होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन–CCI मामले की सुनवाई 11 मई तक टाली
दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन–CCI मामले की सुनवाई 11 मई तक टाली
दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के बीच चल रहे मामले की सुनवाई अब 11 मई 2026 तक टाल दी है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 hour ago
दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के बीच चल रहे मामले की सुनवाई अब 11 मई 2026 तक टाल दी है। हालांकि कोर्ट ने साफ कहा है कि पहले दिया गया अंतरिम राहत आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा।
पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने मैडिसन मीडिया की याचिका पर अपना जवाब रिकॉर्ड में दाखिल नहीं किया था। यह याचिका CCI की उस जांच के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें बड़े मीडिया और विज्ञापन एजेंसियों पर कथित तौर पर आपस में मिलकर रेट और डिस्काउंट तय करने (कार्टेलाइजेशन) का आरोप है। केंद्र सरकार की इस चूक पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि अगर इसी तरह लापरवाही जारी रही तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र उपाध्याय और जस्टिस तुषार गेडेला की बेंच ने केंद्र को हलफनामा दाखिल करने के लिए आखिरी दो हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर तय समय में जवाब नहीं दिया गया तो अदालत को प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को होगी।
गौरतलब है कि मार्च में CCI ने मीडिया रेट और डिस्काउंट को लेकर कथित मिलीभगत की जांच के तहत कई विज्ञापन एजेंसियों और ब्रॉडकास्टर्स के दफ्तरों पर छापे मारे थे। मैडिसन भी उन एजेंसियों में शामिल थी। यह जांच भारतीय विज्ञापन जगत में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक मानी जा रही है।
यह जांच 2024 की शुरुआत में CCI के लेनिएंसी प्रोग्राम के तहत मिली जानकारी के बाद शुरू हुई थी। बताया जाता है कि यह जानकारी डेंट्सू की ओर से दी गई थी। शुरुआती जांच में संकेत मिले थे कि कुछ बड़ी एजेंसियों ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे अनौपचारिक चैनलों के जरिए आपस में प्राइसिंग रणनीति को लेकर तालमेल किया हो सकता है।
मैडिसन का कहना है कि आयोग के अपने ही आदेश में यह पाया गया था कि ISA के सदस्यों ने एक “मॉडल एजेंसी एग्रीमेंट” सर्कुलेट किया था, जिससे एजेंसियों की मोलभाव करने की ताकत कम हुई और उनकी आमदनी पर असर पड़ा। कंपनी का दावा है कि असल में Advertising Agencies Association of India के सदस्य पीड़ित थे, दोषी नहीं।
इसके बावजूद, मैडिसन का आरोप है कि डायरेक्टर जनरल (DG) ने कार्रवाई सिर्फ विज्ञापन एजेंसियों पर की, जबकि ISA के सदस्यों के खिलाफ कोई ऐसी सर्च कार्रवाई नहीं की गई। कंपनी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया मनमानी थी और इससे उसकी साख को काफी नुकसान पहुंचा है।
टैग्स