TRAI की भूमिका पर MIB का रुख साफ, TV Ratings Policy में औपचारिक जगह देने से किया इनकार

टेलीविजन रेटिंग्स को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के बीच खींचतान जारी है।

Last Modified:
Friday, 11 September, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

टेलीविजन रेटिंग्स को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के बीच खींचतान जारी है। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, MIB ने TRAI को बताया है कि उसने टेलीविजन रेटिंग्स के ढांचे को लेकर TRAI की कुछ सिफारिशों को स्वीकार किया है, लेकिन टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 में TRAI को औपचारिक भूमिका देने की उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया है।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय का कहना है कि टेलीविजन रेटिंग्स के ढांचे में TRAI को औपचारिक भूमिका देना कोई स्थापित या सामान्य व्यवस्था नहीं है। इस तरह मंत्रालय ने नई रेटिंग्स पॉलिसी में संशोधन कर TRAI को औपचारिक रूप से शामिल करने के नियामक के अनुरोध को प्रभावी रूप से खारिज कर दिया है। हालांकि, मंत्रालय ने यह जरूर माना है कि रेटिंग्स से जुड़े मामले में TRAI की कुछ सिफारिशों पर विचार किया गया है।

TRAI ने की थी नई पॉलिसी की समीक्षा की मांग

यह जवाब TRAI की उस हालिया पहल के बाद आया है, जिसमें नियामक ने टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 की समीक्षा करने के लिए MIB को पत्र लिखा था। नई पॉलिसी में टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट के ढांचे से TRAI की भूमिका हटा दी गई है। इसके बाद TRAI ने मंत्रालय से पॉलिसी की समीक्षा करने और रेटिंग्स के ढांचे में अपनी भूमिका को लेकर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया था।

मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, MIB ने TRAI की सिफारिशों को तो स्वीकार किया, लेकिन पॉलिसी में बदलाव कर TRAI को टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट के ढांचे में औपचारिक भूमिका देने पर सहमति नहीं जताई।

रेटिंग्स पर MIB का नियंत्रण रहेगा

सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय का रुख यह है कि टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी में TRAI को औपचारिक प्राधिकरण के तौर पर शामिल करने की कोई स्थापित परंपरा नहीं रही है। अब तक ऑडियंस मीजरमेंट को लेकर कार्यकारी अधिकार मुख्य रूप से MIB के पास रहे हैं।

टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 के तहत रेटिंग एजेंसियों के रजिस्ट्रेशन, ऑडिट, नियमों के पालन और उन्हें लागू कराने से जुड़े अधिकार MIB को दिए गए हैं। इससे टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट का पूरा ढांचा मंत्रालय के दायरे में आ गया है।

TRAI ने अपनी चिट्ठी में उन प्रावधानों पर दोबारा विचार करने की मांग की थी, जिनके कारण रेटिंग्स के ढांचे से उसकी भूमिका हट गई है। नियामक का तर्क था कि ऑडियंस मीजरमेंट का मुद्दा ब्रॉडकास्टिंग और केबल सेवाओं को लेकर उसकी व्यापक नियामकीय जिम्मेदारियों से जुड़ा है।

TRAI की भूमिका पहले सिफारिशों तक रही

एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट एग्जिक्यूटिव के मुताबिक, MIB ने TRAI को बताया है कि रेटिंग्स पॉलिसी में TRAI को औपचारिक हितधारक के रूप में शामिल करना उस तरीके के अनुरूप नहीं है, जिसके तहत यह व्यवस्था पहले से संचालित होती रही है।

मंत्रालय का यह भी मानना है कि रेटिंग्स के क्षेत्र में TRAI की भूमिका ऐतिहासिक रूप से सिफारिश देने वाली रही है, जबकि अंतिम पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने की जिम्मेदारी MIB के पास रही है।

पहले लागू 2014 के टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट फ्रेमवर्क के दौरान भी TRAI ने ब्रॉडकास्टिंग रेगुलेशन से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर कंसल्टेशन पेपर और सिफारिशें जारी की थीं। हालांकि, अंतिम पॉलिसी और उसे लागू करने की शक्तियां MIB के पास रही थीं।

मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि मंत्रालय ने TRAI की सिफारिशों को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि रेटिंग्स पॉलिसी में TRAI को शामिल करना सामान्य व्यवस्था नहीं है।

एक अन्य सूत्र के मुताबिक, MIB का जवाब TRAI की उस मांग को नरम तरीके से खारिज करने के बराबर है, जिसमें उसने पॉलिसी में संशोधन कर अपनी औपचारिक भूमिका बहाल करने की मांग की थी।

सूत्र ने कहा कि MIB सिफारिशों को स्वीकार करने और TRAI को रेटिंग्स व्यवस्था में औपचारिक संस्थागत भूमिका देने के बीच अंतर कर रहा है। सिफारिशों को जगह दी गई है, लेकिन औपचारिक भूमिका देने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया है।

रेटिंग्स पॉलिसी को लेकर विवाद जारी

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 को लेकर अलग-अलग हितधारकों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। खास तौर पर नई नियामकीय व्यवस्था और मंत्रालय को दिए गए अधिकारों को लेकर चर्चा हो रही है।

सरकार की ओर से अपनाई जा रही पॉलिसी को देखा जाए तो ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में एकल नियामकीय ढांचे की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। टेलीविजन, डिजिटल मीडिया, टेलीकॉम और दूसरे वितरण प्लेटफॉर्म के बीच बढ़ते जुड़ाव के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि अलग-अलग क्षेत्रों की नियामकीय जिम्मेदारियां किस संस्था के पास होनी चाहिए।

इंडस्ट्री से जुड़े कुछ अधिकारियों का पहले भी कहना रहा है कि TRAI और MIB के अधिकार क्षेत्र में ओवरलैप खत्म होने से ब्रॉडकास्टर्स और रेटिंग एजेंसियों के लिए नियामकीय स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।

दूसरी ओर, रेटिंग्स व्यवस्था में अपनी भूमिका बनाए रखने की TRAI की कोशिश यह दिखाती है कि नियामक ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े व्यापक मामलों में अपनी भागीदारी बनाए रखना चाहता है।

TV Ratings क्यों हैं महत्वपूर्ण?

टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट मीडिया इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रेटिंग्स का सीधा असर विज्ञापन से होने वाली कमाई, चैनलों की पोजिशनिंग, मीडिया प्लानिंग और ब्रॉडकास्टर्स व विज्ञापनदाताओं के बीच व्यावसायिक बातचीत पर पड़ता है।

ऐसे में MIB के ताजा रुख से रेटिंग्स व्यवस्था में TRAI की संस्थागत भूमिका को लेकर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, नई रेटिंग्स पॉलिसी को जमीन पर लागू करने से जुड़े कई व्यावहारिक सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। फिलहाल MIB का रुख यही दिखाई देता है कि TRAI की सिफारिशों को पॉलिसी बनाने में ध्यान में रखा जा सकता है, लेकिन टेलीविजन रेटिंग्स पर औपचारिक अधिकार मंत्रालय के पास ही रहेंगे।

आने वाले समय में टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 के लागू होने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया ढांचा किस तरह काम करता है और ब्रॉडकास्टर्स, रेटिंग एजेंसियों तथा दूसरे हितधारक इसे किस तरह देखते हैं।

 

 

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Z एंटरटेनमेंट में बड़ा बदलाव, संगीता शेट्टी बनीं नई चीफ कंप्लायंस ऑफिसर व कंपनी सेक्रेटरी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने संगीता शेट्टी को कंपनी का नया चीफ कंप्लायंस ऑफिसर और कंपनी सेक्रेटरी नियुक्त किया है।

Last Modified:
Saturday, 31 October, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने संगीता शेट्टी को कंपनी का नया चीफ कंप्लायंस ऑफिसर और कंपनी सेक्रेटरी नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 2 नवंबर 2026 से प्रभावी होगी। वह आशीष अग्रवाल की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगी, जिन्होंने निजी कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कंपनी ने 30 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि आशीष अग्रवाल का इस्तीफा 29 अक्टूबर को कारोबारी समय समाप्त होने के साथ प्रभावी हो गया है। इसके बाद कंपनी के निदेशक मंडल ने 30 अक्टूबर को हुई बैठक में संगीता शेट्टी की नियुक्ति को मंजूरी दी। इससे पहले नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने भी उनके नाम की सिफारिश की थी।

कौन हैं संगीता शेट्टी?

संगीता शेट्टी एक योग्य कंपनी सेक्रेटरी हैं और उन्हें इस क्षेत्र में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। वह इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) की एसोसिएट सदस्य भी हैं।

उन्हें कंपनी कानून, सेबी के नियमों, शेयर बाजार से जुड़े खुलासों, कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता और बोर्ड के कामकाज से जुड़े मामलों का अनुभव है। उन्होंने सूचीबद्ध कंपनियों में नियमों के पालन, बोर्ड और उसकी समितियों के कामकाज तथा पूंजी बाजार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को संभाला है।

जी एंटरटेनमेंट से पहले संगीता शेट्टी एबॉट इंडिया लिमिटेड से जुड़ी थीं। इससे पहले वह आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस, आदित्य बिड़ला मनी, एडलवाइस ग्रुप, एमएसईआई और एंजेल वन में भी काम कर चुकी हैं।

कंपनी की नियमों के पालन की व्यवस्था मजबूत करने की जिम्मेदारी

नई भूमिका में संगीता शेट्टी कंपनी के नियमों के पालन, कॉरपोरेट गवर्नेंस यानी कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही तथा शेयरधारकों से जुड़े मामलों को और मजबूत करने पर काम करेंगी। वह मुंबई स्थित कंपनी के मुख्यालय से काम करेंगी और सीधे कंपनी के सीईओ पुनीत गोयनका को रिपोर्ट करेंगी।

कंपनी के मुताबिक, भविष्य की कारोबारी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए वह नेतृत्व टीम के साथ मिलकर नियमों के पालन की व्यवस्था, आंतरिक नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने पर काम करेंगी।

आशीष अग्रवाल ने सात साल से ज्यादा संभाली जिम्मेदारी

आशीष अग्रवाल ने कंपनी में सात साल से ज्यादा समय तक कंपनी सेक्रेटरी और चीफ कंप्लायंस ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली। कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने कंपनी के सेक्रेटेरियल कामकाज का नेतृत्व किया है। अब उन्होंने संगठन से बाहर नए अवसर तलाशने का फैसला किया है।

कंपनी के सीईओ पुनीत गोयनका ने आशीष अग्रवाल के योगदान के लिए उनका आभार जताया और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं, संगीता शेट्टी ने कहा कि वह कंपनी की नेतृत्व टीम के साथ मिलकर नियमों के पालन की व्यवस्था को और मजबूत करने तथा कंपनी के लंबे समय के लक्ष्यों में योगदान देने के लिए काम करेंगी। 

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टीवी विज्ञापन में सुस्ती, फिर भी नेटवर्क18 की कमाई में उछाल, जानिए कैसे?

नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अपनी कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की है।

Last Modified:
Saturday, 31 October, 2026
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नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अपनी कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की है। 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.4 फीसदी बढ़कर 545 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 498 करोड़ रुपये था। हालांकि, इस दौरान टीवी न्यूज इंडस्ट्री में विज्ञापन की मांग में करीब 13 फीसदी की गिरावट आई।

कंपनी ने 30 अक्टूबर को जारी अपनी निवेशक अपडेट में बताया कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में उसका कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब 9.9 फीसदी बढ़कर 1,061 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 966 करोड़ रुपये था।

विज्ञापन बाजार में सुस्ती, सरकारी विज्ञापनों की मांग मजबूत

नेटवर्क18 के मुताबिक, दूसरी तिमाही में न्यूज चैनलों के लिए विज्ञापन की उपलब्ध जगह की मांग में सालाना आधार पर करीब 13 फीसदी की गिरावट रही। कंपनी ने इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कमजोर मानसून और टीवी रेटिंग के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने जैसे कारण बताए हैं।

हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों के अभियानों, सरकारी कंपनियों (PSUs) और राजनीतिक दलों से जुड़े विज्ञापनों की मांग लगातार दूसरी तिमाही में मजबूत बनी रही। कंपनी का कहना है कि विज्ञापन से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी सीमित रही, जबकि उसकी कुल आय में बढ़ोतरी की मुख्य वजह कंटेंट स्टूडियो से जुड़ा कारोबार रहा।

कंपनी ने यह भी बताया कि कनेक्टेड टीवी (Connected TV) उसके लिए कमाई का एक उभरता हुआ माध्यम बन रहा है और इसमें अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 33 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंच

नेटवर्क18 ने अपनी डिजिटल पहुंच को लेकर भी जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, सितंबर 2026 में उसके डिजिटल न्यूज और इंफॉर्मेशन नेटवर्क की मासिक पहुंच 33 करोड़ से ज्यादा यूजर्स तक रही। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद दर्शक भी शामिल हैं। कंपनी ने इस पहुंच के साथ संबंधित डिजिटल ऑडियंस सेगमेंट में 68 फीसदी पहुंच का दावा किया है।

यूट्यूब पर भी नेटवर्क18 की मौजूदगी मजबूत बनी हुई है। कंपनी के विभिन्न चैनलों को जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान 15 अरब से ज्यादा वीडियो व्यूज मिले, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 17 फीसदी ज्यादा हैं। कंपनी के मुताबिक, यूट्यूब पर उसके वीडियो व्यूज निकटतम प्रतिस्पर्धी के मुकाबले करीब दोगुने रहे।

फेसबुक को मिलाकर अन्य बड़े सोशल प्लेटफॉर्म पर वीडियो व्यूज में सालाना आधार पर 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कंपनी का कुल सोशल मीडिया फॉलोअर बेस 47 करोड़ से ज्यादा हो गया। नेटवर्क18 के मुताबिक, कनेक्टेड टीवी पर दर्शकों की भागीदारी में भी सालाना आधार पर 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

मनीकंट्रोल प्रो के एक करोड़ से ज्यादा पेड सब्सक्राइबर

कंपनी के डिजिटल कारोबार में मनीकंट्रोल की भी अहम भूमिका बनी हुई है। नेटवर्क18 ने बताया कि मनीकंट्रोल प्रो के पेड सब्सक्राइबर्स की संख्या 10 लाख से ज्यादा हो गई है। कंपनी इसे देश का सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर वाला वित्तीय समाचार मंच बताती है।

मनीकंट्रोल ने इस तिमाही में 'कॉर्प लेंस' नाम का नया फीचर शुरू किया है, जिसके जरिए गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय आंकड़े देखे जा सकते हैं। इसके अलावा 'स्टॉक नोट' फीचर भी पेश किया गया है, जिससे यूजर्स शेयर से जुड़े अपने विचार और टिप्पणियां दर्ज कर सकते हैं।

कंपनी के मुताबिक, मनीकंट्रोल पर यूजर्स के बिताए गए समय और पेज व्यूज की संख्या निकटतम प्रतिस्पर्धी के मुकाबले तीन गुना रही। वहीं, न्यूज18 डॉट कॉम पर औसत सेशन अवधि में 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

टीवी रेटिंग के आंकड़े अब भी बंद

टीवी कारोबार के लिए रेटिंग के आंकड़े उपलब्ध नहीं होना अब भी चुनौती बना हुआ है। नेटवर्क18 ने बताया कि न्यूज चैनलों के लिए छह महीने से ज्यादा समय से और दूसरे टीवी जॉनर के लिए तीन महीने से ज्यादा समय से रेटिंग के आंकड़े जारी नहीं हो रहे हैं।

कंपनी के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद मार्च 2026 की शुरुआत में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को न्यूज चैनलों के साप्ताहिक दर्शक आंकड़े रोकने का निर्देश दिया था। इसके बाद जुलाई की शुरुआत में टीवी रेटिंग नीति 2026 के तहत BARC के लाइसेंस नवीनीकरण से जुड़े मामले के कारण गैर-न्यूज चैनलों की रेटिंग भी रोक दी गई।

कंपनी ने यह भी बताया कि रेटिंग के आंकड़े रोके जाने से पहले उसके पास देश का सबसे बड़ा टीवी न्यूज नेटवर्क था। उसके पोर्टफोलियो में 20 न्यूज चैनल शामिल हैं। उस अवधि में कंपनी की अखिल भारतीय न्यूज व्यूअरशिप हिस्सेदारी 13.8 फीसदी थी। ये आंकड़े BARC के 2026 के पहले आठ हफ्तों के आंकड़ों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें मौजूदा दर्शक हिस्सेदारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

न्यूज18 मराठी का नेटवर्क18 में विलय मंजूर

कंपनी ने यह भी जानकारी दी कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने न्यूज18 मराठी के नेटवर्क18 में विलय की योजना को मंजूरी दे दी है। हालांकि, यह विलय योजना में तय सभी जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगी।

नेटवर्क18 के चेयरमैन आदिल जैनुलभाई ने कहा कि चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के बावजूद कंपनी ने स्थिर प्रदर्शन किया है। उनके मुताबिक, कंपनी का ध्यान अपने प्रमुख प्लेटफॉर्म को मजबूत करने, दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने और अलग-अलग कारोबारों में बेहतर प्रदर्शन पर बना हुआ है।

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सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड में कलानिधि मारन व कावेरी कलानिधि की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी

सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड के निदेशक मंडल ने कलानिधि मारन और कावेरी कलानिधि की कंपनी में दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Saturday, 31 October, 2026
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सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड के निदेशक मंडल ने कलानिधि मारन और कावेरी कलानिधि की कंपनी में दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। दोनों को पांच साल के लिए फिर से कंपनी में पूर्णकालिक निदेशक के तौर पर नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, इन नियुक्तियों को लागू करने के लिए कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी होगी।

कंपनी की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को जारी सूचना के मुताबिक, बोर्ड ने कलानिधि मारन को 20 अप्रैल 2027 से 19 अप्रैल 2032 तक पांच साल के लिए पूर्णकालिक निदेशक के रूप में दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी है। इस दौरान वह कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन (Executive Chairman) की जिम्मेदारी संभालेंगे।

इसी बैठक में कावेरी कलानिधि की भी पांच साल के लिए दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उन्हें 20 अप्रैल 2027 से 19 अप्रैल 2032 तक पूर्णकालिक निदेशक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। वह कंपनी में कार्यकारी निदेशक (Executive Director) की भूमिका में रहेंगी।

शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी

सन टीवी नेटवर्क ने बताया है कि इन दोनों नियुक्तियों के प्रस्तावों को डाक मतपत्र (Postal Ballot) के जरिए शेयरधारकों के सामने रखा जाएगा। यानी बोर्ड की मंजूरी के बाद अब इन नियुक्तियों पर अंतिम सहमति शेयरधारकों से ली जाएगी।

बोर्ड की बैठक 30 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई और शाम 4:30 बजे समाप्त हुई। इसी बैठक में कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों और अंतरिम डिविडेंड से जुड़े फैसले भी लिए।

सन टीवी नेटवर्क का कारोबार

सन टीवी नेटवर्क देश की प्रमुख मीडिया और मनोरंजन कंपनियों में शामिल है। कंपनी टेलीविजन चैनलों, एफएम रेडियो, फिल्म निर्माण और डिस्ट्रीब्यूशन के साथ-साथ डिजिटल मनोरंजन कारोबार में भी सक्रिय है। इसके डिजिटल मंचों में सन एनएक्सटी शामिल है। कंपनी क्रिकेट फ्रेंचाइजी कारोबार से भी जुड़ी हुई है। 

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डीडी फ्री डिश: TV चैनलों के लिए स्लॉट आवंटन की होगी प्रक्रिया, जानें रिजर्व प्राइस व नियम

प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) पर खाली MPEG-4 स्लॉट के आवंटन के लिए 104वीं मध्यावधि ई-नीलामी की घोषणा की है।

Last Modified:
Friday, 30 October, 2026
DDFreeDish655

प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) पर खाली MPEG-4 स्लॉट के आवंटन के लिए 104वीं मध्यावधि ई-नीलामी की घोषणा की है। यह नीलामी 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि के लिए स्लॉट आवंटित करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। इसके तहत पात्र निजी सैटेलाइट टीवी चैनल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बोली में हिस्सा ले सकते हैं।

प्रसार भारती के 19 अक्टूबर 2026 के नोटिस के मुताबिक, यह नीलामी ई-नीलामी पद्धति 2025 और 9 जनवरी 2026 को किए गए संशोधनों के आधार पर होनी थी। नोटिस में नीलामी की संभावित तारीख 28 अक्टूबर 2026 तय की गई थी, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे तक थी।

पांच श्रेणियों में बांटे गए टीवी चैनल

नीलामी में चैनलों को उनकी भाषा और प्रसारण की श्रेणी के आधार पर पांच समूहों में बांटा गया है। इनमें क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों के साथ समाचार और गैर-समाचार चैनल भी शामिल हैं।

  • R1: तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा के चैनल।
  • R2: पंजाबी, मराठी, गुजराती, बांग्ला और ओड़िया भाषा के चैनल।
  • R3: संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल, जो R1 और R2 में शामिल नहीं हैं। इसमें हिंदी और उर्दू शामिल नहीं हैं।
  • G1: समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़े चैनल।
  • G2: समाचार और समसामयिक विषयों को छोड़कर दूसरी श्रेणियों के चैनल।

R1, R2 और R3 श्रेणियों में आवेदन करने वाले चैनलों को अपनी भाषा और श्रेणी से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज भी देने होंगे। कुछ मामलों में यह प्रमाण देना जरूरी है कि चैनल संबंधित डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसके लिए डीटीएच ऑपरेटर या मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (MSO) का प्रमाणपत्र मांगा जा सकता है।

किस श्रेणी के लिए कितना है रिजर्व प्राइस?

प्रसार भारती ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए शुरुआती रिजर्व प्राइस और बोली बढ़ाने की न्यूनतम राशि तय की है।

चैनल श्रेणी

शुरुआती रिजर्व प्राइस

बोली बढ़ाने की राशि

G1

₹34.71 लाख

₹1 लाख

G2

₹30.20 लाख

₹1 लाख

R2

₹17.89 लाख

₹50,000

R3

₹2.74 लाख

₹50,000

R1

₹2.49 लाख

₹50,000

रिजर्व प्राइस वह शुरुआती कीमत होती है, जिसके आधार पर नीलामी में बोली लगाई जाती है। बोली बढ़ाने की राशि से मतलब है कि अगली बोली में कम से कम कितनी बढ़ोतरी की जा सकती है।

आवेदन के लिए प्रोसेसिंग फीस और भागीदारी शुल्क

नीलामी में हिस्सा लेने वाले प्रसारकों को आवेदन जमा करने से पहले निर्धारित डीडी फ्री डिश स्लॉट पोर्टल के जरिए 25,000 रुपये की गैर-वापसी योग्य प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी।

इसके अलावा, सामान्य भागीदारी शुल्क 3 लाख रुपये तय किया गया है। हालांकि, R1 और R3 श्रेणियों के आवेदकों के लिए विशेष व्यवस्था है। वे शुरुआती रिजर्व प्राइस के 60 प्रतिशत या 3 लाख रुपये, दोनों में से जो राशि कम हो, उसका भुगतान कर सकते हैं।

आवेदन के साथ कौन से दस्तावेज जरूरी?

आवेदकों को मंत्रालय की ओर से जारी चैनल की डाउनलिंकिंग अनुमति और जहां लागू हो, अपलिंकिंग अनुमति की कॉपी जमा करनी होगी। इसके अलावा चैनल का स्वीकृत लोगो और भागीदारी शुल्क जमा करने का प्रमाण भी देना होगा।

अन्य जरूरी दस्तावेजों में चैनल की घोषित भाषा और श्रेणी के समर्थन में प्रमाण, निर्धारित शपथपत्र, बोली पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति का प्राधिकरण पत्र, भरा हुआ इंटीग्रिटी पैक्ट और आवेदक कंपनी के पैन व जीएसटी पंजीकरण की प्रतियां शामिल हैं।

चैनलों को कार्यक्रमों का शेड्यूल भी देना होगा

नीलामी के लिए जारी नोटिस में कार्यक्रमों के शेड्यूल से जुड़ी शर्तें भी रखी गई हैं। नोटिस जारी होने की तारीख पर पहले से प्रसारण कर रहे चैनलों को जुलाई, अगस्त और सितंबर 2026 का प्रोग्राम कंटेंट शेड्यूल या फिक्स्ड पॉइंट चार्ट (FPC) जमा करना होगा। इसके साथ नवंबर 2026, दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 के प्रस्तावित शेड्यूल भी देने होंगे।

जो चैनल नोटिस की तारीख पर प्रसारण शुरू नहीं कर पाए थे, उन्हें अपनी श्रेणी के मुताबिक लॉन्च योजना और प्रस्तावित कार्यक्रमों से जुड़े जरूरी दस्तावेज देने होंगे।

घोषित भाषा और कंटेंट से जुड़ी शर्तें

प्रसार भारती ने चैनलों के लिए उनकी घोषित भाषा और श्रेणी के अनुरूप कार्यक्रम प्रसारित करने की शर्त भी रखी है। नोटिस में दी गई परिभाषा के अनुसार, आवंटन अवधि के दौरान प्रसारित होने वाले कंटेंट का 75 प्रतिशत हिस्सा घोषित भाषा और श्रेणी से मेल खाना चाहिए। इस गणना में निर्धारित सीमाओं के तहत विज्ञापनों और प्रोमो को अलग रखा गया है।

इसके अलावा, चैनल के कुल मासिक कंटेंट में घोषित श्रेणी और भाषा के कंटेंट की हिस्सेदारी कम से कम 60 प्रतिशत होनी चाहिए। आवेदकों को इस संबंध में निर्धारित शपथपत्र भी देना होगा।

सफल बोलीदाताओं को 15 दिन में जमा करना होगा समझौता

नीलामी में सफल रहने वाले बोलीदाताओं को आवंटन पत्र (Letter of Allotment) दिया जाएगा। इसके साथ भुगतान का शेड्यूल और निर्धारित समझौता भी उपलब्ध कराया जाएगा।

नोटिस के मुताबिक, आवंटन पत्र जारी होने के 15 दिनों के भीतर समझौते पर हस्ताक्षर करके उसकी दो मूल प्रतियां जमा करनी होंगी। सफल बोलीदाताओं को निर्धारित समयसीमा में भुगतान करने और चैनल के प्रसारण से जुड़ी तकनीकी शर्तों का पालन भी करना होगा।

यदि कोई सफल बोलीदाता तय समय पर भुगतान नहीं करता है, तो उसकी जमा भागीदारी फीस और पहले से जमा किस्तें जब्त की जा सकती हैं। इसके अलावा, संबंधित चैनल को डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा सकता है। वहीं, असफल बोलीदाताओं की भागीदारी फीस नीलामी के नतीजे घोषित होने के तीन सप्ताह के भीतर वापस करने का प्रावधान है।

प्रसार भारती की यह प्रक्रिया डीडी फ्री डिश पर खाली MPEG-4 स्लॉट का पात्र सैटेलाइट टीवी चैनलों को आवंटन करने के लिए है। इन स्लॉट का आवंटन निर्धारित पांच महीने की अवधि के लिए किया जाना है। 

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NDTV ने 800 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना को दी मंजूरी, 9% ब्याज वाले डिबेंचर करेगी जारी

मीडिया कंपनी एनडीटीवी (NDTV) ने 800 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। इसके लिए कंपनी असुरक्षित और गैर-परिवर्तनीय स्थायी डिबेंचर जारी करेगी।

Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
NDTV547

मीडिया कंपनी एनडीटीवी (NDTV) ने 800 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। इसके लिए कंपनी असुरक्षित और गैर-परिवर्तनीय स्थायी डिबेंचर जारी करेगी। कंपनी के निदेशक मंडल ने 26 अक्टूबर को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। डिबेंचर निजी प्लेसमेंट के आधार पर एक या उससे अधिक चरणों में जारी किए जाएंगे। हालांकि, इसके लिए जरूरी नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां लेनी होंगी।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस योजना के तहत एक लाख रुपये के अंकित मूल्य वाले 80,000 डिबेंचर जारी किए जा सकते हैं। इनकी कुल राशि 800 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगी।

9% सालाना ब्याज का प्रस्ताव

NDTV के इन डिबेंचर पर सालाना 9 फीसदी की संचयी ब्याज दर प्रस्तावित है। हालांकि, ब्याज का भुगतान तभी किया जाएगा, जब कंपनी का निदेशक मंडल इसकी घोषणा करेगा। यह फैसला बोर्ड के विवेक पर निर्भर करेगा, इसलिए ब्याज का भुगतान अपने आप सुनिश्चित नहीं है।

ये स्थायी डिबेंचर होंगे, यानी इनकी कोई निश्चित परिपक्वता तारीख नहीं होगी। साथ ही, इन्हें भविष्य में कंपनी के इक्विटी शेयरों में नहीं बदला जा सकेगा। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन डिबेंचर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव नहीं है।

क्या होते हैं स्थायी डिबेंचर?

स्थायी डिबेंचर ऐसे वित्तीय साधन होते हैं, जिनकी मूल राशि लौटाने के लिए कोई निश्चित परिपक्वता तारीख तय नहीं होती। गैर-परिवर्तनीय होने का मतलब है कि इन्हें कंपनी के इक्विटी शेयरों में नहीं बदला जा सकता। वहीं, असुरक्षित डिबेंचर के बदले कंपनी की किसी खास संपत्ति को सुरक्षा के तौर पर नहीं रखा जाता।

दूसरी तिमाही में 63.51 करोड़ रुपये का घाटा

गौरतलब है कि NDTV को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में समेकित आधार पर 63.51 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का घाटा 74.01 करोड़ रुपये था।

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TRAI की सिफारिश: इंटरनेट टीवी ऐप्स को खेलों के सिग्नल साझा करने से मिलेगी छूट

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने लाइव टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स और वेबसाइट्स को लेकर नए नियमों की सिफारिश की है।

Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
TVad21

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने लाइव टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स और वेबसाइट्स को लेकर नए नियमों की सिफारिश की है। इसके तहत ऐसे प्लेटफॉर्म को खेलों के लाइव प्रसारण के सिग्नल प्रसार भारती के साथ साझा करने और कुछ तय चैनलों को अनिवार्य रूप से दिखाने की बाध्यता से छूट देने का प्रस्ताव है। फिलहाल ये नियम डिश टीवी (DTH), हेडएंड इन द स्काई (HITS) और इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) जैसी सेवाओं पर लागू होते हैं।

TRAI ने 26 अक्टूबर को जारी अपनी सिफारिशों में इंटरनेट के जरिए लाइव टीवी चैनल दिखाने वाली सेवाओं के लिए अलग अनुमति व्यवस्था का प्रस्ताव दिया है। इसे एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) सेवाएं कहा गया है। इसमें फ्री विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) प्लेटफॉर्म भी शामिल हो सकते हैं।

TRAI का कहना है कि इन सेवाओं पर वही नियम लागू होने चाहिए, जो इनके काम करने के तरीके और प्रकृति के हिसाब से जरूरी हों। इसी आधार पर नियामक ने पारंपरिक टीवी वितरण सेवाओं के कुछ नियमों को नए इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म पर लागू नहीं करने की सिफारिश की है।

खेलों के लाइव प्रसारण के सिग्नल साझा करने से छूट का प्रस्ताव

TRAI के मुताबिक, खेलों के लाइव प्रसारण के सिग्नल सार्वजनिक प्रसारक के साथ साझा करने की कानूनी जिम्मेदारी प्रसारणकर्ताओं यानी ब्रॉडकास्टर्स की है, न कि टीवी वितरण प्लेटफॉर्म की। इसी वजह से प्राधिकरण ने प्रस्तावित ALTD सेवाओं के लिए इस बाध्यता को लागू नहीं करने की सिफारिश की है।

हालांकि, इस मुद्दे पर हितधारकों की राय अलग-अलग रही। कुछ लोगों का मानना था कि यह नियम इंटरनेट पर लाइव टीवी दिखाने वाले ऐप्स पर भी लागू होना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय महत्व के बड़े खेल आयोजनों को ज्यादा से ज्यादा लोग देख सकें और उनका प्रसारण केवल किसी खास ऐप तक सीमित न रह जाए।

कुछ हितधारकों ने इंटरनेट के जरिए दिखाए जाने वाले लाइव टीवी चैनलों को भी वितरण की परिभाषा में शामिल करने का सुझाव दिया। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना था कि ALTD ऐप्स पर आम तौर पर लाइव खेल सामग्री उपलब्ध नहीं होती, इसलिए उनके लिए सिग्नल साझा करना अनिवार्य बनाने की जरूरत नहीं है।

कुछ हितधारकों ने यह भी कहा कि इंटरनेट आधारित और मांग के अनुसार सामग्री देखने वाली सेवाओं पर इस तरह की बाध्यता लागू नहीं होनी चाहिए।

कुछ चैनलों को अनिवार्य रूप से दिखाने की भी जरूरत नहीं

TRAI ने कुछ तय चैनलों को अनिवार्य रूप से दिखाने के नियम पर भी इसी तरह का रुख अपनाया है। नियामक के मुताबिक, DTH, HITS, IPTV और केबल टीवी सेवाओं में इस तरह के नियम की जरूरत इसलिए है, क्योंकि दर्शक आम तौर पर किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर होते हैं और उसी पर उपलब्ध चैनल देख सकते हैं।

इसके उलट, इंटरनेट आधारित टीवी ऐप्स के दर्शकों के पास कई विकल्प होते हैं। वे अलग-अलग ऐप्स के जरिए चैनल देख सकते हैं और किसी एक प्लेटफॉर्म या सेट-टॉप बॉक्स पर निर्भर नहीं होते।

TRAI ने इस संदर्भ में प्रसारणकर्ताओं के अपने ऐप्स का भी उल्लेख किया है। इनमें सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती का WAVES ऐप शामिल है। नियामक का मानना है कि दर्शकों के पास दूसरे विकल्प होने के कारण ALTD प्लेटफॉर्म पर कुछ चैनलों को अनिवार्य रूप से दिखाने का नियम जरूरी नहीं है।

इसलिए प्रस्ताव है कि ऐसे ऐप्स पर कौन से चैनल दिखाए जाएंगे, इसका फैसला अधिकृत ऐप संचालक व्यावसायिक आधार पर कर सकेंगे।

इस मुद्दे पर भी हितधारकों ने अलग-अलग राय दी। कुछ ने सुझाव दिया कि दूरदर्शन के चैनल, सरकार की ओर से जनहित में अधिसूचित चैनल और आपातकालीन प्रसारण संकेतों को ऐसे ऐप्स पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे दर्शकों के लिए जरूरी चैनल चुनना आसान होगा।

वहीं, कुछ हितधारकों ने कहा कि सार्वजनिक प्रसारक के चैनल दिखाने के लिए ऐप संचालकों को क्लाउड होस्टिंग और सामग्री दर्शकों तक पहुंचाने से जुड़ी अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है। एक हितधारक ने यह भी कहा कि प्रसार भारती के चैनलों को अनिवार्य रूप से दिखाने की व्यवस्था अब अपने उद्देश्य से आगे निकल चुकी है।

सेट-टॉप बॉक्स और सैटेलाइट से जुड़े नियम भी लागू नहीं होंगे

TRAI ने पारंपरिक टीवी सेवाओं पर लागू कुछ अन्य नियमों को भी ALTD सेवाओं के लिए जरूरी नहीं माना है।

इसमें सेट-टॉप बॉक्स की इंटरऑपरेबिलिटी यानी अलग-अलग सेवाओं के साथ उपकरण के काम करने की व्यवस्था शामिल है। नियामक के मुताबिक, यह नियम तभी प्रासंगिक है, जब सेवा देने के लिए ग्राहक के परिसर में इस्तेमाल होने वाला उपकरण जरूरी हो। इंटरनेट आधारित ऐप्स के मामले में ऐसा नहीं है।

इसी तरह, भारतीय सैटेलाइट के इस्तेमाल को प्राथमिकता देने वाला नियम भी इन सेवाओं पर लागू करने का प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि ALTD ऐप्स को सैटेलाइट क्षमता का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है।

इसके अलावा, एक ही समूह की कंपनियों के लिए चैनल क्षमता का कुछ हिस्सा आरक्षित रखने की व्यवस्था भी लागू नहीं करने की सिफारिश की गई है। TRAI का तर्क है कि सार्वजनिक इंटरनेट पर चलने वाले ऐप्स के लिए पारंपरिक टीवी नेटवर्क की तरह चैनल क्षमता की कोई तय सीमा नहीं होती।

ऐप्स को केंद्र सरकार से लेनी होगी अनुमति

हालांकि, इन छूटों के साथ TRAI ने ALTD सेवाओं के लिए कुछ नई शर्तें भी प्रस्तावित की हैं। ऐसे ऐप्स और वेबसाइट्स को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए टेलीविजन चैनल वितरण सेवाओं के अंतर्गत एक अलग उप-श्रेणी बनाने का प्रस्ताव है।

इन प्लेटफॉर्म को केवल उन्हीं चैनलों को दिखाने की अनुमति होगी, जिन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से मंजूरी या अनुमति मिली है अथवा जो इंटरनेट के लिए बनाए गए लीनियर चैनलों के रूप में पंजीकृत हैं।

प्रस्ताव के मुताबिक, प्रसारणकर्ता अपने चैनलों के सिग्नल केवल अधिकृत ऐप्स को ही उपलब्ध करा सकेंगे। नई व्यवस्था अधिसूचित होने के बाद इस बदलाव को लागू करने के लिए एक साल का समय देने की सिफारिश की गई है।

TRAI ने अनुमति की अवधि 20 साल रखने और इसके लिए एक लाख रुपये का एकमुश्त प्रवेश शुल्क लेने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कोई नियमित अनुमति शुल्क नहीं होगा।

टैरिफ और सेवा की गुणवत्ता पर बाद में फैसला

TRAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं से जुड़े कुछ व्यावसायिक और तकनीकी मुद्दों पर अलग से विचार किया जाएगा।

इनमें हाइब्रिड या भुगतान वाली सेवाओं के लिए टैरिफ नियम, प्रसारणकर्ताओं और ऐप संचालकों के बीच आपसी समझौते, चैनलों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने या दिखाने से जुड़े सिद्धांत और सेवा की गुणवत्ता के मानक शामिल हैं।

इन मुद्दों पर आगे का फैसला सरकार की ओर से अनुमति व्यवस्था को अंतिम रूप दिए जाने के बाद किया जाएगा।

गौरतलब है कि TRAI की ये सिफारिशें अभी अंतिम नियम नहीं हैं और न ही इन्हें लागू कर दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तय करेगा कि इन सिफारिशों के आधार पर नियम अधिसूचित किए जाएं या नहीं और उन्हें किस रूप में लागू किया जाए। 

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सन टीवी के निवेशकों को मिल सकता है अंतरिम डिविडेंड, 30 अक्टूबर को होगा फैसला

चेन्नई स्थित मीडिया कंपनी सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड के निवेशकों को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दूसरा अंतरिम डिविडेंड मिल सकता है।

Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
Suntv545

चेन्नई स्थित मीडिया कंपनी सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड के निवेशकों को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दूसरा अंतरिम डिविडेंड मिल सकता है। कंपनी ने इसके लिए 30 अक्टूबर 2026 को होने वाली बोर्ड बैठक तय की है। हालांकि, डिविडेंड देने का फैसला अभी नहीं हुआ है।

कंपनी ने 26 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि अगर बोर्ड बैठक में दूसरे अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की जाती है, तो इसके लिए गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है।

रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन से शेयरधारक डिविडेंड पाने के पात्र होंगे। यानी निवेशकों को डिविडेंड मिलेगा या नहीं और कितना मिलेगा, यह 30 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड बैठक के फैसले पर निर्भर करेगा।

कंपनी ने यह भी बताया कि अगर दूसरे अंतरिम डिविडेंड की घोषणा होती है, तो कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार घोषणा की तारीख से 30 दिनों के भीतर इसका भुगतान किया जाएगा।

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Cinépolis India व Saga Studios के बीच साझेदारी, पंजाबी फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस

सिनेमा हॉल चलाने वाली कंपनी सिनेपोलिस इंडिया (Cinépolis India) ने पंजाबी फिल्मों के अधिग्रहण और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए सागा स्टूडियोज (Saga Studios) के साथ साझेदारी की है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
Cinepolis45210

सिनेमा हॉल चलाने वाली कंपनी सिनेपोलिस इंडिया (Cinépolis India) ने पंजाबी फिल्मों के अधिग्रहण और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए सागा स्टूडियोज (Saga Studios) के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद पंजाबी फिल्मों को भारत के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी बड़े स्तर पर रिलीज करना है। शुरुआत में दोनों कंपनियां पंजाबी फिल्मों पर ध्यान देंगी। इसके बाद दूसरी क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं की फिल्मों को भी इस दायरे में शामिल किया जा सकता है।

समझौते के तहत सिनेपोलिस इंडिया और सागा स्टूडियोज मिलकर फिल्मों का चयन और अधिग्रहण करेंगी। भारत में इन फिल्मों के सिनेमाघरों में डिस्ट्रीब्यूशन की जिम्मेदारी सिनेपोलिस इंडिया संभालेगी, जबकि विदेशी बाजारों में रिलीज का काम सेवन कलर्स (Seven Colors) देखेगा।

भारत में 496 स्क्रीन का नेटवर्क

सिनेपोलिस इंडिया के प्रबंध निदेशक देवांग संपत ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में उनके सिनेमाघरों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रही हैं। पंजाबी सिनेमा की अपनी एक वफादार दर्शक संख्या है। सागा स्टूडियोज के साथ साझेदारी से कंपनी को फिल्मों के अधिग्रहण के शुरुआती चरण से जुड़ने और पूरे भारत में उनकी रिलीज की बेहतर योजना बनाने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इस साझेदारी की शुरुआत पंजाबी फिल्मों से हो रही है। आगे चलकर दूसरी भाषाओं की फिल्मों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

सिनेपोलिस इंडिया के पास देश के 57 शहरों में कुल 496 स्क्रीन हैं। उत्तर भारत में कंपनी चंडीगढ़, अमृतसर, मोहाली, लुधियाना और बठिंडा में 29 स्क्रीन संचालित करती है।

पंजाबी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश

सागा स्टूडियोज के प्रबंध निदेशक सुमीत सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पंजाबी सिनेमा में काफी बदलाव आया है। आज पंजाबी फिल्मों की कहानियों को पंजाब और भारत के बाहर भी दर्शक मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सिनेपोलिस के साथ यह साझेदारी पंजाबी फिल्मों को बड़े स्तर पर सिनेमाघरों में रिलीज करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है।

इस साझेदारी के जरिए दोनों कंपनियां पंजाबी फिल्मों के लिए भारत और विदेशी बाजारों में डिस्ट्रीब्यूशन के अवसर बढ़ाने की कोशिश करेंगी। आगे दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को शामिल करने की योजना से इस सहयोग का दायरा भी बढ़ सकता है। 

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NDTV ने FAST और कनेक्टेड टीवी पर विज्ञापन कमाई बढ़ाने के लिए Amagi से मिलाया हाथ

समाचार प्रसारक NDTV ने अपने चैनलों पर विज्ञापनों से कमाई के नए मौके बढ़ाने और दर्शकों को बेहतर अनुभव देने के लिए मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Amagi के साथ साझेदारी की है।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
amagiNDTV89745

समाचार प्रसारक NDTV ने अपने चैनलों पर विज्ञापनों से कमाई के नए मौके बढ़ाने और दर्शकों को बेहतर अनुभव देने के लिए मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Amagi के साथ साझेदारी की है। इसके तहत NDTV ने Amagi के AdFlow Orchestrator समाधान को अपनाया है, जो FAST और कनेक्टेड टीवी (CTV) प्लेटफॉर्म के हिसाब से विज्ञापनों के प्रसारण को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

FAST यानी मुफ्त विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टीवी ऐसा मंच है, जहां दर्शक बिना सब्सक्रिप्शन शुल्क दिए विज्ञापनों के साथ वीडियो सामग्री देख सकते हैं। वहीं, कनेक्टेड टीवी इंटरनेट से जुड़ा ऐसा टेलीविजन है, जिस पर ऑनलाइन वीडियो और स्ट्रीमिंग सेवाएं देखी जा सकती हैं।

लंबे विज्ञापन ब्रेक को छोटे हिस्सों में बांटेगा सिस्टम

Amagi के मुताबिक, NDTV के पारंपरिक टीवी चैनलों पर एक घंटे के दौरान विज्ञापनों के ब्रेक 15 से 18 मिनट तक लंबे हो सकते हैं। ऐसे लंबे ब्रेक FAST और कनेक्टेड टीवी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को परेशान कर सकते हैं। इससे दर्शकों के बीच में ही वीडियो छोड़ने की आशंका बढ़ती है और विज्ञापनों से कमाई के मौके भी प्रभावित हो सकते हैं।

AdFlow Orchestrator लंबे विज्ञापन ब्रेक को अपने आप छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने में मदद करेगा। इन हिस्सों को संबंधित स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाएगा, ताकि वहां विज्ञापन दिखाना आसान हो सके। इसके लिए NDTV को अपनी वीडियो फीड दोबारा संपादित करने या अलग से सामग्री तैयार करने की जरूरत नहीं होगी।

Amagi का कहना है कि इस व्यवस्था से विज्ञापन दिखाने की दर बेहतर हो सकती है, कमाई के नए अवसर खुल सकते हैं और दर्शकों को देखने का बेहतर अनुभव मिल सकता है।

NDTV को मिलेगा प्रसारण पर ज्यादा नियंत्रण

इस साझेदारी के तहत Amagi ने कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की हैं। इनमें विज्ञापन और उनके बीच दिखाई जाने वाली दूसरी सामग्री के लिए प्रसारण के दौरान बेहतर बदलाव, सामग्री कब और किस तरह दिखाई जाए इस पर संपादकीय नियंत्रण, प्रचार सामग्री में अधिक विविधता और सिस्टम के प्रदर्शन की जानकारी शामिल है।

NDTV में ग्रोथ एवं डिजिटल रणनीति के निदेशक गौतम शेलार ने कहा कि पारंपरिक टीवी के विज्ञापन ब्रेक FAST और कनेक्टेड टीवी दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किए गए थे, जिसका असर दर्शकों की भागीदारी पर पड़ रहा था। उनके मुताबिक, Amagi के समाधान से NDTV को अपनी मौजूदा वीडियो फीड या काम करने के तरीके में बड़े बदलाव किए बिना स्ट्रीमिंग दर्शकों के लिए विज्ञापनों को ढालने में मदद मिली है।

उन्होंने यह भी कहा कि Amagi ने NDTV की टीम के सुझावों के आधार पर संपादकीय नियंत्रण और सिस्टम के प्रदर्शन को समझने से जुड़ी सुविधाएं तैयार कीं।

स्ट्रीमिंग के लिए विज्ञापन व्यवस्था बेहतर करने पर जोर

Amagi में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बिक्री प्रमुख जय गणेशन ने कहा कि कंपनी का समाधान प्रसारकों को उनके मौजूदा कामकाज में बाधा डाले बिना विज्ञापनों को FAST और स्ट्रीमिंग के अनुरूप बनाने में मदद करता है। उन्होंने NDTV के साथ लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का भी उल्लेख किया।

Amagi मीडिया कंपनियों, स्ट्रीमिंग सेवाओं और सामग्री मालिकों को वीडियो तैयार करने, प्रसारित करने और उससे कमाई करने के लिए तकनीकी समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी के मुताबिक, उसका मंच 40 से अधिक देशों में 300 से ज्यादा वितरण भागीदारों के लिए 16,000 से अधिक चैनलों का प्रसारण संभालता है।

NDTV तीन दशक से अधिक समय से भारतीय पत्रकारिता में सक्रिय है और टेलीविजन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी खबरें उपलब्ध कराता है। Amagi के साथ यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है, जब पारंपरिक टीवी प्रसारक FAST और कनेक्टेड टीवी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों से कमाई बढ़ाने के तरीके तलाश रहे हैं।

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NDTV जुटाएगा फंड? बोर्ड की बैठक में कर्ज प्रतिभूतियां जारी करने के प्रस्ताव पर होगा विचार

एनडीटीवी (NDTV) का बोर्ड 26 अक्टूबर, 2026 को होने वाली बैठक में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
NDTV874

एनडीटीवी (NDTV) का बोर्ड 26 अक्टूबर, 2026 को होने वाली बैठक में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में कर्ज प्रतिभूतियां जारी करके फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

कंपनी के मुताबिक, फंड जुटाने के लिए निजी नियोजन (Private Placement), योग्य संस्थागत निवेशकों को प्रतिभूतियां जारी करने (Qualified Institutions Placement यानी QIP), तरजीही आधार पर प्रतिभूतियां जारी करने (Preferential Issue) या कानून के तहत मंजूर किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी एक या उससे अधिक चरणों में फंड जुटाने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए जरूरी नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां लेनी होंगी।

एनडीटीवी ने यह जानकारी 21 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी गई सूचना में साझा की।  

ट्रेडिंग विंडो भी बंद

कंपनी ने यह भी बताया कि उसके शेयरों में कारोबार के लिए ट्रेडिंग विंडो बंद है। यह बंदी 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के बिना ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों की घोषणा के 48 घंटे बाद तक जारी रहेगी। कंपनी ने इससे जुड़ी जानकारी 28 सितंबर को भी साझा की थी। 

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