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वरिष्ठ पत्रकार सिराज कुरैशी ने ऐसे जोड़ा गांधी और मोदी को

मोदी विश्व के किसी भी देश में पहुंचें, उनकी एक झलक पाने, उनकी मधुर वाणी सुनने के लिये लाखों लोग तत्पर दिखाई देते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

डॉ. सिराज कुरैशी, वरिष्ठ पत्रकार।।

भारत का वह प्रदेश जिसने विश्व पटल पर देश का नाम रोशन किया-वह है ‘गुजरात’। गुजरात की अपनी खुद की जो पहचान है, वह तो है ही, लेकिन गुजरात के दो महारथियों ने विश्व पटल पर जो नाम कमाया, उससे पूरे विश्व के प्रमुखों के दांत खट्टे हो गये। इन दोनों महारथियों के नाम हैं-मोहन दास करमचन्द गांधी, जिन्हें आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से भी पहचाना जाता है। दूसरे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, जिन्हें विश्व का नम्बर वन सियासतदां माना जाता है।

महात्मा गांधी जन्म के डेढ़ सौ साल बाद भी आज जिन्दा हैं। उनके विचारों को मानते हुये, उनके पदचिन्हों पर आज करोड़ों लोग चलते हुये देखे जा सकते हैं। लाखों लोग अपने फायदे के लिये उनके नाम का इस्तेमाल भी करते हुये देखे जा सकते हैं, लेकिन दुःख तब होता है जब ऐसे महारथी (महात्मा गांधी) को विवादित बना दिया जा रहा है।

मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि गुजरात के दूसरे महारथी जनाब नरेंद्र भाई मोदी, महात्मा गांधी के नाम को कभी विवादित नहीं बनने देंगे, क्योंकि वर्तमान में यह नाम देश की धरोहर बन गया है। इसका मुख्य कारण यह भी कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों और चरित्र में जो गहराई थी, उसका लोहा आज भी पूरी दुनिया मानती है।

ठीक उसी तरह नरेंद्र भाई मोदी के कार्य भी विश्व को आश्चर्यचकित किये हुए हैं। जिस तरह की बुनियादी सोच गांधीजी की थी, उसी सोच के मालिक मोदीजी भी हैं। यही वजह है कि मोदी विश्व के किसी भी देश में पहुंचें, उनकी एक झलक पाने, उनकी मधुर वाणी (जो शिक्षाप्रद होती है) सुनने के लिये लाखों लोग तत्पर दिखाई देते हैं। यह कहने में कतई संकोच नहीं है कि यह सच्चाई की खोज में निकले व्यक्ति की यात्रा है। सच्चाई में भगवान (खुदा) को खोजने की जीवन भर की यात्रा न कि उस दैवत्व की, जिसे सादा तरीके से परिभाषित किया जा सकता हो।

विगत दिनों अमेरिका में हुई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विश्व भर के रहनुमाओं के बीच नरेंद्र मोदीजी की स्पीच ने आतंकवाद से लड़ने की जो विधि बताई तथा जिस तरह एकता की राह पर चलने का रास्ता दिखाया, उसे सुनकर पूरी दुनिया के देशों के प्रमुख दांतों तले अंगुली दबा बैठे और लोहा मान गये। यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी जिस देश में जाकर मोदी बोले हैं, वहां की अवाम ने उनके उपदेशों को अपनाया भी है। ऐसा मुझे पढ़ने को भी मिला है।

खैर, आज हमारे पड़ोसी देश अपने देश की अवाम की परेशानियों की अनदेखी करते हुए कश्मीर की बात करते दिखते हैं, जबकि मोदी और उनकी टीम ने कश्मीरी परिवारों की परेशानी को भांपकर निःसंकोच अनुच्छेद 370 हटाकर उनके और उनके प्रदेश (कश्मीर) के उत्थान के लिए जो कदम उठाया, उससे केवल हिन्दुस्तानी अवाम ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व ने खुशी जाहिर की है।

कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने की बात मैंने इस लेख में इसलिये भी जोड़ी है कि जिस तरह अंग्रेजी हुकूमत ने भारत में अपने कदम ठोस तरीके से जमा रखे थे और उन्हें हटाने वाला कोई नहीं था-उन कदमों को केवल एक ही शख्स ने हटाने की हिम्मत जुटाई और वह शख्स था मोहनदास करम चंद गांधी। ठीक उसी तरह किसी भी प्रधानमंत्री ने 70 सालों से लगे अनुच्छेद 370 को हटाने की जर्रत नहीं की, वह हिम्मत वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही दिखाई।

शायद मोदीजी यह भी अच्छी तरह जानते हैं कि हमारा देश छोटे-छोटे समुदायों से ही बना है, इसलिये भारत वर्ष को भाषा-पंथ यहां तक कि जन्म स्थान और विरासत से परिभाषित करना संभव नहीं है। मोदीजी शायद यह भी भली-भांति जानते हैं कि यदि सभी लोग सामान्य रूप से मानवता में विश्वास करते हों तो उनके सामने विवाद, खासकर राजनीतिक पटल पर मतभेदों और विवादों को सुलझाने का मसला हो तो कैसा कदम उठाना चाहिये। मुझे यह लेख लिखते समय ध्यान आ रहा है कि एक बार जनसभा को सम्बोधित करते हुये मोदीजी ने उपस्थित जनता से ही प्रश्न पूछा था कि आप बताएं कि जीवन कैसे जिया जाये? पूरी सभा में खामोशी छा गई। इसका उत्तर भी स्वयं मोदीजी ने ही दिया। यह सवाल भी आज कहीं ज्यादा मौजूं हो गया है।

जब पर्यावरण के प्रभाव को लेकर लोगों और समूहों में दिनोंदिन जागरूकता बढ़ रही है। इसके अलावा देश की जनता जनसंख्या सीमित करने को लेकर भी जागरूक दिखाई दे रही है। देश-प्रदेश-शहर और कालोनी कैसे स्वस्थ्य और साफ-सुथरी रहे, इसको बताने के लिये जब स्वयं झाडू़ उठाई तो देश की समस्त जनता की आंखें उसी तरह खुल गईं, जिस तरह से महात्मा गांधी ने कपड़ों का त्याग करके केवल चश्मा-लाठी और धोती को अपनाकर अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी। 

आखिर में पुनः मैं गुजरात प्रदेश की सराहना करता हूं कि इस प्रदेश ने दो महारथी (गांधीजी और मोदीजी) भारत को दिये हैं, जो सदैव विश्व पटल पर चमकते रहेंगे। दो अक्टूबर को महात्मा गांधी को श्रद्धांजिल अर्पित करते हुये दूसरे गुजरातवासी (गांधी ही कहें) मोदी को दुआयें देता हूं।

(यह लेखक के निजी विचार हैं।)


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