'महादंगल' को लेकर 'आजतक' व 'ABP न्यूज' आमने-सामने, दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला

हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' का संचालन करने वाली कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क ने अपने बहुचर्चित डिबेट शो 'दंगल' के नाम को लेकर ABP नेटवर्क के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

Last Modified:
Thursday, 24 April, 2025
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हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' का संचालन करने वाली कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क ने अपने बहुचर्चित डिबेट शो 'दंगल' के नाम को लेकर ABP नेटवर्क के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीवी टुडे नेटवर्क का आरोप है कि ABP के नए शो 'महादंगल' ने 'दंगल' नाम का अनुचित इस्तेमाल किया है, जिससे दर्शकों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है।

टीवी टुडे नेटवर्क का कहना है कि वह वर्ष 2014 से 'दंगल' नाम का उपयोग कर रहा है और यह नाम अब उनके ब्रैंड की पहचान बन चुका है। कोर्ट में पेश हुए वकील ऋषिकेश बरुआ ने दलील दी कि ABP द्वारा 'महादंगल' शीर्षक अपनाना उनके पहले से स्थापित शो की लोकप्रियता का फायदा उठाने की कोशिश है।

बरुआ ने यह भी कहा कि पत्रकार चित्रा त्रिपाठी, जो पहले आजतक में 'दंगल' की एंकर रह चुकीं हैं, अब ABP में 'महादंगल' होस्ट कर रही हैं। इससे दर्शकों में और भी ज्यादा भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला सिर्फ शो के नाम तक सीमित है, न कि चित्रा त्रिपाठी के चैनल परिवर्तन से संबंधित।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अमित बंसल ने हालांकि 'दंगल' शब्द पर किसी एक चैनल के विशेष अधिकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह एक आम हिंदी शब्द है, जिसे अकेले ट्रेडमार्क नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी उल्लेख किया कि 'दंगल' नाम से एक सुपरहिट फिल्म भी मौजूद है, जिससे साफ है कि यह शब्द कई संदर्भों में इस्तेमाल होता रहा है।

कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि दर्शक यह भली-भांति समझते हैं कि वे किस चैनल पर कौन सा शो देख रहे हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए हल निकालने का सुझाव भी दिया, जिस पर अगली सुनवाई में विचार किया जा सकता है।

टीवी टुडे ने ABP को 'महादंगल' शीर्षक के इस्तेमाल से रोकने के लिए अंतरिम राहत की मांग भी की है। कोर्ट ने ABP नेटवर्क को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और अगली सुनवाई की तारीख तय की जानी बाकी है।

बता दें, चित्रा त्रिपाठी अक्टूबर 2024 में ABP न्यूज में वाइस प्रेसिडेंट (न्यूज एंड प्रोग्रामिंग) के तौर पर दोबारा जुड़ीं और फिलहाल 'महादंगल' और 'जनहित' जैसे प्राइम टाइम शोज को होस्ट कर रही हैं। उनके जाने के बाद आजतक पर अब 'दंगल' शो की एंकरिंग साहिल जोशी कर रहे हैं।

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‘भारत एक्सप्रेस’ के मैनेजिंग एडिटर मिहिर रंजन ने दिया इस्तीफा

मिहिर रंजन ने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
Mihir Ranjan

वरिष्ठ पत्रकार मिहिर रंजन ने देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शुमार ‘भारत एक्सप्रेस’ (Bharat Express) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था और बतौर मैनेजिंग एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अपनी इस भूमिका में मिहिर रंजन चैनल की संपादकीय रणनीति और आउटपुट संचालन का नेतृत्व कर रहे थे।

मिहिर रंजन ने इस्तीफा क्यों दिया और उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी है। मिहिर रंजन इससे पहले हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया डेली लाइव’ (India Daily Live) से जुड़े हुए थे। बतौर मैनेजिंग एडिटर वह इस चैनल की सभी डिजिटल प्रॉपर्टीज की कमान संभाल रहे थे। इसी के साथ वह कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर टीवी चैनल को भी अपने सुझाव दे रहे थे।

‘इंडिया डेली लाइव’ से पहले मिहिर रंजन ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की टीम का हिस्सा थे, जहां उन्होंने एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट के पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद वह IIM, इंदौर में डिजिटल मीडिया का एक कोर्स करने चले गए थे।

‘एबीपी न्यूज’ में मिहिर रंजन करीब दो साल तक रहे थे। उन्होंने मई 2020 में बतौर आउटपुट हेड ‘एबीपी न्यूज’ जॉइन किया था।

इसके बाद वह ‘इंडिया डेली लाइव’ के साथ जुड़ गए थे और फिर पिछले साल उन्होंने ‘भारत एक्सप्रेस’ के साथ अपना सफर शुरू किया था।

मिहिर रंजन को विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का लंबा अनुभव है। ’एबीपी न्यूज’ से पहले वह ’रिपब्लिक भारत’ (Republic Bharat) से जुड़े हुए थे। वह ‘रिपब्लिक टीवी’ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा रहे हैं और ‘रिपब्लिक भारत’ में आउटपुट एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) में भी अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं।

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ के साथ अपनी 14-15 साल की लंबी पारी के दौरान वह कई अहम प्रोग्राम भी कर चुके हैं। यही नहीं, मिहिर रंजन करीब पांच साल तक जानी-मानी न्यूज एजेंसी ‘यूएनआई’ (UNI) के साथ भी काम कर चुके हैं। इसमें करीब ढाई साल उन्होंने लखनऊ और करीब ढाई साल दिल्ली में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर अपनी जिम्मेदारी संभाली है।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले मिहिर रंजन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने डिफेंस करेसपॉन्डेंट (Defence Correspondent) का कोर्स भी किया है।

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TRP विवाद: ‘लैंडिंग पेज’ व्यूअरशिप को शून्य मानना कारोबार पर चोट- हाईकोर्ट में AIDCF

ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
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टीवी इंडस्ट्री में TRP को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है। ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि नई नीति के तहत ‘लैंडिंग पेज’ की व्यूअरशिप को TRP में शामिल नहीं करना केबल ऑपरेटर्स और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) के कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

दरअसल, ‘लैंडिंग पेज’ वह चैनल होता है जो सेट-टॉप बॉक्स ऑन करते ही सबसे पहले स्क्रीन पर दिखाई देता है। केबल और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए यह एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स माना जाता है, क्योंकि कई ब्रॉडकास्टर्स बेहतर प्लेसमेंट के लिए भुगतान करते हैं।

नई नीति में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने साफ कहा है कि लैंडिंग पेज से आने वाली व्यूअरशिप को TRP में नहीं गिना जाएगा और इसे सिर्फ मार्केटिंग टूल माना जाएगा। इसी फैसले को AIDCF और DEN Networks ने अदालत में चुनौती दी है।

मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। केरल हाईकोर्ट ने फिलहाल बिना लैंडिंग पेज डेटा वाले TRP जारी करने पर रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने नई TRP नीति के लागू होने पर रोक नहीं लगाई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया की बढ़ती चुनौती के बीच केबल टीवी इंडस्ट्री पहले से दबाव में है। ऐसे में लैंडिंग पेज से जुड़ी कमाई खत्म होने से कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

AIDCF और DEN Networks ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से वही काम कर रही है, जिसे लेकर पहले से सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। यह विवाद 2017 से चला आ रहा है, जब Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने लैंडिंग पेज पर रेटेड चैनल दिखाने पर रोक लगाने की कोशिश की थी।

बाद में यह मामला TDSAT और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही TRAI को सीधे तौर पर ऐसे प्रतिबंध लागू करने से रोका था, लेकिन अब नई TRP नीति के जरिए वही काम दूसरे तरीके से किया जा रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने पहले से ऐसा एल्गोरिद्म तैयार किया हुआ है, जो यह पहचान सकता है कि दर्शक किसी चैनल को सिर्फ ऑटोमेटिक प्लेसमेंट की वजह से देख रहा है या वास्तव में उसमें रुचि ले रहा है। इसलिए पूरी तरह से लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाना तकनीकी रूप से भी सही नहीं माना जा सकता।

नई TV Ratings Policy 2026 में सिर्फ लैंडिंग पेज ही नहीं, बल्कि पूरे टीवी मेजरमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब TV रेटिंग्स में केबल, DTH, OTT और Connected TV को भी शामिल करने की बात कही गई है। इसके अलावा मापे जाने वाले घरों की संख्या बढ़ाने, ऑडिट और निगरानी को सख्त करने जैसे कई नए नियम भी लागू किए गए हैं।

AIDCF और DEN Networks ने अदालत से मांग की है कि लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाने वाले प्रावधान को असंवैधानिक घोषित किया जाए और नई गाइडलाइंस के अमल पर रोक लगाई जाए।

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Dish TV यूजर्स को लगा झटका: फ्री में नहीं दिखेगा 'Star Sports 1 Hindi'

Dish TV ने IPL सीजन के दौरान Star Sports 1 Hindi SD और HD की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब मैच देखने के लिए ग्राहकों को चैनल अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा।

Last Modified:
Monday, 25 May, 2026
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आईपीएल (IPL) सीजन के बीच Dish TV यूजर्स को बड़ा झटका लगा है। प्लेटफॉर्म ने Star Sports 1 Hindi SD और HD चैनलों की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब क्रिकेट मैच देखने के लिए ग्राहकों को इन चैनलों को अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा। पहले यह चैनल आईपीएल प्रसारण के दौरान कई ग्राहकों को मुफ्त उपलब्ध कराया गया था।

हालांकि अब इन्हें फिर से पेड कैटेगरी में डाल दिया गया है। Dish TV पर आईपीएल के बाकी मैच देखने के लिए सब्सक्राइबर्स को Star Sports 1 Hindi चैनल 19 रुपये प्लस जीएसटी देकर एक्टिवेट करना होगा। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब आईपीएल लगातार स्पोर्ट्स चैनलों के लिए हाई व्यूअरशिप ला रहा है। खासतौर पर हिंदी क्रिकेट फीड्स की मांग काफी ज्यादा बनी हुई है।

डीटीएच ऑपरेटर्स अक्सर प्रमोशनल ऑफर या सैंपलिंग के तहत कुछ पेड चैनलों को सीमित समय के लिए फ्री उपलब्ध कराते हैं। बाद में कंपनी अपनी नीति या ऑफर के अनुसार इन्हें वापस पेड कैटेगरी में डाल सकती है। हालांकि Dish TV की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह बदलाव सभी ग्राहकों पर लागू हुआ है या केवल कुछ चुनिंदा पैक्स वाले यूजर्स पर इसे लागू किया गया है।

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'प्राइम टाइम' से 'पॉडकास्ट टाइम' तक: भारत में मीडिया की बदलती ताकत

जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे।

Last Modified:
Saturday, 23 May, 2026
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जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे। Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत के पॉडकास्ट 'People by WTF' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे थे और यह उनका पहला पॉडकास्ट अपीयरेंस था। फिर मार्च 2025 में मोदी अमेरिकी पॉडकास्टर Lex Fridman के साथ करीब तीन घंटे बात करते दिखे। क्लिप्स वायरल हुईं, न्यूज चैनलों ने उन्हें चलाया, सोशल मीडिया पर बहस हुई। यह महज एक इंटरव्यू नहीं था। यह एक संकेत था, भारत में मीडिया की शक्ति का केंद्र बदल रहा है।

टीवी का दरबार खाली होने लगा

कुछ साल पहले तक प्राइम टाइम टीवी डिबेट ही वह जगह थी जहां जनमत बनता था। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है।

FICCI-EY की 2026 मीडिया एंड एंटरटेनमेंट रिपोर्ट (मार्च 2026, 2025 के आंकड़े) के अनुसार, भारत में लीनियर टीवी विज्ञापन राजस्व में लगभग 10% (10.3%) की गिरावट आई, और ब्रैंड्स की संख्या भी 3% घटी जो TV पर विज्ञापन दे रहे थे। इसी साल डिजिटल विज्ञापन 26% बढ़कर ₹947 अरब पर पहुंच गया, जो कुल विज्ञापन राजस्व का 63% हो गया, पहली बार डिजिटल ने TV को पीछे छोड़ा।

Kantar की मीडिया कम्पास रिपोर्ट (Q3 2025) बताती है कि लीनियर TV की पहुंच Q1 2025 के 70.5 करोड़ से घटकर Q3 2025 में 68.9 करोड़ रह गई। इसके विपरीत, डिजिटल-ओनली दर्शक, यानी जो लोग बिना TV देखे केवल इंटरनेट पर कंटेंट देखते हैं, 2024 की तुलना में 30% बढ़कर 31.3 करोड़ हो गए, जो भारत की 15+ आबादी का 26% है।

IPL 2026 का आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है। BARC India और TAM Sports के data के मुताबिक TV रेटिंग्स 4.57 (IPL 2025) से गिरकर 3.71 (IPL 2026) पर आ गईं, 18.8% की गिरावट। औसत viewership 26% गिरकर 1.06 करोड़ से 78.4 लाख रह गई। जबकि JioStar ने पहले वीकेंड पर डिजिटल में 51.5 करोड़ की रीच और 32.6 अरब मिनट का वाच टाइम दर्ज किया।

यह सिर्फ कंटेंट का बदलाव नहीं है। यह ऑडियंस के भरोसे का पलायन है, TV स्टूडियो से माइक्रोफोन की तरफ।

पॉडकास्ट का विस्फोट: नंबर बोलते हैं

भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट बाजार है, अमेरिका और चीन के बाद।

Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पॉडकास्ट श्रोता 2024 के करीब 10 करोड़ से बढ़कर 2025 में 20 करोड़ हो गए। Astute Analytica के अनुसार भारत का पॉडकास्ट बाजार 2024 में $56 करोड़ (USD 560 million) का था और 2033 तक $424.8 करोड़ (USD 4.24 billion) तक पहुंचने का अनुमान है, 25.5% CAGR के साथ।

भारत में करीब 2.5 करोड़ लोग रोजाना कम से कम एक पॉडकास्ट सुनते हैं। और वे सुनते कब हैं? ऑफिस जाते समय, जिम में, खाना बनाते हुए। यह "बैकग्राउंड कंजप्शन" का नया युग है।

वैश्विक तस्वीर भी उतनी ही तेज है। Deloitte TMT Predictions 2026 का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक पॉडकास्ट और वीडियो पॉडकास्ट (vodcast) का कुल विज्ञापन राजस्व $5 अरब (USD 5 billion) तक पहुंचेगा, पिछले साल की तुलना में करीब 20% की वृद्धि। IAB/PwC की 2025 Internet ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पॉडकास्ट ad revenue 17.6% बढ़कर $2.9 अरब (USD 2.9 billion) पर पहुंचा। इसी दौरान अमेरिका में TV ऐडवर्टाइजिंग 13.4% गिरा।

नेता अब TV स्टूडियो नहीं, माइक्रोफोन ढूंढते हैं

राजनेताओं का पॉडकास्ट की तरफ झुकाव इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है।

जनवरी 2025 में PM मोदी ने निखिल कामत के साथ करीब दो घंटे की बातचीत की, यह उनका पहला पॉडकास्ट था। मार्च 2025 में Lex Fridman के साथ लगभग तीन घंटे की चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प ने Joe Rogan के पॉडकास्ट पर तीन घंटे बिताए, जो उस चुनाव के सबसे चर्चित मीडिया मूमेंट्स में से एक बना।

सवाल यह है कि नेता TV से पॉडकास्ट की तरफ क्यों जा रहे हैं?

जवाब सीधा है: नैरेटिव कंट्रोल।

टीवी डिबेट्स में अक्सर शोर-शराबा, टोका-टाकी और बहस के बीच बात अधूरी रह जाती है। वहीं पॉडकास्ट एक शांत और कंट्रोल माहौल देते हैं, जहां लोग खुलकर और लंबी बातचीत कर पाते हैं। यहां सिर्फ छोटे ‘साउंड बाइट’ नहीं, बल्कि पूरी कहानी सुनने को मिलती है। यही वजह है कि पॉडकास्ट के छोटे-छोटे क्लिप्स सोशल मीडिया पर कई दिनों तक वायरल होते रहते हैं।

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। सवाल उठ रहा है कि क्या पॉडकास्ट अब कठिन पत्रकारिता से बचने का जरिया बनते जा रहे हैं? जब नेता अपने पसंदीदा होस्ट के साथ बैठते हैं, तो अक्सर मुश्किल सवाल कम पूछे जाते हैं और जवाबदेही भी कम नजर आती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निखिल कामत के पॉडकास्ट पर आने के बाद कांग्रेस ने भी यही सवाल उठाए थे। पॉडकास्ट की ‘ऑथेंटिसिटी’ और अपनी कहानी को कंट्रोल करने की कोशिश, इन दोनों के बीच का यही टकराव अब मीडिया की बड़ी बहस बनता जा रहा है।

युवा भरोसा क्यों करते हैं, TV की बजाय?

यह सिर्फ मीडिया के एक नए फॉर्मेट का मामला नहीं है, बल्कि लोगों के भरोसे के बदलने की कहानी है।

Grand View Research की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2024 में News & Politics सबसे ज्यादा कमाई करने वाला पॉडकास्ट कैटेगरी रहा, जिसकी हिस्सेदारी 35.5% थी। इसका मतलब साफ है, लोग अब पॉडकास्ट पर सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि खबर, राय और विश्लेषण के लिए भी जा रहे हैं। यह काम पहले ज्यादातर टीवी करता था।

टीवी को लंबे समय से एक “authority-based medium” माना जाता रहा है, जहां एंकर दर्शकों को बताता है कि क्या सही है और क्या गलत। लेकिन पॉडकास्ट एक “personality-based medium” बनकर उभरा है, जहां रणवीर अलहाबादिया, निखिल कामत और राज समानी जैसे होस्ट अपनी सामान्य और असली आवाज में बात करते हैं। वे अपनी गलतियां भी मानते हैं, सवाल भी उठाते हैं और बातचीत को ज्यादा नेचुरल रखते हैं।

Deloitte की TMT 2026 रिपोर्ट भी इसी ट्रेंड की तरफ इशारा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनेस, एजुकेशन, हेल्थ और फाइनेंस जैसे खास विषयों पर काम करने वाले क्रिएटर्स आने वाले समय में ज्यादा तेजी से बढ़ेंगे, क्योंकि उनकी ऑडियंस उनसे ज्यादा जुड़ी हुई और भरोसा करने वाली होती है।

ऑडियो-वीडियो हाइब्रिड: पॉडकास्ट सिर्फ "सुनने की चीज" नहीं रहा

पॉडकास्ट अब सिर्फ ऑडियो तक सीमित नहीं रहे। धीरे-धीरे यह एक पूरा वीडियो फॉर्मेट बनते जा रहे हैं।

Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, एक बड़ा पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म अब अपने 60% से ज्यादा टॉप शोज में वीडियो भी दे रहा है। यानी लोग अब सिर्फ सुन नहीं रहे, बल्कि पॉडकास्ट देख भी रहे हैं। Deloitte के 2025 Digital Media Trends सर्वे में यह भी सामने आया कि 27% लोग हर हफ्ते वीडियो पॉडकास्ट देखते हैं, और इसमें Gen Z और मिलेनियल्स सबसे आगे हैं।

वीडियो पॉडकास्ट के बढ़ने से “क्लिप्स इकॉनमी” भी तेजी से बढ़ी है। अब एक पॉडकास्ट सिर्फ एक वीडियो नहीं रहता, बल्कि उससे कई तरह का कंटेंट बनता है। उदाहरण के लिए, 2 घंटे के एक पॉडकास्ट से 20-30 छोटे क्लिप्स निकल जाते हैं, जो Reels, Shorts और X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लाखों व्यूज़ और इम्प्रेशंस लाते हैं।

Interactive Advertising Bureau और PwC की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में डिजिटल वीडियो रेवेन्यू 25.4% बढ़कर 78 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला फॉर्मेट रहा। इसका सीधा फायदा वीडियो पॉडकास्ट्स को मिल रहा है, क्योंकि अब advertisers ऑडियो और वीडियो, दोनों को साथ में खरीद रहे हैं।

विज्ञापन का पैसा: TV से माइक्रोफोन की तरफ

मीडिया की असली ताकत अक्सर इस बात से समझी जाती है कि विज्ञापन का पैसा कहां जा रहा है। और इस समय पॉडकास्ट तेजी से विज्ञापनदाताओं को अपनी तरफ खींच रहे हैं।

Grand View Research के Horizon Databook के मुताबिक, भारत का पॉडकास्ट विज्ञापन बाजार 2024 में करीब 275.7 मिलियन डॉलर का था, जो 2030 तक बढ़कर 586.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। यानी यह बाजार तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 77% से ज्यादा हिस्सा होस्ट-रीड विज्ञापनों का है।

होस्ट-रीड विज्ञापन इसलिए खास माने जाते हैं क्योंकि ये टीवी विज्ञापनों से बिल्कुल अलग होते हैं। टीवी पर विज्ञापन अक्सर लोगों को बीच में रोकते हैं, इसलिए कई बार दर्शक चैनल बदल देते हैं या उठकर दूसरे काम में लग जाते हैं। लेकिन पॉडकास्ट में जब खुद होस्ट किसी प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में बात करता है, तो वह एक सिफारिश जैसा लगता है। लोग उसे ज्यादा भरोसे के साथ सुनते हैं।

इसी वजह से D2C ब्रांड्स, फिनटेक कंपनियां और एडटेक प्लेटफॉर्म्स अब पॉडकास्ट स्पॉन्सरशिप पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं, क्योंकि वहां उन्हें ज्यादा फोकस्ड और इंगेज्ड ऑडियंस मिलती है। EY और Big Bang Social की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री, जिसमें पॉडकास्ट क्रिएटर्स भी शामिल हैं, 2026 तक 3,375 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

खतरे भी हैं: जब माइक बेलगाम हो जाए

इस पूरी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

टीवी में चाहे कितना भी शोर-शराबा हो, लेकिन वहां एक संपादकीय व्यवस्था होती है। एक एडिटर होता है, लीगल टीम होती है और ब्रॉडकास्टिंग के नियम भी होते हैं। लेकिन पॉडकास्ट की दुनिया में ऐसी निगरानी अभी बहुत कम है।

सबसे बड़ा खतरा गलत जानकारी फैलने का है। जब लाखों-करोड़ों लोग किसी होस्ट पर भरोसा करने लगते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। लेकिन अभी पॉडकास्ट की दुनिया में जवाबदेही तय करने का सिस्टम उतना मजबूत नहीं है।

दूसरी चिंता “पर्सनैलिटी कल्ट” की है। यानी जब किसी क्रिएटर की हर बात को बिना सवाल किए सच मान लिया जाए। टीवी पर नेताओं को अक्सर एंकर के कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पॉडकास्ट में माहौल ज्यादा दोस्ताना होता है। ऐसे में बिना जांचे दावे, भरोसेमंद आवाज और बड़ी पहुंच, ये मिलकर एक तरह के “सॉफ्ट प्रोपेगेंडा” का जरिया भी बन सकते हैं।

तीसरा बड़ा सवाल क्षेत्रीय भाषाओं का है। भारत की बड़ी आबादी हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में सोचती और समझती है। Deloitte की रिपोर्ट भी कहती है कि बिजनेस, एजुकेशन और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में क्षेत्रीय भाषाओं के पॉडकास्ट तेजी से बढ़ेंगे। Kuku FM और Hubhopper जैसे प्लेटफॉर्म इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन यह बाजार अभी शुरुआती दौर में ही है।

अब आगे क्या?

FICCI-EY, Deloitte और Grand View Research, इन तीनों की रिपोर्ट एक बात साफ कहती हैं: आने वाले पांच सालों में भारत का मीडिया जगत जितना बदलेगा, उतना शायद पिछले बीस सालों में भी नहीं बदला।

भारत का पॉडकास्ट बाजार तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी तरफ टीवी विज्ञापनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जबकि डिजिटल-ओनली दर्शकों की संख्या 31 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। और सबसे बड़ा संकेत यह है कि देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi भी अब पॉडकास्ट पर नजर आ रहे हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि टीवी खत्म हो जाएगा। FICCI-EY की रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी आज भी करीब 74.5 करोड़ साप्ताहिक दर्शकों वाला बड़ा माध्यम है। इतना बड़ा प्लेटफॉर्म अचानक खत्म नहीं होता। लेकिन अब वह अकेला भी नहीं है।

जो ताकत कभी सिर्फ टीवी के पास थी, लोगों की राय बनाने की और मुद्दे तय करने की, वह अब धीरे-धीरे उन लोगों की तरफ जा रही है, जिनके पास एक अच्छा माइक्रोफोन, एक कैमरा और अपनी बात कहने का भरोसा है।

हो सकता है कि भारत के अगले बड़े opinion leaders किसी बड़े टीवी स्टूडियो में नहीं, बल्कि घर के एक छोटे से कमरे में, हेडफोन लगाकर माइक्रोफोन के सामने बैठे हों।

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न्यूज TRP विवाद गहराया, AIDCF की याचिका पर केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

AIDCF की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मांगा जवाब, 11 जून से न्यूज रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की तैयारी में था BARC

Last Modified:
Friday, 22 May, 2026
TRP Ratings

टेलीविजन न्यूज रेटिंग्स यानी TRP को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। केरल हाईकोर्ट ने बिना लैंडिंग पेज डेटा के न्यूज चैनलों की TRP जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) की याचिका पर आया है।

जानकारी के मुताबिक, AIDCF ने संशोधित ऑडियंस मेजरमेंट फ्रेमवर्क के क्लॉज 5.4.1 को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार की TRP पॉलिसी गाइडलाइंस के अमल पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन बिना लैंडिंग पेज डेटा के रेटिंग्स जारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने 11 जून से न्यूज चैनलों की साप्ताहिक रेटिंग्स दोबारा जारी करने की घोषणा की थी।

दरअसल, BARC ने कहा था कि शुरुआती चरण में न्यूज रेटिंग्स में लैंडिंग पेज इम्प्रेशंस को शामिल नहीं किया जाएगा। इसी फैसले को लेकर इंडस्ट्री में विवाद बढ़ गया।

न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि अनिवार्य या प्रोत्साहित किए गए लैंडिंग पेज दर्शकों की वास्तविक पसंद को प्रभावित करते हैं और इससे TRP आंकड़ों में असंतुलन पैदा होता है। वहीं, कई ब्रॉडकास्टर्स का तर्क है कि लैंडिंग पेज चैनलों के प्रमोशन का एक वैध तरीका है और इन्हें पूरी तरह हटाने से प्रतिस्पर्धी बाजार में चैनलों की पहुंच और विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है।

मीडिया इंडस्ट्री के लिए यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि न्यूज TRP दोबारा शुरू होने से विज्ञापन दरों, चैनलों की मार्केट पोजिशनिंग और फेस्टिव सीजन की रणनीतियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि केरल हाईकोर्ट में चल रही यह सुनवाई भविष्य में टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम और ब्रॉडकास्टर्स व डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स के बीच शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई केंद्र सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद होगी।

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सन टीवी नेटवर्क का रेवेन्यू बढ़ा, निवेशकों पर मेहरबान कंपनी

देश की बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Sun TV Network ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं।

Last Modified:
Friday, 22 May, 2026
SUNTV8745

देश की बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन मुनाफा पिछले साल के मुकाबले कम रहा। इसके साथ ही कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा देते हुए पूरे साल में कुल 250% डिविडेंड देने का ऐलान किया है।

कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में Sun TV की स्टैंडअलोन कुल आय बढ़कर 4,637.70 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल यह 4,543.96 करोड़ रुपये थी। वहीं कंपनी का रेवेन्यू भी करीब 6% बढ़कर 4,102.13 करोड़ रुपये पहुंच गया।

हालांकि कंपनी के मुनाफे में गिरावट देखने को मिली। पूरे वित्त वर्ष में Sun TV का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 1,393.52 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 1,654.46 करोड़ रुपये था।

मार्च 2026 तिमाही की बात करें तो कंपनी की कुल आय 941.67 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 1,135.86 करोड़ रुपये थी। वहीं तिमाही मुनाफा घटकर 218.64 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 362.18 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने बताया कि मौजूदा तिमाही में कुछ एकबारगी खर्च और निवेश से जुड़े प्रावधानों का असर मुनाफे पर पड़ा। म्यूचुअल फंड निवेश पर मार्क-टू-मार्केट प्रावधान और रेडियो बिजनेस में निवेश से जुड़ी कमजोरी की वजह से कंपनी की कमाई प्रभावित हुई।

Sun TV का सब्सक्रिप्शन बिजनेस मजबूत बना हुआ है। घरेलू सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 10% बढ़कर 1,891.68 करोड़ रुपये पहुंच गया।

कंपनी का क्रिकेट बिजनेस भी लगातार बढ़ रहा है। Sun TV के पास IPL टीम SunRisers Hyderabad, South Africa T20 League की SunRisers Eastern Cape और UK की The Hundred League टीम SunRisers Leeds Limited है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने शेयरधारकों को चार अंतरिम डिविडेंड दिए। कुल मिलाकर निवेशकों को 12.50 रुपये प्रति शेयर यानी 250% डिविडेंड मिला।

Sun TV Network दक्षिण भारत की सबसे बड़ी टीवी ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में चैनल चलाती है। इसके अलावा कंपनी का OTT प्लेटफॉर्म SunNXT भी तेजी से बढ़ रहा है।

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लैंडिंग पेज TRP का खेल खत्म! 11 जून से नए नियमों के साथ लौटेगी न्यूज चैनलों की रेटिंग

करीब दो महीने की रोक के बाद अब टीवी न्यूज चैनलों की TRP रेटिंग फिर से शुरू होने जा रही है।

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2026
BARC9852

करीब दो महीने की रोक के बाद अब टीवी न्यूज चैनलों की TRP रेटिंग फिर से शुरू होने जा रही है। ब्रॉ़कास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC)  11 जून 2026 से न्यूज चैनलों की रेटिंग दोबारा जारी करेगा। लेकिन इस बार बड़ा बदलाव यह होगा कि “लैंडिंग पेज” की व्युअरशिप को TRP कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से टीवी न्यूज इंडस्ट्री का पूरा समीकरण बदल सकता है।

दरअसल, “लैंडिंग पेज” उस चैनल को कहा जाता है जो टीवी ऑन करते ही अपने आप स्क्रीन पर खुल जाता है। इससे चैनल को बिना दर्शक की पसंद के भी ज्यादा व्युअरशिप मिल जाती थी। लंबे समय से कई ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापन एजेंसियां इस व्यवस्था पर सवाल उठा रही थीं। उनका कहना था कि इससे असली दर्शकों की पसंद नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूशन डील्स के आधार पर TRP बढ़ती है।

सूत्रों के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने मार्च 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष की सनसनीखेज कवरेज को लेकर न्यूज चैनलों की साप्ताहिक TRP पर चार हफ्ते की रोक लगाई थी। बाद में इंडस्ट्री में नए रेटिंग सिस्टम पर चर्चा के चलते यह रोक आगे बढ़ा दी गई।

अब BARC, ब्रॉडकास्टर्स और रेगुलेटर्स के बीच कई दौर की बातचीत के बाद नया सिस्टम लागू किया जा रहा है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इससे उन चैनलों को ज्यादा फायदा मिलेगा जिनकी ऑर्गेनिक ऑडियंस मजबूत है। वहीं, वे चैनल प्रभावित हो सकते हैं जो अब तक लैंडिंग पेज व्यवस्था के जरिए ज्यादा पहुंच हासिल करते रहे हैं।

मीडिया एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं ने भी इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे डेटा ज्यादा साफ और भरोसेमंद होगा, जिससे विज्ञापन की प्लानिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। पहले कई बार ऐसा होता था कि मजबूत कंटेंट की बजाय डिस्ट्रीब्यूशन ताकत रखने वाले चैनलों को फायदा मिल जाता था।

गौरतलब है कि “लैंडिंग पेज” विवाद पहली बार 2020 के TRP स्कैम के दौरान बड़े स्तर पर सामने आया था। उस समय कई चैनलों पर आरोप लगे थे कि वे केबल नेटवर्क पर खुद को डिफॉल्ट चैनल बनवाकर व्युअरशिप बढ़ा रहे हैं। इसके बाद से ही न्यूज रेटिंग सिस्टम में सुधार की मांग लगातार उठती रही।

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदी और क्षेत्रीय न्यूज चैनलों की रैंकिंग में अब बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। क्योंकि इन जॉनर में डिस्ट्रीब्यूशन डील्स का असर काफी ज्यादा माना जाता था।

BARC पिछले कुछ वर्षों से अपने डेटा सिस्टम और पैनल मॉनिटरिंग को मजबूत करने पर काम कर रहा है। संस्था ने रेटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई नए नियम और जांच प्रक्रियाएं भी लागू की हैं।

टीवी न्यूज इंडस्ट्री के लिए यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चुनौती लगातार बढ़ रही है और दर्शकों की देखने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को उम्मीद है कि नया और ज्यादा पारदर्शी TRP सिस्टम विज्ञापनदाताओं का भरोसा वापस लाने में मदद करेगा।

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'डीडी फ्री डिश' के MPEG-4 स्लॉट ऑक्शन के लिए प्रसार भारती ने मांगे आवेदन

प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए मिड-ईयर ई-ऑक्शन का ऐलान किया है।

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
prasar bharati95

प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए मिड-ईयर ई-ऑक्शन का ऐलान किया है। यह 99वां ई-ऑक्शन 26 मई 2026 से शुरू होगा। इस ऑक्शन में सफल रहने वाले चैनलों को 5 जून 2026 से लेकर 31 मार्च 2027 तक डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर जगह मिलेगी।

इस ई-ऑक्शन में निजी सैटेलाइट टीवी चैनल और अंतरराष्ट्रीय पब्लिक ब्रॉडकास्टर्स हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से वैध लाइसेंस और अनुमति होना जरूरी होगा।

प्रसार भारती ने चैनलों को भाषा और जॉनर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी यानी “बकेट” में बांटा है। न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों के लिए सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइस तय किया गया है, जो 61.65 लाख रुपये है। वहीं, हिंदी और उर्दू को छोड़कर बाकी क्षेत्रीय भाषा चैनलों के लिए शुरुआती रिजर्व प्राइस 4.94 लाख रुपये रखा गया है।

इस बार कंटेंट से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके हर महीने के कम से कम 75% कंटेंट (विज्ञापन और प्रमोशन छोड़कर) उसी भाषा और जॉनर का हो, जिसके तहत उन्होंने आवेदन किया है। साथ ही, कुल मासिक प्रसारण समय में कम से कम 60% कंटेंट घोषित कैटेगरी का होना जरूरी होगा।

अगर कोई चैनल इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका मामला एक विशेष समिति के पास जाएगा। शुरुआत में चैनल को अपनी भाषा या जॉनर बदलने के लिए आधिकारिक अनुरोध करने का मौका दिया जाएगा, लेकिन सुधार नहीं होने पर उसे प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा सकता है।

ई-ऑक्शन में हिस्सा लेने के इच्छुक ब्रॉडकास्टर्स को 25 मई 2026 दोपहर 3 बजे तक आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन जमा करना होगा।

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TRP Policy की समीक्षा के बीच BARC ने लाइसेंस रिन्यूअल के लिए किया आवेदन

टीवी रेटिंग एजेंसी BARC ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के पास अपने लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए औपचारिक आवेदन दे दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
BARC584

टीवी रेटिंग एजेंसी BARC ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के पास अपने लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए औपचारिक आवेदन दे दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब सरकार नई TRP Policy 2026 की समीक्षा कर रही है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में Indian Broadcasting and Digital Foundation (IBDF) और BARC के वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर नई नीति को लागू करने की समयसीमा और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की थी।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने मौजूदा टीवी ऑडियंस मीजरमेंट एजेंसीज को नई व्यवस्था के तहत दोबारा आवेदन करने के लिए 60 दिन का समय दिया है। इसके बाद ही BARC ने अपना रिन्यूअल आवेदन दाखिल किया।

गौरतलब है कि सरकार ने 27 मार्च 2026 को नई TRP Policy जारी की थी। शुरुआत में इसे 30 दिनों के भीतर लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापन कंपनियों और रेटिंग इंडस्ट्री से जुड़े पक्षों ने इसे लेकर कई चिंताएं जताई थीं। उनका कहना था कि इतने कम समय में नई व्यवस्था लागू करना मुश्किल होगा और इससे लागत भी काफी बढ़ सकती है।

इंडस्ट्री की सबसे बड़ी आपत्तियों में people meters की संख्या तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य, बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की अनिवार्यता और लैंडिंग पेज इम्प्रेशंस को रेटिंग गणना से बाहर रखना शामिल था। ब्रॉडकास्टर्स का तर्क था कि इससे ऑपरेशनल खर्च बढ़ जाएगा, जबकि रेटिंग की सटीकता में उतना बड़ा फायदा नहीं मिलेगा।

इन आपत्तियों के बाद मंत्रालय ने कुछ नियमों में राहत दी। अब रेटिंग एजेंसी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की अनिवार्य हिस्सेदारी 50% से घटाकर 33% कर दी गई है। इसके अलावा, 80,000 घरों तक मीटर लगाने की समयसीमा बढ़ा दी गई है और सर्वे अब हर साल की बजाय तीन साल में एक बार होगा।

इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकार का यह बदला हुआ रुख दिखाता है कि वह सुधारों और व्यावहारिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। मंत्रालय अभी भी अलग-अलग पक्षों से मिले सुझावों पर विचार कर रहा है, जिसके बाद टीवी ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम का अंतिम ढांचा तय किया जाएगा।

फिलहाल BARC देश की इकलौती टीवी ऑडियंस मीजरमेंट एजेंसी है और टीवी इंडस्ट्री में विज्ञापन दरों से लेकर चैनलों की परफॉर्मेंस तय करने में इसकी अहम भूमिका मानी जाती है।

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MSO-LCO रजिस्ट्रेशन में धोखाधड़ी पर MIB सख्त, लोगों को किया सतर्क

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने केबल टीवी नेटवर्क से जुड़े ऑपरेटर्स और आवेदकों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की है।

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) और लोकल केबल ऑपरेटर (LCO) रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर एक अहम एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि कुछ लोग और संस्थाएं खुद को “कंसल्टेंट” बताकर रजिस्ट्रेशन या रिन्यूअल जल्दी कराने के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांग रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से तय फीस के अलावा कोई भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता।

मंत्रालय ने साफ किया है कि केबल टीवी नेटवर्क चलाने के लिए MSO और LCO का रजिस्ट्रेशन केवल Broadcast Seva Portal के जरिए ही किया जाता है। नए रजिस्ट्रेशन और रिन्युअल दोनों के आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर जरूरी दस्तावेजों और तय प्रोसेसिंग फीस के साथ जमा करने होते हैं।

एडवाइजरी के मुताबिक, MSO रजिस्ट्रेशन या रिन्युअल के लिए 10 साल की वैधता के साथ 1 लाख रुपये फीस तय है, जबकि LCO रजिस्ट्रेशन या रिन्यूअल के लिए 5 साल की वैधता के साथ 5 हजार रुपये फीस रखी गई है।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी भुगतान केवल Broadcast Seva Portal के ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए ही किए जाएं। किसी भी तरह का कैश पेमेंट, ऑफलाइन ट्रांजैक्शन या किसी तीसरे पक्ष के खाते में भुगतान अधिकृत नहीं है।

MIB ने कहा कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से तय नियमों के अनुसार की जाती है और कोई भी बाहरी व्यक्ति या कंसल्टेंट इस प्रक्रिया को तेज नहीं कर सकता। आवेदनकर्ता अपने आवेदन की स्थिति खुद भी Broadcast Seva Portal पर जाकर देख सकते हैं।

मंत्रालय ने सभी आवेदकों से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी कंसल्टेंट्स से सावधान रहें और तय फीस से ज्यादा किसी को भी पैसा न दें। किसी भी तरह की जानकारी या सहायता के लिए मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर 011-23387774 और ईमेल sodas-moiab@gov.in जारी किया है। 

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