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TV से सोशल मीडिया व AI तक बदला दौर, पर पत्रकारिता की असली आत्मा आज भी कायम: सुधीर चौधरी
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में गुरुवार को दिग्गज पत्रकार और न्यूज एंकर सुधीर चौधरी ने टीवी पत्रकारिता से लेकर डिजिटल और AI के दौर तक के सफर पर खुलकर बात की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 hour ago
नई दिल्ली में आयोजित चौथे वार्षिक डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में गुरुवार को दिग्गज पत्रकार और न्यूज एंकर सुधीर चौधरी ने टीवी पत्रकारिता से लेकर डिजिटल और AI के दौर तक के सफर पर खुलकर बात की। इस खास सेशन में उनके साथ बातचीत कर रहे थे आरजे रौनक, जिन्हें लोग “बाऊआ” के नाम से जानते हैं। चर्चा का विषय था- “The new world order of news: rewriting the playbook for a resilient digital future”, यानी डिजिटल दौर में खबरों की नई दुनिया और उसका बदलता स्वरूप।
सुधीर चौधरी ने बताया कि जब उन्होंने 1994–95 में करियर शुरू किया था, तब भारत में टीवी न्यूज बस शुरू ही हो रही थी। उस समय दिन में सिर्फ एक ही न्यूज बुलेटिन आता था, वह भी रात 9 या 10 बजे। लोग उस बुलेटिन का बेसब्री से इंतजार करते थे। उन्होंने कहा कि आज हालात बिल्कुल अलग हैं, देश में 400 से ज्यादा न्यूज चैनल 24 घंटे चल रहे हैं।
उन्होंने अपने शुरुआती दिनों के अनुभव भी साझा किए। 1999 के कारगिल युद्ध को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत का पहला “टेलीवाइज्ड वॉर” था। उस समय युद्ध क्षेत्र से दिल्ली तक फुटेज भेजने में दो-दो दिन लग जाते थे। रिपोर्टर बेबस महसूस करते थे क्योंकि टेक्नोलॉजी बहुत सीमित थी। इसी तरह 2002 में संसद हमले के दौरान उनके पास बेहतरीन वीडियो फुटेज था, लेकिन उसे नोएडा ऑफिस भेजने का कोई जरिया नहीं था। उस दिन ओबी वैन भी उपलब्ध नहीं थी।
सुधीर चौधरी ने कहा कि आज भले ही टेक्नोलॉजी बहुत आगे बढ़ गई हो- टीवी से सोशल मीडिया और अब AI तक लेकिन पत्रकारिता की असली आत्मा नहीं बदली है। उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि टीवी खत्म हो रहा है, सोशल मीडिया का दौर है और अब AI आ गया है। लेकिन कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं।” उनके मुताबिक, स्टोरीटेलिंग, साफगोई और जिम्मेदारी हमेशा पत्रकारिता की नींव रहेंगी। टेक्नोलॉजी कंटेंट बना सकती है, लेकिन उसके पीछे की भावना और इरादा इंसान ही तय करता है।
कॉन्क्लेव में नीति-निर्माताओं, संपादकों, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और मीडिया इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने हिस्सा लिया। पूरे दिन चली चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि AI के दौर में इनोवेशन, नियम और नैतिकता के बीच संतुलन बनाकर ही भरोसेमंद और टिकाऊ डिजिटल मीडिया का भविष्य तैयार किया जा सकता है।
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