GTPL Hathway ने ₹35.55 करोड़ में खरीदा ACT Group का केबल टीवी कारोबार

GTPL Hathway ने ACT Group की सात कंपनियों के केबल टीवी कारोबार का अधिग्रहण पूरा कर लिया है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
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GTPL Hathway ने ACT Group की सात कंपनियों के केबल टीवी कारोबार का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। यह सौदा 15 सितंबर 2026 को पूरा हुआ। अंतिम लेनदेन के तहत GTPL Hathway ने करीब ₹35.55 करोड़ की नकद राशि का भुगतान किया है।

यह अधिग्रहण GTPL के लिए खास है, क्योंकि इसके जरिए कंपनी को करीब 6 लाख केबल टीवी सब्सक्राइबर्स मिलेंगे। ये सब्सक्राइबर्स आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और कर्नाटक के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं। इससे इन चार राज्यों में GTPL Hathway की केबल टीवी पहुंच और मजबूत होगी।

सात कंपनियों का कारोबार हुआ शामिल

इस सौदे में ACT Group की सात कंपनियों का केबल टीवी कारोबार शामिल है। इनमें A.C.N Cable, ACT Digital Home Entertainment, Atria Broadband Services, Kable First India, Sri Venkateshwara Digital Home Entertainment, Mandapeta Digital Entertainment और I.B. Communications Network शामिल हैं।

GTPL ने इस कारोबार को Business Transfer Agreement (BTA) के तहत खरीदा है। यह सौदा ‘slump sale’ के जरिए एक चालू कारोबार के तौर पर किया गया है। यानी GTPL ने इन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने के बजाय उनके केबल टीवी कारोबार को अपने अधीन लिया है।

जून में हुआ था करार

GTPL Hathway ने इस अधिग्रहण की घोषणा जून 2026 में की थी। उस समय कंपनी ने सात ACT Group कंपनियों के केबल टीवी कारोबार के लिए कुल ₹36.23 करोड़ की नकद कीमत बताई थी और सौदा 15 सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई थी। अब लेनदेन पूरा होने पर अंतिम भुगतान ₹35.55 करोड़ बताया गया है।

कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण का उद्देश्य दक्षिण भारत में अपने केबल टीवी कारोबार की पहुंच को मजबूत और विस्तारित करना है। करीब 6 लाख नए सब्सक्राइबर जुड़ने से कंपनी को उन बाजारों में तत्काल विस्तार मिलेगा, जहां ACT Group का पहले से नेटवर्क और ग्राहक आधार मौजूद है।

GTPL के लिए क्यों अहम है यह डील

यह अधिग्रहण ऐसे समय हुआ है जब पारंपरिक केबल टीवी कारोबार को DTH और OTT प्लेटफॉर्म्स से लगातार प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ऐसे माहौल में केबल ऑपरेटर्स के लिए बड़ा सब्सक्राइबर बेस और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क महत्वपूर्ण माना जाता है।

GTPL Hathway पहले से ही देश की प्रमुख मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (MSO) कंपनियों में शामिल है। कंपनी डिजिटल केबल टीवी के साथ वायरलाइन ब्रॉडबैंड सेवाएं भी देती है। उपलब्ध कंपनी जानकारी के मुताबिक, FY25 के अंत में GTPL के पास 96 लाख एक्टिव सेट-टॉप बॉक्स और 89 लाख भुगतान करने वाले सब्सक्राइबर थे।

सितंबर 2026 में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में GTPL Hathway ने राजस्व के मामले में Tata Play को पीछे छोड़कर देश की सबसे बड़ी टीवी डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी का स्थान हासिल किया। ACT Group के करीब 6 लाख और ग्राहक जुड़ने से कंपनी का केबल टीवी कारोबार और बड़ा होगा।

कुल मिलाकर, ACT Group के केबल टीवी कारोबार का अधिग्रहण GTPL Hathway के लिए दक्षिण और पूर्वी भारत में अपनी पहुंच बढ़ाने और नए ग्राहकों को अपने नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

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'डीडी फ्री डिश' के MPEG-4 स्लॉट्स के लिए ई-ऑक्शन की तैयारी, 24 सितंबर को होगी नीलामी

प्रसार भारती ने 'डीडी फ्री डिश' प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए 102वें मिड-ईयर ई-ऑक्शन का नोटिस जारी किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 17 September, 2026
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Thursday, 17 September, 2026
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प्रसार भारती ने 'डीडी फ्री डिश' प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए 102वें मिड-ईयर ई-ऑक्शन का नोटिस जारी किया है। इस नीलामी के जरिए निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को 'डीडी फ्री डिश' पर स्लॉट दिए जाएंगे। नीलामी 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक यानी छह महीने की अवधि के लिए होगी।

ई-ऑक्शन फिलहाल 24 सितंबर 2026 को होने की संभावना है। इसका आयोजन E-auction Methodology 2025 के तहत किया जाएगा।

पांच कैटेगरी में बांटे गए चैनल

इस बार चैनलों को उनकी भाषा और जॉनर के आधार पर पांच कैटेगरी में रखा गया है। R1 में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं के रीजनल चैनल शामिल हैं। R2 में पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली और उड़िया चैनल रखे गए हैं।

वहीं, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल, हिंदी और उर्दू को छोड़कर, R3 कैटेगरी में आएंगे। बाकी दो कैटेगरी जॉनर के आधार पर हैं। G1 में न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल, जबकि G2 में नॉन-न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल शामिल होंगे।

न्यूज चैनलों के लिए सबसे ज्यादा शुरुआती बोली

प्रसार भारती ने हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग रिजर्व प्राइस तय किया है। G1 कैटेगरी के स्लॉट की शुरुआती बोली ₹39.83 लाख रखी गई है, जो पांचों कैटेगरी में सबसे ज्यादा है। वहीं G2 के लिए यह रकम ₹36.40 लाख है। R2 के लिए शुरुआती बोली ₹21.56 लाख, R3 के लिए ₹3.31 लाख और R1 के लिए ₹3 लाख रखी गई है। 

बोली बढ़ाने की न्यूनतम रकम G1, G2 और R2 के लिए ₹1 लाख, R3 के लिए ₹80,000 और R1 के लिए ₹50,000 होगी।

कौन किस कैटेगरी के स्लॉट के लिए बोली लगा सकता है?

प्रसार भारती ने यह भी तय किया है कि अलग-अलग कैटेगरी के चैनल किन स्लॉट्स के लिए बोली लगा सकते हैं।

G1 कैटेगरी के चैनल G1, G2, R2, R1 और R3 के लिए बोली लगा सकते हैं। G2 चैनल G2, R2, R1 और R3 के लिए बोली लगा सकते हैं, लेकिन G1 के लिए नहीं।

R2 कैटेगरी के चैनल R2, R1 और R3 के लिए बोली लगा सकते हैं, जबकि R3 चैनल सिर्फ R3 और R1 के लिए बोली लगा सकते हैं। R1 कैटेगरी में बोली लगाने वाले चैनल सिर्फ R1 स्लॉट के लिए ही पात्र होंगे।

रीजनल भाषा के दावे के लिए देना होगा सबूत

इस बार प्रसार भारती ने चैनल की भाषा और जॉनर से जुड़े दस्तावेजों पर खास जोर दिया है। जो चैनल नोटिफिकेशन जारी होने के समय पहले से चल रहे हैं, उन्हें यह साबित करने के लिए दस्तावेज देने होंगे कि वे किसी MSO या DTH प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं और वहां किस भाषा व जॉनर में चल रहे हैं।

इसके लिए MIB, TRAI जैसी सरकारी या नियामक संस्थाओं से मिले दस्तावेज और BARC जैसी टीवी रेटिंग एजेंसी से जुड़ी जानकारी भी दी जा सकती है। R1, R2 और R3 कैटेगरी के लिए आवेदन करने वाले चैनलों को खास तौर पर DTH ऑपरेटर या MSO से संबंधित प्रमाण देना होगा। जो चैनल नीलामी का नोटिस जारी होने के समय ऑन-एयर नहीं हैं, वे भारत में चैनल को डाउनलिंक करने की अनुमति के लिए MIB में जमा किए गए आवेदन की प्रमाणित कॉपी दे सकते हैं।

कंटेंट शेड्यूल भी देना होगा

चैनलों को अपने बताए गए जॉनर और भाषा के समर्थन में कंटेंट शेड्यूल भी जमा करना होगा। पहले से चल रहे चैनलों को जून, जुलाई और अगस्त 2026 का प्रोग्राम कंटेंट शेड्यूल या फिक्स्ड पॉइंट चार्ट देना होगा। इसके अलावा सभी आवेदकों को अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के लिए प्रस्तावित कंटेंट शेड्यूल भी जमा करना होगा।

75% कंटेंट तय भाषा और जॉनर में होना जरूरी

'डीडी फ्री डिश' पर स्लॉट पाने वाले चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके चैनल पर मुख्य रूप से वही कंटेंट प्रसारित हो, जिस भाषा और जॉनर की घोषणा आवेदन के समय की गई है।

प्रसार भारती के मुताबिक, ‘मुख्य रूप से’ का मतलब है कि चैनल का 75% कंटेंट घोषित भाषा और जॉनर में होना चाहिए। हालांकि, इसमें केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट के तहत तय विज्ञापन और प्रमोशनल सीमाओं को ध्यान में रखा जाएगा। साथ ही, किसी महीने में घोषित भाषा और जॉनर का कंटेंट चैनल के कुल कंटेंट के 60% से कम नहीं होना चाहिए।

यदि किसी चैनल पर घोषित भाषा या जॉनर के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसकी ब्रॉडकास्ट रिकॉर्डिंग की जांच की जा सकती है। नियमों का उल्लंघन करने वाले चैनल को शो-कॉज नोटिस दिया जा सकता है। चैनल तय समय के भीतर अपना जॉनर या भाषा बदलने के लिए आवेदन कर सकता है। ऐसा नहीं करने पर 'डीडी फ्री डिश' से चैनल को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

आवेदन के लिए ₹3 लाख तक की भागीदारी फीस

ई-ऑक्शन में शामिल होने के लिए ब्रॉडकास्टर्स को 'डीडी फ्री डिश' ऑक्शन पोर्टल के जरिए ₹25,000 की नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। इसके अलावा ₹3 लाख की पार्टिसिपेशन फीस भी जमा करनी होगी। R1 और R3 कैटेगरी के लिए अलग फॉर्मूला रखा गया है। इनमें पार्टिसिपेशन फीस रिजर्व प्राइस की 60% रकम या ₹3 लाख, दोनों में से जो कम होगी, उतनी होगी। आवेदन के साथ फीस जमा करने का प्रमाण भी देना होगा।

22 सितंबर तक आवेदन

आवेदकों को MIB की डाउनलिंकिंग और जहां जरूरी हो वहां अपलिंकिंग अनुमति, अप्रूव्ड चैनल लोगो, PAN, GST रजिस्ट्रेशन, भाषा और जॉनर से जुड़े दस्तावेज, कंटेंट शेड्यूल, अधिकृत साइनिंग अथॉरिटी का सर्टिफिकेट और साइन किया हुआ Integrity Pact जमा करना होगा।

आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 22 सितंबर 2026 दोपहर 3 बजे है। जहां जरूरी होगा, ओरिजिनल डिमांड ड्राफ्ट भी इसी समय सीमा के भीतर जमा करना होगा। योग्य प्रतिभागियों को ई-ऑक्शन से पहले ऑनलाइन ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

भुगतान में देरी पर 14.5% ब्याज

नीलामी में सफल रहने वाले चैनलों को प्रसार भारती की ओर से Letter of Allotment और पेमेंट शेड्यूल दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें 15 दिनों के भीतर तय एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने होंगे। सफल चैनलों को 'डीडी फ्री डिश' के खाली स्लॉट या तय प्रक्रिया के अनुसार Logical Channel Number (LCN) दिया जाएगा। चैनलों को Letter of Allotment और एग्रीमेंट में तय समय के अनुसार भुगतान करना होगा।

यदि भुगतान में देरी होती है तो बकाया रकम पर 14.5% सालाना ब्याज लगाया जाएगा। तय नोटिस और समय सीमा के बाद भी किस्त और ब्याज का भुगतान नहीं होने पर जमा पार्टिसिपेशन फीस और पहले से जमा किस्तें जब्त की जा सकती हैं और चैनल को 'डीडी फ्री डिश' से हटाया जा सकता है। इसके बाद खाली हुआ स्लॉट किसी अन्य ई-ऑक्शन के जरिए दिया जा सकता है।

स्लॉट मिलने के बाद भी तय समय में चैनल शुरू करना होगा

सफल चैनल को 'डीडी फ्री डिश' पर रखने से पहले कैरिज फीस की पहली किस्त का भुगतान करना होगा। यदि चैनल आवंटन शुरू होने की तारीख से एक महीने के भीतर अपने तय स्लॉट पर चैनल नहीं लगाता है, तो उसका आवंटन अपने आप रद्द हो जाएगा। ऐसी स्थिति में पार्टिसिपेशन फीस और पहले से जमा किस्त भी जब्त की जा सकती है। यदि कोई चैनल समय से पहले 'डीडी फ्री डिश' से हटता है या अपना एग्रीमेंट खत्म करता है, तो पार्टिसिपेशन फीस और जमा की गई किस्तें जब्त की जा सकती हैं।

तकनीकी तौर पर सफल बोली लगाने वाले चैनलों को स्लॉट पर प्लेसमेंट से कम से कम एक सप्ताह पहले IRD बॉक्स, जिसमें Dual IP Multicast और SDI Output की सुविधा हो, उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ सैटेलाइट पैरामीटर और अन्य तकनीकी जानकारी भी Doordarshan के नई दिल्ली स्थित Todapur DTH स्टेशन को देनी होगी।

 

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CNN-News18 ने बदली प्रोग्रामिंग लाइन-अप, रिपोर्टिंग और एनालिसिस पर बढ़ाया फोकस

न्यूज का सिलसिला लगातार चलता रहता है और इसी को ध्यान में रखते हुए CNN-News18 ने अपनी प्रोग्रामिंग में बड़ा बदलाव किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 17 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
CNN-News18

न्यूज का सिलसिला लगातार चलता रहता है और इसी को ध्यान में रखते हुए CNN-News18 ने अपनी प्रोग्रामिंग में बड़ा बदलाव किया है। चैनल ने नई प्रोग्रामिंग लाइन-अप पेश की है, जिसका मकसद बदलती दर्शकों की पसंद और नई पीढ़ी के न्यूज ऑडियंस के हिसाब से अपने कंटेंट को तैयार करना है।

नई प्रोग्रामिंग में ओरिजिनल रिपोर्टिंग, एक्सप्लेनर, एनालिसिस, एक्सपर्ट की राय और बातचीत पर ज्यादा जोर दिया गया है। दिन में एजेंडा सेट करने वाली खबरों और ब्रेकिंग न्यूज से लेकर शाम के समय डिबेट और गहरी एनालिसिस तक का फोकस रखा गया है। चैनल इसे ‘Voice for a New India’ की अपनी पोजिशनिंग को मजबूत करने की दिशा में एक कदम बता रहा है।

दोपहर से शुरू होगा नया लाइन-अप

वीकडे का नया प्रोग्रामिंग शेड्यूल दोपहर 12 बजे वरिष्ठ पत्रकार सावन सेन के शो Raw Report से शुरू होगा। इसके बाद दोपहर 1 बजे Breaking Frontline में शिवान गुप्ता नजर आएंगी। 1:30 बजे Simply South की कमान नबीला जमाल और हरीश उपाध्याय संभालेंगे। दोपहर 3 बजे गृह अतुल का Newsroom Unfiltered और शाम 4 बजे आयुष्मान जमाल का News Periscope 360° View प्रसारित होगा।

शाम और प्राइम टाइम में भी बदलाव

शाम 5 बजे Poonam Burde के साथ The 5 PM Brief शुरू होगा। इसके बाद 5:55 बजे शिवानी गुप्ता का Plain Speak और 6:55 बजे नबीला जमाल का Brass Tacks आएगा। प्राइम टाइम में रात 7:55 बजे आनंद नरसिम्हन का The Right Stand प्रसारित होगा। इसके बाद रात 8:55 बजे राहुल शिवशंकर के साथ The Hard Facts आएगा। रात 9:58 बजे सावन सेन का Raw Report और रात 10:30 बजे हेम कौर सरोय का Vantage दर्शकों के लिए होगा।

वीकेंड पर भी दो नए शो

CNN-News18 ने वीकेंड प्रोग्रामिंग में भी दो नए शो जोड़े हैं। गृह अतुल का The Global Radar शनिवार सुबह 9:30 बजे और रविवार शाम 5:30 बजे प्रसारित होगा। यह शो जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम पर फोकस करेगा। वहीं हिमानी चंद्रा का Health Matters शनिवार दोपहर 12:30 बजे और रविवार दोपहर 1:30 बजे आएगा। इसमें हेल्थकेयर और रोजमर्रा की वेलनेस से जुड़े मुद्दों पर एक्सपर्ट की राय शामिल होगी।

दर्शक अब सिर्फ तेज खबर नहीं चाहते: राहुल शिवशंकर

CNN-News18 के एडिटोरियल अफेयर्स के डायरेक्टर राहुल शिवशंकर ने कहा कि दर्शकों की उम्मीदें अब सिर्फ खबरों की स्पीड तक सीमित नहीं हैं। उनके मुताबिक, दर्शक ऐसी ओरिजिनल, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित पत्रकारिता चाहते हैं, जो यह भी बताए कि कोई खबर उनके लिए क्यों मायने रखती है।

Network18 में इंग्लिश व बिजनेस न्यूज की सीईओ स्मृति मेहरा ने कहा कि नई लाइन-अप बदलती दर्शक आदतों के साथ कदम मिलाने की कोशिश है। इसमें रिपोर्टिंग, एक्सप्लेनर, डिबेट और एनालिसिस के साथ अलग-अलग प्रोग्रामिंग पहचान और भरोसेमंद एंकरों को एक साथ लाया गया है।

TV के साथ Connected TV और YouTube पर भी फोकस

नई प्रोग्रामिंग सिर्फ लीनियर टीवी तक सीमित नहीं रहेगी। CNN-News18 इसे Connected TV और YouTube पर भी लेकर जा रहा है। यानी चैनल की कोशिश अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर न्यूज ऑडियंस तक पहुंचने और उनके बदलते कंटेंट कंजम्पशन पैटर्न के हिसाब से प्रोग्रामिंग तैयार करने की है।

नई लाइन-अप के जरिए CNN-News18 ने अपनी प्रोग्रामिंग में रिपोर्टिंग, विश्लेषण, एक्सपर्ट बातचीत और डिबेट के बीच एक नया संतुलन बनाने की कोशिश की है, ताकि बदलते न्यूज कंजम्पशन के दौर में दर्शकों के साथ अपनी पकड़ बनाए रख सके।

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TV विज्ञापनों पर TRAI का बड़ा फैसला, 2013 के इस आदेश को लिया वापस

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि से जुड़ा एक पुराना आदेश वापस ले लिया है।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 15 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
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टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि से जुड़ा एक पुराना आदेश वापस ले लिया है। TRAI ने 14 सितंबर 2026 को जारी आदेश में 5 अगस्त 2013 के उस आदेश को वापस लेने का फैसला किया है, जिसके तहत ब्रॉडकास्टर्स को अपने टीवी चैनलों पर प्रसारित विज्ञापनों की अवधि की जानकारी हर सप्ताह देनी होती थी।

TRAI का यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से टीवी चैनलों पर विज्ञापनों के लिए तय 12 मिनट प्रति घंटे की सीमा हटाए जाने और TRAI की ओर से विज्ञापन अवधि से जुड़े पुराने नियमों को खत्म किए जाने के बाद आया है।

हर सप्ताह देनी होती थी विज्ञापनों की जानकारी

TRAI ने 5 अगस्त 2013 को जारी आदेश के जरिए ब्रॉडकास्टर्स को अपने टीवी चैनलों पर प्रसारित विज्ञापनों की अवधि की जानकारी हर सप्ताह इलेक्ट्रॉनिक रूप में तय प्रारूप में देने को कहा था।

इस आदेश का उद्देश्य टीवी चैनलों पर विज्ञापनों के लिए तय हर घंटे 12 मिनट की सीमा का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी करना था। यह सीमा Cable Television Networks Rules, 1994 के तहत तय की गई थी।

सरकार ने हटाई 12 मिनट की सीमा

TRAI के नए आदेश के मुताबिक, केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने Cable Television Networks (Amendment) Rules, 2026 के जरिए टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की 12 मिनट प्रति घंटे की सीमा हटा दी है।

इसके लिए Cable Television Networks Rules, 1994 के Rule 7 से Sub-rule (11) को हटा दिया गया है। सरकार ने यह बदलाव टीवी ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और कारोबार करने में आसानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया है।

TRAI ने भी पुराने विज्ञापन नियम खत्म किए

TRAI ने बताया कि उसने 10 सितंबर 2026 को Standards of Quality of Service (Duration of Advertisements in Television Channels) Regulations, 2012 को भी रद्द कर दिया था। इसके साथ ही इन नियमों के तहत जारी किए गए सभी पुराने आदेश और निर्देश भी खत्म हो गए।

TRAI के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से विज्ञापनों की 12 मिनट वाली सीमा हटाए जाने और उसके पुराने नियमों को रद्द किए जाने के बाद ब्रॉडकास्टर्स के लिए टीवी चैनलों पर प्रसारित विज्ञापनों की अवधि की जानकारी देने की पुरानी जरूरत भी नहीं रह गई है।

इसी वजह से TRAI ने अब 5 अगस्त 2013 के आदेश को औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। यह आदेश सभी ब्रॉडकास्टर्स को जारी किया गया है।

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WION ने की ‘विऑन वर्ल्ड कॉन्फ्रेंसेज’ की घोषणा: वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा

विऑन ने वर्ल्ड कॉन्फ्रेंसेज की घोषणा की है, जहां नीति, कारोबार, कूटनीति, निवेश, तकनीक और शिक्षा से जुड़े ग्लोबल लीडर्स भारत और दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 11 September, 2026
Last Modified:
Friday, 11 September, 2026
wionsummit

विऑन (WION) ने विऑन वर्ल्ड कॉन्फ्रेंसेज (WION World Conferences) की घोषणा की है। यह समिट, कॉन्फ्रेंस, कॉन्क्लेव और विभिन्न प्रोफेशनल एंगेजमेंट की एक क्यूरेटेड सीरीज होगी, जिसमें नीति-निर्माताओं, बिजनेस लीडर्स, राजनयिकों, निवेशकों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और बदलाव लाने वाले लोगों को एक मंच पर लाया जाएगा।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब ग्लोबल ऑर्डर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ग्लोबलाइजेशन में बड़े बदलाव, बढ़ते जियोपॉलिटिकल रिअलाइनमेंट और टेक्नोलॉजी व आर्थिक ताकतों के कारण पारंपरिक सीमाएं बदल रही हैं। वियोन वर्ल्ड कॉन्फ्रेंसेज इन बदलावों को समझने, उनके असर पर चर्चा करने और सहयोग के नए अवसर तलाशने पर फोकस करेगा।

विऑन के ‘वर्ल्ड इज वन’ (World Is One) के मूल विचार पर आधारित यह प्लेटफॉर्म सिर्फ खबरों और सुर्खियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उद्देश्य ग्लोबल नजरिए को अलग-अलग देशों की प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाना है।

कॉन्फ्रेंसेज के एजेंडे में एआई (AI), सस्टेनेबिलिटी, टूरिज्म, डिफेंस, डिप्लोमेसी, ग्लोबल इकोनॉमी, एजुकेशन, टेक्नोलॉजी और फ्यूचर ऑफ वर्क जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा अलग-अलग देशों के बीच साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

इस दौरान हाई-लेवल कीनोट्स, पैनल डिस्कशन, फायरसाइड कन्वर्सेशन, क्लोज्ड-डोर राउंडटेबल और स्ट्रैटेजिक नेटवर्किंग जैसे सेशन आयोजित किए जाएंगे। इनका मकसद विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोगों को साथ लाकर भारत और दुनिया को प्रभावित करने वाले बदलावों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है।

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TRAI की भूमिका पर MIB का रुख साफ, TV Ratings Policy में औपचारिक जगह देने से किया इनकार

टेलीविजन रेटिंग्स को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के बीच खींचतान जारी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 11 September, 2026
Last Modified:
Friday, 11 September, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

टेलीविजन रेटिंग्स को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के बीच खींचतान जारी है। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, MIB ने TRAI को बताया है कि उसने टेलीविजन रेटिंग्स के ढांचे को लेकर TRAI की कुछ सिफारिशों को स्वीकार किया है, लेकिन टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 में TRAI को औपचारिक भूमिका देने की उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया है।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय का कहना है कि टेलीविजन रेटिंग्स के ढांचे में TRAI को औपचारिक भूमिका देना कोई स्थापित या सामान्य व्यवस्था नहीं है। इस तरह मंत्रालय ने नई रेटिंग्स पॉलिसी में संशोधन कर TRAI को औपचारिक रूप से शामिल करने के नियामक के अनुरोध को प्रभावी रूप से खारिज कर दिया है। हालांकि, मंत्रालय ने यह जरूर माना है कि रेटिंग्स से जुड़े मामले में TRAI की कुछ सिफारिशों पर विचार किया गया है।

TRAI ने की थी नई पॉलिसी की समीक्षा की मांग

यह जवाब TRAI की उस हालिया पहल के बाद आया है, जिसमें नियामक ने टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 की समीक्षा करने के लिए MIB को पत्र लिखा था। नई पॉलिसी में टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट के ढांचे से TRAI की भूमिका हटा दी गई है। इसके बाद TRAI ने मंत्रालय से पॉलिसी की समीक्षा करने और रेटिंग्स के ढांचे में अपनी भूमिका को लेकर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया था।

मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, MIB ने TRAI की सिफारिशों को तो स्वीकार किया, लेकिन पॉलिसी में बदलाव कर TRAI को टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट के ढांचे में औपचारिक भूमिका देने पर सहमति नहीं जताई।

रेटिंग्स पर MIB का नियंत्रण रहेगा

सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय का रुख यह है कि टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी में TRAI को औपचारिक प्राधिकरण के तौर पर शामिल करने की कोई स्थापित परंपरा नहीं रही है। अब तक ऑडियंस मीजरमेंट को लेकर कार्यकारी अधिकार मुख्य रूप से MIB के पास रहे हैं।

टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 के तहत रेटिंग एजेंसियों के रजिस्ट्रेशन, ऑडिट, नियमों के पालन और उन्हें लागू कराने से जुड़े अधिकार MIB को दिए गए हैं। इससे टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट का पूरा ढांचा मंत्रालय के दायरे में आ गया है।

TRAI ने अपनी चिट्ठी में उन प्रावधानों पर दोबारा विचार करने की मांग की थी, जिनके कारण रेटिंग्स के ढांचे से उसकी भूमिका हट गई है। नियामक का तर्क था कि ऑडियंस मीजरमेंट का मुद्दा ब्रॉडकास्टिंग और केबल सेवाओं को लेकर उसकी व्यापक नियामकीय जिम्मेदारियों से जुड़ा है।

TRAI की भूमिका पहले सिफारिशों तक रही

एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट एग्जिक्यूटिव के मुताबिक, MIB ने TRAI को बताया है कि रेटिंग्स पॉलिसी में TRAI को औपचारिक हितधारक के रूप में शामिल करना उस तरीके के अनुरूप नहीं है, जिसके तहत यह व्यवस्था पहले से संचालित होती रही है।

मंत्रालय का यह भी मानना है कि रेटिंग्स के क्षेत्र में TRAI की भूमिका ऐतिहासिक रूप से सिफारिश देने वाली रही है, जबकि अंतिम पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने की जिम्मेदारी MIB के पास रही है।

पहले लागू 2014 के टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट फ्रेमवर्क के दौरान भी TRAI ने ब्रॉडकास्टिंग रेगुलेशन से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर कंसल्टेशन पेपर और सिफारिशें जारी की थीं। हालांकि, अंतिम पॉलिसी और उसे लागू करने की शक्तियां MIB के पास रही थीं।

मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि मंत्रालय ने TRAI की सिफारिशों को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि रेटिंग्स पॉलिसी में TRAI को शामिल करना सामान्य व्यवस्था नहीं है।

एक अन्य सूत्र के मुताबिक, MIB का जवाब TRAI की उस मांग को नरम तरीके से खारिज करने के बराबर है, जिसमें उसने पॉलिसी में संशोधन कर अपनी औपचारिक भूमिका बहाल करने की मांग की थी।

सूत्र ने कहा कि MIB सिफारिशों को स्वीकार करने और TRAI को रेटिंग्स व्यवस्था में औपचारिक संस्थागत भूमिका देने के बीच अंतर कर रहा है। सिफारिशों को जगह दी गई है, लेकिन औपचारिक भूमिका देने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया है।

रेटिंग्स पॉलिसी को लेकर विवाद जारी

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 को लेकर अलग-अलग हितधारकों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। खास तौर पर नई नियामकीय व्यवस्था और मंत्रालय को दिए गए अधिकारों को लेकर चर्चा हो रही है।

सरकार की ओर से अपनाई जा रही पॉलिसी को देखा जाए तो ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में एकल नियामकीय ढांचे की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। टेलीविजन, डिजिटल मीडिया, टेलीकॉम और दूसरे वितरण प्लेटफॉर्म के बीच बढ़ते जुड़ाव के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि अलग-अलग क्षेत्रों की नियामकीय जिम्मेदारियां किस संस्था के पास होनी चाहिए।

इंडस्ट्री से जुड़े कुछ अधिकारियों का पहले भी कहना रहा है कि TRAI और MIB के अधिकार क्षेत्र में ओवरलैप खत्म होने से ब्रॉडकास्टर्स और रेटिंग एजेंसियों के लिए नियामकीय स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।

दूसरी ओर, रेटिंग्स व्यवस्था में अपनी भूमिका बनाए रखने की TRAI की कोशिश यह दिखाती है कि नियामक ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े व्यापक मामलों में अपनी भागीदारी बनाए रखना चाहता है।

TV Ratings क्यों हैं महत्वपूर्ण?

टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट मीडिया इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रेटिंग्स का सीधा असर विज्ञापन से होने वाली कमाई, चैनलों की पोजिशनिंग, मीडिया प्लानिंग और ब्रॉडकास्टर्स व विज्ञापनदाताओं के बीच व्यावसायिक बातचीत पर पड़ता है।

ऐसे में MIB के ताजा रुख से रेटिंग्स व्यवस्था में TRAI की संस्थागत भूमिका को लेकर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, नई रेटिंग्स पॉलिसी को जमीन पर लागू करने से जुड़े कई व्यावहारिक सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। फिलहाल MIB का रुख यही दिखाई देता है कि TRAI की सिफारिशों को पॉलिसी बनाने में ध्यान में रखा जा सकता है, लेकिन टेलीविजन रेटिंग्स पर औपचारिक अधिकार मंत्रालय के पास ही रहेंगे।

आने वाले समय में टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 के लागू होने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया ढांचा किस तरह काम करता है और ब्रॉडकास्टर्स, रेटिंग एजेंसियों तथा दूसरे हितधारक इसे किस तरह देखते हैं।

 

 

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TAM Media की टीवी रेटिंग कारोबार में वापसी की तैयारी, लाइसेंस के लिए किया आवेदन

TAM Media Research ने सरकार की नई टेलीविजन रेटिंग नीति 2026 के तहत टेलीविजन दर्शकों की माप करने के लिए लाइसेंस का आवेदन किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 11 September, 2026
Last Modified:
Friday, 11 September, 2026
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TAM Media Research ने सरकार की नई टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 के तहत टेलीविजन दर्शकों की माप करने के लिए लाइसेंस का आवेदन किया है। इसके साथ ही भारत में टेलीविजन रेटिंग कारोबार में TAM की दोबारा वापसी की संभावना बढ़ गई है। इस घटनाक्रम से परिचित लोगों ने इसकी जानकारी एक्सचेंज4मीडिया को दी है।

समझा जाता है कि TAM का प्रस्तावित मीजरमेंट मॉडल शुरुआत में रिटर्न-पाथ डेटा (RPD) पर आधारित होगा। इसके बाद कंपनी साझेदारियों के जरिए अलग-अलग स्क्रीन पर दर्शकों की माप का विस्तार कर सकती है। इसमें कनेक्टेड टीवी मीजरमेंट कंपनी VTION के साथ उसकी मौजूदा साझेदारी भी शामिल है। इससे संकेत मिलता है कि TAM केवल पुराने पैनल आधारित टीवी रेटिंग मॉडल को दोहराने के बजाय कई तरह के डेटा स्रोतों को मिलाकर अपना मीजरमेंट मॉडल तैयार करना चाहती है।

बदला TAM का रुख

यह आवेदन TAM के उस सार्वजनिक रुख से एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो कंपनी ने मार्च में संशोधित पॉलिसी जारी होने के बाद अपनाया था। TAM ने पहले संकेत दिया था कि BARC India के साथ अपने संयुक्त उपक्रम के बाद, उद्योग की जरूरतों के आधार पर वह रेटिंग मीजरमेंट के अगले चरण में BARC को सहयोग देने के लिए तैयार है।

अब लाइसेंस के लिए आवेदन करने के फैसले से संकेत मिलता है कि TAM नई व्यवस्था के तहत रेटिंग इकोसिस्टम में अधिक सीधी भूमिका निभाना चाहती है। नई पॉलिसी के तहत एक से ज्यादा रेटिंग एजेंसियों को काम करने की अनुमति है।

RPD और CTV साझेदारी पर आधारित होगा मॉडल

TAM के प्रस्तावित मॉडल में शुरुआत में दर्शकों के डेटा के स्रोत के तौर पर RPD का इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद साझेदारियों के जरिए अलग-अलग स्क्रीन पर दर्शकों की माप का विस्तार किया जा सकता है।

इस तरीके से TAM को बड़े पैमाने पर टेलीविजन देखने से जुड़े डेटा तक पहुंच मिल सकती है, जबकि विशेषज्ञ साझेदार कनेक्टेड टीवी और डिजिटल दर्शकों से जुड़ी अतिरिक्त क्षमताएं उपलब्ध करा सकते हैं।

जून में TAM Media Research ने VTION के साथ साझेदारी कर CTV Ad Pulse लॉन्च किया था। इसमें TAM की विज्ञापन निगरानी क्षमता और VTION की कनेक्टेड टीवी दर्शक मीजरमेंट क्षमता को जोड़ा गया है। यह समाधान कनेक्टेड टीवी पर विज्ञापन दिखने और दर्शकों के देखने के व्यवहार को जोड़ता है। इसका उद्देश्य अलग-अलग मार्केटों में दर्शकों की प्रोफाइल, पहुंच, विज्ञापन देखने की आवृत्ति और अभियान की पहुंच को मीजरमेंटा है।

VTION 1 लाख से ज्यादा स्मार्टफोन के पैनल के जरिए सहमति आधारित और बिना किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप के दर्शक मीजरमेंट करता है। कंपनी ने इस चुने गए पैनल मॉडल को कनेक्टेड टेलीविजन तक भी बढ़ाया है। ऐसे में TAM और VTION की साझेदारी TAM को टेलीविजन और डिजिटल स्क्रीन पर दर्शकों के व्यवहार को जोड़ने का एक मौजूदा रास्ता दे सकती है, क्योंकि कंपनी अपने व्यापक मीजरमेंट मॉडल को विकसित कर रही है।

MIB कनेक्टेड टीवी मीजरमेंट की क्षमता को समझ रहा

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) यह देख रहा है कि बदलते दर्शक व्यवहार के बीच टेलीविजन मीजरमेंट को किस तरह बदला जा सकता है। इसमें पारंपरिक टीवी, स्मार्ट टीवी और कनेक्टेड डिवाइस पर होने वाली खपत शामिल है।

मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, मंत्रालय ने कनेक्टेड टीवी मीजरमेंट की क्षमताओं को समझने के लिए TAM और Chrome DM दोनों से संपर्क किया है।

Chrome DM बड़े पैमाने पर दर्शकों के देखने से जुड़ा डेटा जुटाने वाली स्वचालित कनेक्टेड टीवी मीजरमेंट प्रणाली संचालित करता है। कंपनी पहले कह चुकी है कि आने वाले समय में टेलीविजन मीजरमेंट के लिए कई तरह के डेटा स्रोतों को जोड़ना जरूरी होगा। इसमें जनगणना स्तर का डेटा और प्रतिनिधि पैनल डेटा शामिल हो सकता है, ताकि दर्शकों की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल तैयार की जा सके।

नई पॉलिसी के तहत यह अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रतिनिधि पैनल दर्शकों की जनसांख्यिकीय जानकारी और एक समान टीवी रेटिंग माप के लिए जरूरी बने रहेंगे। वहीं, स्वचालित CTV और RPD सिस्टम बड़ी मात्रा में डिवाइस स्तर पर देखने से जुड़ा डेटा उपलब्ध करा सकते हैं।

सिर्फ तकनीक से नहीं चलेगा रेटिंग सिस्टम

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि रेटिंग लाइसेंस हासिल करना किसी कंपनी के लिए एक भरोसेमंद रेटिंग सिस्टम तैयार करने की दिशा में सिर्फ पहला कदम है।

एक वरिष्ठ प्रसारण अधिकारी ने कहा कि रेटिंग एजेंसी का काम सिर्फ यह गिनना नहीं है कि कितनी टीवी स्क्रीन चल रही हैं। इसके लिए प्रतिनिधि पैनल, फील्ड ऑपरेशन, पीपल मीटर और दूसरी मीजरमेंट सुविधाओं के साथ डेटा प्रोसेसिंग, सांख्यिकीय मॉडलिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रशासनिक व्यवस्था और ऐसे सिस्टम की जरूरत होती है, जो प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों की जांच-पड़ताल का सामना कर सके।

संशोधित पॉलिसी में रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की जरूरत 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। हालांकि, देशभर में रेटिंग मीजरमेंट का पूरा सिस्टम खड़ा करने की लागत इससे काफी ज्यादा हो सकती है।

उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, देशव्यापी रेटिंग ऑपरेशन स्थापित करने में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश लग सकता है। इसमें पैनल का विस्तार, पीपल मीटर, फील्ड ऑपरेशन, तकनीक, डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों से जुड़े खर्च शामिल हैं।

क्या रेटिंग मार्केट और ज्यादा बंटेगा?

TAM का लाइसेंस आवेदन इस चर्चा को और तेज कर सकता है कि भारत का भविष्य का टीवी रेटिंग इकोसिस्टम केवल पूरी सेवाएं देने वाली रेटिंग एजेंसियों तक सीमित रहेगा या मीजरमेंट व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों के लिए विशेषज्ञ कंपनियां भी भूमिका निभाएंगी।

एक संभावित मॉडल में प्रतिनिधि पैनल से दर्शकों की जनसांख्यिकीय माप, RPD और स्वचालित CTV सिस्टम से बड़े पैमाने पर दर्शक खपत का डेटा और फिर इन सभी स्रोतों को जोड़कर अंतिम रेटिंग तैयार करने वाली एजेंसी शामिल हो सकती है।

इस तरह की व्यवस्था से विज्ञापनदाताओं और प्रसारकों को दर्शकों को ज्यादा विस्तार से समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ डेटा की पद्धति, अलग-अलग स्रोतों के डेटा को जोड़ने, डुप्लीकेट डेटा हटाने, ऑडिट और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सामने आएंगे।

TAM के लिए लाइसेंस आवेदन और VTION के साथ उसकी साझेदारी से संकेत मिलता है कि मार्केट में उसकी संभावित वापसी पारंपरिक टीवी रेटिंग मॉडल को दोबारा खड़ा करने के बजाय अलग-अलग स्क्रीन पर दर्शकों के मीजरमेंट पर आधारित व्यापक मॉडल के साथ हो सकती है।

अब सबसे अहम सवाल यह है कि TAM का RPD आधारित प्रस्तावित मॉडल नए नियामकीय ढांचे में किस तरह फिट बैठता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि उद्योग आगे चलकर कई पूरी सेवाएं देने वाली रेटिंग एजेंसियों का मॉडल अपनाता है या फिर ऐसा मॉड्यूलर सिस्टम विकसित होता है, जिसमें अलग-अलग विशेषज्ञ कंपनियां दर्शकों के डेटा की अलग-अलग परतों में योगदान देंगी। 

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TRAI ने टीवी विज्ञापनों की 12 मिनट की सीमा हटाई, केंद्र के फैसले के अनुरूप बदले नियम

टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापनों को लेकर एक बड़ा नियामकीय बदलाव हुआ है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि को लेकर 2012 में बनाए गए नियमों को रद्द कर दिया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 10 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 10 September, 2026
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टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापनों को लेकर एक बड़ा नियामकीय बदलाव हुआ है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि को लेकर 2012 में बनाए गए नियमों को रद्द कर दिया है। इन नियमों के तहत एक कार्यक्रम के प्रसारण के दौरान एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट के विज्ञापन दिखाने की सीमा तय थी।

यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994 में किए गए बदलाव के बाद आया है। सरकार ने इन नियमों से वह प्रावधान हटा दिया था, जिसके जरिए टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि की 12 मिनट की सीमा प्रभावी रूप से लागू होती थी।

TRAI ने गुरुवार को Standards of Quality of Service (Duration of Advertisements in Television Channels) (Repealing) Regulations, 2026 जारी किए। इसके साथ ही टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि को नियंत्रित करने वाला यह नियामकीय ढांचा औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया है।

हालांकि, इन नए Repealing Regulations का असर उसी दिन से होगा, जिस दिन इन्हें ऑफिशियल गैजेट में अधिसूचित किया जाएगा।

12 मिनट की विज्ञापन सीमा हुई खत्म

TRAI के 2012 के नियमों में प्रावधान था कि किसी कार्यक्रम के प्रसारण के दौरान एक Clock Hour में अधिकतम 12 मिनट के विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। इन नियमों के तहत TRAI को सेवा प्रदाताओं को आदेश या निर्देश जारी करने का अधिकार भी दिया गया था। इसका उद्देश्य दर्शकों के हितों की सुरक्षा और विज्ञापन अवधि से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना था।

TRAI के मुताबिक, 2012 के ये नियम मुख्य रूप से Quality of Service के तौर पर बनाए गए थे। इनका मकसद केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स में दिए गए विज्ञापन अवधि संबंधी प्रावधान की निगरानी और उसे लागू करना था।लेकिन अब केंद्र सरकार ने केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994 से वह मूल प्रावधान ही हटा दिया है, जिसके आधार पर विज्ञापनों की 12 मिनट की सीमा लागू होती थी।

ऐसे में TRAI का कहना है कि उसी प्रावधान से जुड़े अपने नियमों को जारी रखना केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स के मौजूदा प्रावधानों के अनुरूप नहीं होगा।

सरकार ने क्यों हटाई विज्ञापन सीमा?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 21 अगस्त को केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994 में बदलाव से जुड़ी अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत Rule 7 के sub-rule (11) को हटा दिया गया। यही वह प्रावधान था, जिसके जरिए टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि को लेकर 12 मिनट की सीमा प्रभावी रूप से लागू होती थी।

TRAI के अनुसार, सरकार का यह फैसला टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में आए बड़े बदलावों के बीच लिया गया है। इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और दर्शकों के पास मनोरंजन और कंटेंट के ज्यादा विकल्प उपलब्ध हुए हैं।

सरकार ने इस पाबंदी को हटाने का उद्देश्य टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और बिजनेस की प्रक्रिया को और आसान बनाना बताया है। इस बदलाव के बाद टीवी विज्ञापन अब 12 मिनट प्रति Clock Hour की तय सीमा वाले पुराने नियामकीय ढांचे के तहत नहीं रहेंगे। यानी 2012 से लागू यह खास वैधानिक सीमा अब हटा दी गई है।

TRAI ने केंद्र के फैसले के अनुरूप बदले नियम

TRAI ने कहा कि उसके नियमों को रद्द करना इसलिए जरूरी था ताकि उसके रेगुलेशंस और केंद्र सरकार की ओर से संशोधित केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स के बीच एकरूपता बनी रहे।

TRAI के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा विज्ञापन अवधि की सीमा हटाए जाने के बाद संबंधित TRAI प्रावधानों को जारी रखना केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स के रूल 7(11) के मौजूदा स्वरूप के अनुरूप नहीं होता।

इसी वजह से TRAI ने 2012 के Regulations को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही इन रेगुलेशंस के तहत पहले जारी किए गए सभी Orders और Directions को भी वापस ले लिया गया है। हालांकि, इन बदलावों को प्रभावी होने के लिए नए Repealing Regulations का Official Gazette में जारी होना जरूरी है। नियम उसी तारीख से प्रभावी होंगे, जिस दिन इन्हें ऑफिशियल गैजेट में अधिसूचित किया जाएगा।

टीवी विज्ञापन के नियमों में बड़ा बदलाव

TRAI का यह फैसला भारत में टेलीविजन विज्ञापनों के नियामकीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है। इसके साथ टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि को लेकर करीब एक दशक से ज्यादा समय से लागू 12 मिनट की सीमा खत्म हो गई है।

यह सीमा 2012 में दर्शकों के लिए Quality of Service से जुड़े नियम के तौर पर लागू की गई थी। अब केंद्र सरकार द्वारा मूल प्रावधान हटाए जाने के बाद TRAI ने भी उससे जुड़े अपने नियमों को रद्द कर दिया है।

TRAI ने ये Repealing Regulations 10 सितंबर 2026 को जारी किए हैं।

 

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हैप्पी बर्थडे निशांत चतुर्वेदी: मेहनत और जज्बे के दम पर मीडिया में बनाई खास पहचान

पत्रकारिता में आने से पहले वह रेडियो जॉकी भी रह चुके हैं। खेलों में भी उनकी खास पकड़ रही है और वह 100 मीटर दौड़ में स्टेट चैंपियन रह चुके हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 05 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
Nishant Chaturvedi Birthday

हिंदी टीवी पत्रकारिता के लोकप्रिय चेहरों में शुमार वरिष्ठ पत्रकार निशांत चतुर्वेदी का आज जन्मदिन है। वर्तमान में ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे निशांत चतुर्वेदी को मीडिया जगत में ऐसे एंकर और पत्रकार के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर दो दशकों से भी ज्यादा वक्त में खास पहचान बनाई है।

निशांत चतुर्वेदी ने मीडिया में अपना करियर जून 2000 में देश के पहले निजी न्यूज चैनल ‘जी न्यूज’ (Zee News) से बतौर एंकर/रिपोर्टर किया था। वह इस चैनल के साथ दो साल तक जुड़े रहे। जून 2002 में उन्होंने द्विभाषी एंकर/कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘डीडी न्यूज’ (DD NEWS) जॉइन कर लिया। यहां उनका कार्यकाल एक साल से ज्यादा समय तक चला।   

इसके बाद दिसंबर 2003 में उन्होंने प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट और एंकर के रूप में ‘आजतक’ (AajTak) में अपनी पारी शुरू की। जनवरी 2005 में उन्होंने ‘आजतक’ में अपनी पारी को विराम दे दिया और स्पेशल करेसपॉन्डेंट और एंकर के तौर पर ‘सहारा न्यूज’ (Sahara News) जॉइन कर लिया। यहां वह तीन साल से अधिक समय तक कार्यरत रहे और फिर यहां से बाय बोलकर जुलाई 2008 में बतौर एडिटर (न्यूजरूम) और एंकर ‘वॉइस ऑफ इंडिया’ (Voice Of India) में शामिल हो गए।

इसके बाद अप्रैल 2009 से अप्रैल 2012 तक निशांत चतुर्वेदी एंकर/एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर ‘इंडिया टीवी’ (India TV) से जुड़े रहे। निशांत चतुर्वेदी ‘न्यूज24’ (News24) में भी अपनी पारी खेल चुके हैं। हालांकि, यहां उनका कार्यकाल छोटा ही रहा। इसके बाद निशांत चतुर्वेदी अगस्त 2012 से मार्च 2014 तक ‘न्यूज एक्सप्रेस’ (News Express) में चैनल हेड भी रहे हैं।  

मार्च 2014 में निशांत चतुर्वेदी ने दोबारा ‘आजतक’ जॉइन कर लिया। यहां बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर/एंकर पांच साल से अधिक समय तक उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई और फिर यहां से अलविदा कहकर नवंबर 2019 में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में शामिल हो गए और तब से यहां अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

यहां उन्होंने न सिर्फ प्राइम टाइम फ्लैगशिप शो ‘फिक्र आपकी’ को डिजाइन और लॉन्च किया, बल्कि शाम चार बजे आने वाले शो ‘फुल एंड फाइनल’ की कमान भी संभालते हैं।

निशांत चतुर्वेदी की स्कूली पढ़ाई जबलपुर के क्राइस्ट चर्च स्कूल और दिल्ली के द फ्रैंक एंथोनी पब्लिक स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। उन्होंने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज से कैपिटल मार्केट्स पर प्रोफेशनल कोर्स किया और ‘ऑल इंडिया रेडियो’ व बीबीसी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से न्यूज प्रेजेंटेशन और रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं।

पत्रकारिता में आने से पहले वह रेडियो जॉकी भी रह चुके हैं। खेलों में भी उनकी खास पकड़ रही है और वह 100 मीटर दौड़ में स्टेट चैंपियन रह चुके हैं।

अपने लंबे करियर में निशांत कई दिग्गजों का इंटरव्यू कर चुके हैं। इनमें एरिक ट्रंप, डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक सलाहकार केलीनेन कॉनवे, अमेरिकी नेता सारा पॉलिन, शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार और रणबीर कपूर जैसे नाम शामिल हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से निशांत चतुर्वेदी को जन्मदिन की ढेरों बधाई औऱ शुभकामनाएं।

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Sun TV Network के COO सी. प्रवीण हुए रिटायर, 28 साल तक दिया योगदान

सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) सी. प्रवीण अपने पद से रिटायर हो गए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
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सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) सी. प्रवीण अपने पद से रिटायर हो गए हैं। कंपनी ने बताया कि उनका रिटायरमेंट 31 अगस्त 2026 को कारोबारी समय खत्म होने के साथ प्रभावी हो गया है।

सी. प्रवीण लंबे समय से Sun TV Network से जुड़े हुए थे। वह 1998 से कंपनी के साथ काम कर रहे थे, यानी करीब 28 साल तक उन्होंने कंपनी में अपनी सेवाएं दीं। कंपनी ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उनके विजन और नेतृत्व से Sun TV Network को काफी फायदा मिला।

Sun TV Network ने अपने खुलासे में सी. प्रवीण के लंबे जुड़ाव और योगदान की सराहना की है। कंपनी के मुताबिक, करीब तीन दशक के दौरान उनके विजन और नेतृत्व से कंपनी को फायदा मिला। 

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डॉ. सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस ने दी सफाई, कहा- बेबुनियाद हैं आरोप

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से रिलायंस ग्रुप और उसके मीडिया संस्थानों पर लगाए गए आरोपों के बाद अब रिलायंस ने इन आरोपों पर अपना जवाब दिया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 28 August, 2026
Last Modified:
Friday, 28 August, 2026
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एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से रिलायंस ग्रुप और उसके मीडिया संस्थानों पर लगाए गए आरोपों के बाद अब रिलायंस ने इन आरोपों पर अपना जवाब दिया है। रिलायंस ग्रुप ने डॉ. सुभाष चंद्रा की टिप्पणियों को बेबुनियाद बताते हुए सभी आरोपों और इशारों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

रिलायंस की ओर से 28 अगस्त को जारी मीडिया बयान में कहा गया कि ग्रुप ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की टिप्पणियों पर निराशा जताई है।

‘आरोप और इशारे पूरी तरह खारिज’

रिलायंस ने अपने बयान में कहा कि रिलायंस ग्रुप का हिस्सा रहे मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप और इशारे पूरी तरह गलत हैं। ग्रुप ने साफ किया कि उसके मीडिया ब्रैंड्स का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया और न ही भविष्य में ऐसा किया जाएगा।

रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा, “हमारे मीडिया ब्रैंड्स का इस्तेमाल कभी किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया और न ही कभी किया जाएगा।” 

डॉ. सुभाष चंद्रा के लिए सम्मान भी जताया

हालांकि, आरोपों को खारिज करने के साथ ही रिलायंस ने डॉ. सुभाष चंद्रा के प्रति सम्मान भी जताया। कंपनी ने कहा कि वह सुभाष चंद्रा को एक कारोबारी और उद्यमी के तौर पर काफी सम्मान देती है। रिलायंस ने अपने बयान के अंत में डॉ. सुभाष चंद्रा के अच्छे भविष्य की कामना भी की।

NCLT कवरेज को लेकर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, यह पूरा विवाद सुभाष चंद्रा की ओर से रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी और रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों की कथित रिपोर्टिंग पर सवाल उठाए जाने के बाद सामने आया है। डॉ. सुभाष चंद्रा ने आरोप लगाया था कि उनके कर्ज और हालिया NCLT कार्यवाही को लेकर गलत नैरेटिव पेश किया गया। उन्होंने रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों पर उनके खिलाफ अभियान चलाने का आरोप भी लगाया था।

अब रिलायंस ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। दोनों पक्षों के बयानों के बाद यह मामला कारोबारी और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बन गया है।

 

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