पद पर बैठे राजनेता की यह टिप्पणी बताती है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी अब राज्य सरकार के गले की फांस बन गए हैं।

पिछले चुनाव में उन्होंने विपक्ष के साथ मिलकर जैसे-तैसे सरकार बनाई थी, लेकिन अब किसान आंदोलन के कारण खिसक रहे जनाधार ने उन्हें इस तरह का धमकी भरा बयान देने के लिए बाध्य कर दिया है।

प्रश्न यह है कि क्या किसी भी सभ्य लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को हिंसा और टकराव का खुलेआम समर्थन करना चाहिए? जिन वर्गो के हितों की हिफाजत के लिए अवाम उन्हें चुनकर भेजती है, उनमें किसान बहुसंख्यक है। 

यह देश सदियों से किसानों को अन्नदाता तो मानता रहा है, लेकिन उनके आर्थिक और सामाजिक कल्याण की उपेक्षा भी करता रहा है। आजादी के पहले से ही यह सिलसिला जारी है। किसानों को कई बार खेतीबाड़ी छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा है। उन पर पुलिस की गोलियां भी बरसीं मगर कृषि के लिए रियायतें और उत्पादन का वाजिब मूल्य कभी नहीं मिला, चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार रही हो। 

एक कृषि प्रधान देश के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि किसान सबका पेट भरने की चिंता अपने धर्म पालन की तरह करें और समाज उनके सरोकारों को रद्दी की टोकरी में फेंक दे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री धरने पर बैठे किसानों के मुकाबले बेशक जिले-जिले में कार्यकर्ताओं की हथियारबंद फौज उतार दें, पर क्या वे भूल सकते हैं कि आंदोलनकारी लाखों किसान भी उन्हें वोट देते आए हैं और वे भारतीय प्रजातंत्र का अभिन्न अंग भी हैं।

आत्मरक्षा का अधिकार तो भारतीय दंड विधान भी देता है। कल्पना करें कि उन पांच-सात सौ लोगों की सेना से लड़ने के लिए हर किसान ने अगर एक-एक डंडा उठा लिया तो सरकार के लिए कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालना कठिन हो जाएगा।

पाकिस्तान में तानाशाह जनरल अयूब खान को ऐसे ही जनआंदोलन के सामने अपनी सत्ता छोड़कर भागना पड़ा था। भारत में भी जनता के व्यापक प्रतिरोध का परिणाम हम 1977 में देख चुके हैं।   

क्या यह संयोग मात्र है कि चौबीस घंटे के भीतर हरियाणा के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक शर्मनाक घटना घट गई। जिस अंदाज में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने खुलेआम सत्याग्रह कर रहे किसानों को धमकाया और अपने आपराधिक अतीत का हवाला दिया, उसने किसानों के खिलाफ सीधी कार्रवाई के लिए समर्थकों को उकसाया। मंत्री ने साफ-साफ कहा था कि वे केवल मंत्री, सांसद या विधायक ही नहीं हैं। जो लोग उन्हें जानते हैं, उन्हें अतीत के बारे में भी पता होना चाहिए। यह बाहुबली मंत्री की साफ-साफ धमकी थी।

पिता से प्रोत्साहित बेटा और चार कदम आगे निकला। उसने गुस्से में जिस तरह किसानों को अपनी गाड़ी से रौंदा, वह भयावह और विचलित करने वाला है। इससे गुस्साए किसान भी हिंसा पर उतर आए। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं, लेकिन यह सच है कि जनप्रतिनिधियों के बयान किसानों की भावनाओं को आहत करने वाले थे।

दो पड़ोसी प्रदेशों में एक मुख्यमंत्री और एक केंद्रीय मंत्री का रवैया इस बात का प्रमाण है कि हुकूमतं अब किसान आंदोलन को हरसंभव ढंग से कुचलने पर आमादा हैं। वे किसानों के साथ अपराधियों की तरह सुलूक कर रही हैं। इसके अलावा लखीमपुर खीरी की यह घटना एक आशंका और खड़ी करती है। एक मंत्री पुत्र का आचरण यह साबित करता है कि भारतीय लोकतंत्र अब जो नई नस्लें तैयार कर रहा है, वे मुल्क को मध्ययुगीन सामंती बर्बरता के युग में ले जाना चाहती हैं। इस तरह की हैवानियत यकीनन हताशा और कुंठा का नतीजा है।

उत्तर प्रदेश आने वाले दिनों में विधानसभा चुनावों का सामना करने जा रहा है। लखीमपुर खीरी की घटना के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या बंदूक की नोंक पर नागरिकों से उनके अधिकार तो नहीं छीने जा रहे हैं। 

हमें याद रखना चाहिए कि स्वतंत्रता से पहले महात्मा गांधी के अहिंसक और सविनय अवज्ञा आंदोलनों से तत्कालीन हुकूमत बौखला उठी थी। फिर उसने दमनचक्र चलाया था। उस भयावह दौर में तात्कालिक नुकसान भले ही सत्याग्रहियों या स्वतंत्रता सेनानियों को उठाना पड़ा हो, मगर जीत अंतत: सच की हुई थी। सच सिर चढ़कर बोलता है और झूठ के पांव नहीं होते। यह बात सियासी नुमाइंदों को ध्यान में रखनी चाहिए।

(साभार: लोकमत)


टैग्स पत्रकार राजेश बादल क्राइम किसान लखीमपुर खीरी
सम्बंधित खबरें

रामबहादुर राय - पत्रकारिता क्षेत्र में शुचिता और पवित्रता के जीवंत व्यक्तित्व

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वे शीर्ष नेताओं में थे। जब पत्रकारिता में आए तो शीर्ष पत्रकार बने। आज की भारतीय पत्रकारिता में उन सरीखे सम्मानित और सर्वस्वीकार्य नाम बहुत कम हैं।

5 minutes ago

भविष्य को आकार देने की कोशिश कर रहा है भारत: राहुल कंवल

यदि कुछ समय के लिए राजनीति को अलग रख दें, तो एक बात स्पष्ट है। भारत की एआई रणनीति (AI strategy) की सफलता में हमारे सामूहिक भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निहित है।

23 hours ago

मधुसूदन आनंद हमेशा यादों में बने रहेंगे : अनिल जैन

आनंद जी ने जर्मनी में 'डायचे वेले' (द वाॅयस ऑफ जर्मनी) में कुछ सालों तक काम किया और वे 'वाॅयस ऑफ अमेरिका' के नई दिल्ली स्थित संवाददाता भी रहे।

1 day ago

प्रवक्ता, अहंकार और संवाद की संवेदनहीनता का सबक: नीरज बधवार

चूंकि समाज के अवचेतन में अंग्रेज़ी को लेकर एक हीन भावना मौजूद है, इसलिए जो व्यक्ति अंग्रेज़ी में प्रभावशाली ढंग से बोल लेता है, वह अक्सर खुद को विद्वान भी मान बैठता है।

1 day ago

समस्य़ाओं को हल करने के लिए हो एआई का इस्तेमाल: रजत शर्मा

मेरा यह मानना है कि सबसे ज़रूरी है, AI का इस्तेमाल रोज़मर्रा की जिंदगी में आने वाली समस्य़ाओं को हल करने के लिए हो। भारी भरकम शब्दों से इसे परिभाषित करके उससे डराया न जाए।

2 days ago


बड़ी खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

1 day ago

AI बना सकता है भारत को दुनिया की क्रिएटिव कैपिटल: उदय शंकर

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने कहा कि अब भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर में है।

13 hours ago

ENIL के प्रमोटर ढांचे में जल्द होगा बड़ा बदलाव, NCLT के बाद अब CCI की भी मंजूरी

एफएम चैनल ‘रेडियो मिर्ची’ का संचालन करने वाली कंपनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) के कॉर्पोरेट ढांचे में बड़ा बदलाव अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है।

22 hours ago

Decode ने पूरे किए 200 एपिसोड: यूट्यूब व्यूज़ और सब्सक्राइबर में बना नंबर 1

डीडी न्यूज के प्राइम टाइम शो डिकोड विद सुधीर चौधरी ने 200 एपिसोड पूरे कर लिए हैं। यूट्यूब पर मिले कुल व्यूज़ में इसका योगदान 74 प्रतिशत और नए सब्सक्राइबर में 75 प्रतिशत रहा।

18 hours ago

AI में 10 लाख करोड़ का निवेश करेगी रिलायंस: मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी ने AI क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश का ऐलान किया। जियो सस्ता और सुलभ इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगा, जिससे भारत को इंटेलिजेंस के नए युग से जोड़ने की तैयारी है।

23 hours ago