एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से रिलायंस ग्रुप और उसके मीडिया संस्थानों पर लगाए गए आरोपों के बाद अब रिलायंस ने इन आरोपों पर अपना जवाब दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से रिलायंस ग्रुप और उसके मीडिया संस्थानों पर लगाए गए आरोपों के बाद अब रिलायंस ने इन आरोपों पर अपना जवाब दिया है। रिलायंस ग्रुप ने डॉ. सुभाष चंद्रा की टिप्पणियों को बेबुनियाद बताते हुए सभी आरोपों और इशारों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
रिलायंस की ओर से 28 अगस्त को जारी मीडिया बयान में कहा गया कि ग्रुप ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की टिप्पणियों पर निराशा जताई है।
‘आरोप और इशारे पूरी तरह खारिज’
रिलायंस ने अपने बयान में कहा कि रिलायंस ग्रुप का हिस्सा रहे मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप और इशारे पूरी तरह गलत हैं। ग्रुप ने साफ किया कि उसके मीडिया ब्रैंड्स का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया और न ही भविष्य में ऐसा किया जाएगा।
रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा, “हमारे मीडिया ब्रैंड्स का इस्तेमाल कभी किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया और न ही कभी किया जाएगा।”
डॉ. सुभाष चंद्रा के लिए सम्मान भी जताया
हालांकि, आरोपों को खारिज करने के साथ ही रिलायंस ने डॉ. सुभाष चंद्रा के प्रति सम्मान भी जताया। कंपनी ने कहा कि वह सुभाष चंद्रा को एक कारोबारी और उद्यमी के तौर पर काफी सम्मान देती है। रिलायंस ने अपने बयान के अंत में डॉ. सुभाष चंद्रा के अच्छे भविष्य की कामना भी की।
#JustIn | #RelianceGroup has noted with dismay the baseless remarks by #EsselGroup chairman Shri Subhash Chandra. It strongly denies the allegations and insinuations against the media entities that are a part of the Reliance Group.
— CNBC-TV18 (@CNBCTV18Live) August 28, 2026
“Our media brands have never been used to… pic.twitter.com/IB0Vfe85vi
NCLT कवरेज को लेकर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद सुभाष चंद्रा की ओर से रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी और रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों की कथित रिपोर्टिंग पर सवाल उठाए जाने के बाद सामने आया है। डॉ. सुभाष चंद्रा ने आरोप लगाया था कि उनके कर्ज और हालिया NCLT कार्यवाही को लेकर गलत नैरेटिव पेश किया गया। उन्होंने रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों पर उनके खिलाफ अभियान चलाने का आरोप भी लगाया था।
अब रिलायंस ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। दोनों पक्षों के बयानों के बाद यह मामला कारोबारी और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बन गया है।
समाचार प्रसारक NDTV ने अपने चैनलों पर विज्ञापनों से कमाई के नए मौके बढ़ाने और दर्शकों को बेहतर अनुभव देने के लिए मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Amagi के साथ साझेदारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
समाचार प्रसारक NDTV ने अपने चैनलों पर विज्ञापनों से कमाई के नए मौके बढ़ाने और दर्शकों को बेहतर अनुभव देने के लिए मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Amagi के साथ साझेदारी की है। इसके तहत NDTV ने Amagi के AdFlow Orchestrator समाधान को अपनाया है, जो FAST और कनेक्टेड टीवी (CTV) प्लेटफॉर्म के हिसाब से विज्ञापनों के प्रसारण को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
FAST यानी मुफ्त विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टीवी ऐसा मंच है, जहां दर्शक बिना सब्सक्रिप्शन शुल्क दिए विज्ञापनों के साथ वीडियो सामग्री देख सकते हैं। वहीं, कनेक्टेड टीवी इंटरनेट से जुड़ा ऐसा टेलीविजन है, जिस पर ऑनलाइन वीडियो और स्ट्रीमिंग सेवाएं देखी जा सकती हैं।
लंबे विज्ञापन ब्रेक को छोटे हिस्सों में बांटेगा सिस्टम
Amagi के मुताबिक, NDTV के पारंपरिक टीवी चैनलों पर एक घंटे के दौरान विज्ञापनों के ब्रेक 15 से 18 मिनट तक लंबे हो सकते हैं। ऐसे लंबे ब्रेक FAST और कनेक्टेड टीवी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को परेशान कर सकते हैं। इससे दर्शकों के बीच में ही वीडियो छोड़ने की आशंका बढ़ती है और विज्ञापनों से कमाई के मौके भी प्रभावित हो सकते हैं।
AdFlow Orchestrator लंबे विज्ञापन ब्रेक को अपने आप छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने में मदद करेगा। इन हिस्सों को संबंधित स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाएगा, ताकि वहां विज्ञापन दिखाना आसान हो सके। इसके लिए NDTV को अपनी वीडियो फीड दोबारा संपादित करने या अलग से सामग्री तैयार करने की जरूरत नहीं होगी।
Amagi का कहना है कि इस व्यवस्था से विज्ञापन दिखाने की दर बेहतर हो सकती है, कमाई के नए अवसर खुल सकते हैं और दर्शकों को देखने का बेहतर अनुभव मिल सकता है।
NDTV को मिलेगा प्रसारण पर ज्यादा नियंत्रण
इस साझेदारी के तहत Amagi ने कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की हैं। इनमें विज्ञापन और उनके बीच दिखाई जाने वाली दूसरी सामग्री के लिए प्रसारण के दौरान बेहतर बदलाव, सामग्री कब और किस तरह दिखाई जाए इस पर संपादकीय नियंत्रण, प्रचार सामग्री में अधिक विविधता और सिस्टम के प्रदर्शन की जानकारी शामिल है।
NDTV में ग्रोथ एवं डिजिटल रणनीति के निदेशक गौतम शेलार ने कहा कि पारंपरिक टीवी के विज्ञापन ब्रेक FAST और कनेक्टेड टीवी दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किए गए थे, जिसका असर दर्शकों की भागीदारी पर पड़ रहा था। उनके मुताबिक, Amagi के समाधान से NDTV को अपनी मौजूदा वीडियो फीड या काम करने के तरीके में बड़े बदलाव किए बिना स्ट्रीमिंग दर्शकों के लिए विज्ञापनों को ढालने में मदद मिली है।
उन्होंने यह भी कहा कि Amagi ने NDTV की टीम के सुझावों के आधार पर संपादकीय नियंत्रण और सिस्टम के प्रदर्शन को समझने से जुड़ी सुविधाएं तैयार कीं।
स्ट्रीमिंग के लिए विज्ञापन व्यवस्था बेहतर करने पर जोर
Amagi में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बिक्री प्रमुख जय गणेशन ने कहा कि कंपनी का समाधान प्रसारकों को उनके मौजूदा कामकाज में बाधा डाले बिना विज्ञापनों को FAST और स्ट्रीमिंग के अनुरूप बनाने में मदद करता है। उन्होंने NDTV के साथ लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का भी उल्लेख किया।
Amagi मीडिया कंपनियों, स्ट्रीमिंग सेवाओं और सामग्री मालिकों को वीडियो तैयार करने, प्रसारित करने और उससे कमाई करने के लिए तकनीकी समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी के मुताबिक, उसका मंच 40 से अधिक देशों में 300 से ज्यादा वितरण भागीदारों के लिए 16,000 से अधिक चैनलों का प्रसारण संभालता है।
NDTV तीन दशक से अधिक समय से भारतीय पत्रकारिता में सक्रिय है और टेलीविजन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी खबरें उपलब्ध कराता है। Amagi के साथ यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है, जब पारंपरिक टीवी प्रसारक FAST और कनेक्टेड टीवी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों से कमाई बढ़ाने के तरीके तलाश रहे हैं।
एनडीटीवी (NDTV) का बोर्ड 26 अक्टूबर, 2026 को होने वाली बैठक में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एनडीटीवी (NDTV) का बोर्ड 26 अक्टूबर, 2026 को होने वाली बैठक में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में कर्ज प्रतिभूतियां जारी करके फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, फंड जुटाने के लिए निजी नियोजन (Private Placement), योग्य संस्थागत निवेशकों को प्रतिभूतियां जारी करने (Qualified Institutions Placement यानी QIP), तरजीही आधार पर प्रतिभूतियां जारी करने (Preferential Issue) या कानून के तहत मंजूर किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी एक या उससे अधिक चरणों में फंड जुटाने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए जरूरी नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां लेनी होंगी।
एनडीटीवी ने यह जानकारी 21 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी गई सूचना में साझा की।
ट्रेडिंग विंडो भी बंद
कंपनी ने यह भी बताया कि उसके शेयरों में कारोबार के लिए ट्रेडिंग विंडो बंद है। यह बंदी 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के बिना ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों की घोषणा के 48 घंटे बाद तक जारी रहेगी। कंपनी ने इससे जुड़ी जानकारी 28 सितंबर को भी साझा की थी।
प्रवीण वर्मा ने टीवी टुडे नेटवर्क में राजस्थान के रेवेन्यू लीड की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एबीपी नेटवर्क में एक दशक से अधिक समय तक विज्ञापन बिक्री और बिजनेस डेवलपमेंट से जुड़े रहे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रवीण वर्मा (Praveen Verma) ने टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड (TV Today Network Ltd), जो आज तक (Aaj Tak) का संचालन करती है, में राजस्थान के रेवेन्यू लीड के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।
टीवी टुडे नेटवर्क से पहले वर्मा एबीपी नेटवर्क (ABP Network) के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने यहां एक दशक से अधिक समय तक एडवरटाइजिंग सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम किया। इस दौरान उन्होंने अकाउंट मैनेजमेंट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
एबीपी नेटवर्क में उनकी सबसे हालिया भूमिका अकाउंट डायरेक्टर की थी। उन्होंने जुलाई 2024 से अक्टूबर 2026 तक इस पद पर काम किया। इससे पहले अप्रैल 2019 से जुलाई 2024 तक वह सीनियर मैनेजर–मेजर अकाउंट्स और मई 2016 से मार्च 2019 तक मैनेजर–मेजर अकाउंट्स के पद पर रहे।
अपने करियर के शुरुआती दौर में वर्मा आज तक के साथ भी काम कर चुके हैं। मई 2010 से मई 2016 तक उन्होंने डिप्टी मैनेजर–ऐड सेल्स की जिम्मेदारी संभाली और जयपुर क्षेत्र में एडवरटाइजिंग सेल्स का अनुभव हासिल किया।
टीवी टुडे नेटवर्क में नई भूमिका के तहत प्रवीण वर्मा राजस्थान में कंपनी के रेवेन्यू की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके पास मीडिया सेल्स, प्रमुख ग्राहकों के मैनेजमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट का लंबा अनुभव है।
आईबीसी24 न्यूज़रूम में कर्मचारियों ने रामलीला का शानदार मंचन किया। डेस्क टीम के साथियों ने रामायण के पात्र निभाए और तहशीन जैदी ने हनुमान का किरदार निभाकर सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आईबीसी24 न्यूज (IBC24 News) के न्यूज़रूम में कर्मचारियों ने रामलीला का शानदार मंचन किया। आमतौर पर कैमरे के पीछे रहकर न्यूज़ तैयार करने वाले डेस्क के साथियों ने इस बार रामायण के पात्रों को मंच पर जीवंत किया। कम समय की तैयारी के बावजूद कर्मचारियों की प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया।
रामलीला का मंचन न्यूज़रूम में ही किया गया। इसमें शामिल अधिकतर कलाकार डेस्क टीम से जुड़े कर्मचारी थे। मंचन के दौरान उनकी संवाद अदायगी और अभिनय की जमकर तारीफ हुई। टेक्निकल टीम ने भी बैकड्रॉप और पूरे मंच को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
आईबीसी24 में इन-हाउस प्रस्तुति की जमकर तारीफ की गई। एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि करीब एक हजार किलोमीटर दूर बैठकर भी पूरी रामलीला देखने का अनुभव ऐसा रहा, जैसे सामने बैठकर कार्यक्रम देखा जा रहा हो। मंचन की डायरेक्शन किसने की और संवाद किसने लिखे, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन प्रस्तुति बेहद प्रभावी रही। कम दिनों की तैयारी के बावजूद कलाकारों ने शानदार तरीके से अपने किरदार निभाए।
कार्यक्रम में आईबीसी24 के चेयरमैन भी चीफ गेस्ट के तौर पर मौजूद रहे। वहीं रामलीला का सबसे खास पहलू हनुमान जी के किरदार को लेकर रहा। इस भूमिका को तहशीन जैदी ने निभाया। मुस्लिम समुदाय से आने वाले तहशीन जैदी ने हनुमान जी का किरदार इस तरह निभाया कि दर्शकों ने उनकी खूब तारीफ की।
पोस्ट में इसे सर्वधर्म समभाव की मिसाल बताया गया। साथ ही रामलीला में शामिल सभी कलाकारों और इससे जुड़े लोगों को शानदार इन-हाउस प्रस्तुति के लिए बधाई दी गई।
भारत में कनेक्टेड टीवी और फ्री विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टेलीविजन से जुड़ी इंडस्ट्री दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र संगठन बनाने की तैयारी कर रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में कनेक्टेड टीवी (CTV) और फ्री विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) से जुड़ी इंडस्ट्री दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र संगठन बनाने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या मापने के लिए एक भरोसेमंद व्यवस्था तैयार करना है। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया की टेलीविजन रेटिंग लंबे समय से जारी नहीं होने के बीच इस पहल की जरूरत और बढ़ गई है।
इस प्रस्ताव के तहत इंडिया CTV एंड FAST काउंसिल (ICFC) बनाने की बात कही गई है। यह एक गैर-लाभकारी संगठन होगा, जिसमें ब्रॉडकास्टर, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, विज्ञापनदाता, विज्ञापन एजेंसियां, विज्ञापन तकनीक से जुड़ी कंपनियां और दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्थाएं एक साझा व्यवस्था के तहत काम कर सकेंगी।
इस काउंसिल का मसौदा साझा चार्टर इंडस्ट्री से जुड़े पक्षों के बीच चर्चा, सुझावों और प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें जियोस्टार, जी, शेमारू, मैग्नाइट, द ट्रेड डेस्क, रन टीवी, क्लाउडटीवी और अन्य संगठनों की चर्चाओं और सुझावों को शामिल किया गया है।
यह प्रस्ताव टेलीविजन और विज्ञापन इंडस्ट्री के लिए ऐसे समय आया है, जब BARC की साप्ताहिक टीवी रेटिंग उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते ब्रॉडकास्टर और विज्ञापनदाता दर्शकों के प्रदर्शन को समझने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इससे मीडिया प्लानिंग, विज्ञापन सौदों पर बातचीत और विज्ञापन अभियानों के नतीजों का आकलन करना भी कठिन हो गया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की TRP नीति 2026 में भी कनेक्टेड टीवी की माप को रेटिंग एजेंसी की पात्रता के मानदंडों में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। वहीं, CTV का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल टीवी स्क्रीन, स्ट्रीमिंग सेवाओं और डिजिटल विज्ञापन के बीच एक जैसे मापदंड तैयार करने की जरूरत को बढ़ा रहा है।
हालांकि, ICFC का उद्देश्य BARC की जगह लेना या अपना अलग रेटिंग कारोबार शुरू करना नहीं है। प्रस्तावित चार्टर के मुताबिक, यह काउंसिल दर्शकों की संख्या मापने के लिए साझा परिभाषाएं, तकनीकी मानक और स्वतंत्र जांच की व्यवस्था तैयार करेगी। इसके अलावा, यह प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने के लिए किसी मौजूदा मापन या रेटिंग एजेंसी के चयन में भी मदद कर सकती है।
CTV पर दर्शकों की संख्या मापना होगी पहली प्राथमिकता
प्रस्तावित काउंसिल के सामने शुरुआती चुनौती कनेक्टेड टीवी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या मापने के बिखरे हुए तरीकों को एक समान बनाना होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों और विज्ञापनों से जुड़ी गतिविधियों का आंकड़ा सभी व्यूइंग के आधार पर जुटाने की संभावना हो सकती है। इसके उलट, पारंपरिक टेलीविजन की रेटिंग के लिए तय संख्या में चुने गए घरों के नमूने के आधार पर दर्शकों की देखने की आदतों का आकलन किया जाता है।
हालांकि, चार्टर में कहा गया है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर आंकड़ों का अलग-अलग तरीके से उपलब्ध होना, रिपोर्टिंग के तरीकों में अंतर और जांच के लिए साझा मानकों की कमी के कारण सेवाओं के बीच दर्शकों की संख्या की सीधी तुलना करना मुश्किल होता है।
CTV इंडस्ट्री से जुड़े एक पक्ष ने कहा, “विज्ञापनदाताओं के लिए इससे उन अभियानों का आकलन करना मुश्किल हो जाता है, जो पारंपरिक टेलीविजन, स्ट्रीमिंग ऐप और CTV पर चलाए जाते हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म अपने यहां देखने से जुड़े आंकड़े जुटा सकते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट जरूरी नहीं कि दर्शकों की संख्या का स्वतंत्र रूप से जांचा गया और पूरी इंडस्ट्री में मान्य आंकड़ा पेश करे।”
BARC की रेटिंग बंद होने से ऐसे मानक बनाने की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है। हालांकि, दोनों समस्याएं अलग-अलग हैं। पारंपरिक टीवी की रेटिंग दोबारा शुरू करने के लिए सामान्य टेलीविजन के मापन की व्यवस्था को चालू करना जरूरी है। वहीं, CTV की माप के लिए बंटे हुए डिजिटल वितरण, दर्शकों के हिसाब से अलग-अलग विज्ञापन दिखाने की सुविधा और प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों को ध्यान में रखना होगा।
ICFC का प्रस्ताव CTV और व्यापक डिजिटल टेलीविजन व्यवस्था में दर्शकों की संख्या मापने और रिपोर्टिंग के लिए एक भरोसेमंद, साझा और स्वतंत्र रूप से संचालित ढांचा तैयार करने का है।
इस ढांचे के तहत दर्शकों, कंटेंट, चैनलों और विज्ञापनों की साझा परिभाषाएं तय की जाएंगी। साथ ही, रिपोर्टिंग के एक समान सिद्धांत और ऐसे मापदंड तैयार किए जाएंगे, जिनकी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तुलना की जा सके। इनमें देखने में बिताया गया समय, दर्शकों की संख्या, विज्ञापन दिखाए जाने की संख्या, विज्ञापन देखने की दर, विज्ञापन पर क्लिक करने की दर और बीच में कंटेंट छोड़ने की दर शामिल होंगी।
इस व्यवस्था में निजता की सुरक्षा, स्वतंत्र ऑडिट और आंकड़ों की गुणवत्ता जांचने के मानक भी शामिल होंगे।
पूरी इंडस्ट्री के लिए एक साझा व्यवस्था बनने से विज्ञापनदाताओं की निर्भरता अलग-अलग प्लेटफॉर्म की अपनी रिपोर्टिंग पद्धतियों पर कम हो सकती है। इससे उन्हें डिजिटल टेलीविजन में किए गए निवेश का आकलन करने के लिए एक जैसा आधार मिल सकता है।
हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बड़े ब्रॉडकास्टर, स्ट्रीमिंग सेवाएं, विज्ञापनदाता और तकनीकी कंपनियां इसमें कितनी भागीदारी करती हैं।
काउंसिल स्वतंत्र एजेंसी से करा सकती है मापन का काम
प्रस्तावित चार्टर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें मापन की व्यवस्था को स्वतंत्र रखने पर जोर दिया गया है।
ICFC अपनी अलग मापन सहायक कंपनी बनाने या खुद व्यावसायिक रेटिंग कारोबार शुरू करने का प्रस्ताव नहीं रखती। इसके बजाय, यह तकनीकी जरूरतें, मापन से जुड़े दिशा-निर्देश और व्यवस्था लागू करने के सिद्धांत तय करेगी। इसके बाद पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किसी मौजूदा स्वतंत्र मापन या रेटिंग एजेंसी के चयन में मदद की जा सकती है।
चार्टर में यह तय नहीं किया गया है कि आंकड़े जुटाने के लिए कौन-सी तकनीक इस्तेमाल होगी। इस पर तकनीकी जांच के बाद फैसला लिया जा सकता है। संभावित विकल्पों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK), एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API), दोनों का मिला-जुला मॉडल या तकनीकी आकलन में सामने आने वाला कोई अन्य तरीका शामिल है।
SDK आधारित व्यवस्था से इसमें शामिल सेवाओं पर देखने और विज्ञापन से जुड़े जरूरी आंकड़ों को एक समान तरीके से जुटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए आंकड़ों की परिभाषाओं, तकनीकी तालमेल, निजता की सुरक्षा और स्वतंत्र मापन एजेंसी को मिलने वाली जानकारी की सीमा पर सहमति बनानी होगी।
चार्टर के मुताबिक, चुनी गई तकनीकी व्यवस्था पर निगरानी और स्वतंत्र ऑडिट होगा, ताकि बिना अनुमति लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने या आंकड़ों का गलत इस्तेमाल करने से बचा जा सके। इसमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 को भी चर्चा और नीतिगत विचार-विमर्श का एक अहम विषय बताया गया है।
प्रस्तावित ऑडियंस मेजरमेंट वर्किंग ग्रुप के तहत एक ऑडियंस मेजरमेंट टेक्निकल कमेटी बनाई जाएगी। यह समिति मापन के तरीकों, आंकड़ों की संरचना, निजता, अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल, तकनीकी जांच और ऑडिट पर काम करेगी। साथ ही, यह मापन के लिए उपलब्ध अलग-अलग तकनीकों की व्यावहारिकता का आकलन भी करेगी।
आखिरकार इस सेवा का इस्तेमाल कैसे होगा, इसकी सदस्यता या शुल्क का मॉडल क्या होगा और इससे जुड़े दूसरे व्यावसायिक पहलू कैसे तय किए जाएंगे, इस पर बाद में काउंसिल की संचालन व्यवस्था के तहत फैसला लिया जाएगा।
BARC की रेटिंग बंद होने से साझा मापन व्यवस्था की जरूरत बढ़ी
यह प्रस्ताव भारत में दर्शकों की संख्या मापने की व्यवस्था के भविष्य को लेकर चल रही व्यापक चर्चा के बीच आया है।
BARC की रेटिंग उपलब्ध नहीं होने से वह स्थापित व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिसके जरिए ब्रॉडकास्टर, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां टीवी दर्शकों की संख्या का आकलन करते हैं। नियमित रेटिंग उपलब्ध नहीं होने के कारण बाजार से जुड़े पक्षों को चैनलों के प्रदर्शन का आकलन करने, विज्ञापन अभियान की योजना बनाने और विज्ञापन पर हुए खर्च से मिलने वाले नतीजों को समझने में मुश्किल हो रही है।
CTV ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। अब दर्शक स्मार्ट टीवी के ऑपरेटिंग सिस्टम, स्ट्रीमिंग ऐप, ब्रॉडकास्टर की अपनी डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट के जरिए कंटेंट देने वाले दूसरे प्लेटफॉर्म पर बंटे हुए हैं। इन सेवाओं के पास अपने दर्शकों से जुड़ा आंकड़ा हो सकता है, लेकिन मापन और रिपोर्टिंग के तरीकों में अंतर होने के कारण इनकी सीधी तुलना करना आसान नहीं है।
इंडस्ट्री की स्वतंत्र व्यवस्था डिजिटल टेलीविजन के दर्शकों की संख्या मापने के लिए साझा मानक तैयार करने में मदद कर सकती है। हालांकि, इससे अकेले BARC की रेटिंग बहाल करने से जुड़ी नियामकीय, संचालन संबंधी या संस्थागत समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
विज्ञापनदाताओं के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकता है, जिसमें पारंपरिक टीवी और CTV पर किए गए विज्ञापन निवेश का आकलन एक जैसे और स्वतंत्र रूप से जांचे गए मानकों के आधार पर हो सके।
इसके लिए केवल साझा तकनीकी मानक बनाना काफी नहीं होगा। इंडस्ट्री के बड़े हिस्से की भागीदारी और मापन की व्यवस्था के संचालन पर भरोसा भी जरूरी होगा।
विज्ञापन धोखाधड़ी रोकना और सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाना दूसरा प्रमुख लक्ष्य
दर्शकों की संख्या मापने के साथ-साथ ICFC विज्ञापन धोखाधड़ी रोकने और विज्ञापन की सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाने को भी अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने का प्रस्ताव रखती है।
CTV में बड़े टीवी स्क्रीन पर देखने के अनुभव के साथ डिजिटल विज्ञापन की वे सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनके जरिए अलग-अलग दर्शकों को उनकी रुचि के हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं और उनके नतीजों को मापा जा सकता है।
लेकिन विज्ञापन से जुड़े संकेतों में अंतर, बिखरी हुई रिपोर्टिंग और विज्ञापन सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों की सीमित जानकारी पारदर्शिता को कमजोर कर सकती है। इससे विज्ञापन में धोखाधड़ी या आंकड़ों में गड़बड़ी का पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है।
चार्टर में विज्ञापन संकेतों के लिए साझा मानक और उन्हें लागू करने के दिशा-निर्देश तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके तहत विज्ञापन अनुरोधों और उनसे जुड़े मेटाडेटा की एक समान परिभाषा तय करने के साथ संकेतों की जांच और धोखाधड़ी का पता लगाने की साझा प्रक्रिया भी बनाई जाएगी।
इसके अलावा, ऐसी पारदर्शी रिपोर्टिंग व्यवस्था तैयार करने की योजना है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि विज्ञापन संकेत सप्लाई चेन से गुजरते समय कहां कमी या नुकसान हो रहा है। इस दिशा में अधिकृत विक्रेताओं की एक पंजीकृत सूची बनाने का विकल्प भी विचाराधीन है।
काउंसिल जरूरत के मुताबिक इंटरएक्टिव ऐडवर्टाइजिंग ब्यूरो (IAB) जैसे संगठनों के पहले से मौजूद इंडस्ट्री मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, ताकि एक जैसे काम के लिए अलग-अलग ढांचे बनाने से बचा जा सके। यह विज्ञापन के मानक प्रारूपों को भी बढ़ावा देगी, लेकिन नए प्रयोगों की गुंजाइश बनाए रखेगी।
चार्टर के मुताबिक, इन कदमों का मकसद नियमों को एक समान तरीके से लागू करना, विज्ञापन अनुरोधों को ज्यादा स्पष्ट बनाना, रिपोर्टिंग में सुधार करना और आंकड़ों की बेहतर जांच सुनिश्चित करना है। इससे विज्ञापन धोखाधड़ी कम करने और CTV विज्ञापन व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ICFC विज्ञापन की कीमतें तय नहीं करेगी और न ही प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच व्यावसायिक शर्तों के तालमेल की व्यवस्था करेगी। उसका काम मानक, पारदर्शिता और उन्हें लागू करने के सिद्धांतों तक सीमित रहेगा। सदस्यों के बीच सहयोग के दौरान प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े सुरक्षा उपायों का पालन भी जरूरी होगा।
वितरण व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर भी काम करेगी काउंसिल
दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन के अलावा, प्रस्तावित काउंसिल टीवी वितरण के पुराने और नए तरीकों से जुड़े मुद्दों पर भी काम करेगी।
इसके संभावित कार्यक्षेत्र में सभी को उचित पहुंच देना, भेदभाव से बचना, अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल बढ़ाना, मेटाडेटा और सिग्नलिंग के मानक तय करना, नए प्लेटफॉर्म को व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया और रिपोर्टिंग के तरीके शामिल हैं। वितरण के क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा बाजार शक्ति एक जगह केंद्रित होने से बचाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
चार्टर में उचित हिस्सेदारी और मूल्य के बंटवारे से जुड़े सिद्धांतों का भी जिक्र है, जहां ये लागू होते हों। हालांकि, इसमें फिर से स्पष्ट किया गया है कि काउंसिल प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच ऐसे व्यावसायिक नियम तय नहीं करेगी, जो प्रतिस्पर्धा के लिहाज से संवेदनशील हों।
ICFC सरकार और नियामक संस्थाओं के साथ होने वाली चर्चाओं में इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने की कोशिश करेगी। चार्टर में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 और डिजिटल कॉम्पिटिशन बिल को उन नीतिगत विषयों में शामिल किया गया है, जिन पर काउंसिल संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श करना चाहती है।
इसका घोषित उद्देश्य ऐसी नीतियों की वकालत करना है, जो कारोबार को आगे बढ़ने का अवसर दें और जरूरत के मुताबिक संतुलित नियम लागू करें। इसमें बाजार में मजबूत स्थिति का गलत इस्तेमाल रोकने और भारत के भीतर शिकायत या विवाद के समाधान के प्रभावी रास्ते उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
काउंसिल अपनी संचालन व्यवस्था के तहत जिन मुद्दों पर सहमति बनाएगी, उन्हीं पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखेगी। इस तरह नीतिगत मुद्दों पर उसकी वकालत को सदस्यों के बीच होने वाली व्यावसायिक बातचीत से अलग रखा जाएगा।
काउंसिल की विश्वसनीयता तय करेंगे संचालन और फंडिंग के नियम
प्रस्तावित काउंसिल की संरचना पांच प्रमुख समूहों को प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार की गई है। इनमें ब्रॉडकास्टर और कंटेंट के मालिक, CTV-OTT और FAST प्लेटफॉर्म, विज्ञापनदाता और ब्रांड, विज्ञापन एजेंसियां तथा विज्ञापन तकनीक और कमाई से जुड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
मापन, विश्लेषण, तकनीक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां भी उचित सदस्यता या कार्य समूहों के जरिए इसमें भाग ले सकती हैं। चार्टर के मुताबिक, प्रतिनिधित्व का संतुलन ऐसा होना चाहिए कि किसी एक समूह या व्यावसायिक हित का फैसलों पर जरूरत से ज्यादा प्रभाव न पड़े।
चार्टर को मंजूरी मिलने और संस्थापक सदस्यों के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक अंतरिम संचालन समिति बनाई जाएगी। यह समिति कानूनी इकाई और सचिवालय की स्थापना की देखरेख करेगी, शुरुआती फंडिंग मॉडल तय करेगी और अलग-अलग कार्य समूह बनाएगी।
गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए भारत में इस्तेमाल होने वाली कानूनी संरचना, कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत कंपनी बनाना भी विचाराधीन विकल्पों में शामिल है। हालांकि, इस पर कानूनी, कर और नियामकीय सलाह के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
संस्थापक सदस्यों से उम्मीद की जा रही है कि वे काउंसिल की स्थापना और पहले साल के संचालन का खर्च उठाने के लिए शुरुआत में वित्तीय योगदान देंगे। चार्टर में इस योगदान की कोई निश्चित राशि नहीं बताई गई है। इसकी रकम, ढांचा और भुगतान का समय अंतरिम संचालन समिति तय करेगी।
लंबे समय तक कामकाज जारी रखने के लिए सदस्यता शुल्क और मंजूर किए गए दूसरे वित्तीय स्रोतों का सहारा लिया जा सकता है।
दस्तावेज में इस बात पर जोर दिया गया है कि किसी सदस्य का ज्यादा पैसा देना उसे काउंसिल के फैसलों पर दूसरों से ज्यादा अधिकार नहीं देगा। इसमें पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया, हितों के टकराव की जानकारी देने और उसे संभालने के नियमों तथा प्रतिस्पर्धा की दृष्टि से संवेदनशील जानकारी साझा होने से रोकने के उपायों की भी बात कही गई है।
ये प्रावधान इसलिए अहम हैं, क्योंकि प्रस्तावित काउंसिल ऐसे मानक तैयार करना चाहती है, जिन पर दर्शकों और विज्ञापन बजट के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने वाली कंपनियां भी भरोसा कर सकें।
साझा मापन व्यवस्था की सफलता इंडस्ट्री के भरोसे पर निर्भर
BARC की रेटिंग बंद होने से टीवी विज्ञापन के लिए दर्शकों की संख्या मापने की भरोसेमंद व्यवस्था का महत्व सामने आया है। वहीं, CTV और FAST के बढ़ते इस्तेमाल ने पहले से बंटे हुए बाजार को और जटिल बना दिया है।
इंडस्ट्री की अगुवाई में तैयार होने वाला एक स्वतंत्र ढांचा डिजिटल मापन से जुड़ी कमियों को दूर करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसकी विश्वसनीयता पारदर्शी संचालन, स्वतंत्र जांच, एक जैसे तकनीकी मानकों और पूरी इंडस्ट्री की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी।
फिलहाल, यह प्रस्ताव भारत के डिजिटल टेलीविजन क्षेत्र को दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन से जुड़े साझा मानकों के तहत एकजुट करने की कोशिश है। आगे चलकर यह पहल पूरी इंडस्ट्री में स्वीकार की जाने वाली मापन व्यवस्था बन पाती है या नहीं, इसी से तय होगा कि टीवी और स्ट्रीमिंग के लगातार एक-दूसरे के करीब आने के दौर में इसकी कितनी अहमियत होगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में भुगतान वाली डायरेक्ट-टू-होम (DTH) टीवी सेवाओं के ग्राहकों की संख्या एक साल में 75.1 लाख घट गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में पारंपरिक टीवी प्रसारण और रेडियो कारोबार पर दबाव बना हुआ है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में भुगतान वाली डायरेक्ट-टू-होम (DTH) टीवी सेवाओं के ग्राहकों की संख्या एक साल में 75.1 लाख घट गई। वहीं, निजी एफएम रेडियो कंपनियों की विज्ञापन से होने वाली कमाई में भी गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में यह कमाई पिछली तिमाही के मुकाबले 9.1% कम रही।
TRAI की तिमाही प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, देश के चार भुगतान वाले DTH ऑपरेटरों के सक्रिय ग्राहकों की संख्या 30 जून 2026 तक घटकर 4.856 करोड़ रह गई। एक साल पहले, 30 जून 2025 को यह संख्या 5.607 करोड़ थी। यानी सालाना आधार पर इसमें करीब 13.4% की गिरावट आई।
ग्राहकों की संख्या में गिरावट का सिलसिला हाल की तिमाही में भी जारी रहा। मार्च 2026 में इन ऑपरेटरों के सक्रिय ग्राहकों की संख्या 4.905 करोड़ थी, जो जून में घटकर 4.856 करोड़ रह गई।
Tata Play सबसे आगे, Airtel दूसरे स्थान पर
भुगतान वाली DTH सेवाओं में Tata Play सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है। 30 जून 2026 तक उसके 1.484 करोड़ ग्राहक थे और बाजार में उसकी हिस्सेदारी 30.56% रही।
भारती टेलीमीडिया 1.358 करोड़ ग्राहकों के साथ दूसरे स्थान पर रही। उसकी बाजार हिस्सेदारी 27.97% थी। वहीं, Sun Direct के 1.093 करोड़ और Dish TV India के 92.1 लाख ग्राहक थे।
इन आंकड़ों में प्रसार भारती की मुफ्त DTH सेवा DD Free Dish के ग्राहक शामिल नहीं हैं।
टीवी वितरण के अलग-अलग माध्यमों पर 9.67 करोड़ सक्रिय ग्राहक
TRAI की रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी वितरण के चुनिंदा ऑपरेटरों के पास 30 जून 2026 तक कुल 9.673 करोड़ सक्रिय ग्राहक थे। इस आंकड़े में ऐसे ग्राहक भी शामिल हैं, जिनकी सेवा 90 दिनों तक निष्क्रिय रही थी या अस्थायी रूप से निलंबित थी।
इनमें DTH सेवाओं के 4.856 करोड़ ग्राहक थे। इसके बाद केबल टीवी का स्थान रहा, जहां मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (MSO) के पास 3.724 करोड़ ग्राहक थे।
इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) के ग्राहकों की संख्या 62.1 लाख रही, जबकि हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS) सेवाओं के ग्राहकों की संख्या 47.2 लाख दर्ज की गई।
IPTV क्षेत्र में भारती एयरटेल सबसे आगे रही। उसके 40.9 लाख ग्राहक थे, जबकि Hathway Digital के पास 12.8 लाख ग्राहक थे।
वहीं, HITS क्षेत्र में GTPL Hathway के 31 लाख ग्राहक थे। इस मामले में NXTDIGITAL 16.1 लाख ग्राहकों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
सभी ऑपरेटरों का पूरा आंकड़ा नहीं
TRAI ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े सभी पंजीकृत ऑपरेटरों के बजाय चुनिंदा कंपनियों की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित हैं।
देश में पंजीकृत 736 मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों में से केवल 127 ने TRAI को अपने ग्राहकों की संख्या बताई। वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास स्व-घोषणा जमा करने वाले 76 IPTV ऑपरेटरों में से केवल 12 ने ग्राहकों का आंकड़ा दिया। दोनों HITS ऑपरेटरों ने अपनी जानकारी उपलब्ध कराई।
इसलिए, टीवी वितरण के अलग-अलग माध्यमों के ये आंकड़े संबंधित क्षेत्र के सभी ऑपरेटरों की कुल ग्राहक संख्या को पूरी तरह नहीं दर्शाते।
देश में 915 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अनुमति
TRAI की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 तक भारत में 915 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अनुमति मिली हुई थी। इनमें से 906 चैनल देश में डाउनलिंकिंग यानी प्रसारण के लिए उपलब्ध थे।
इन 915 चैनलों में 342 पे चैनल और 564 मुफ्त प्रसारण वाले चैनल थे। मार्च 2026 के मुकाबले पे चैनलों की संख्या में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन एक साल पहले दर्ज 333 चैनलों के मुकाबले यह संख्या अधिक थी।
कुल 342 पे चैनलों में 238 स्टैंडर्ड डेफिनिशन (SD) और 104 हाई डेफिनिशन (HD) चैनल शामिल थे।
श्रेणी के हिसाब से देखें तो सामान्य मनोरंजन के सबसे ज्यादा 108 पे चैनल थे। इसके बाद फिल्मों के 63 और समाचार एवं समसामयिक मामलों के 61 चैनल थे। खेल से जुड़े 41 चैनल थे, जबकि बच्चों के कार्यक्रमों के 24 और जानकारी व मनोरंजन से जुड़े 23 चैनल थे।
निजी FM रेडियो की विज्ञापन कमाई 9.1% घटी
टीवी के साथ-साथ निजी एफएम रेडियो कारोबार में भी दबाव देखने को मिला। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में निजी एफएम रेडियो प्रसारकों की विज्ञापन से होने वाली कमाई 376.16 करोड़ रुपये रही। पिछली तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2026 में यह 414.03 करोड़ रुपये थी। इस तरह तिमाही आधार पर कमाई में 9.1% की गिरावट आई।
इससे पहले अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में विज्ञापन से कमाई 419.29 करोड़ रुपये थी। सालाना आधार पर भी कमाई घटी है। अप्रैल-जून 2025 में निजी एफएम रेडियो प्रसारकों ने विज्ञापन से 383.14 करोड़ रुपये कमाए थे, जबकि अप्रैल-जून 2026 में यह घटकर 376.16 करोड़ रुपये रह गई।
निजी FM चैनलों की संख्या भी घटी
जून 2026 में देश में चालू निजी एफएम रेडियो चैनलों की संख्या घटकर 386 रह गई, जबकि मार्च में यह 390 थी। TRAI के मुताबिक, पांच चैनलों की अनुमति वापस किए जाने के कारण चैनलों की संख्या में गिरावट आई।
हालांकि, निजी एफएम रेडियो वाले शहरों की संख्या 120 से बढ़कर 121 हो गई। इस दौरान निजी एफएम रेडियो ऑपरेटरों की संख्या भी 31 से घटकर 30 रह गई।
कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या बढ़ी
जहां निजी एफएम रेडियो चैनलों की संख्या घटी, वहीं कम्युनिटी रेडियो का विस्तार जारी रहा। जून 2026 तक देश में चालू कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या बढ़कर 578 हो गई। एक साल पहले जून 2025 में इनकी संख्या 540 थी, जबकि मार्च 2026 में 566 स्टेशन चालू थे।
इस तरह सालाना आधार पर कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या में 38 की बढ़ोतरी हुई, जो करीब 7% है।
TRAI के ये आंकड़े बताते हैं कि भुगतान वाली DTH सेवाओं के ग्राहक लगातार घट रहे हैं और निजी एफएम रेडियो की विज्ञापन कमाई पर भी दबाव है। दूसरी ओर, कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड ने अपनी सहायक कंपनी न्यूज24 ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड (News24 Broadcast India Limited) में आयुष मिश्रा को कंपनी सचिव नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड (B.A.G. Films and Media Limited) ने अपनी सहायक कंपनी न्यूज24 ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड (News24 Broadcast India Limited) में आयुष मिश्रा को कंपनी सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 13 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो गई है।
कंपनी ने 13 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि आयुष मिश्रा को कंपनी सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 203 और इसके अन्य लागू प्रावधानों के तहत की गई है।
बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया ने इस नियुक्ति की जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की है। कंपनी ने यह सूचना सेबी के लिस्टिंग दायित्वों और जानकारी देने से जुड़े नियमों, 2015 के नियम 30 के अनुपालन में बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी है।
आयुष मिश्रा का आईसीएसआई सदस्यता नंबर ACS 81466 है। कंपनी ने नियुक्ति से जुड़ी जरूरी जानकारी भी नियामकीय नियमों के अनुसार साझा की है।
यह जानकारी बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड के कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी अजय मिश्रा की ओर से जारी की गई है।
वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत 12 अक्टूबर से न्यूज18 इंडिया के प्राइम टाइम डिबेट शो ‘आर पार’ की मेजबानी करेंगी। कार्यक्रम रोज शाम 6:50 बजे प्रसारित होगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट पत्रकार और एंकर रुबिका लियाकत (Rubika Liyaquat) 12 अक्टूबर से न्यूज18 इंडिया (News18 India) के चर्चित प्राइम टाइम डिबेट शो ‘आर पार’ की मेजबानी करेंगी। एक घंटे का यह शो रोज शाम 6:50 बजे प्रसारित होगा।
न्यूज18 इंडिया के प्रमुख प्राइम टाइम कार्यक्रमों में शामिल ‘आर पार’ दिन के बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर सीधी और तीखी बहस के लिए जाना जाता है। शो में अलग-अलग विचारों और नजरियों को सामने रखते हुए यह समझने की कोशिश की जाती है कि इन मुद्दों का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है।
रुबिका लियाकत के नेतृत्व में शो नए दौर में प्रवेश करेगा, लेकिन इसका मूल एडिटोरियल फॉर्मेट बरकरार रहेगा। कार्यक्रम में मुद्दों पर स्पष्ट रुख के साथ विरोधी विचारों को भी अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। रुबिका अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस, सटीक सवालों और दर्शकों के साथ बेहतर जुड़ाव के साथ शो में बातचीत के साथ निर्णायक अंदाज लेकर आएंगी।
अपने नए शो को लेकर रुबिका लियाकत ने कहा कि ‘आर पार’ न्यूज18 इंडिया के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है और दर्शकों का इससे लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि वह इसकी विरासत को अपने अंदाज में आगे बढ़ाने को लेकर उत्साहित हैं। उनकी प्राथमिकता तीखे सवाल, बेबाक बातचीत और दर्शकों के साथ मजबूत जुड़ाव होगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है। प्राधिकरण ने इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर, 2026 तय की गई है।
ट्राई ने यह मसौदा 9 अक्टूबर, 2026 को जारी किया। इसका पूरा नाम ‘टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज DRM-बेस्ड डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम्स ऑडिट मैनुअल, 2026’ है। इसका मकसद DRM आधारित सिस्टम के नियमों के पालन की जांच के लिए ऑडिट प्रक्रिया को विस्तार से बताना है।
टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं का सालाना ऑडिट जरूरी
ट्राई के मुताबिक, टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज इंटरकनेक्शन (एड्रेसेबल सिस्टम्स) रेगुलेशंस, 2017 के तहत टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशंस के डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) का सालाना ऑडिट जरूरी है। इसमें नियमों के प्रावधानों के अनुसार कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (CAS), सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), DRM और इनसे जुड़े अन्य सिस्टम शामिल हैं।
इन नियमों की अनुसूची-X (Schedule X) में DRM आधारित सिस्टम के लिए आवश्यक प्रावधान दिए गए हैं। ये प्रावधान मुख्य रूप से इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) आधारित डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं से जुड़े हैं।
पहले जारी हो चुका है डिजिटल सिस्टम के ऑडिट का मैनुअल
ट्राई ने 10 मार्च, 2026 को डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए एक मैनुअल जारी किया था। इसमें नियमों की अनुसूची-III के तहत आने वाले सिस्टम के लिए अलग-अलग प्रावधानों के अनुसार ऑडिट प्रक्रिया बताई गई थी। इसमें CAS, SMS और सेट-टॉप बॉक्स (STB) आधारित सिस्टम शामिल हैं। हालांकि, DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए भी इसी तरह के विस्तृत मैनुअल की जरूरत महसूस की गई। IPTV ऑपरेटरों, प्रसारकों और ऑडिटरों सहित कई संबंधित पक्षों ने इस जरूरत को उठाया था।
इसी को ध्यान में रखते हुए ट्राई ने अब DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए अलग मैनुअल का मसौदा तैयार किया है। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों को अनुसूची-X के प्रावधानों के पालन की जांच करने की प्रक्रिया समझाने में मदद करना है। इसे ऑडिट के दौरान मार्गदर्शन देने वाले दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है।
मसौदे में ऑडिट से जुड़े कई अहम प्रावधान
DRM ऑडिट मैनुअल के मसौदे में कई महत्वपूर्ण बातें शामिल की गई हैं:
इन प्रावधानों का उद्देश्य DRM आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट को व्यवस्थित करना और संबंधित पक्षों को नियमों के पालन की जांच के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराना है।
30 अक्टूबर तक भेज सकते हैं सुझाव
ट्राई ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से लिखित सुझाव, टिप्पणियां और प्रस्ताव मांगे हैं। सुझावों के साथ उनके पीछे के कारण, औचित्य और संबंधित आंकड़े या सबूत देना भी जरूरी बताया गया है।
हितधारक अपने सुझाव 30 अक्टूबर, 2026 तक ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। इसके लिए advbcs2@trai.gov.in और jtadvbcs-3@trai.gov.in ईमेल पते दिए गए हैं। ट्राई ने सुझाव इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने को प्राथमिकता देने की बात कही है।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है। इस नए अध्याय की नींव तीन बातों पर रखी गई है- नया ऑफिस, नया विजन और नए शोज।
कंपनी ने अपनी वर्षगांठ के संदेश में कहा, “एक नया अध्याय शुरू हो रहा है और हम इससे ज्यादा उत्साहित नहीं हो सकते।”
31 साल के सफर की विरासत
SPNI ने कहा कि तीन दशक से ज्यादा समय से वह भारत के मनोरंजन सफर का हिस्सा रहा है। कंपनी के मुताबिक, उसने यादगार कहानियों, लोगों के पसंदीदा शोज और खेलों के यादगार पलों के जरिए लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया है।
कंपनी की यह बात उसके अब तक के सफर को भी दिखाती है, जिसमें मनोरंजन और खेल, दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दर्शक जहां गए, कंपनी भी उसी दिशा में
SPNI का नया कदम इस बात को ध्यान में रखते हुए है कि आज दर्शकों के मनोरंजन देखने का तरीका काफी बदल चुका है। दर्शक अब अलग-अलग स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं में मनोरंजन कंटेंट देख रहे हैं।
कंपनी ने कहा कि आज जब दर्शक नए स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं के जरिए मनोरंजन खोज रहे हैं, तो वह भी उनके साथ खुद को बदल रही है। कंपनी ने आगे कहा, “नए विजन, नई शुरुआत और आगे आने वाले नए अवसरों के साथ हम यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि हम मिलकर क्या बना सकते हैं।”
‘Chapter 31’ की तीन बड़ी बातें
SPNI की वर्षगांठ के लिए जारी किए गए क्रिएटिव में Sony Pictures का लोगो और “Happy 31st Anniversary!” लिखा गया है। इसमें ‘Chapter 31’ के तीन मुख्य स्तंभ भी बताए गए हैं।
पहला- नया ऑफिस: इसे “एक नया घर, एक नई शुरुआत” के तौर पर पेश किया गया है।
दूसरा- नया विजन: कंपनी ने अपने नए विजन को “कंटेंट-फर्स्ट, प्लेटफॉर्म एग्नॉस्टिक, मल्टी-लिंगुअल एंटरटेनमेंट” बताया है। यानी कंटेंट सबसे पहले होगा, उसे किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा और अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।
तीसरा- नए शोज: इसके तहत कंपनी ने “नई सोच और यादगार पलों” का वादा किया है।
इस क्रिएटिव के आखिर में उन सभी लोगों का धन्यवाद किया गया है, जिन्होंने SPNI के इस सफर को खास बनाने में योगदान दिया। इसके साथ ही “Here’s to writing the next one together” और “Tell stories beyond the ordinary” जैसे संदेश दिए गए हैं।
एम्प्लॉयीज और दर्शकों को भी धन्यवाद
कंपनी ने अपने लोगों और दर्शकों को भी खास तौर पर धन्यवाद दिया। SPNI ने कहा, “उन सभी लोगों का धन्यवाद, जिन्होंने पिछले 31 वर्षों में SPNI को आकार देने में मदद की और हमारी कहानी का हिस्सा बने।”
कंपनी ने अपने संदेश का अंत “Here’s to Chapter 31 and the many possibilities it holds!” के साथ किया।
क्या है ‘Chapter 31’ के पीछे की सोच?
‘Chapter 31’ में इस्तेमाल किए गए तीन शब्द कंपनी की आगे की रणनीति की दिशा को समझने में मदद करते हैं। ‘Content-first’ का मतलब है कि कहानी और कंटेंट सबसे महत्वपूर्ण होंगे, स्क्रीन या प्लेटफॉर्म बाद में आएगा।
‘Platform agnostic’ का मतलब है कि कहानी को किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा। दर्शक जिस जगह मौजूद हैं, कंटेंट वहां तक पहुंचने की कोशिश करेगा, चाहे वह टेलीविजन हो या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म।
वहीं ‘Multi-lingual’ इस बात को दर्शाता है कि भारत के दर्शक एक जैसे नहीं हैं। अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाओं में मनोरंजन की पसंद है और कंपनी कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
इन तीनों को साथ देखा जाए तो यह संकेत मिलता है कि SPNI खुद को केवल चैनल चलाने वाली कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे स्टूडियो की तरह आगे बढ़ाना चाहती है, जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म और भाषाओं के लिए कंटेंट तैयार करे। मनोरंजन कारोबार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। नया ऑफिस इस बदलाव का एक प्रतीक है, जबकि नए शोज यह साबित करेंगे कि बाजार और दर्शक इस नई दिशा को किस तरह स्वीकार करते हैं।
31 साल का सफर SPNI को एक मजबूत कंटेंट लाइब्रेरी, खेलों से जुड़ा अनुभव और एक स्थापित ब्रैंड देता है। अब ‘Chapter 31’ के जरिए कंपनी की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि आने वाला दशक भी उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण और मजबूत साबित हो।